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कोटा मेडिकल कॉलेज में लापरवाही का चौंकाने वाला मामला!

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कोटा से एक चौंकाने वाली और लापरवाही भरी घटना सामने आई है, जहां कोटा मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने दुर्घटना में घायल युवक मनीष की जगह उसके लकवाग्रस्त पिता का ऑपरेशन कर दिया। यह हादसा तब हुआ जब मनीष के पिता ऑपरेशन थियेटर के बाहर अपने बेटे की सर्जरी का इंतजार कर रहे थे।

घायल मनीष ने ANI को बताया कि उसकी सर्जरी शनिवार को निर्धारित थी और वह अपने लकवाग्रस्त पिता को अस्पताल लेकर आया था क्योंकि घर पर उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं था। उसने अपने पिता से कहा था कि वे बाहर बैठकर उसका इंतजार करें।

लेकिन जब मनीष सर्जरी के बाद लौटा, तो उसने देखा कि उसके पिता के शरीर पर 5-6 टांके लगे हैं। हैरान मनीष ने कहा, “मुझे नहीं पता कि ऑपरेशन थियेटर में क्या हुआ। डॉक्टरों ने मेरे पिता का ऑपरेशन कर दिया। मैं भी खुद घायल हूं, मैं कर ही क्या सकता हूं?”

इस लापरवाही की खबर जब कोटा मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. संगीता सक्सेना तक पहुंची, तो उन्होंने तत्काल जांच के आदेश दिए। उन्होंने बताया कि तीन सदस्यों की एक जांच समिति बनाई गई है, जो 2-3 दिनों में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।

डॉ. सक्सेना ने प्रेस को बताया, “हमने इस मामले को गंभीरता से लिया है। समिति पूरी घटना की जांच करेगी और स्पष्ट करेगी कि आखिर यह चूक कैसे हुई।”

यह घटना सरकारी अस्पतालों में लापरवाही और मरीजों की सुरक्षा को लेकर गहरे सवाल खड़े करती है। जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि यह गलती कैसे हुई और जिम्मेदार कौन हैं।

भाजपा को यूपी में नए प्रदेश अध्यक्ष की तलाश, पूर्वी उत्तर प्रदेश के ओबीसी नेता पर फोकस

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को नए प्रदेश अध्यक्ष की तलाश जारी है। पार्टी नेतृत्व इस बार पूर्वी उत्तर प्रदेश के एक प्रभावशाली ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) नेता पर दांव लगाने की तैयारी में है, ताकि 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को बेहतर तरीके से साधा जा सके।

हाइलाइट्स:

  • यूपी भाजपा अध्यक्ष पद के लिए ओबीसी नेता पर विचार

  • धर्मपाल सिंह, बीएल वर्मा और बाबूराम निषाद प्रमुख दावेदार

  • पार्टी दलित चेहरों को भी देख रही है, लेकिन कोई बड़ा नाम नहीं

  • 2027 के चुनावों की रणनीति को ध्यान में रखकर हो रहा चयन

भाजपा नेतृत्व पर सपा के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समीकरण के जवाब में ओबीसी या दलित चेहरे को आगे लाने का दबाव है। एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने बताया, “ओबीसी समुदाय यूपी की सबसे बड़ी आबादी है और वर्तमान में पार्टी के पास कोई बड़ा दलित चेहरा नहीं है, जिससे ओबीसी नेता की नियुक्ति की संभावना ज्यादा है।”

पूर्वी यूपी पर फोकस

पार्टी इस बार खासतौर पर पूर्वी उत्तर प्रदेश से नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति पर विचार कर रही है। 2024 लोकसभा चुनावों में इस क्षेत्र की 24 सीटों में से भाजपा और सहयोगी अपना दल (एस) सिर्फ 10 सीटें ही जीत पाए थे, जबकि सपा ने 14 सीटें जीतीं। पार्टी को उम्मीद है कि पूर्वांचल से ओबीसी नेता को चुनने से इस नुकसान की भरपाई हो सकती है।

संभावित नामों की चर्चा

इस पद के लिए जिन नामों की चर्चा है, उनमें शामिल हैं:

  • धर्मपाल सिंह – राज्य मंत्री, लोध ओबीसी समुदाय से

  • बीएल वर्मा – केंद्रीय राज्य मंत्री, लोध समुदाय से

  • बाबूराम निषाद – राज्यसभा सांसद, निषाद समुदाय से

धर्मपाल और वर्मा दोनों ही भाजपा के पारंपरिक ओबीसी मतदाता समूह से आते हैं, जिनका प्रभाव बुंदेलखंड और रोहिलखंड क्षेत्रों में है। पार्टी के भीतर यह भी चर्चा है कि कुछ दलित नेताओं जैसे रामशंकर कठेरिया, विनोद सोनकर, नीलम सोनकर और विद्या सागर सोनकर के नाम भी विचाराधीन हैं।

ब्राह्मण चेहरों की संभावना कम

हालांकि, दिनेश शर्मा और हरीश द्विवेदी जैसे ब्राह्मण नेताओं के नाम भी चल रहे हैं, लेकिन पार्टी सूत्रों का मानना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (ठाकुर) पहले से ही उच्च जाति से हैं, इसलिए प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए बहुसंख्यक ओबीसी या दलित समुदाय से नेता चुना जाना राजनीतिक रूप से अधिक उपयुक्त होगा।

प्रक्रिया में देरी और अब तैयार नियुक्ति

भाजपा ने हाल ही में 98 जिला और शहर इकाई प्रमुखों में से 70 की नियुक्ति पूरी कर ली है, जिससे अब प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है। पार्टी संविधान के अनुसार, प्रदेश अध्यक्ष का चयन तभी संभव है जब 50% से अधिक जिला व शहर इकाइयों की नियुक्ति हो चुकी हो।

भाजपा के प्रवक्ता अवनीश त्यागी ने कहा, “पार्टी में प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव की एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया होती है, जिसमें कार्यकर्ताओं की भावनाओं का भी ध्यान रखा जाता है। जल्द ही नया प्रदेश अध्यक्ष घोषित किया जाएगा।”

वर्तमान में यूपी भाजपा अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी हैं, जो जाट समुदाय से आते हैं और अगस्त 2022 में नियुक्त किए गए थे। उन्होंने कुर्मी नेता स्वतंत्र देव सिंह का स्थान लिया था।

अब देखना यह है कि भाजपा अगले प्रदेश अध्यक्ष के रूप में किस नेता पर भरोसा जताती है – ओबीसी, दलित या फिर किसी क्षेत्रीय समीकरण को साधने वाला नया चेहरा।

छत्तीसगढ़: महादेव ऐप के जरिए आईपीएल सट्टेबाजी करते 14 आरोपी गिरफ्तार, ₹30 लाख के लेनदेन का खुलासा

रायपुर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए महादेव बेटिंग ऐप के जरिए आईपीएल मैचों पर सट्टा लगाने वाले 14 लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इन आरोपियों के पास से मोबाइल फोन, लैपटॉप, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड, बैंक पासबुक समेत कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज़ और दस्तावेज़ जब्त किए हैं। यह मामला राज्य में पहले से चल रही महादेव ऐप सट्टेबाजी जांच को और गहरा करता नजर आ रहा है।

हाइलाइट्स:

  • 14 लोग आईपीएल सट्टेबाजी के आरोप में गिरफ्तार

  • महादेव बेटिंग ऐप के पैनल से सट्टा चलाया जा रहा था

  • ₹30 लाख से अधिक के लेनदेन के रिकॉर्ड जब्त

  • 1,500 से ज्यादा बैंक खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया शुरू

पुलिस के अनुसार, इस कार्रवाई की शुरुआत निखिल वाधवानी नामक आरोपी के बयान के बाद हुई, जिसे 13 अप्रैल को ऑनलाइन सट्टेबाजी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उसी के बयान के आधार पर 14 और आरोपियों को पकड़ने में सफलता मिली।

रायपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक अमरेश मिश्रा ने बताया कि गिरफ्तार किए गए 14 लोगों में से छह छत्तीसगढ़, तीन झारखंड, दो मध्य प्रदेश, और एक-एक पंजाब, उत्तर प्रदेश और बिहार से हैं। इनमें से आठ को कोलकाता से और छह को गुवाहाटी से गिरफ्तार किया गया है।

जब्त सामान में शामिल हैं:

  • 67 मोबाइल फोन

  • 8 लैपटॉप

  • 4 राउटर

  • 94 एटीएम कार्ड

  • 15 सिम कार्ड

  • 32 बैंक पासबुक

  • 3 चेकबुक

  • 1 सीसीटीवी कैमरा

  • ₹30 लाख के सट्टेबाजी लेनदेन के रिकॉर्ड

पुलिस ने इस नेटवर्क से जुड़े 1,500 से ज्यादा बैंक खातों को फ्रीज करने के लिए संबंधित बैंकों को पत्र भेजे हैं। साथ ही यह भी बताया गया है कि इस पूरे सट्टेबाजी रैकेट की गहनता से जांच की जा रही है और जल्द ही और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

CBI भी कर रही है जांच

महादेव सट्टा ऐप मामले की जांच पहले से ही CBI और प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा की जा रही है। यह मामला राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक और कानूनी हलचलों का केंद्र बन गया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क से और कौन-कौन जुड़े हुए हैं और पैसा कहां-कहां गया है।

फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में इस रैकेट से जुड़ी और भी परतें खुलेंगी।

लॉकडाउन में विवाह स्थगित, होटल संचालक ने एडवांस लौटाने से किया इनकार, आयोग ने सुनाया फैसला

छत्तीसगढ़ के रायपुर से एक उपभोक्ता विवाद का मामला सामने आया है। कोविड-19 लॉकडाउन के कारण विवाह समारोह स्थगित करने पर एक होटल संचालक ने एडवांस राशि लौटाने से इनकार कर दिया। इस मामले में राज्य उपभोक्ता आयोग ने हस्तक्षेप करते हुए होटल को 1 लाख रुपये एडवांस और मानसिक पीड़ा व वाद व्यय के रूप में 7,000 रुपये लौटाने का आदेश दिया है।

यह मामला गरियाबंद जिले के फिंगेश्वर निवासी विकास कुमार गुप्ता से जुड़ा है, जिन्होंने 11 जनवरी 2021 को अपने भाई की शादी के लिए बिलासपुर स्थित होटल इंटरसिटी इंटरनेशनल को 4.91 लाख रुपये में बुक किया था। इस बुकिंग के तहत उन्होंने 1 लाख रुपये की एडवांस राशि होटल को दी थी। विवाह 21 और 22 अप्रैल 2021 को तय था, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण शासन ने लॉकडाउन लगा दिया, जिसके चलते विवाह स्थगित करना पड़ा।

विकास कुमार ने बाद में विवाह के लिए 2 जुलाई 2021 की तारीख तय की, लेकिन होटल प्रबंधन ने बुकिंग स्वीकार करने से मना कर दिया और एडवांस राशि लौटाने से भी इनकार कर दिया। इस पर विकास कुमार ने जिला उपभोक्ता फोरम, बिलासपुर में शिकायत दर्ज करवाई।

सुनवाई के दौरान होटल संचालक ने दावा किया कि उन्हें विवाह स्थगन की कोई मौखिक या लिखित सूचना नहीं दी गई थी। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि लॉकडाउन के दौरान सीमित संख्या (50-100 लोगों) के साथ समारोहों की अनुमति थी, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान हुआ।

हालांकि, फोरम और आयोग ने जब दस्तावेजों की जांच की तो यह स्पष्ट हुआ कि बिलासपुर जिले को उस समय पूरी तरह कंटेनमेंट जोन घोषित किया गया था। 14 से 21 अप्रैल 2021 तक प्रतिबंध लागू थे, जिसे बाद में 5 मई तक बढ़ा दिया गया था। ऐसी स्थिति में विवाह आयोजन संभव ही नहीं था। साथ ही, होटल की बुकिंग शर्तों में ऐसी आपदा की स्थिति को लेकर कोई स्पष्ट नीति नहीं थी।

अंततः राज्य उपभोक्ता आयोग ने माना कि होटल संचालक का एडवांस राशि जब्त करना मनमाना और गैर-जिम्मेदाराना कृत्य था। आयोग ने होटल को आदेश दिया कि वह विकास कुमार को 1 लाख रुपये एडवांस राशि के रूप में लौटाए, साथ ही मानसिक पीड़ा और वाद व्यय के लिए 7,000 रुपये अतिरिक्त दे।

इस फैसले से उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा को बल मिला है और यह एक मिसाल बन सकता है कि आपदा जैसी स्थितियों में सेवा प्रदाताओं को मानवीय संवेदना के साथ व्यवहार करना चाहिए।

मुर्शिदाबाद हिंसा पूर्व नियोजित थी, ममता बनर्जी का आरोप

कोलकाता, 16 अप्रैल 2025 — पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुर्शिदाबाद जिले में हाल ही में हुई सांप्रदायिक हिंसा को पूर्व नियोजित करार दिया है। उन्होंने कहा कि यदि इस हिंसा में बांग्लादेश के तत्व शामिल हैं, तो केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बुधवार को कोलकाता में इमामों और मुअज्जिनों के साथ बैठक के दौरान बोल रही थीं। इस बैठक में उन्होंने मुसलमानों से भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) के जाल में न फंसने और सड़कों पर हिंसा में शामिल न होने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “बीजेपी बंगाल में ध्रुवीकरण करना चाहती है ताकि हमारी सरकार चली जाए और उनकी सरकार आए।”

ममता बनर्जी ने मुर्शिदाबाद हिंसा के पीड़ितों के लिए 10-10 लाख रुपये मुआवजे की घोषणा की। उन्होंने कहा, “अगर बंगाल में शांति होगी तो सब अच्छा रहेगा। बीजेपी बंगाल में ध्रुवीकरण करना चाहती है ताकि हमारी सरकार चली जाए और उनकी सरकार आए, जब वे आएंगे तो आपका खाना भी बंद कर देंगे।”

मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल करके बाहर से लोगों को लाकर बंगाल में दंगे कराने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा, “क्या आपकी योजना केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल करके बाहर से लोगों को लाकर बंगाल में दंगे कराने की है? बीएसएफ ने ऐसे संकट को क्यों नहीं टाला?”

ममता बनर्जी ने विपक्षी दलों से एकजुट होने की अपील करते हुए कहा, “मैं INDIA ब्लॉक से अपील करना चाहती हूं कि आइए वक्फ कानून के खिलाफ मिलकर लड़ें। इसका असर हर किसी पर पड़ेगा।” उन्होंने कहा कि इसके बाद वे समान नागरिक संहिता लागू करने की कोशिश करेंगे, क्या आपको लगता है कि हर कोई इसे स्वीकार करेगा?

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अनुरोध किया कि वह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर नजर रखें, क्योंकि वह अपने राजनीतिक एजेंडे के लिए देश को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

रायपुर पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 52 लाख रुपये की चांदी की सिल्ली जब्त, दो अंतर्राज्यीय तस्कर गिरफ्तार

रायपुर, 16 अप्रैल 2025 — रायपुर पुलिस ने खमतराई थाना क्षेत्र में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए दो अंतर्राज्यीय तस्करों को गिरफ्तार किया है और उनके पास से करीब 56.3 किलो चांदी की सिल्ली जब्त की है, जिसकी अनुमानित कीमत ₹52 लाख है।

घटना का विवरण:

पुलिस को सूचना मिली थी कि दो व्यक्ति दोपहिया वाहन पर चांदी की सिल्ली लेकर आ रहे हैं। इसके बाद पुलिस ने भनपुरी चौराहे पर नाकेबंदी की और संदिग्ध वाहन को रोका। वाहन में सवार दोनों व्यक्तियों ने अपना नाम ओंकार जाधव और अजय बताया, जो महाराष्ट्र के निवासी हैं।

पुलिस कार्रवाई:

तलाशी के दौरान उनके पास से 115 नग चांदी की सिल्ली मिली, जो एल्यूमिनियम जैसी दिखती थीं। इनकी कुल वजन 56.3 किलो था। जब उनसे इनकी वैधता के दस्तावेज मांगे गए, तो उन्होंने कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया। इस पर दोनों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ भारतीय सीमा शुल्क अधिनियम की धारा 35(1) और बीएनएस अधिनियम की धारा 303(3) के तहत मामला दर्ज किया गया।

पुलिस की प्रतिक्रिया:

रायपुर पुलिस ने इस कार्रवाई को बड़ी सफलता बताया है और कहा है कि अवैध गतिविधियों के खिलाफ उनकी मुहिम जारी रहेगी। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी पुलिस को दें ताकि कानून-व्यवस्था बनाए रखा जा सके।​

मुख्यमंत्री साय ने फिर भरी हुंकार: नक्सलियों का खात्मा तक नहीं रुकेंगी सरकार की जंग, बस्तर में विकास और विश्वास का संदेश

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बस्तर दौरे के दौरान एक बार फिर यह स्पष्ट किया कि राज्य सरकार नक्सलवाद के पूर्ण खात्मे तक संघर्ष जारी रखेगी। उन्होंने कहा, “जब तक खौफ का सफाया नहीं होगा, तब तक रुकेंगे नहीं।”

बस्तर कलेक्ट्रेट सभागार ‘प्रेरणा’ में आयोजित संभाग स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार केंद्र सरकार के सहयोग से नक्सल उन्मूलन की दिशा में तीव्र गति से कार्य कर रही है। उन्होंने इस कार्य को 31 मार्च 2026 तक पूर्ण करने का संकल्प दोहराया।

हर गांव और हर परिवार को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना लक्ष्य

 

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि हितग्राही मूलक योजनाओं का क्रियान्वयन प्राथमिकता से हो और अंतिम छोर के व्यक्ति तक शासन की पहुंच सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा, “बस्तर अब पिछड़ेपन का प्रतीक नहीं बल्कि नए भारत की संभावनाओं का प्रवेश द्वार बन चुका है।”

साय ने आयुष्मान भारत, आधार, आवास और विद्युतीकरण जैसी योजनाओं को आम जन की गरिमा और सुरक्षा की गारंटी बताया और कहा कि इनका लाभ बिना किसी बाधा के हर नागरिक तक पहुँचना चाहिए।

बस्तर के युवा हमारी सबसे बड़ी पूंजी

मुख्यमंत्री साय ने युवाओं को बस्तर की सबसे बड़ी पूंजी बताते हुए कहा कि सरकार उन्हें केवल कौशल नहीं, बल्कि स्वाभिमान देना चाहती है। उन्होंने कहा, “हर घर में उजाला, हर हाथ में रोजगार और हर दिल में विश्वास—यही बस्तर की नई पहचान होगी।”

उन्होंने यह भी बताया कि बस्तर में उद्योग स्थापना के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं, जिनमें अनुसूचित जातियों, महिलाओं और स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता दी जा रही है। इससे रोजगार और स्वावलंबन को बढ़ावा मिलेगा।

नक्सलवाद के खात्मे का संकल्प, विकास में विश्वास

मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासी बहुल क्षेत्रों में व्यक्तिगत लाभ आधारित योजनाएं आवश्यक हैं ताकि प्रत्येक परिवार आर्थिक रूप से सशक्त हो सके। उन्होंने बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसी गतिविधियों को जनता की विकास में भागीदारी का प्रमाण बताया।

साय ने कहा कि लोगों का नक्सल विचारधारा से मोहभंग हो रहा है और वे अब विकास से जुड़ना चाहते हैं। “हमें इस विश्वास को और मज़बूत करना है,” उन्होंने जोड़ा।

प्रशासनिक निर्देश और अधोसंरचना पर ज़ोर

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों की शिकायतों को गंभीरता से लेने, उन्हें सम्मान देने और संवेदनशीलता के साथ प्रशासनिक कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बस्तर की जनता का विश्वास सरकार की सबसे बड़ी पूंजी है।

उन्होंने बताया कि बस्तर में अपूर्ण योजनाओं को जल्द पूर्ण किया जा रहा है और जगदलपुर हवाई अड्डे से नियमित उड़ानों की शुरुआत के प्रयास प्रगति पर हैं। इसके साथ ही राष्ट्रीय राजमार्ग और अन्य अधोसंरचना परियोजनाओं को भी गति दी जा रही है।

उपस्थित dignitaries: बैठक में मुख्य सचिव अमिताभ जैन, पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

कोरबा: अवैध वसूली के आरोप में बांगो थाना प्रभारी और प्रधान आरक्षक निलंबित

कोरबा, 16 अप्रैल 2025 — कोरबा जिले के बांगो थाना क्षेत्र में अवैध वसूली और जनप्रतिनिधियों के साथ दुर्व्यवहार के आरोप में थाना प्रभारी निरीक्षक उषा सौंधिया और प्रधान आरक्षक जितेन्द्र जायसवाल को निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक कोरबा द्वारा शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए की गई है।

शिकायतों की पृष्ठभूमि:

बांगो थाना क्षेत्र में वाहन चेकिंग और शराब पकड़ने के नाम पर अवैध वसूली की शिकायतें सामने आई थीं। जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया था कि थाना प्रभारी और प्रधान आरक्षक द्वारा जनप्रतिनिधियों के साथ अभद्र व्यवहार किया जा रहा है। इन शिकायतों के आधार पर पुलिस अधीक्षक ने सायबर सेल को जांच सौंपी थी।

जांच के निष्कर्ष:

सायबर सेल की जांच में पाया गया कि निरीक्षक उषा सौंधिया और प्रधान आरक्षक जितेन्द्र जायसवाल ने सचिन कुमार मिश्रा से ₹10,500 की अवैध वसूली की थी। यह कृत्य विभागीय नियमों और कर्तव्यों के उल्लंघन का प्रतीक है।

निलंबन और आगे की कार्रवाई:

पुलिस अधीक्षक ने दोनों अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय रक्षित केंद्र, कोरबा रहेगा, और उन्हें नियमानुसार अनुषांगिक भत्ते प्राप्त होंगे।

प्रशासन की प्रतिक्रिया:

पुलिस विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधियों और अनुशासनहीनता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जनता की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

निष्कर्ष:

यह घटना पुलिस विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जनप्रतिनिधियों और आम जनता की शिकायतों को गंभीरता से लेकर प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की है, जो कानून व्यवस्था बनाए रखने में सहायक होगी।

रायपुर में नो-पार्किंग पर विशेष अभियान: 72 वाहनों पर चालान, 14 पर न्यायिक कार्रवाई

रायपुर, 16 अप्रैल 2025 — रायपुर यातायात पुलिस ने रिंग रोड नंबर 2 के हीरापुर-कबीरनगर क्षेत्र में नो-पार्किंग में खड़े मालवाहक वाहनों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया। इस अभियान के दौरान 72 वाहनों पर मौके पर ही चालान काटा गया, जबकि 14 वाहनों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 285 के तहत न्यायालय में प्रकरण भेजा गया।​

अभियान का संचालन सुबह 8 बजे से दोपहर 3 बजे तक किया गया, जिसमें टाटीबंध और भनपुरी यातायात थानों की टीमें शामिल थीं। नो-पार्किंग में खड़े वाहनों के कारण मार्ग में बाधा उत्पन्न हो रही थी, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ गई थी।​

यातायात पुलिस की अपील:

  • वाहन चालकों से अनुरोध है कि निर्धारित पार्किंग स्थलों का ही उपयोग करें।

  • नाबालिगों को वाहन न चलाने दें और नशे की हालत में ड्राइविंग से बचें।

  • यातायात संकेतों का पालन करें और मोबाइल फोन का उपयोग करते हुए वाहन न चलाएं।

यातायात पुलिस का यह अभियान शहर में सुगम और सुरक्षित यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए जारी रहेगा।

नेशनल हेराल्ड केस: रायपुर में कांग्रेस का ईडी दफ्तर के बाहर प्रदर्शन, भूपेश बघेल और टीएस सिंहदेव ने केंद्र पर लगाया एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप

नेशनल हेराल्ड केस में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा सोनिया गांधी और राहुल गांधी सहित कांग्रेस नेताओं के खिलाफ चार्जशीट दाखिल किए जाने के बाद, छत्तीसगढ़ में कांग्रेस नेताओं ने रायपुर स्थित ED कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने इस विरोध प्रदर्शन में भाग लिया।

कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि केंद्र सरकार राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से केंद्रीय जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है। उनका कहना है कि विपक्षी नेताओं को निशाना बनाकर उन्हें बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। भूपेश बघेल ने कहा कि यह कार्रवाई विपक्ष को दबाने की रणनीति का हिस्सा है।

प्रवर्तन निदेशालय ने नेशनल हेराल्ड केस में सोनिया गांधी को आरोपी नंबर 1 और राहुल गांधी को आरोपी नंबर 2 के रूप में नामित किया है। चार्जशीट में आरोप है कि गांधी परिवार ने यंग इंडियन लिमिटेड के माध्यम से एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) की संपत्तियों पर अवैध रूप से कब्जा किया, जिसकी कीमत लगभग ₹2,000 करोड़ बताई गई है ।​

इस मामले में विशेष अदालत ने चार्जशीट पर विचार के लिए 25 अप्रैल 2025 की तारीख निर्धारित की है

कांग्रेस पार्टी ने इस कार्रवाई को राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बताया है और कहा है कि वह इसके खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन करेगी।

इस बीच, भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि कानून अपना काम कर रहा है और इसमें कोई राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं है ।​

नेशनल हेराल्ड केस में हुई इस कार्रवाई ने देश की राजनीति में एक बार फिर से सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव को उजागर कर दिया है।