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UPSC CSE 2024 Result: छत्तीसगढ़ के छात्रों का जलवा, पूर्वा अग्रवाल ने हासिल की 65वीं रैंक

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा सिविल सेवा परीक्षा 2024 का फाइनल रिजल्ट जारी कर दिया गया है, जिसमें छत्तीसगढ़ के छात्रों ने शानदार प्रदर्शन किया है। बिलासपुर की रहने वाली पूर्वा अग्रवाल ने 65वीं रैंक हासिल कर पूरे राज्य को गर्वित किया है। खास बात यह है कि पूर्वा इससे पहले UPSC 2023 में भी चयनित हुई थीं, जहां उन्हें 189वीं रैंक के साथ IPS मिला था। यह उनकी लगातार दूसरी सफलता है जो उनके समर्पण और मेहनत को दर्शाती है।

मुंगेली से अर्पण चोपड़ा ने 313वीं रैंक प्राप्त की है। वे मुंगेली नगर पालिका के कांग्रेस पार्षद अभय चोपड़ा के भाई हैं और फिलहाल दिल्ली में रहकर परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। वहीं बस्तर के जगदलपुर की मानसी जैन ने 444वीं रैंक हासिल की है। मानसी ने 2014 में IIT धनबाद से एमटेक किया था और दूसरी बार में UPSC परीक्षा में सफलता प्राप्त की है।

अंबिकापुर के केशव गर्ग ने 496वीं रैंक हासिल की है, जबकि बौरीपारा अंबिकापुर की शची जायसवाल ने 654वीं रैंक पाकर राज्य का नाम रोशन किया है। कुल मिलाकर इस बार छत्तीसगढ़ से 5 छात्रों ने UPSC में चयनित होकर राज्य को गौरवान्वित किया है।

 

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमला, रायपुर के कारोबारी को लगी गोली

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में मंगलवार को एक बड़ा आतंकी हमला हुआ, जिसमें पर्यटकों के एक समूह को निशाना बनाया गया। इस हमले में छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के एक व्यवसायी दिनेश मिरानिया को गोली लगने की खबर है। दिनेश मिरानिया अपनी पत्नी नेहा मिरानिया और बच्चों शौर्य व लक्षिता के साथ पहलगाम घूमने गए थे। इस दौरान आतंकियों ने घुड़सवारी कर रहे पर्यटकों पर अचानक अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी।

बताया जा रहा है कि यह गोलीबारी करीब 3 से 5 मिनट तक चली, जिसके बाद आतंकी वहां से फरार हो गए। इस हमले में दिनेश मिरानिया सहित कुल 6 पर्यटक घायल हुए हैं, जिनमें से एक की हालत गंभीर बताई जा रही है। सभी घायलों को अनंतनाग के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

दिनेश मिरानिया के बेटे शौर्य मिरानिया ने अपने पिता को गोली लगने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि फिलहाल उनके पिता का इलाज चल रहा है, लेकिन उनकी स्थिति और लोकेशन को लेकर अभी पूरी जानकारी नहीं मिल सकी है। दिनेश मिरानिया रायपुर के समता कॉलोनी के निवासी हैं।

यह आतंकी हमला कश्मीर में पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर चिंता खड़ी करता है। सुरक्षा बलों ने इलाके की घेराबंदी कर सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है।

गर्मी की मार: 25 अप्रैल से प्रदेश के सभी स्कूलों में ग्रीष्मकालीन अवकाश

स्कूल शिक्षा विभाग ने भीषण गर्मी के चलते जारी किया आदेश, 15 जून तक रहेगा अवकाश

रायपुर। प्रदेश में लगातार बढ़ रही गर्मी और लू के खतरे को देखते हुए स्कूल शिक्षा विभाग ने बड़ा फैसला लिया है। अब 25 अप्रैल से ही प्रदेश के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में ग्रीष्मकालीन अवकाश लागू होगा। यह निर्णय छात्रों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

जारी आदेश के अनुसार, यह अवकाश 25 अप्रैल से शुरू होकर 15 जून 2025 तक रहेगा। यह आदेश राज्य के सभी शासकीय, अशासकीय, अनुदान प्राप्त एवं गैर अनुदान प्राप्त स्कूलों पर लागू होगा। हालांकि यह अवकाश शिक्षकों के लिए मान्य नहीं होगा और उन्हें विभागीय कार्यों के लिए उपस्थित रहना होगा।

लू का कहर, पारा 44 के पार

राजधानी रायपुर समेत कई जिलों में पारा 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। मौसम विभाग ने भी आने वाले दिनों में तापमान में और वृद्धि की चेतावनी दी है। लू के हालात को गंभीर मानते हुए शिक्षा विभाग ने पहले से तय छुट्टियों में आंशिक संशोधन करते हुए यह आदेश जारी किया।

छात्रों और अभिभावकों को राहत

इस निर्णय से छात्रों और अभिभावकों ने राहत की सांस ली है। भीषण गर्मी में स्कूल जाना बच्चों के लिए मुश्किल हो गया था। अब उन्हें स्कूल से छुट्टी मिलने से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा।

432 पेटी जब्त शराब मामला, अब तक नहीं पकड़ाया मुख्य आरोपी

डोंगरगढ़ के करवारी स्थित एक फार्म हाउस से 29 मार्च को 432 पेटी अवैध शराब जब्त किए जाने के मामले में पुलिस ने अब तक 19 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। जब्त की गई शराब की कीमत करीब साढ़े 27 लाख रुपये बताई गई है और यह खेप मध्यप्रदेश के खरगौन व छिंदवाड़ा से लाई गई थी।

हालांकि, पुलिस अभी तक इस बड़ी अवैध शराब तस्करी के मुख्य सरगना तक नहीं पहुंच पाई है। जानकारी के अनुसार, यह शराब इंदौर के एक बड़े शराब माफिया द्वारा भेजी गई थी, लेकिन पुलिस की जांच की दिशा अभी तक वहां तक नहीं पहुंच सकी है।

इस मामले में पुलिस ने कंटेनर में शराब लोड करने वाले, नकली ढक्कन और होलोग्राम सप्लाई करने वाले आरोपियों को दिल्ली से तथा नकली स्टीकर उपलब्ध कराने वाले को मुंबई से गिरफ्तार कर लिया है। बावजूद इसके, पुलिस की कार्रवाई शराब आपूर्ति करने वाले मुख्य ठेकेदार और सरगना तक नहीं पहुंची है।

मुख्य आरोपी रोहित नेताम उर्फ सोनू सहित 19 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, लेकिन सूत्रों के अनुसार, इस मामले में पुलिस की कार्रवाई में गंभीरता की कमी साफ दिखाई दे रही है।

शराब की इतनी बड़ी खेप की जब्ती के बाद भी मुख्य माफिया अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर है, जिससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं। अब यह देखना होगा कि पुलिस आगे की जांच में क्या रुख अपनाती है और कब तक मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर पाती है।

 

केनरा बैंक साइबर क्राइम: 111 म्यूल अकाउंट से 87.60 करोड़ का ट्रांजेक्शन, बैंक प्रशासन को भनक तक नहीं

वैशाली नगर स्थित केनरा बैंक की एक चौंकाने वाली साइबर क्राइम घटना सामने आई है, जहां 111 म्यूल अकाउंट के जरिए करीब 87.60 करोड़ रुपये का ट्रांजेक्शन किया गया। इस मामले में बैंक के वरिष्ठ प्रबंधक परमाल सिंह सींगोदिया की शिकायत पर पुलिस ने अपराध दर्ज किया है। बताया गया कि ये ट्रांजेक्शन 1 अप्रैल 2017 से लेकर 5 अप्रैल 2025 तक चलते रहे, लेकिन इतने लंबे समय तक बैंक अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं हो सकी।

पुलिस ने आईटी एक्ट की धारा 317 (2), 317 (4), 318 (4), 61 (2)(ए) के तहत मामला दर्ज किया है और साइबर एक्सपर्ट्स की टीम जांच में जुट गई है। बैंक प्रबंधन ने सतर्कता बरतते हुए लगभग 22 लाख रुपये की राशि फ्रीज कर दी है, जबकि बाकी रकम खातों से निकाल ली गई।

गौरतलब है कि म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खाते होते हैं जिनका इस्तेमाल साइबर अपराधी अवैध पैसों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने या मनी लॉन्ड्रिंग के लिए करते हैं। ये खाते आमतौर पर किसी तीसरे व्यक्ति के नाम पर खोले जाते हैं, जो या तो इस गतिविधि से अनजान होता है या जानबूझकर इसमें शामिल होता है।

फिलहाल पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है और यह जानने की कोशिश कर रही है कि इतने लंबे समय तक यह साइबर फ्रॉड कैसे जारी रहा और बैंक प्रशासन इससे अनजान कैसे रहा।

“छत्तीसगढ़ में कांग्रेस का सीएम हाउस घेराव: बढ़ते अपराध पर हल्ला बोल, भाजपा ने किया पलटवार”

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में प्रदेश कांग्रेस ने कानून-व्यवस्था को लेकर राज्य की भाजपा सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के नेतृत्व में कांग्रेस नेताओं ने नगर निगम के सामने सभा कर सरकार पर निशाना साधा और फिर मुख्यमंत्री निवास की ओर कूच किया। हालांकि, पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक लिया, जिसके कारण पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। इस प्रदर्शन में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और टीएस सिंहदेव को छोड़कर सभी प्रमुख कांग्रेस नेता मौजूद रहे।

दीपक बैज ने भाजपा सरकार पर अपराध रोकने में विफल रहने का आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य की जनता भय के माहौल में जी रही है और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जनसेवक नहीं, बल्कि ‘भक्षक’ की भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आत्मानंद स्कूल की छात्रा से दुष्कर्म जैसी घटनाएं यह दिखाती हैं कि प्रशासन पूरी तरह निष्क्रिय हो चुका है। बैज ने यह भी आरोप लगाया कि हर तीन घंटे में एक बलात्कार की घटना हो रही है और सरकार आंखें मूंदे बैठी है।

पूर्व पीसीसी प्रमुख धनेंद्र साहू ने छत्तीसगढ़ को ‘शांति का टापू’ बताते हुए कहा कि अब यह राज्य अपराध का गढ़ बन चुका है। उन्होंने कहा कि लगातार हो रही हत्या, बलात्कार और लूट की घटनाएं राज्य सरकार की नाकामी का प्रमाण हैं और आज का यह प्रदर्शन पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में एक कदम है।

वहीं भाजपा ने कांग्रेस के प्रदर्शन को ‘अपराध के खिलाफ अपराधियों का प्रदर्शन’ बताया है। भाजपा प्रदेश महामंत्री संजय श्रीवास्तव ने पलटवार करते हुए कहा कि जिन मामलों का हवाला कांग्रेस दे रही है, उनमें से 10 में से 8 मामलों में आरोपी कांग्रेस से जुड़े हुए हैं। उन्होंने पूर्ववर्ती भूपेश सरकार के समय की कई घटनाओं का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस शासन में अपराध और नशाखोरी को बढ़ावा मिला। उन्होंने सूरजपुर, बलौदाबाजार, बिलासपुर और बालोद की घटनाओं में कांग्रेस नेताओं की संलिप्तता की ओर इशारा किया और कांग्रेस पर दोहरे रवैये का आरोप लगाया।

 

सप्ताह में 6 दिन की सरकारी छुट्टी से अटका काम, अफसरों पर फाइलों का बोझ

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सरकारी छुट्टियों की लगातार भरमार से आमजन के कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। पिछले दो सप्ताह में कुल छह दिन की सरकारी छुट्टी रही, जिससे सरकारी दफ्तरों में कामकाज ठप रहा और अधिकारी-कर्मचारियों पर फाइलों का दबाव भी बढ़ गया है।

हर शनिवार को शासकीय अवकाश घोषित होने के बाद शनिवार और रविवार लगातार दो दिन छुट्टी होने लगी है। इसके साथ जब तीज-त्योहारों की छुट्टियां भी जुड़ जाती हैं, तो कार्यालय लगातार बंद रहते हैं। इससे न केवल आम जनता को काम कराने में दिक्कत आती है, बल्कि जनदर्शन में आने वाली शिकायतों और आवेदनों का भी निपटारा नहीं हो पाता।

21 अप्रैल को जब दफ्तर खुले, तो कई शाखाओं में लंबित फाइलों की संख्या काफी बढ़ चुकी थी। कलेक्टोरेट कार्यालय की रिपोर्ट के अनुसार, 1 से 21 अप्रैल तक कई दिनों में शिकायतें लंबित रहीं।

लंबित शिकायतों का ब्यौरा (1 से 21 अप्रैल तक):

1 अप्रैल – 17 शिकायतें, 7 लंबित

8 अप्रैल – 21 शिकायतें, 18 लंबित

11 अप्रैल – 12 शिकायतें, 12 लंबित

15 अप्रैल – 10 शिकायतें, 10 लंबित

इन हालातों को देखते हुए शासन द्वारा “शासन तिहार” के अंतर्गत 8 अप्रैल से 31 मई तक एक विशेष अभियान शुरू किया गया है। इसके तहत शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में शिविर लगाकर समस्याएं सुनी जा रही हैं। साथ ही, जनदर्शन हॉल में एक “समाधान पेटी” लगाई गई है, जिसमें लोग अपनी शिकायतें दर्ज कर सकते हैं।

सरकारी कार्यों में सुस्ती और जनता की बढ़ती समस्याओं को लेकर अब अवकाश प्रबंधन और कार्यालयीन कार्यसंस्कृति पर सवाल उठने लगे हैं।

कोरबा: 20 हजार की रिश्वत लेते पटवारी रंगे हाथ गिरफ्तार, एसीबी की कार्रवाई

छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने एक और पटवारी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोपी पटवारी सुल्तान सिंह बंजारा को 20 हजार रुपए की घूस लेते हुए पकड़ा गया। बताया गया कि वह जमीन का रिकॉर्ड ऑनलाइन सुधारने के एवज में यह राशि मांग रहा था।

किसान सुमार सिंह की शिकायत पर ACB ने कार्रवाई करते हुए पटवारी को पकड़ने के लिए जाल बिछाया। योजना के अनुसार, पटवारी को कोरबा कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर स्थित एलआईसी ऑफिस के पास बुलवाया गया। जैसे ही उसने गमछे में पैसे लिए, टीम ने उसे मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया।

पूछताछ के बाद पटवारी को कोरबा के विशेष न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। यह ACB की ओर से जिले में हाल के दिनों में की गई एक और बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।

बस्तर में नक्सलियों का नया हथियार बना IED, चार महीने में 9 जवान शहीद

छत्तीसगढ़ के बीजापुर समेत पूरे बस्तर क्षेत्र में नक्सलियों की रणनीति में बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। आमने-सामने की लड़ाई में कमजोर पड़ चुके नक्सली अब IED (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) का सहारा ले रहे हैं। बीते चार महीनों में IED ब्लास्ट की वजह से 9 जवान शहीद हो चुके हैं, जबकि दर्जनों घायल हुए हैं।

हाल ही में बीजापुर जिले के मोरमेड के जंगल में सड़क निर्माण की सुरक्षा में तैनात CAF की 19वीं बटालियन के जवान मनोज पुजारी IED ब्लास्ट में शहीद हो गए। यह धमाका तोयनार से लगभग 4 किमी दूर हुआ। इससे पहले 6 जनवरी को अंबेली में हुए IED विस्फोट में DRG के 8 जवानों ने अपनी जान गंवा दी थी

बस्तर में नक्सलियों ने मुख्य सड़कों से लेकर जंगलों तक IED प्लांट कर रखे हैं। वे ग्रामीणों को पर्चे जारी कर जंगल की ओर न जाने की चेतावनी दे रहे हैं। चिंता की बात यह है कि फोर्स के पास IED डिटेक्ट करने के लिए आधुनिक तकनीक की कमी है। चार फीट से अधिक गहराई में लगे IED को मौजूदा संसाधन नहीं पकड़ पा रहे हैं।

सिर्फ फोर्स ही नहीं, वनोपज संग्रहण के लिए जंगल जाने वाले ग्रामीण भी इन धमाकों के शिकार बन रहे हैं। बीते छह महीनों में 14 ग्रामीण IED की चपेट में आए, जिनमें से 4 की मौत हो गई। सबसे अधिक घटनाएं बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा जिलों में दर्ज की गई हैं।

बीजापुर एसपी जितेंद्र यादव के अनुसार, ताजा घटना के बाद से इलाके में सघन सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। मौजूदा हालात में बस्तर में नक्सलियों से निपटने के लिए IED डिटेक्शन के हाईटेक संसाधनों की सख्त जरूरत है।

कोयला खदान में घट गए 2 लाख 32 हजार से अधिक नियमित मजदूर, ठेका श्रमिकों का बढ़ा दबदबा

कोल इंडिया और इसकी सहयोगी कंपनियों में नियमित मजदूरों की संख्या लगातार घट रही है। पिछले 20 वर्षों में कोयला खदान में 2 लाख 32 हजार से अधिक नियमित श्रमिक घटे हैं। इसी अवधि में ठेका मजदूरों की संख्या बढ़ी है। मजदूरों की घटती संख्या के मामले में एसईसीएल भी अन्य कंपनियों की तरह ही है। एसईसीएल में वर्ष 2006 में नियमित कर्मचारियों की संख्या 85 हजार 871 थी, जो पहली अप्रैल 2025 को घटकर 37 हजार 523 हो गई है। इस अवधि में एसईसीएल के मेनपावर में 48 हजार 348 नियमित कर्मचारियों की कमी आई है।

इस वजह से घट रही मजदूरों की संख्या

मेनपावर की संख्या घटने का सबसे बड़ा कारण नियमित मजदूरों का सेवानिवृत्त होना है। इनके स्थान पर कोयला कंपनी में नए कर्मचारियों की भर्ती नहीं हो रही है और स्थाई नौकरी के अवसर कम हुए हैं। कंपनी से अनुकंपा या भूमि अधिग्रहण के बदले नौकरी दे रही है। जबकि सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों के स्थान पर नई भर्तियां नहीं हो रही है। मजदूरों की संख्या घटने से कोयला कंपनी को जहां आर्थिक लाभ हो रहा है वहीं ठेका मजदूरों को खदान में कंपनी द्वारा निर्धारित दर पर भुगतान प्राप्त नहीं हो रहा है

एसईसीएल में हर साल ढाई से तीन हजार मजदूर घट रहे हैं। इससे मेनपावर में काफी गिरावट दर्ज की जा रही है। पहली अप्रैल 2018 में एसईसीएल का मेनपावर लगभग 49 हजार था जो अब घटकर 35 हजार 523 पर पहुंच गया है।

ठेका मजदूरों की बढ़ रही संख्या, हर काम आउटसोर्सिंग पर

कोयला उद्योग में एक तरफ जहां नियमित कर्मचारियों की संख्या लगातार घट रही है वहीं दूसरी ओर ठेका कंपनियों और उसमें काम करने वाले मजदूरों की संख्या बढ़ रही है। कोरबा जिले में स्थित कोल इंडिया की मेगा प्रोजेक्ट, गेवरा, दीपका और कुसमुंडा में ठेका कंपनियों का दबदबा है। कंपनियां कोयला उत्पादन से लेकर मिट्टी हटाने का कार्य कर रही है। छोटी-बड़ी मशीनों की मरम्मत भी आउटसोर्सिंग कंपनियों के पास है। हालांकि कोयला उत्पादन में ठेका मजदूर जितना योगदान दे रहे हैं उसके अनुसार मेहनताना नहीं मिल रहा है।