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NCRT किताबों पर विवाद: नई किताबों में किए गए बदलावों को लेकर उठे सवाल, एनसीईआरटी ने दिए जवाब

NCRT द्वारा जारी की जा रही नई पाठ्यपुस्तकों पर लगातार विवाद हो रहा है। खासकर कक्षा 1 से 8 तक की किताबों में बदलाव को लेकर विभिन्न आपत्तियां उठाई जा रही हैं। इनमें से कुछ आपत्तियां किताबों के नामकरण, विषयवस्तु, और ऐतिहासिक संदर्भों से जुड़ी हैं।

इस बार एनसीईआरटी ने कक्षा 7 की सोशल साइंस किताब “Exploring Society: India and Beyond” में मुगलों और दिल्ली सल्तनत के संदर्भों को हटाने के फैसले को लेकर आलोचना झेली है। किताब में भारतीय राजवंशों पर नए चैप्टर जोड़े गए हैं, जिसमें महाकुंभ, मेक इन इंडिया, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जैसे प्रमुख योजनाओं का उल्लेख है। एनसीईआरटी ने इन बदलावों को नयी शिक्षा नीति और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचे (एनसीएफ) के तहत सही ठहराया है।

इसके अलावा, एनसीईआरटी ने किताबों के नामकरण पर भी प्रतिक्रिया दी है, जहां पहले की किताबों के मुकाबले भारतीय संगीत वाद्ययंत्रों के नाम रखे गए हैं, जैसे कि ‘मृदंग’ (कक्षा 1 और 2 की अंग्रेजी किताब), ‘संतूर’ (कक्षा 3 की अंग्रेजी किताब), और ‘पूर्वी’ (कक्षा 6 और 7 की अंग्रेजी किताब)। इस कदम को भारतीय संस्कृति के प्रति छात्रों की रुचि बढ़ाने और संगीत के महत्व को समझाने की दिशा में उठाया गया एक कदम बताया गया है।

एनसीईआरटी का कहना है कि इन किताबों का नामकरण और विषयवस्तु एनईपी 2020 और एनसीएफ 2023 के आधार पर किया गया है, जो राष्ट्रीय शिक्षा के समग्र दृष्टिकोण को अपनाता है। उन्होंने यह भी कहा कि पहले की किताबों की तुलना नई किताबों से करना उचित नहीं है, क्योंकि नई किताबें पूरी तरह से नई दृष्टिकोण और पैटर्न पर आधारित हैं।

एनसीईआरटी ने स्पष्ट किया कि इन किताबों में कोई महत्वपूर्ण विषय नहीं हटाया गया है, बल्कि इन्हें नए तरीके से पेश किया गया है। साथ ही, उन्होंने यह भी बताया कि इन किताबों के सभी 22 अनुसूचित भारतीय भाषाओं में अनुवाद किए जाएंगे, ताकि छात्रों को उनकी मातृभाषा में भी इसका लाभ मिल सके।

वहीं, कुछ लोगों ने इंग्लिश और हिंदी किताबों के समान नाम पर सवाल उठाया है, लेकिन एनसीईआरटी का कहना है कि यह नामकरण बिल्कुल उचित है और इसके पीछे भारतीयता को बढ़ावा देने का उद्देश्य है। एनसीईआरटी ने यह भी बताया कि इन बदलावों को लेकर प्राप्त प्रतिक्रिया काफी सकारात्मक रही है और कई शिक्षाविदों ने इन किताबों को 5 स्टार रेटिंग दी है।

इस विवाद के बीच, एनसीईआरटी ने आने वाले महीनों में अन्य कक्षाओं के लिए नई किताबों की टाइमलाइन भी जारी की है। कक्षा 4 से लेकर 8 तक की किताबें जल्द ही बाजार में उपलब्ध होंगी, और स्कूलों में ब्रिज कोर्स की शुरुआत भी की जा चुकी है ताकि छात्र नए पैटर्न में आसानी से समायोजित हो सकें।

कुल मिलाकर, एनसीईआरटी की नई किताबों को लेकर जो विवाद खड़ा हुआ है, वह भारत की सांस्कृतिक धरोहर, शिक्षा नीति, और पाठ्यक्रम में बदलावों को लेकर हो रहा है।

छत्तीसगढ़: पेयजल व्यवस्था और स्वच्छता पर जोर, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नगरीय प्रशासन विभाग की समीक्षा बैठक में दिए निर्देश

रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मंगलवार को मंत्रालय में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की कार्यों की समीक्षा बैठक ली। बैठक में मुख्यमंत्री ने आने वाले दस वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए शहरी इलाकों में पेयजल व्यवस्था को सुदृढ़ करने की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ती शहरी आबादी की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अभी से रणनीतिक तैयारी जरूरी है।

नए रिहायशी इलाकों में प्राथमिकता से बनेंगे उद्यान
मुख्यमंत्री साय ने शहरों के आउटर इलाकों में विकसित हो रहे नए रिहायशी क्षेत्रों में प्राथमिकता से उद्यान (पार्क) विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बच्चों को खेलने, बुजुर्गों को वॉकिंग, जॉगिंग, योग और शारीरिक व्यायाम के लिए पर्याप्त सार्वजनिक स्थान उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।

स्वच्छता रैंकिंग सुधारने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने सभी नगरीय निकायों को भारत सरकार द्वारा जारी स्वच्छता रैंकिंग में सुधार लाने के लिए ठोस प्रयास करने को कहा। उन्होंने सुझाव दिया कि नगर निगम आयुक्तों को इंदौर जैसे देश के सर्वश्रेष्ठ सफाई मॉडल वाले शहरों का अध्ययन दौरा कराया जाए ताकि वहां की बेहतरीन व्यवस्थाओं को अपने शहरों में भी लागू किया जा सके।

अटल विश्वास पत्र पर प्रभावी अमल
बैठक में मुख्यमंत्री साय ने अटल विश्वास पत्र पर प्रमुखता से अमल सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि शहरी विकास की योजनाओं में जनभागीदारी को बढ़ावा देना आवश्यक है ताकि स्वच्छ, सुंदर और सुविधायुक्त शहरों का निर्माण हो सके।

ग्रामीण क्षेत्रों में भी विकसित हों शहरी सुविधाएं
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि शहरी इलाकों से सटे ग्रामीण क्षेत्रों में अन्य विभागों के समन्वय से बुनियादी शहरी सुविधाओं का विकास किया जाए। इससे भविष्य में इन क्षेत्रों के नगरीय निकाय में शामिल होने पर उन्हें आधुनिक शहरी सुविधाओं के साथ जोड़ा जा सकेगा।

निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और समय-सीमा पर विशेष ध्यान
साय ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और समय-सीमा के भीतर काम पूरा करने पर विशेष बल दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि समय पर कार्य पूरा करने वाले निकायों को प्रोत्साहित करने के लिए रिवार्ड-सिस्टम तैयार किया जाए। साथ ही निर्माण और विकास कार्यों की प्रगति की प्रभावी मॉनिटरिंग के लिए एक ऑनलाइन सिस्टम या एप विकसित करने का भी निर्देश दिया।

वित्तीय वर्ष की प्राथमिकताओं पर चर्चा
मुख्यमंत्री ने चालू वित्तीय वर्ष की प्राथमिकताओं पर भी चर्चा की और केंद्र एवं राज्य शासन की योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन की जानकारी ली। बैठक में उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव और मुख्य सचिव अमिताभ जैन भी उपस्थित रहे।

छत्तीसगढ़ में नक्सल उन्मूलन अभियान की समीक्षा, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दिया 2026 तक नक्सलमुक्त प्रदेश का लक्ष्य

रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंगलवार को मंत्रालय में उच्चस्तरीय बैठक कर प्रदेश में चल रहे नक्सल उन्मूलन अभियान की गहन समीक्षा की। बैठक में गृह मंत्री विजय शर्मा, मुख्य सचिव अमिताभ जैन, अपर मुख्य सचिव गृह मनोज पिंगुआ, डीजीपी अरुण देव गौतम, विशेष डीजी (नक्सल ऑपरेशंस), सीआरपीएफ और अन्य सुरक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक का मुख्य फोकस नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में चल रही कार्रवाई और आंतरिक सुरक्षा की वर्तमान स्थिति पर रहा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में प्रदेश को नक्सलमुक्त बनाने के संकल्प के साथ दृढ़ता से कार्य कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मार्च 2026 तक नक्सलवाद का पूर्ण उन्मूलन करना सरकार का लक्ष्य है और इसके लिए सभी प्रयास तेज किए जा रहे हैं।

सुरक्षा बलों के अदम्य साहस की सराहना
मुख्यमंत्री ने बैठक में सुरक्षा बलों के जवानों के अदम्य साहस, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा की सराहना करते हुए कहा कि उनकी बहादुरी के कारण आज कई क्षेत्र नक्सल प्रभाव से मुक्त हो चुके हैं। उन्होंने अधिकारियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि अंतिम सफलता अब बहुत निकट है।

समन्वय और सूचना तंत्र को मजबूत करने पर जोर
मुख्यमंत्री साय ने विशेष निर्देश दिए कि नक्सल विरोधी अभियानों में आपसी समन्वय और सूचना संकलन तंत्र को और मजबूत किया जाए ताकि कार्रवाई और भी प्रभावी हो सके। उन्होंने कहा कि नक्सल उन्मूलन केवल एक सुरक्षा अभियान नहीं, बल्कि बस्तर और समूचे छत्तीसगढ़ के सुरक्षित भविष्य का मिशन है, जिसमें किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

विकास कार्यों में तेजी लाने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने कहा कि बीजापुर, सुकमा और दंतेवाड़ा जैसे जिलों में सुरक्षा और विकास दोनों को साथ लेकर चलना होगा। उन्होंने स्थानीय समुदायों का विश्वास जीतने के लिए संवाद बढ़ाने और स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क निर्माण तथा रोजगार सृजन जैसे विकास कार्यों को तेज गति से पूरा करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि जनता को यह महसूस होना चाहिए कि सरकार उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए पूरी तरह समर्पित है।

‘विकसित छत्तीसगढ़’ का सपना
बैठक के अंत में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ अब निर्णायक मोड़ पर है। उन्होंने सभी सुरक्षा और प्रशासनिक अधिकारियों से आह्वान किया कि वे पूरी निष्ठा, सजगता और प्रतिबद्धता के साथ इस ऐतिहासिक लक्ष्य को प्राप्त करने में अपनी भूमिका निभाएँ।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेशवासी, सुरक्षा बल और प्रशासन मिलकर नक्सलवाद के खिलाफ इस निर्णायक लड़ाई को जीतेंगे और ‘विकसित छत्तीसगढ़’ के सपने को साकार करेंगे।

नवा रायपुर बना देश का पहला पूरी तरह कर्ज मुक्त नियोजित शहर, छत्तीसगढ़ सरकार के सुधारों का बड़ा संकेत

रायपुर। छत्तीसगढ़ के नवा रायपुर ने इतिहास रचते हुए देश का पहला पूर्ण रूप से कर्ज मुक्त नियोजित शहर बनने का गौरव प्राप्त किया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने आर्थिक अनुशासन, पारदर्शिता और निर्णायक नेतृत्व का परिचय देते हुए यह उपलब्धि हासिल की है। अब नवा रायपुर निवेशकों के लिए एक भरोसेमंद और आकर्षक केंद्र के रूप में उभर रहा है।

नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण (NRDA) ने 1788 करोड़ रुपये का कर्ज और 100 करोड़ रुपये की गारंटी राज्य सरकार को वापस कर दी है, जिससे यह शहर पूरी तरह ऋणमुक्त हो गया है। इस सफलता को आर्थिक अनुशासन, संस्थागत सुधार और स्पष्ट विजन का परिणाम माना जा रहा है।

स्मार्ट सिटी मिशन को मिली नई ऊर्जा
देशभर में जारी स्मार्ट सिटी मिशन को नवा रायपुर ने एक नई दिशा दी है। यह केवल छत्तीसगढ़ की उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत के आत्मनिर्भर और सशक्त राष्ट्र बनने के अभियान में भी एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत @2047” विजन को साकार करने में सहायक सिद्ध हो रही है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का विजन
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा, “हमारा लक्ष्य केवल ऋणमुक्ति तक सीमित नहीं है। हम नवा रायपुर को एक ऐसा आदर्श शहर बनाना चाहते हैं, जो अपनी आधुनिकता, पारदर्शिता और टिकाऊ विकास मॉडल के लिए पूरे देश में मिसाल बने।”

उनके नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने दिखाया है कि सही नीति और मजबूत इच्छाशक्ति से कोई भी संस्था आत्मनिर्भर बन सकती है, जबकि अन्य राज्य कर्ज के बोझ से जूझ रहे हैं।

नीति परिवर्तन और निजी निवेश का रास्ता खुला
बीते एक वर्ष में नवा रायपुर के व्यावसायिक और सामाजिक विकास के लिए कई अहम फैसले लिए गए। 1043 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान, सेमीकंडक्टर यूनिट की स्थापना, मेडिसिटी और एडुसिटी जैसी परियोजनाएं, और राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (NIFT) की स्थापना ने इस क्षेत्र को निवेशकों के लिए आकर्षक बना दिया है।

फार्मास्युटिकल, आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर की कई बड़ी कंपनियां नवा रायपुर की ओर रुख कर रही हैं। CBDA कमर्शियल टॉवर में प्रमुख आईटी कंपनियों को स्पेस आबंटित किया गया है। इसके साथ ही 156 करोड़ रुपये की लागत से प्लग-एंड-प्ले ऑफिस स्पेस, 37 करोड़ रुपये की लागत से साइंस सिटी, और 20 करोड़ रुपये की लागत से ई-बस सेवाओं की भी शुरुआत हो रही है।

वित्त मंत्री का बयान
राज्य के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा, “नवा रायपुर केवल भवनों का समूह नहीं है, बल्कि भारत के आर्थिक आत्मबल का प्रतीक है। यह छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था का नया ग्रोथ इंजन बनेगा और देशभर के निवेशकों का भरोसेमंद केंद्र भी।”

छत्तीसगढ़ सरकार का यह कदम निश्चित ही राज्य को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के मिशन में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

तेंदूपत्ता घोटाले के बाद संग्राहकों के खुलेंगे बैंक खाते, 920 करोड़ राशि का होगा ऑनलाइन भुगतान

रायपुर। छत्तीसगढ़ में तेंदूपत्ता संग्राहकों को अब उनके मेहनताने और बोनस का भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में ऑनलाइन किया जाएगा। हाल ही में सामने आए तेंदूपत्ता घोटाले के बाद सरकार ने पारदर्शिता बढ़ाने के लिए यह कदम उठाया है। इसके लिए विशेष रूप से Online MFP Collection and Payment System सॉफ्टवेयर तैयार किया गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस वर्ष तेंदूपत्ता संग्राहकों को संग्रहण पारिश्रमिक 5500 रुपए प्रति मानक बोरा की दर से दिया जाएगा। अनुमान है कि इस बार संग्राहकों को कुल मिलाकर लगभग 920 करोड़ रुपए का भुगतान किया जाएगा, जो सीधे उनके बैंक खातों में ऑनलाइन ट्रांसफर होगा।

ऑनलाइन भुगतान की व्यवस्था
राज्य लघु वनोपज संघ के प्रबंध संचालक अनिल साहू ने बताया कि इस बार सभी जिला यूनियनें तेंदूपत्ता संग्राहकों को पारिश्रमिक का भुगतान डिजिटल माध्यम से करेंगी। 28 अप्रैल तक प्रदेश में 5.64 लाख मानक बोरा तेंदूपत्ता का संग्रहण हो चुका है। फिलहाल सुकमा, दंतेवाड़ा और जगदलपुर जिलों में संग्रहण जारी है।

बस्तर संभाग में तैयारी पूरी
बस्तर संभाग के जिलों में तेंदूपत्ता संग्रहण के लिए बोरा, सुतली और अन्य जरूरी सामग्रियों एवं परिवहन की सभी व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं। इसके अलावा फड़ से गोदाम तक और गोदामों में भंडारित तेंदूपत्ता का बीमा भी राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा कराया गया है।

इस वर्ष 31 जिला वनोपज सहकारी यूनियनों के तहत 902 प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों के 954 लाटों में 16.72 लाख मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहण का लक्ष्य तय किया गया है।

सरकार का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना, संग्राहकों को समय पर भुगतान करना और किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार को रोकना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल तेंदूपत्ता संग्राहकों के हित में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव साबित होगी।

CGMSC घोटाले के बाद सरकार की नई पहल, अब आमजन ऑनलाइन देख सकेंगे सभी जानकारी

रायपुर। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CGMSC) में हुए 660 करोड़ रुपए के घोटाले के बाद अब सरकार ने पारदर्शिता बढ़ाने के लिए बड़ी पहल की है। कॉर्पोरेशन ने ड्रग प्रोक्योरमेंट एंड डिस्ट्रीब्यूशन मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम (DPDMIS) पोर्टल को आम नागरिकों के लिए खोल दिया है।

इस पोर्टल के माध्यम से अब प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों, सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में दवाओं व चिकित्सीय उपकरणों की आपूर्ति, स्टॉक की स्थिति, और निर्माणाधीन अस्पतालों की प्रगति को रियल टाइम में देखा जा सकेगा। साथ ही दवा वितरण, निविदाएं, स्वीकृत आपूर्तिकर्ताओं की सूची, अनुबंध मूल्य और दवाओं के परिवहन में लगे वाहनों की लाइव लोकेशन भी आम जनता के लिए उपलब्ध होगी।

660 करोड़ का CGMSC घोटाला
कांग्रेस शासनकाल के दौरान हुए इस बड़े घोटाले में 660 करोड़ रुपए के रीएजेंट और मेडिकल उपकरणों की खरीदी में गड़बड़ी सामने आई थी। इस मामले में मोक्षित कॉर्पोरेशन के मालिक शशांक चोपड़ा सहित छह अधिकारी जेल में हैं। स्वास्थ्य विभाग में चर्चा है कि घोटाले से जुड़े कुछ उच्च अधिकारी अब भी जांच से बाहर हैं और उन्हें जिम्मेदार पदों पर बनाए रखा गया है। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं की गई है।

पारदर्शिता की दिशा में अहम कदम
CGMSC की एमडी पद्मिनी भोई ने कहा कि पारदर्शिता केवल आंकड़ों के दिखावे तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि आमजन को यह जानने का अधिकार होना चाहिए कि उनके स्वास्थ्य के लिए सरकार द्वारा खर्च किया गया हर संसाधन कहां और कैसे उपयोग हो रहा है। DPDMIS पोर्टल इसी सोच के तहत बनाया गया है।

इस पहल से न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की दक्षता में सुधार होगा, बल्कि कार्य प्रणाली में पारदर्शिता, भ्रष्टाचार पर नियंत्रण और जनता के बीच विश्वास भी बढ़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह छत्तीसगढ़ में सुशासन की दिशा में एक बड़ा और अनुकरणीय प्रयास है, जो भविष्य में स्वास्थ्य सेवा प्रबंधन को एक सशक्त आधार प्रदान करेगा।

रायपुर न्यूज़: पिकनिक मनाने गए दो युवक खारून नदी में डूबे, दोनों की मौत

रायपुर। राजधानी रायपुर में रविवार को पिकनिक मनाने गए दो युवकों की खारून नदी में डूबने से मौत हो गई। दोनों के शव सोमवार सुबह बरामद किए गए। मुजगहन पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस के मुताबिक, नवा रायपुर निवासी अर्जुन यादव (18 वर्ष) और लाभांडी निवासी भूपेंद्र भुंडे (21 वर्ष) अपने साथी विकास के साथ सातपाखर एनीकट पिकनिक मनाने गए थे। नहाने के दौरान अर्जुन और भूपेंद्र गहरे पानी में चले गए और डूब गए।

उनके साथी विकास ने तुरंत पुलिस और एसडीआरएफ टीम को सूचना दी। बचाव दल ने शाम तक तलाशी अभियान चलाया, लेकिन अंधेरा होने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन रोकना पड़ा। सोमवार सुबह फिर से तलाशी अभियान शुरू किया गया, जिसके बाद दोनों युवकों के शव नदी से बरामद कर लिए गए।

बताया गया है कि तीनों युवक पहले भी इस स्थान पर नहाने आ चुके थे। फिलहाल पुलिस ने मर्ग कायम कर आगे की जांच शुरू कर दी है।

रायपुर में कांग्रेस का आरोप: दिव्यांगजनों को केंद्र की योजना का लाभ नहीं मिल रहा

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस का कहना है कि दिव्यांग कर्मचारियों को केंद्र सरकार द्वारा बनाई गई योजनाओं का वास्तविक लाभ नहीं मिल पा रहा है।

प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि केंद्र सरकार ने दिव्यांगजनों को कम ब्याज दर पर मकान निर्माण और वाहन खरीदने के लिए ₹50,000 से ₹50 लाख तक का ऋण उपलब्ध कराने की योजना बनाई थी। इसके लिए छत्तीसगढ़ के कुछ चुनिंदा बैंकों को अधिकृत भी किया गया, लेकिन जमीनी हकीकत में दिव्यांगजनों को इस योजना के तहत ऋण नहीं मिल रहा है।

ठाकुर ने आरोप लगाया कि “डबल इंजन” की सरकार छत्तीसगढ़ में केंद्र की योजनाओं को सही तरीके से लागू करने में असफल रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र की यह लोन योजना भी दिव्यांगों के लिए केवल एक जुमला बनकर रह गई है।

कांग्रेस प्रवक्ता ने आगे कहा कि केंद्र सरकार ने योजना बनाकर प्रदेश सरकार को लागू करने के लिए भेज दी, लेकिन प्रदेश के समाज कल्याण संचालनालय को इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं है।

कांग्रेस पार्टी ने मांग की है कि दिव्यांगजनों के हित में बनाई गई इस योजना का लाभ छत्तीसगढ़ के पात्र लाभार्थियों को तत्काल प्रदान किया जाए, ताकि वे अपना घर बनाने या वाहन खरीदने जैसे सपनों को साकार कर सकें।

साय सरकार की नई रणनीति: कांग्रेस विधायकों के क्षेत्रों में मंत्रियों की सक्रियता तेज

रायपुर। छत्तीसगढ़ में साय सरकार ने प्रशासनिक कार्यों में तेजी लाने और सियासी जमीन मजबूत करने के लिए नई रणनीति अपनाई है। मुख्यमंत्री से लेकर कैबिनेट मंत्री तक अब लगातार जिलों का दौरा कर रहे हैं। खास बात यह है कि इन दौरों का मुख्य फोकस उन विधानसभा क्षेत्रों पर है, जहां कांग्रेस के विधायक हैं।

बीते सप्ताह कैबिनेट मंत्रियों ने बालोद और जांजगीर-चांपा जैसे जिलों का व्यापक दौरा किया। बालोद में उपमुख्यमंत्री अरुण साव और महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने प्रशासनिक कार्यों की गहन समीक्षा की। जिला कार्यालय में हुई बैठक में उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जनहित के कामों में कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। पीएचई विभाग के अधिकारियों को गांवों में पानी की समस्या दूर करने के लिए जल स्रोतों के रिचार्ज और वर्षा जल संरक्षण के लिए योजनाएं बनाने के निर्देश दिए गए।

महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने आंगनवाड़ी केंद्रों का निरीक्षण कर अधिकारियों की बैठक ली। निरीक्षण के दौरान लापरवाही पाए जाने पर एक कर्मचारी को निलंबित करने का निर्देश भी उन्होंने दिया।

गौरतलब है कि बालोद जिले में तीनों विधानसभा सीटों पर कांग्रेस का कब्जा है। विधानसभा चुनाव में भाजपा यहां से एक भी सीट नहीं जीत पाई थी। अब साय सरकार ने इन क्षेत्रों में भी अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने के लिए रणनीतिक तरीके से काम शुरू कर दिया है।

इसी तरह जांजगीर-चांपा जिले में भी, जहां कांग्रेस विधायकों की संख्या अधिक है, साय सरकार के मंत्री लगातार दौरे कर रहे हैं। क्षेत्रीय प्रशासनिक समीक्षा के साथ ही जनता के बीच सरकार की उपस्थिति बढ़ाकर सियासी समीकरणों को बदलने की कोशिशें तेज हो गई हैं।

साय सरकार का यह आक्रामक प्रशासनिक और सियासी अभियान आने वाले समय में छत्तीसगढ़ की राजनीति में बड़ा असर डाल सकता है।

नक्सल ऑपरेशन में सुरक्षा बलों की निर्णायक बढ़त, कर्रेगुट्टा की पहाड़ी पर बनेंगे नए सुरक्षा शिविर

जगदलपुर: छत्तीसगढ़ और तेलंगाना की सीमा पर माओवादियों के खिलाफ चल रहे बड़े अभियान में सुरक्षा बलों को कर्रेगुट्टा की पहाड़ी पर बड़ी सफलता मिली है। आठ दिनों से जारी इस निर्णायक लड़ाई के बाद सुरक्षा बलों ने अब इस क्षेत्र में कई नए फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस (FOB) यानी सुरक्षा शिविर स्थापित करने की योजना बनाई है, जिससे माओवादियों के लिए यह इलाका अब सुरक्षित नहीं रह जाएगा।

करीब 10 हजार से अधिक जवानों की तैनाती के साथ शुरू हुए इस अभियान में पहली बार सुरक्षा बलों ने कर्रेगुट्टा की दुर्गम पहाड़ी पर चढ़ाई कर उसकी चोटी तक पहुंच बनाई है। बीते चार दशकों में यह क्षेत्र माओवादियों का मजबूत गढ़ माना जाता था, जहां पहुंचना सुरक्षा बलों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण था।

अभियान के दौरान जवानों ने अब तक 150 से अधिक आईईडी (इंप्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) बरामद कर उन्हें निष्क्रिय किया है, साथ ही माओवादियों के कई बंकर भी ध्वस्त किए गए हैं। भीषण गर्मी (45 से 48 डिग्री सेल्सियस) में अभियान चला रहे जवानों को पहाड़ी की चोटी पर एक प्राकृतिक जल स्रोत भी मिला है, जिससे उनका मनोबल और उत्साह बढ़ा है।

सुरक्षा बलों ने कर्रेगुट्टा की पहाड़ी शृंखला का बड़ा हिस्सा अपने नियंत्रण में ले लिया है और इसकी लगभग 250 वर्ग किमी क्षेत्रफल को माओवादियों के प्रभाव से मुक्त करने की तैयारी