Home Blog Page 204

NEET UG 2025: छत्तीसगढ़ में केवल सरकारी संस्थानों में हुई परीक्षा, 45 हजार छात्रों ने लिया हिस्सा

रायपुर, छत्तीसगढ़:
देशभर में NEET UG 2025 की परीक्षा रविवार को सफलतापूर्वक आयोजित की गई। छत्तीसगढ़ में इस बार केवल सरकारी संस्थानों को ही परीक्षा केंद्र के रूप में चुना गया। राज्यभर में लगभग 45,000 छात्र परीक्षा में शामिल हुए, जिनमें से रायपुर जिले में 9300 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी।

रायपुर में कुल 27 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। परीक्षा के दौरान सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए इस बार सीसीटीवी कैमरे, जैमर और बायोमैट्रिक अटेंडेंस सिस्टम जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया।

परीक्षा केंद्रों में प्रवेश से पहले कड़ी चेकिंग की गई। धागा, ताबीज, रुद्राक्ष, कड़ा, ज्वेलरी या किसी भी प्रकार की मेटलिक वस्तु पहनकर आए विद्यार्थियों को अंदर नहीं जाने दिया गया। पारदर्शी पानी की बोतल के अलावा किसी अन्य सामग्री को अनुमति नहीं थी। छात्रों को लोअर, हाफ टी-शर्ट या शर्ट में परीक्षा केंद्र पहुंचने की सलाह दी गई थी।

AI तकनीक की मदद से अभ्यर्थियों की पहचान सुनिश्चित की गई। आवेदन पत्र में लगे फोटो, परीक्षा केंद्र पर खींची गई तस्वीरें और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर 15 मिनट के फोटो का मिलान किया गया, ताकि किसी भी प्रकार की नकल या फर्जीवाड़ा रोका जा सके।

पिछले साल का प्रदर्शन:
NEET UG 2024 में छत्तीसगढ़ से 43,873 छात्रों ने परीक्षा दी थी, जिनमें से 22,344 (50.92%) अभ्यर्थी सफल हुए थे। यह पिछले छह वर्षों में सर्वश्रेष्ठ परिणाम था। वहीं 2023 में 41,196 छात्रों में से 19,610 (47.60%) ने परीक्षा पास की थी। साल 2024 में राज्य का परिणाम 3.32% बेहतर रहा।

इस वर्ष की परीक्षा निष्पक्षता और पारदर्शिता की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

सीएम विष्णुदेव साय बोले – “सभी मुसलमान बुरे नहीं होते”, पहलगाम आतंकी हमले में छत्तीसगढ़ के पर्यटकों की जान बचाने वाले गाइड नजाकत का जताया आभार

रायपुर, छत्तीसगढ़:
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले को लेकर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गहरा दुख जताया और कश्मीरी गाइड नजाकत अहमद शाह के प्रति आभार व्यक्त किया, जिन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना छत्तीसगढ़ के पर्यटकों की जान बचाई।

सीएम साय ने एक बयान में कहा, “सभी मुसलमान बुरे नहीं होते। कुछ लोगों की वजह से पूरा समुदाय बदनाम हो रहा है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि नजाकत जैसे लोग इंसानियत की मिसाल हैं, जो देश के लिए गर्व की बात है।

22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 निर्दोष लोगों की जान गई, जिनमें छत्तीसगढ़ के दिनेश मिरानिया भी शामिल थे। मुख्यमंत्री ने इस हमले को कायरतापूर्ण बताते हुए पाकिस्तान की निंदा की और कहा कि “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार कड़ी कार्रवाई करेगी।”

नजाकत अहमद शाह, जो पेशे से पर्यटक गाइड हैं, उस दिन मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले से आए 11 लोगों के एक समूह के साथ थे। आतंकियों के हमला करने पर शाह ने दो बच्चों को गोद में उठाकर सुरक्षित स्थान की ओर दौड़ लगाई, जिससे बाकी पर्यटकों को भी भागने का मौका मिला।

इन पर्यटकों में भाजपा युवा मोर्चा के नेता अरविंद एस अग्रवाल, कुलदीप स्थापक, शिवांश जैन और हैप्पी वधावन के परिवार शामिल थे।

शाह हर साल सर्दियों में छत्तीसगढ़ के चिरमिरी आकर तीन महीने तक शॉल बेचते हैं, जिससे उनका इन परिवारों से पुराना परिचय था।

सीएम साय ने कहा, “मैं नजाकत को उनके साहस और मानवता के लिए धन्यवाद देता हूं। उनका यह कार्य बताता है कि इंसानियत धर्म और मजहब से ऊपर है।”

बीरगांव में फुटकर व्यापारियों ने जताया आक्रोश, 6 मई को महापौर कार्यालय घेराव का ऐलान

बीरगांव, रायपुर: बीरगांव मेन रोड स्थित बिजली ऑफिस के सामने एवं नाले के पास वर्षों से कपड़ा व मछली का फुटकर व्यापार करने वाले स्थानीय व्यापारियों ने नगर निगम प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। व्यापारियों का आरोप है कि निगम प्रशासन व महापौर द्वारा उन्हें हटाकर उनकी रोजी-रोटी पर हमला किया जा रहा है।

स्थानीय पार्षद बेदराम साहू के नेतृत्व में व्यापारियों ने ज्ञापन सौंपते हुए स्पष्ट किया कि पिछले 8 वर्षों से वे फुटकर दुकानें लगाकर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। लेकिन बीते दो महीनों से नगर निगम प्रशासन व्यवस्था बनाने के नाम पर दुकानें हटवा रहा है और अब तक कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है।

व्यापारियों ने बताया कि महापौर गरीब एवं मेहनतकश लोगों को परेशान कर रही हैं और स्वार्थ सिद्धि के लिए उनकी दुकानों को हटवाकर उन्हें बेरोजगार बना रही हैं। उनका कहना है कि जब निगम क्षेत्र के अन्य हिस्सों में दुकानें लगने दी जा रही हैं, तो उनके साथ यह भेदभाव क्यों?

इस मुद्दे को लेकर व्यापारियों ने पांच दिन का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो 6 मई 2025 को वे अपने परिवारों व नगरवासियों के साथ महापौर कार्यालय का घेराव कर उग्र आंदोलन करेंगे।

इस आंदोलन में पार्षद बेदराम साहू के साथ छाया पार्षद डोमेश देवांगन, आनंद शर्मा, विक्की साहू, दानेश्वर वर्मा, अरविंद पाल, तकी, शुभम वर्मा और शुभम सिंह सहित कई स्थानीय नेता व व्यापारी शामिल होंगे।

रायपुर: एम्स के डॉक्टर ने की आत्महत्या, कमरे में लटका मिला शव, जांच में जुटी पुलिस

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) से एक दुखद घटना सामने आई है। यहां कार्यरत एक युवा डॉक्टर ने आत्महत्या कर ली है। मृतक की पहचान 26 वर्षीय डॉ. ए. रवि के रूप में हुई है, जो मूल रूप से आंध्र प्रदेश का निवासी था।

डॉ. रवि एम्स परिसर के पास बी ब्लॉक, हर्षित टॉवर के फ्लैट नंबर 221 में अकेले रहते थे। जानकारी के अनुसार, यह घटना शनिवार देर रात की है। उन्होंने कमरे का दरवाजा अंदर से बंद किया और पंखे से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।

घटना की सूचना मिलते ही अमानाका थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। कमरे की तलाशी के दौरान पुलिस को कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है।

पुलिस अब इस मामले की गहन जांच कर रही है और मृतक के सहकर्मियों व परिजनों से पूछताछ की जा रही है। आत्महत्या के पीछे के कारणों का फिलहाल खुलासा नहीं हो पाया है।

मामले में मर्ग कायम कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। एम्स रायपुर के इस हादसे से चिकित्सा जगत में शोक की लहर है।

मऊगंज में पारिवारिक विवाद ने लिया खूनी रूप: बड़े भाई पर जानलेवा हमले का आरोप

मऊगंज, मध्यप्रदेश – मऊगंज थाना क्षेत्र के अमोखर गांव से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां एक ही परिवार के चार सदस्यों पर अपने बड़े भाई पर जानलेवा हमला करने का आरोप लगा है।

आरोपियों में केसरी चौबे, नीलेश चौबे, विभा चौबे और सुषमा चौबे शामिल हैं। बताया जा रहा है कि इन चारों ने धारदार हथियार और लाठी-डंडों से बड़े भाई पर हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया। इस हमले के पीछे पारिवारिक रंजिश को कारण बताया जा रहा है।

पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि यह पहली घटना नहीं है। एक साल पहले भी इन्हीं लोगों ने हत्या का प्रयास किया था, जिसकी रिपोर्ट मऊगंज थाने में दर्ज है और मामला अभी अदालत में लंबित है।

पीड़ित परिवार का कहना है कि प्रशासन की अनदेखी और निष्क्रियता के कारण यह चौथी बार हमला हुआ है। बुजुर्ग पीड़ित गांव में अकेले रहते हैं, जिससे उनकी जान को हमेशा खतरा बना रहता है।

प्रशासन की निष्क्रियता से निराश होकर, अब पीड़ित परिवार ने मुख्यमंत्री और गृह मंत्री से न्याय की गुहार लगाई है। यह घटना प्रशासनिक लापरवाही और ग्रामीण इलाकों में कानून व्यवस्था की गंभीर स्थिति को उजागर करती है।

भिलाई में शासकीय जमीन पर कब्जे की कोशिश: कांग्रेस और भाजपा नेता आमने-सामने, निगम ने चलाया बुलडोजर

भिलाई के जुनवानी क्षेत्र में शासकीय जमीन पर कब्जे की कोशिश को लेकर कांग्रेस और भाजपा नेताओं के बीच विवाद की स्थिति बन गई। ईएसआईसी हॉस्पिटल के सामने स्थित खसरा नंबर 541 की नजूल भूमि पर कब्जा करने की कोशिश की गई थी। मामले ने तूल पकड़ा तो नगर निगम की टीम ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करते हुए बुलडोजर चला दिया।

शासकीय भूमि पर कब्जे की कोशिश

अतिरिक्त तहसीलदार दुर्ग के मुताबिक, यह जमीन शासकीय नजूल भूमि के अंतर्गत आती है। कांग्रेस नेता बृजेश शर्मा और भाजपा समर्थक अनिल अग्रवाल ने इस जमीन पर अपना-अपना दावा पेश किया। बृजेश शर्मा ने सड़क निर्माण के लिए मुरुम डालवाया, जबकि अनिल अग्रवाल ने जमीन की घेराबंदी के लिए प्रीकास्ट बाउंड्री खड़ी करवा दी।

पुलिस की मौजूदगी में प्रीकास्ट

कब्जे को लेकर जब दोनों पक्ष स्मृति नगर चौकी पहुंचे, तो वहां जमकर बहस और हंगामा हुआ। अपने-अपने दस्तावेज दिखाने के बावजूद कोई नतीजा नहीं निकल सका। ऐसे में पुलिस ने विवाद से बचने के लिए प्रीकास्ट करवा दिया।

निगम आयुक्त ने लिया संज्ञान, बुलडोजर चलवाया

नगर निगम आयुक्त राजीव पाण्डेय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कार्रवाई का निर्देश दिया। इसके बाद निगम की टीम ने मौके पर पहुंचकर प्रीकास्ट बाउंड्री पर बुलडोजर चलवाया। कार्रवाई में जोन-1 प्रभारी प्रशन्न तिवारी, राजस्व निरीक्षक मीनू सिंह और तोड़फोड़ दस्ता प्रमुख हरिओम गुप्ता समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

भाजपा समर्थकों की दबंगई

जानकारी के अनुसार, भाजपा समर्थक अनिल अग्रवाल की ओर से बड़ी संख्या में समर्थक—including शैलेन्द्र सिंह, कुबेर शर्मा, अंकुर शर्मा, रिंकू, गाबू, नंदू और सोनू—मौके पर डटे रहे। उन्होंने पुलिस प्रशासन पर दबाव बनाते हुए शासकीय भूमि पर कब्जा करने की कोशिश को अंजाम देने की कोशिश की।

प्रशासन का रुख सख्त

इस पूरे मामले में प्रशासन ने स्पष्ट किया कि शासकीय जमीन पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। किसी भी राजनीतिक दबाव में आए बिना उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

छत्तीसगढ़: बिजली संकट से उबरने के लिए उठाया गया ‘गैर-कानूनी’ कदम, बना ऊर्जा राज्य का पहला बड़ा फैसला

रायपुर। आज जिस छत्तीसगढ़ को ऊर्जा प्रदेश और ऊर्जा हब के रूप में जाना जाता है, वह राज्य गठन के समय गहरे बिजली संकट से जूझ रहा था। वर्ष 2000 में राज्य बनने के समय छत्तीसगढ़ में करीब 1400 मेगावॉट बिजली का उत्पादन होता था, लेकिन इसका अधिकांश हिस्सा तत्कालीन मध्यप्रदेश के पश्चिमी हिस्सों में चला जाता था। इससे आम उपभोक्ताओं को घरेलू, कृषि और औद्योगिक उपयोग के लिए बिजली की भारी किल्लत होती थी।

राज्य गठन के बाद बिजली की खींचतान

1 नवंबर 2000 को जब छत्तीसगढ़ बना, तो संसद द्वारा पारित अधिनियम में स्पष्ट प्रावधान था कि प्रारंभिक वर्षों में छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश बिजली का उपयोग एक निर्धारित अनुपात में करेंगे। यह अनुपात केंद्र सरकार द्वारा तय किया गया था, जो मध्यप्रदेश के हित में अधिक था। परिणामस्वरूप मंत्रालय, राजभवन और मुख्यमंत्री निवास तक को बिजली कटौती झेलनी पड़ती थी।

मुख्यमंत्री अजीत जोगी का सख्त निर्णय

राज्य गठन के तुरंत बाद, मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए नवंबर 2000 के दूसरे सप्ताह में मुख्य सचिव और वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक बुलाई। उन्होंने आदेश दिया कि छत्तीसगढ़ के लिए अलग विद्युत मंडल बनाया जाए और राज्य में उत्पादित बिजली का उपयोग यहीं किया जाए।

15 नवंबर 2000 को एकपक्षीय अधिसूचना जारी कर दी गई। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ राज्य में नया बिजली मंडल अस्तित्व में आया और मध्यप्रदेश को बिजली की आपूर्ति रोक दी गई। यह कदम कानूनी रूप से विवादास्पद था, लेकिन इसके चलते राज्य में बिजली कटौती बंद हो गई और छत्तीसगढ़ सरप्लस ऊर्जा राज्य बन गया।

मध्यप्रदेश में हड़कंप, केंद्र तक पहुंचा मामला

इस फैसले से मध्यप्रदेश में बिजली संकट गहरा गया, उद्योगों को परेशानी झेलनी पड़ी और राजनीतिक तनाव बढ़ गया। मामला कांग्रेस हाईकमान और केंद्र सरकार तक पहुंचा। बाद में समझौता हुआ कि छत्तीसगढ़ की अतिरिक्त बिजली पर मध्यप्रदेश को प्राथमिकता मिलेगी, लेकिन वह केवल तत्काल नकद भुगतान के आधार पर बिजली ले सकेगा।

ऊर्जा राज्य बनने की नींव

हालांकि यह कदम तकनीकी रूप से ‘गैर-कानूनी’ माना गया, लेकिन यही निर्णय छत्तीसगढ़ को आत्मनिर्भर ऊर्जा राज्य बनाने की दिशा में पहला और बेहद प्रभावशाली कदम साबित हुआ। आज छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख ऊर्जा उत्पादक राज्यों में से एक है।

रायपुर-विशाखापट्टनम तक 464 किमी लंबा एक्सप्रेसवे तैयार: डिप्टी CM साव ने किया निरीक्षण, कहा- गुणवत्ता में न हो कोई समझौता

रायपुर, छत्तीसगढ़ – रायपुर से विशाखापट्टनम तक बन रहा 464 किमी लंबा 6 लेन का एक्सप्रेसवे अब लगभग तैयार हो चुका है। शनिवार को छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना का निरीक्षण किया और निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर विशेष जोर देते हुए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।

डिप्टी सीएम अचानक अभनपुर पहुंचे और भारतमाला परियोजना के तहत निर्माणाधीन ओवरब्रिज एवं सड़क का मुआयना किया। इस दौरान उन्होंने मौके पर मौजूद भारत माला प्रोजेक्ट एवं लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों से सड़क की गुणवत्ता, निर्माण में उपयोग हो रही सामग्री और कार्य की प्रगति की जानकारी ली।

अधिकारियों से बोले – तय समय में करें कार्य पूर्ण

निरीक्षण के दौरान उप मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस क्रांतिकारी परियोजना को निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाए। उन्होंने कहा, “इस एक्सप्रेसवे से छत्तीसगढ़ की जनता को सीधा लाभ मिलेगा। यह न केवल विशाखापट्टनम की दूरी कम करेगा, बल्कि एक मजबूत आर्थिक गलियारा भी साबित होगा।”

464 किमी का हाईवे: छत्तीसगढ़, ओडिशा होते हुए आंध्र तक

यह एक्सप्रेसवे छत्तीसगढ़ के रायपुर, धमतरी, कांकेर, कोंडागांव होते हुए ओडिशा के कोरापुट और आंध्र प्रदेश के सब्बावरम तक जाएगा। यह हाईवे अंततः विशाखापट्टनम बंदरगाह से जुड़ेगा, जिससे व्यापार और परिवहन में बड़ी सुविधा होगी।

ग्राम भेलवाडीह में भी लिया जायजा

निरीक्षण के बाद डिप्टी सीएम ग्राम पंचायत भेलवाडीह पहुंचे, जहां उन्होंने सड़क निर्माण स्थल पर उपस्थित अधिकारियों से निर्माण सामग्री की गुणवत्ता और लेवलिंग के बारे में जानकारी प्राप्त की।

भारत सरकार की क्रांतिकारी योजना

डिप्टी सीएम ने कहा कि यह परियोजना भारत सरकार की क्रांतिकारी योजना है, जो देश के विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने कहा, “एक्सप्रेसवे के निर्माण से प्रदेश की आर्थिक और सामाजिक कनेक्टिविटी को नई दिशा मिलेगी।”

छत्तीसगढ़ में सुशासन तिहार पर गरमाई सियासत: डिप्टी CM अरुण साव बोले – “जनहित के काम से बघेल को पेट में दर्द होता है”

रायपुर।
छत्तीसगढ़ के डिप्टी मुख्यमंत्री अरुण साव ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जब प्रदेश में जनहित के कार्य होते हैं तो बघेल को पेट में दर्द होता है। कांग्रेस नेताओं को जनसेवा की पहल से तकलीफ होती है क्योंकि उनका जनहित से कोई सरोकार नहीं है। साव ने यह बयान राज्य सरकार के सुशासन तिहार कार्यक्रम पर कांग्रेस की ओर से उठाए गए सवालों के जवाब में दिया।

जनता के बीच जाएंगे मंत्री, मुख्यमंत्री

डिप्टी सीएम ने जानकारी दी कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार 5 मई से आम जनता के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुनकर समाधान करेगी। इस दौरान प्रदेश के सभी मंत्री, सांसद, विधायक और वरिष्ठ अधिकारी विभिन्न जिलों में समाधान शिविर लगाएंगे।

भूपेश बघेल का तंज

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सुशासन तिहार को लेकर सरकार पर हमला करते हुए कहा था कि जब राज्य में नक्सलवाद और पेयजल संकट जैसे गंभीर मुद्दे हैं, तब सरकार उत्सव मना रही है। वे लगातार सोशल मीडिया पर इस विषय में पोस्ट कर रहे हैं।


सुशासन तिहार-2025: 3 चरणों में अभियान

  1. पहला चरण (8-11 अप्रैल): जनता से आवेदन लिए गए।

  2. दूसरा चरण: एक महीने में आवेदनों का निराकरण।

  3. तीसरा चरण (5-31 मई): समाधान शिविर आयोजित होंगे।

अब तक मिले आवेदन

  • कुल प्राप्त आवेदन: 7 लाख+

  • पोर्टल: 1.65 लाख मांग, 19,987 शिकायतें

  • शिविर: 4.5 लाख मांग, 12,695 शिकायतें

  • शिकायत पेटी: 50,336 मांग, 1,690 शिकायतें


समाधान शिविरों की व्यवस्था

  • समय: 5 मई से 31 मई तक

  • स्थान: हर 8 से 15 पंचायतों में

  • नगरीय निकायों में भी आयोजित होंगे

  • SMS द्वारा आवेदकों को शिविर की सूचना

  • डिजिटल मॉनिटरिंग और रिकॉर्डिंग की सुविधा

शिविर में होंगे ये कार्य

  • योजनाओं की जानकारी देना

  • आवेदन पत्र उपलब्ध कराना

  • समस्याओं का डिजिटल समाधान

  • मुख्यमंत्री और मंत्रीगण लेंगे फीडबैक

  • स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित

राज्य सरकार का दावा है कि यह कार्यक्रम जनता से सीधे संवाद और समस्याओं के त्वरित समाधान का मॉडल बनेगा। वहीं विपक्ष इसे सरकार की “विकास विफलताओं से ध्यान भटकाने की कोशिश” बता रहा है।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट 10 मई से 8 जून तक रहेगा समर वेकेशन, वेकेशन जज करेंगे जरूरी मामलों की सुनवाई

CG News: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में 10 मई से 8 जून तक समर वेकेशन घोषित किया गया है। इस दौरान जरूरी मामलों की सुनवाई के लिए वेकेशन जज की व्यवस्था की गई है। रजिस्ट्रार जनरल ज्यूडिशियल की ओर से ग्रीष्मकालीन अवकाश की अधिसूचना जारी कर दी गई है।

अवकाश का शेड्यूल और सुनवाई

ग्रीष्मकालीन अवकाश 12 मई से शुरू होगा, लेकिन चूंकि 10 मई शनिवार है, इसलिए आखिरी कार्य दिवस 9 मई रहेगा। हाईकोर्ट 9 जून, सोमवार को पुनः खुलेगा और सामान्य कार्यों की शुरुआत होगी।

समर वेकेशन के दौरान जरूरी मामलों की सुनवाई

समर वेकेशन के दौरान हर मंगलवार और गुरुवार को वेकेशन जज आवश्यक मामलों की सुनवाई करेंगे। आपातकालीन स्थिति में, वेकेशन जज अपनी सुनवाई की अवधि को अन्य जज के साथ बदल सकते हैं, बशर्ते वे चीफ जस्टिस से स्वीकृति प्राप्त करें।

रजिस्ट्री विभाग समर वेकेशन के दौरान खुले रहेंगे, जहां नए मामलों की याचिकाएं दायर की जा सकेंगी। रजिस्ट्री कार्यालय सुबह 10:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक खुले रहेंगे, केवल शनिवार, रविवार और सार्वजनिक छुट्टियों को छोड़कर।

महत्वपूर्ण मामलों की लिस्टिंग

समर वेकेशन के दौरान सिविल, आपराधिक और रिट मामलों के साथ-साथ जमानत आवेदनों की तुरंत सुनवाई के लिए आवेदन किए जाएंगे। इसके अलावा, अन्य लंबित मामलों को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने के लिए अर्जेंट हियरिंग आवेदन की आवश्यकता होगी।

सुनवाई की तारीखें

समर वेकेशन के दौरान वेकेशन जज की व्यवस्था के तहत 13, 15, 20, 22, 27, 29 मई और 3, 5 जून को सुनवाई होगी। जो मामले वेकेशन जज के समक्ष नहीं पहुंच पाएंगे, उन्हें अगले वेकेशन जज के सामने सूचीबद्ध किया जाएगा।

इस प्रकार, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने समर वेकेशन के दौरान भी न्यायिक कार्यों को जारी रखने और जरूरी मामलों की सुनवाई सुनिश्चित करने की व्यवस्था की है।