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बिलासपुर में इंसाफ दिलाने वाले वकील ने ही किया दुष्कर्म, FIR दर्ज

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से एक शर्मनाक मामला सामने आया है, जिसमें एक रेप पीड़िता के साथ उसके ही वकील ने दुष्कर्म किया। वकील ने महिला को न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया था, लेकिन उसी भरोसे का गलत फायदा उठाते हुए उसे अपनी हवस का शिकार बना लिया।

न्याय दिलाने का भरोसा देकर ले गया रिसॉर्ट

कोंडागांव जिले की रहने वाली 21 वर्षीय युवती बिलासपुर हाईकोर्ट में एक केस की सुनवाई के लिए आई थी। यहां उसकी मुलाकात अधिवक्ता बसंत कैवर्त्य से हुई, जो कि चकरभाठा क्षेत्र के द्वारिकापुरम का निवासी है। वकील ने युवती से कहा कि वह उसे न्याय दिलाएगा और उसका केस लड़ेगा। इसी बीच उसने भरोसे में लेकर युवती को घुमाने के बहाने कोटा इलाके के एक रिसॉर्ट में ले गया, जहां उसने दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया।

धमकाया और कई बार बनाए शारीरिक संबंध

पीड़िता ने पुलिस को बताया कि जब उसने इसका विरोध किया, तो आरोपी वकील ने मारपीट की और जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद वकील ने कई बार उसके साथ जबरदस्ती संबंध बनाए। महिला का कहना है कि सरकंडा क्षेत्र में भी वकील ने उसके साथ दुष्कर्म किया।

सरकंडा थाने में दर्ज हुई शिकायत

युवती ने इस मामले की शिकायत सरकंडा थाने में दर्ज कराई है, जिसके बाद पुलिस ने आरोपी वकील बसंत कैवर्त्य के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह मामला न्याय व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है कि जब पीड़िता को इंसाफ दिलाने वाला ही दरिंदा बन जाए, तो भरोसा किस पर किया जाए।

धमतरी: दो माह के बाद किसानों को मिली राहत, चना विक्रय की 4.32 करोड़ की राशि जारी

छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर चना खरीदी की प्रक्रिया जारी है। किसानों को दो महीने के लंबे इंतजार के बाद उनकी फसल की आंशिक राशि का भुगतान मिला है। जिले में अब तक 18,391 क्विंटल चना 2,017 किसानों से 5,650 रुपए प्रति क्विंटल की दर से खरीदा गया है, जिसकी कुल कीमत लगभग 10.39 करोड़ रुपए है।

फिलहाल प्रशासन ने केवल 4.32 करोड़ रुपए की राशि किसानों को जारी की है, जो खरीदी गई कुल उपज का एक हिस्सा है। यह भुगतान 7,649 क्विंटल चने की बिक्री के एवज में किया गया है। बाकी की राशि कब तक किसानों को मिलेगी, इस पर अधिकारियों की ओर से स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाई है, हालांकि दावा किया जा रहा है कि अगले सप्ताह तक शेष राशि भी जारी कर दी जाएगी।

चना बेचने की प्रक्रिया 1 मार्च से शुरू हुई थी, और अब किसानों के पास 30 मई तक का ही समय है। इसके बाद समर्थन मूल्य पर चना खरीदी बंद कर दी जाएगी। जिले में चना खरीदी के लिए आठ समितियां बनाई गई हैं।

सबसे अधिक खरीदी तरसींवा समिति में हुई है, जहां 624 किसानों ने 7,006 क्विंटल चना बेचा, जिसकी कीमत 3.95 करोड़ रुपए बैठती है। वहीं कुरूद समिति में 307 किसानों ने 2,829 क्विंटल चना बेचा है, जिसकी कीमत 1.59 करोड़ रुपए आंकी गई है।

डिप्टी मार्केटिंग ऑफिसर सुनील सिंह राजपूत ने जानकारी दी कि अब तक जिन किसानों ने चना बेचा है, उन्हें धीरे-धीरे भुगतान किया जा रहा है। जल्द ही बाकी किसानों को भी भुगतान मिल जाएगा।

काफी लंबे समय से भुगतान की प्रतीक्षा कर रहे किसानों को इस आंशिक भुगतान से कुछ राहत जरूर मिली है।

CBSE 12वीं बोर्ड परीक्षा 2025: छत्तीसगढ़ के छात्रों का शानदार प्रदर्शन, 82.17% हुए पास

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने वर्ष 2025 की कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा के नतीजे घोषित कर दिए हैं। इस बार कुल 88.39 प्रतिशत विद्यार्थी सफल हुए हैं। दिल्ली क्षेत्र ने एक बार फिर श्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 95.18% पासिंग प्रतिशत दर्ज किया है।

रिजल्ट के अनुसार, इस वर्ष भी लड़कियों ने लड़कों से बेहतर प्रदर्शन किया है। लड़कियों का पास प्रतिशत 91.64% रहा, जबकि लड़कों का पासिंग प्रतिशत 85.70% दर्ज हुआ।

छत्तीसगढ़ राज्य की बात करें तो यहां के छात्रों ने भी बेहतरीन प्रदर्शन किया है। यहां कुल 82.17 प्रतिशत स्टूडेंट्स ने सफलता हासिल की है। राज्य में कुल 26,057 छात्र-छात्राओं ने परीक्षा पास की है, जिनमें से 12,713 छात्राएं हैं।

CBSE बोर्ड के छात्र अपना रिजल्ट आधिकारिक वेबसाइट्स – cbse.gov.in, cbse.nic.in, और cbseresults.nic.in – पर जाकर देख सकते हैं।

इस वर्ष का रिजल्ट एक बार फिर से यह दर्शाता है कि छात्राएं लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं और राज्य स्तर पर भी छत्तीसगढ़ ने अपनी उपस्थिति मजबूत की है।

फर्जी दस्तावेज से पूर्व पति की जमीन बेचने का मामला, महिला समेत 6 पर FIR दर्ज

छत्तीसगढ़ के डोमा गांव में फर्जी दस्तावेजों के जरिये जमीन हड़पने और उसे बेचने का मामला सामने आया है। एक महिला ने अपने पूर्व पति की संपत्ति को गलत तरीके से अपने नाम करवाकर उसे बेच दिया। इस मामले में पुलिस ने महिला समेत छह लोगों पर एफआईआर दर्ज की है।

पुलिस के अनुसार, मिन्हाजुद्दीन और उनके भाई शाहिद मुनीर के नाम पर डोमा गांव में 0.1120 हेक्टेयर जमीन है। शाहिद की शादी 1992 में सुलताना बेगम से हुई थी, लेकिन तीन साल बाद 1995 में उनका तलाक हो गया था। तलाक के बाद सुलताना ने दूसरी शादी कर ली, जबकि शाहिद धार्मिक यात्राओं में व्यस्त रहते थे और लंबे समय तक उनसे संपर्क नहीं हो सका।

इस बीच सुलताना ने अपने पूर्व पति शाहिद की सिविल डेथ घोषित करने के लिए अदालत में वाद दायर किया और खुद को उनकी संपत्ति की वारिस बताने की कोशिश की। हालांकि अदालत ने संपत्ति पर वारिस होने का दावा खारिज कर दिया।

इसके बाद सुलताना ने अपने बेटे फैजल शाहिद, खलील अहमद निजामी, अब्दुल जुनैद सिद्दीकी, जीशान सिद्दीकी, मोहम्मद फारूख और अन्य की मदद से फर्जी तरीके से अपने नाम को पटवारी रिकॉर्ड में दर्ज करा लिया और फिर जमीन को 15.12 लाख रुपये में मोती शेख नामक व्यक्ति को बेच दिया।

जब खरीदार ने नामांतरण के लिए विज्ञापन प्रकाशित कराया तो असली मालिकों को इसकी जानकारी हुई। मिन्हाजुद्दीन ने सेजबहार थाने में शिकायत दर्ज कराई। जांच के बाद पुलिस ने सुलताना बेगम सहित छह लोगों के खिलाफ भारतीय न्याया संहिता (BNS) की धारा 318(4), 338, 336(3), 340(2), 61(2), और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया है।

सूत्रों का यह भी कहना है कि पुलिस ने एक आरोपी को थाने बुलाकर पूछताछ की थी, लेकिन बाद में उसे छोड़ दिया गया। इसी तरह की धोखाधड़ी का एक और मामला कोटा इलाके में सामने आया था, जिस पर सरस्वती नगर पुलिस कार्रवाई कर रही है।

जेईई मेन्स: NIT में 1.10 लाख और IIIT में 31 हजार रैंक तक मिला एडमिशन, सीटों और कोर्स की प्राथमिकता से बदली तस्वीर

जेईई मेन्स के परिणाम घोषित होने के बाद छात्रों में कॉलेज और कोर्स को लेकर गंभीर मंथन शुरू हो गया है। देश के प्रमुख इंजीनियरिंग संस्थानों में शामिल NIT और IIIT के पिछले तीन वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो यह स्पष्ट होता है कि जहां NIT में 1 लाख 10 हजार तक की रैंक वाले छात्रों को एडमिशन मिला है, वहीं IIIT में 31 हजार रैंक तक वाले छात्र प्रवेश पा चुके हैं।

सीटों की बढ़ती संख्या बनी बड़ी वजह

विश्लेषण से यह भी सामने आया है कि NIT के कई डिपार्टमेंट्स की क्लोजिंग रैंक में वृद्धि देखी गई है। इसका एक बड़ा कारण इन संस्थानों में सीटों की संख्या में लगातार हो रही बढ़ोतरी है। दूसरी ओर, IIIT में पिछले साल क्लोजिंग रैंक में थोड़ी गिरावट दर्ज की गई।

बदलते कोर्स और करियर की प्राथमिकताएं

एक्सपर्ट्स के अनुसार, छात्र अब ट्रेडिशनल कोर्स के बजाय ऐसे एडवांस और इंडस्ट्री-डिमांड वाले कोर्स को प्राथमिकता दे रहे हैं जो भविष्य में करियर के लिए ज्यादा उपयोगी हैं। यही कारण है कि छात्र अब सिर्फ सरकारी नहीं बल्कि कुछ प्रमुख निजी संस्थानों में भी प्रवेश लेने के लिए उत्सुक हो रहे हैं।

क्लोजिंग रैंक में बदलाव के कारण

क्लोजिंग रैंक में बदलाव के पीछे कई कारण हैं—जैसे सीटों में बढ़ोतरी, मेट्रो शहरों में एडमिशन का ट्रेंड, कोर ब्रांच की तुलना में कंप्यूटर साइंस, IT, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे मॉडर्न कोर्स की मांग, और मनपसंद कॉलेज या ब्रांच न मिलने पर दूसरे विकल्पों को चुनना। साथ ही, NIRF रैंकिंग को ध्यान में रखते हुए भी छात्र कॉलेज का चयन कर रहे हैं।

राज्य स्तरीय संस्थानों की स्थिति

राज्य के NIT के 13 में से कई विभागों में क्लोजिंग रैंक में बढ़ोतरी हुई है, जबकि कुछ में गिरावट भी देखने को मिली है। होम स्टेट और अदर स्टेट कोटे में भी यह उतार-चढ़ाव स्पष्ट रूप से देखा गया है। वहीं, IIIT के तीनों विभागों की क्लोजिंग रैंक में लगातार गिरावट दर्ज की गई है।

यह बदलती प्रवृत्ति बताती है कि छात्र अब केवल रैंक नहीं, बल्कि कोर्स की उपयोगिता और कॉलेज की समग्र गुणवत्ता को देखकर निर्णय ले रहे हैं।

पुलिस की बर्बरता: कुल्फी विक्रेता और वीडियो बना रहे युवक की सरेआम पिटाई, SSP ने दिए जांच के आदेश

शहर में कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी निभा रही पुलिस अब आम नागरिकों पर ही सख्ती दिखाने लगी है। ताजा मामला सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र का है, जहां देर रात पुलिसकर्मियों ने एक कुल्फी बेचने वाले को सरेराह डंडों से पीटा और इसके बाद एक युवक को केवल वीडियो बनाने के शक में बुरी तरह मार दिया।

परिवार संग जन्मदिन मना रहा था युवक

सरकंडा निवासी राहुल सोनी अपने जन्मदिन के मौके पर अपनी पत्नी मीना और दो सालों के साथ तेलीपारा के एक होटल में डिनर करने गया था। डिनर के बाद वे रिवर व्यू रोड पहुंचे और एक ठेले से कुल्फी ली। तभी पुलिस की पेट्रोलिंग गाड़ी वहां आ पहुंची। पुलिसकर्मी उतरते ही ठेले वाले पर लाठियां बरसाने लगे।

सेल्फी लेने पर पिटाई का शिकार

राहुल का कहना है कि वह उस वक्त अपने परिवार के साथ सिर्फ सेल्फी ले रहा था। कैमरे का फ्लैश देखकर पुलिस को शक हुआ कि वह उनकी वीडियो बना रहा है। इसी शक में पुलिस ने उसे बेरहमी से पीट दिया।

SSP ने जताई सख्ती, मांगी शिकायत

एसएसपी रजनेश सिंह ने कहा कि यदि पुलिस द्वारा अनावश्यक बल प्रयोग किया गया है तो यह गंभीर मामला है। अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक शिकायत नहीं मिली है। यदि पीड़ित शिकायत करता है तो दोषी पुलिसकर्मियों पर उचित कार्रवाई की जाएगी।

बीजापुर में नक्सलियों का खूनी तांडव: कांग्रेस कार्यकर्ता की कुल्हाड़ी से हत्या, भाई की भी पहले हो चुकी है हत्या

छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में नक्सलियों ने एक बार फिर अपनी क्रूरता का परिचय दिया है। रविवार रात नक्सलियों ने कांग्रेस से जुड़े कार्यकर्ता नागा भंडारी की धारदार हथियार से निर्मम हत्या कर दी। यह वारदात उसूर थाना क्षेत्र के लिंगापुर गांव में हुई, जहां नागा एक सामाजिक कार्यक्रम में शामिल होने गए थे।

जानकारी के अनुसार, रात करीब 11:30 बजे कुछ अज्ञात नक्सलियों ने उन पर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया और मौके पर ही उनकी जान ले ली। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। पुलिस टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया।

बताया जा रहा है कि नागा भंडारी मारूडबाका सोसायटी के संचालक थे और क्षेत्र में एक सक्रिय राजनीतिक कार्यकर्ता के रूप में जाने जाते थे।

पहले बड़े भाई की भी हो चुकी है हत्या

यह पहली बार नहीं है जब भंडारी परिवार को नक्सलियों के गुस्से का शिकार होना पड़ा हो। 24 अक्टूबर 2024 को नागा भंडारी के बड़े भाई तिरुपति भंडारी की भी नक्सलियों ने दिनदहाड़े हत्या कर दी थी। लगातार हो रही इन घटनाओं से यह साफ है कि नक्सली राजनीतिक रूप से सक्रिय लोगों को टारगेट बना रहे हैं।

नक्सलवाद के खिलाफ जारी है अभियान

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा मार्च 2026 तक नक्सलवाद को खत्म करने के ऐलान के बाद से सुरक्षाबलों ने कार्रवाई तेज कर दी है। हाल ही में बीजापुर और तेलंगाना बॉर्डर के पास कर्रेगुट्टा की पहाड़ियों में सुरक्षाबलों ने एक बड़ी सफलता हासिल की थी, जहां मुठभेड़ में 26 नक्सलियों को ढेर कर दिया गया।

हालांकि, भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव को ध्यान में रखते हुए कुछ ऑपरेशन फिलहाल के लिए रोक दिए गए हैं और सुरक्षा बलों को वापस बुला लिया गया है।

चलती ट्रेन में कुछ भी हो जाए, अब शिकायत करना हुआ आसान – महिला यात्री को मिली त्वरित सहायता

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के लिए एक नई व्यवस्था शुरू की है, जिसके तहत अब चलती ट्रेन में ही किसी घटना की रिपोर्ट दर्ज करवाई जा सकती है। यदि किसी यात्री के साथ चोरी, उठाईगिरी या मोबाइल छिनने जैसी घटनाएं घटती हैं, तो अब उन्हें अपनी यात्रा रोकने की जरूरत नहीं है। टीटीई की मदद से रेलवे सुरक्षा बल (RPF) संबंधित यात्री के पास पहुँच कर शिकायत दर्ज करते हैं। इसके अलावा ‘रेल मदद’ ऐप के जरिए शिकायतों का त्वरित समाधान कंट्रोल रूम के माध्यम से किया जा रहा है।

ऐसी ही एक घटना 10 मई को दुर्ग रेलवे स्टेशन पर हुई, जब चर्लपल्ली-पटना एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 07256) से यात्रा कर रही महिला यात्री मंशा स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 3 पर स्थित स्टॉल बी-04 से पानी की बोतल खरीदने गई थीं। उन्होंने इसके लिए ऑनलाइन 60 रुपये का भुगतान किया, लेकिन ट्रेन में चढ़ने की जल्दी में बोतल लेना भूल गईं और ट्रेन रवाना हो गई।

यात्री ने ‘रेल मदद’ ऐप के जरिए अपनी शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत की सूचना दुर्ग स्टेशन स्थित कंट्रोल रूम को दी गई, जहाँ से ड्यूटी पर तैनात सीटीआई एके शर्मा को इसकी जानकारी दी गई। उन्होंने स्टॉल से संपर्क कर जांच की और पुष्टि के बाद महिला यात्री को ऑनलाइन माध्यम से 60 रुपये की राशि वापस दिलवाई। यह मामला ओवरचार्जिंग से संबंधित नहीं था, बल्कि एक असावधानीवश छूटी वस्तु का था।

यात्री को राशि वापस मिलने पर उन्होंने रेलवे प्रशासन का धन्यवाद दिया। यह घटना दर्शाती है कि रेलवे अब यात्रियों की समस्याओं को गंभीरता से लेकर त्वरित समाधान प्रदान कर रहा है।

बच्चों में बढ़ रहा टाइप-2 डायबिटीज का खतरा, गलत खानपान और जीवनशैली बनी वजह

बच्चों में टाइप-2 डायबिटीज के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जो स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय बन चुका है। डॉक्टरों का कहना है कि इसका मुख्य कारण बच्चों में बढ़ती मीठी चीजों की खपत और निष्क्रिय जीवनशैली है। चाय, कॉफी और रंग-बिरंगे सॉट ड्रिंक्स से बच्चों के शरीर में अत्यधिक मात्रा में चीनी पहुंच रही है, जिससे पेट के आसपास फैट जमा हो रहा है और मोटापा बढ़ रहा है। यही मोटापा आगे चलकर टाइप-2 डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारी का रूप ले रहा है।

आंबेडकर अस्पताल सहित शहर के अन्य निजी अस्पतालों के बाल रोग विभाग में डायबिटीज से पीड़ित बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जहां पहले केवल कुछ गिने-चुने मामले सामने आते थे, अब यह आंकड़ा सौ से ऊपर पहुंच गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, दिनभर में पांच से छह बार मीठे पेय पदार्थ पीने से बच्चों के शरीर में रोजाना 200 ग्राम से अधिक शक्कर पहुंच रही है। इससे सिर्फ मोटापा ही नहीं, बल्कि फैटी लिवर और डायबिटीज जैसी बीमारियां भी तेजी से पनप रही हैं। डॉक्टरों का कहना है कि डायबिटीज सीधे शक्कर खाने से नहीं होती, लेकिन जंक फूड और अत्यधिक मीठे पेय शरीर में फालतू कैलोरी जोड़ते हैं, जिससे वजन बढ़ता है और डायबिटीज का खतरा भी बढ़ जाता है।

डायबिटीज से पीड़ित बच्चों की उम्र 12-13 साल तक की है, और कई बार इससे छोटे बच्चे भी इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। युवाओं में भी इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। आंबेडकर अस्पताल में हालांकि शुगर क्लीनिक नहीं है, लेकिन इंडोक्राइनोलॉजिस्ट अब विशेष रूप से बच्चों का इलाज कर रहे हैं।

राजधानी में हर गली-मोहल्ले में आसानी से मिलने वाले सॉट ड्रिंक और मीठे खाद्य पदार्थ बच्चों की सेहत को नुकसान पहुंचा रहे हैं। बाल रोग विशेषज्ञों की सलाह है कि बच्चों को बचपन से ही मीठे से दूरी सिखाई जाए और माता-पिता को भी खुद एक आदर्श उदाहरण बनना चाहिए।

डॉ. आकाश लालवानी के अनुसार, एक व्यक्ति को प्रतिदिन अधिकतम 40 ग्राम चीनी का सेवन करना चाहिए, लेकिन आज के बच्चे इससे पांच गुना ज्यादा शक्कर ले रहे हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है।

यात्रियों के लिए राहतभरी खबर: अब बसों की जानकारी मिलेगी घर बैठे, बनेगा हाईटेक कमांड सेंटर

राज्य में बस यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए एक बड़ी सुविधा जल्द शुरू होने जा रही है। पंडरी स्थित सिटी आरटीओ कार्यालय परिसर में अत्याधुनिक सेंट्रल कमांड सेंटर की स्थापना की जाएगी, जिसकी लागत करीब 1.50 करोड़ रुपये होगी। राज्य सरकार से मंजूरी और बजट जारी होने के बाद परिवहन विभाग इस प्रोजेक्ट की तैयारियों में जुट गया है।

इस हाईटेक केंद्र के शुरू होने के बाद यात्रियों को बसों की रूट, टाइमिंग, और लाइव लोकेशन जैसी अहम जानकारी मोबाइल या अन्य माध्यमों से घर बैठे मिल सकेगी। सभी बसों में अनिवार्य रूप से GPS सिस्टम लगाया जाएगा, जिससे उनकी हर गतिविधि पर नजर रखी जा सकेगी। साथ ही, बसों में लगे पैनिक बटन से आपातकालीन स्थिति में तुरंत सहायता उपलब्ध कराई जा सकेगी।

यह कदम यात्रियों की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद उठाया गया है। अक्सर बस चालकों और परिचालकों द्वारा यात्रियों के साथ दुर्व्यवहार, अतिरिक्त किराया वसूली, और ओवरलोडिंग की घटनाएं सामने आती रही हैं। इसके अलावा, कई चालक तय रूट को छोड़कर अन्य मार्गों पर बस चलाते थे, जिनकी निगरानी में मुश्किल आ रही थी।

अब तक इन समस्याओं का समाधान डॉयल 112 के जरिए किया जा रहा था, लेकिन भारी संख्या में सूचनाएं आने के कारण हर बस की सटीक निगरानी संभव नहीं हो पा रही थी। इसी को ध्यान में रखते हुए, राज्य सरकार को खुद का नियंत्रण केंद्र बनाने का प्रस्ताव भेजा गया था, जिसे अब स्वीकृति मिल गई है।

यह नया सिस्टम न सिर्फ यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा बढ़ाएगा, बल्कि परिवहन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और अनुशासित बनाएगा।