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छत्तीसगढ़ बोर्ड 12वीं में 96% अंक लाकर कृति यादव ने पाया नवां स्थान, बनी प्रदेश की गौरव

रायपुर – छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (CGBSE) की 12वीं की परीक्षा में कृति यादव ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 96.00% अंक हासिल किए हैं। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने पूरे प्रदेश में नौवां स्थान प्राप्त कर अपने परिवार और जिले का नाम रोशन किया है।

कृति ने बताया कि उनका लक्ष्य सिविल सेवा में अधिकारी बनना है और इसके लिए वे छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (PSC) की तैयारी करेंगी। उनका मानना है कि एक अधिकारी के रूप में वे समाज की सेवा कर सकती हैं और राज्य का गौरव बढ़ा सकती हैं।

अपनी सफलता के बारे में बात करते हुए कृति ने कहा, “मैंने पढ़ाई को हमेशा एक जिम्मेदारी की तरह लिया। रोज़ाना तय समय पर पढ़ाई करती थी और कभी भी तनाव में नहीं आई। मेरे माता-पिता और शिक्षकों का सहयोग मेरे लिए प्रेरणा रहा।”

अन्य विद्यार्थियों को सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि निरंतरता और स्मार्ट स्टडी सफलता की कुंजी है। आत्मविश्वास बनाए रखना सबसे ज़रूरी है।

कृति की इस सफलता पर स्कूल, परिवार और समाज के लोगों ने उन्हें बधाई दी है। सभी ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।

12वीं बोर्ड परीक्षा में टॉप-10 में शामिल हुई कृति यादव, बिरगांव पार्षदों ने उरला थाने में सम्मानित कर दी बधाई

रायपुर/बिरगांव छत्तीसगढ़ बोर्ड 12वीं कक्षा के परीक्षा परिणाम में कृति यादव ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 96.00 प्रतिशत अंक प्राप्त कर प्रदेश की मेरिट लिस्ट में 9वीं रैंक हासिल की। उनकी इस उपलब्धि पर पूरे क्षेत्र में गर्व और खुशी का माहौल है।

कृति यादव को बिरगांव नगर निगम के पार्षद पुत्र राजू सिन्हा, पार्षद खेमलाल साहू एवं पार्षद दिकेंद्र सिन्हा ने बधाई दी। इस अवसर पर उरला थाना में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित कर कृति को सम्मानित किया गया। उरला थाना प्रभारी बी.एल. चंद्राकर ने कृति को प्रशस्ति पत्र और उपहार भेंट कर उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

सभी जनप्रतिनिधियों ने कृति को आशीर्वाद देते हुए कहा कि वह आगे भी इसी तरह मेहनत करती रहे और अपने माता-पिता, क्षेत्र तथा प्रदेश का नाम रोशन करती रहे। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की उपलब्धियां बेटियों के आत्मविश्वास को बढ़ाती हैं और समाज को नई दिशा देती हैं।

कृति की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि लगन, अनुशासन और निरंतर प्रयास से हर मंज़िल पाई जा सकती है। क्षेत्रवासियों ने भी कृति को ढेर सारी शुभकामनाएं और आशीर्वाद दिए।

छत्तीसगढ़ में जल्द दस्तक देगा मानसून, इस बार समय से पहले होगी बारिश

छत्तीसगढ़ में इस बार मानसून समय से पहले पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है। मौसम विभाग के मुताबिक, केरल में मानसून पांच दिन पहले यानी 31 मई तक दस्तक दे सकता है, जिससे प्रदेश में भी 5 जून तक झमाझम बारिश की शुरुआत होने की संभावना है। सामान्यतः छत्तीसगढ़ में मानसून 10 जून को आता है, लेकिन बीते 20 वर्षों में केवल तीन बार ही यह समय पर पहुंचा है।

पिछले साल मानसून 7 जून को प्रदेश में आया था, लेकिन इसकी शुरुआत सुकमा जिले में हुई और रायपुर में एक सप्ताह बाद बारिश हुई थी। इससे पहले 2023 में 21 जून, 2022 में 18 जून, और 2021 में 11 जून को मानसून पहुंचा था।

मौसम विभाग 1 जून से 30 सितंबर तक होने वाली बारिश को मानसूनी श्रेणी में गिनता है, जबकि इससे पहले की बारिश को प्री-मानसून और इसके बाद की बारिश को पोस्ट-मानसून माना जाता है।

बीते साल बारिश ने तोड़ा 20 साल का रिकॉर्ड

2024 में छत्तीसगढ़ में कुल 1231.7 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो पिछले 20 सालों में सबसे अधिक है। बीजापुर जिले में सर्वाधिक 2388.9 मिमी वर्षा हुई, जो सामान्य से 75% अधिक है। केवल पांच जिलों – बेमेतरा, दुर्ग, जशपुर, सारंगढ़-बिलाईगढ़ और सरगुजा में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई, जबकि बाकी 28 जिलों में औसत से अधिक वर्षा हुई।

इस साल भी भारतीय मौसम विभाग ने सामान्य से अधिक बारिश की संभावना जताई है, जिससे किसानों और जल स्रोतों के लिए अच्छी खबर मानी जा रही है।

पिछले 20 वर्षों में मानसून की स्थिति और वर्षा का आंकड़ा:

| वर्ष | मानसून आगमन | कुल बारिश (मिमी) |

|——|—————-|——————-|

| 2024 | 07 जून | 1231.7 |

| 2023 | 21 जून | 1050.3 |

| 2022 | 18 जून | 1071.5 |

| 2021 | 11 जून | 1107.7 |

| 2020 | 12 जून | 1101.0 |

| 2019 | 22 जून | 1095.0 |

| 2018 | 26 जून | 1005.0 |

| 2017 | 21 जून | 842.9 |

| 2016 | 17 जून | 1112.1 |

| 2015 | 14 जून | 959.6 |

| 2014 | 19 जून | 1129.9 |

| 2013 | 09 जून | 1229.0 |

| 2012 | 18 जून | 1230.7 |

| 2011 | 17 जून | 1212.2 |

| 2010 | 17 जून | 1060.6 |

| 2009 | 27 जून | 890.0 |

| 2008 | 12 जून | 892.8 |

| 2007 | 24 जून | 1014.5 |

| 2006 | 24 जून | 960.9 |

इस बार यदि पूर्वानुमान सटीक रहा, तो छत्तीसगढ़ में खेती-किसानी के लिए यह मानसून बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है।

रेत माफिया के खूनी खेल का पर्दाफाश, झारखंड पहुंचते ही कई गुना महंगी बिक रही छत्तीसगढ़ की रेत

छत्तीसगढ़ में रेत का अवैध कारोबार अब सिर्फ तस्करी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह जानलेवा रूप ले चुका है। राज्य की नदियों में अब पानी के साथ खून भी बह रहा है। हाल ही में आरक्षक शिवबचन सिंह की हत्या ने इस खतरनाक रैकेट की भयावह सच्चाई को उजागर कर दिया है।

छत्तीसगढ़ में ट्रैक्टर भर रेत की कीमत करीब 800 से 1000 रुपये होती है, लेकिन यही रेत जब झारखंड पहुंचती है तो उसकी कीमत 7000 से 8000 रुपये हो जाती है। उत्तर प्रदेश में इसकी दरें और भी ऊंची हैं। इसी भारी मुनाफे के लालच में माफिया इतने बेखौफ हो गए हैं कि अब इंसानी जान भी उनके लिए कोई मायने नहीं रखती।

कानून को ठेंगा, माफिया की मनमानी

झारखंड सीमा से लगे कन्हर नदी क्षेत्र में गढ़वा जिले के धुरकी और आसपास के गांवों में रेत तस्कर लंबे समय से सक्रिय हैं। इस अवैध कारोबार को स्थानीय नेताओं, अधिकारियों और कुछ जनप्रतिनिधियों का संरक्षण प्राप्त है। माफिया अब छत्तीसगढ़ की कानून व्यवस्था को खुली चुनौती दे रहे हैं।

रेत तस्करी बना अपराध का उद्योग

अविभाजित सरगुजा जिले की कन्हर और रेण नदियों से प्रतिदिन 1000 से 1500 ट्रैक्टर रेत निकाली जाती है, जिसे झारखंड, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश तक पहुंचाया जाता है। यह अब सिर्फ तस्करी नहीं, बल्कि संगठित अपराध का एक इंडस्ट्रियल मॉडल बन चुका है।

झारखंड में चार आरोपी गिरफ्तार

शिवबचन सिंह की हत्या के मामले में झारखंड पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है:

आरीफूल हक (खाला टोला, सेराजनगर, थाना धुरकी, जिला गढ़वा)

जमील अंसारी (खाला टोला, सेराजनगर, थाना धुरकी, जिला गढ़वा)

शकील अंसारी (खाला टोला, सेराजनगर, थाना धुरकी, जिला गढ़वा)

अकबर अंसारी (अरसली, थाना भवनाथपुर, जिला गढ़वा)

इनके पास से दो ट्रैक्टर भी जब्त किए गए हैं। यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि रेत का अवैध धंधा अब एक खूनी खेल बन चुका है, जिसे रोकने के लिए कड़े और प्रभावी कदम उठाना बेहद जरूरी है।

तलाक का आदेश रद्द, पति-पत्नी एक ही भवन में अलग-अलग रहेंगे: हाईकोर्ट का निर्णय

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक विवाहित जोड़े के बीच हुए आपसी समझौते को वैध ठहराते हुए फैमिली कोर्ट द्वारा दिया गया तलाक का आदेश निरस्त कर दिया है। यह फैसला दुर्ग जिले से जुड़े एक मामले में आया है, जिसमें पति और पत्नी एक ही घर की अलग-अलग मंजिलों पर रहने के लिए सहमत हुए हैं। पति ग्राउंड फ्लोर पर तो पत्नी फर्स्ट फ्लोर पर निवास करेंगी।

यह मामला तब शुरू हुआ जब पति ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13 के तहत तलाक की अर्जी दी थी, जिसे फैमिली कोर्ट ने 9 मई 2024 को मंजूर कर लिया। इस आदेश को चुनौती देते हुए पत्नी ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की सहमति से एक लिखित समझौता प्रस्तुत किया गया।

घर के खर्च और जिम्मेदारियां साझा

समझौते के अनुसार, दोनों अपने-अपने हिस्से की बिजली, पानी, संपत्ति कर और मरम्मत का खर्च खुद उठाएंगे। पति और पत्नी के बीच यह भी तय हुआ कि वे एक-दूसरे की निजी आय, बैंक खाता या खर्चों में हस्तक्षेप नहीं करेंगे। यदि कोई निर्माण या बदलाव करना हो, तो संबंधित पक्ष को 30 दिन पूर्व सूचना देना आवश्यक होगा, जब तक वह साझा क्षेत्र को प्रभावित न करे।

स्वतंत्र सामाजिक जीवन की छूट

दोनों को अपने सामाजिक जीवन और यात्रा की स्वतंत्रता होगी और कोई भी एक-दूसरे को पारिवारिक या सामाजिक आयोजनों में शामिल होने के लिए मजबूर नहीं करेगा। यदि पत्नी को चिकित्सा सुविधाओं के लिए किसी दस्तावेज की जरूरत हो, तो पति उसकी सहायता करेगा, जबकि खर्च वह स्वयं वहन करेंगी।

कोर्ट ने समझौते को बताया रिश्तों में संतुलन बनाने की कोशिश

जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की डिवीजन बेंच ने इस सहमति को विवाह विच्छेद के स्थान पर एक संतुलित और मर्यादित संबंध बनाए रखने की दिशा में सकारात्मक कदम बताया। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि भविष्य में कोई पक्ष समझौते का उल्लंघन करता है, तो पीड़ित पक्ष न्यायालय में पुनः याचिका दायर कर सकता है।

21 दिन चला अब तक का सबसे बड़ा ऑपरेशन, 31 इनामी नक्सली ढेर, 1.92 करोड़ का इनाम

तेलंगाना और छत्तीसगढ़ की सीमा पर स्थित कर्रेगुट्टा पहाड़ियों में बीते 21 दिनों तक सुरक्षा बलों द्वारा देश का अब तक का सबसे बड़ा नक्सल विरोधी अभियान चलाया गया। यह ऑपरेशन 11 मई को समाप्त हुआ। बुधवार को बीजापुर जिला मुख्यालय में सीआरपीएफ के महानिदेशक जीपी सिंह और छत्तीसगढ़ के डीजीपी अरुण देव गौतम ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऑपरेशन की जानकारी दी और उसकी वीडियो डॉक्यूमेंट्री भी साझा की।

450 आईईडी सबसे बड़ी चुनौती

अधिकारियों के अनुसार, इस ऑपरेशन की सबसे कठिन बाधा थी पहाड़ पर बिछाई गई 450 आईईडी। इनमें से केवल 15 ही फटीं, जबकि बाकी को सुरक्षा बलों ने सफलतापूर्वक निष्क्रिय कर दिया। इस दौरान 18 जवान घायल हुए। जवानों को आधुनिक मेटल डिटेक्टर उपलब्ध कराए गए जिससे आईईडी का पता लगाने में सहायता मिली।

31 नक्सली मारे गए, महिलाओं की संख्या अधिक

अभियान के दौरान 21 अलग-अलग स्थानों पर मुठभेड़ें हुईं, जिनमें 31 नक्सली मारे गए। इनमें 17 महिलाएं और 14 पुरुष शामिल थे। इन सभी पर कुल 1 करोड़ 92 लाख रुपये का इनाम घोषित था। ऑपरेशन में डीआरजी, एसटीएफ और सीआरपीएफ की कोबरा यूनिट ने मिलकर भाग लिया।

नक्सलियों की फैक्ट्री और बंकर ध्वस्त

सुरक्षाबलों ने पहाड़ पर नक्सलियों द्वारा बनाई गई चार हथियार फैक्ट्रियों, एक अस्पताल और 250 से अधिक बंकरों को ध्वस्त किया। नक्सलियों ने पहाड़ी पर दो वर्षों के लिए हथियारों का जखीरा जमा कर रखा था, जिनमें एसएलआर, इंसास, स्नाइपर रायफल, बीजीएल लॉन्चर समेत कई हथियार शामिल थे।

250 गुफाएं और 400 नक्सलियों की मौजूदगी

कर्रेगुट्टा पहाड़ पर 250 से ज्यादा गुफाएं मिली हैं, जो नक्सलियों की छिपने की सबसे सुरक्षित जगह मानी जाती थी। यहां हर समय 300 से 400 नक्सलियों की आवाजाही रहती थी।

पहली बार ऑपरेशन की डॉक्यूमेंट्री बनाई गई

इस ऑपरेशन की एक खास बात यह रही कि पहली बार सुरक्षा बलों ने पूरे अभियान की एक वीडियो डॉक्यूमेंट्री तैयार की, जिसे सार्वजनिक तौर पर दिखाया गया। इसमें नक्सलियों के नेटवर्क, ठिकानों और हथियार निर्माण की विस्तृत जानकारी दी गई है।

यह ऑपरेशन नक्सलवाद के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा और प्रभावशाली कदम माना जा रहा है, जिसने सुरक्षा बलों की रणनीतिक क्षमता और साहस का प्रमाण दिया है।

बुजुर्ग महिला ने जमीन पर कब्जे की शिकायत की, कलेक्टर ने दिए कार्रवाई के निर्देश

बेमेतरा जिला कार्यालय में जनदर्शन निरस्त होने के बावजूद बड़ी संख्या में फरियादी पहुंचे और अपनी समस्याओं को लेकर आवेदन प्रस्तुत किए। बेरला तहसील की ग्राम बहेरा निवासी बुजुर्ग महिला राजबती साहू ने कलेक्टर रणवीर शर्मा को अपनी जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायत की। महिला ने बताया कि उसके पति का देहांत हो चुका है और उसकी जमीन का सीमांकन भी हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद एक व्यक्ति ने उस पर कब्जा कर रखा है। सीमांकन के समय उक्त व्यक्ति ने जमीन खाली करने की बात कही थी, लेकिन अब वह मुकर गया है। महिला की आपबीती सुनकर कलेक्टर ने तत्काल बेरला तहसीलदार को फोन कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।

पेयजल संकट पर सरपंच ने जताई चिंता

ग्राम मुड़पारकला के सरपंच दीपक कुमार यदु ने कलेक्टर को आवेदन देकर जल जीवन मिशन के तहत निर्माणाधीन पानी टंकी और पाइपलाइन कार्य की धीमी गति और घटिया निर्माण की शिकायत की। उन्होंने बताया कि पिछले दो-तीन महीनों से कार्य अधूरा छोड़ दिया गया है, जिससे गांव में भीषण पेयजल संकट उत्पन्न हो गया है। ग्रामीणों ने गुणवत्तापूर्ण और शीघ्र कार्य पूर्ण करने की मांग की है।

प्रधानमंत्री सड़क योजना में अधूरा कार्य, लोगों को हो रही परेशानी

नवागढ़ ब्लॉक के ग्राम बदनारा के सरपंच ने बताया कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत स्वीकृत सीसी रोड निर्माण कार्य तो हो गया, लेकिन नाली निर्माण अधूरा छोड़ दिया गया। इस कारण बारिश में पानी घरों में घुस जाता है। ग्रामीणों की शिकायत के एक सप्ताह के भीतर ठेकेदार ने काम दोबारा शुरू किया।

जमीन पर निर्माण रोकने की गुहार

टेमरी गांव के नरेन्द्र शुक्ला ने भी कलेक्टर को आवेदन सौंपकर बताया कि उसकी जमीन पर किसी अनधिकृत व्यक्ति द्वारा प्लॉट काटने और निर्माण कार्य किया जा रहा है। उसने कलेक्टर से इस कार्य को रुकवाने की मांग की।

ड्रोन सर्वे में ग्रामीणों के नाम छूटे, सुधार की मांग

ग्राम झिरिया के ग्रामीणों ने संयुक्त रूप से कलेक्टर को आवेदन सौंपा कि ड्रोन से किए गए आबादी सर्वे में कई पात्र ग्रामीणों के नाम सूची से वंचित रह गए हैं। उन्होंने पटवारी द्वारा जारी सूची को गलत बताते हुए उसमें सुधार कर दोबारा सूची प्रकाशित करने की मांग की।

इस तरह विभिन्न क्षेत्रों से आए फरियादियों ने अपनी-अपनी समस्याएं कलेक्टर के समक्ष रखीं और उचित समाधान की उम्मीद जताई।

कैबिनेट की बैठक में लिए गए अहम फैसले: शिक्षा, कला, उद्योग और युवाओं के लिए बड़ी घोषणाएं

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में मंत्रालय महानदी भवन में हुई कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए, जो राज्य के सामाजिक, शैक्षणिक, औद्योगिक और सांस्कृतिक विकास को नई दिशा देंगे।

1. मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता अभियान की शुरुआत

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत राज्य के शासकीय स्कूलों में “मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता अभियान” चलाया जाएगा। इसका उद्देश्य स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता बढ़ाना, पालक-शिक्षक संवाद को मजबूत करना और छात्रों की शैक्षणिक उपलब्धियों में सुधार करना है।

अभियान के तहत स्कूलों का सामाजिक अंकेक्षण किया जाएगा और ग्रेडिंग की जाएगी। कमजोर स्कूलों की निगरानी के लिए अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को जोड़ा जाएगा। मॉडल स्कूलों का चयन कर, कमजोर स्कूलों के शिक्षकों को वहां भ्रमण कराया जाएगा। कक्षा शिक्षण की गुणवत्ता सुधारने और पालक-शिक्षक बैठकों को नियमित करने पर जोर दिया जाएगा।

2. कलाकारों और साहित्यकारों को राहत

राज्य सरकार ने आर्थिक तंगी से जूझ रहे कलाकारों और साहित्यकारों के लिए पेंशन राशि 2,000 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये मासिक कर दी है। यह योजना 1986 से लागू है, लेकिन 12 वर्षों से राशि में कोई वृद्धि नहीं हुई थी। वर्तमान में 162 लोगों को यह सहायता मिल रही है। इस बढ़ोतरी से सालाना राज्य पर लगभग 58 लाख रुपये का अतिरिक्त बोझ आएगा, लेकिन इससे इन वर्गों को आर्थिक मजबूती मिलेगी।

3. औद्योगिक भूमि नियमों में बदलाव

औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने “छत्तीसगढ़ औद्योगिक भूमि एवं भवन प्रबंधन नियम, 2015” में संशोधन को मंजूरी दी है। इससे भूमि आवंटन की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुगम होगी, जिससे निवेशकों को सुविधा मिलेगी।

4. नई औद्योगिक नीति 2024-30 को मंजूरी

कैबिनेट ने औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में कई संशोधनों को मंजूरी दी है। इसमें रोजगार, कृषि, खेल, शिक्षा, पर्यटन और टेक्सटाइल जैसे क्षेत्रों को विशेष प्रोत्साहन दिया गया है:

स्थानीय रोजगार को बढ़ावा: जिन कंपनियों में स्थानीय लोगों को नौकरी मिलेगी, उन्हें सरकार अनुदान देगी।

आधुनिक खेती को बढ़ावा: हाइड्रोपोनिक और एयरोपोनिक तकनीकों को प्रोत्साहन मिलेगा।

युवाओं के लिए ट्रेनिंग: खेल अकादमियों और निजी प्रशिक्षण केंद्रों को प्रोत्साहित किया जाएगा।

उच्च शिक्षा को बढ़ावा: गुणवत्तापूर्ण विश्वविद्यालयों की स्थापना को समर्थन मिलेगा।

पर्यटन विकास: बस्तर और सरगुजा में होटल-रिसॉर्ट निर्माण के लिए निवेश की न्यूनतम सीमा घटाई गई है।

टेक्सटाइल सेक्टर: कपड़ा उद्योग को 200% तक प्रोत्साहन मिलेगा।

लॉजिस्टिक नीति: पूरे राज्य में माल परिवहन को आसान बनाने के लिए नई लॉजिस्टिक नीति लाई जाएगी।

दिव्यांगजनों के लिए विशेष लाभ: योजनाओं के अधिक लाभ देने के लिए दिव्यांगजन की परिभाषा का विस्तार किया गया है।

नए क्षेत्रों को थ्रस्ट सेक्टर में शामिल किया गया: मिनी मॉल और सीबीएसई स्कूलों को भी विशेष प्रोत्साहन दिया जाएगा।

इन निर्णयों से छत्तीसगढ़ में शिक्षा, उद्योग, संस्कृति और रोजगार के नए अवसर खुलेंगे और राज्य का समग्र विकास सुनिश्चित होगा।

छत्तीसगढ़ में 50 टीआई को जल्द मिलेगा डीएसपी पद पर प्रमोशन, डीपीसी की बैठक 14 मई को

छत्तीसगढ़ पुलिस के 50 निरीक्षकों (टीआई) को जल्द ही उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) के पद पर पदोन्नति दी जाएगी। इस प्रक्रिया को अंतिम रूप देने के लिए 14 मई को छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (पीएससी) कार्यालय में विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में पीएससी के अध्यक्ष, गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव (एसीएस) और राज्य पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) हिस्सा लेंगे।

बैठक के दौरान पात्र अधिकारियों की सूची तैयार की जाएगी, जिसे गृह विभाग के माध्यम से मुख्यमंत्री के पास अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा। मुख्यमंत्री की स्वीकृति मिलने के बाद एक सप्ताह के भीतर पदोन्नति सूची जारी की जाएगी।

गौरतलब है कि बीते कई वर्षों से टीआई स्तर के अधिकारियों का प्रमोशन रुका हुआ था। पिछली सरकार के समय भी प्रमोशन की प्रक्रिया शुरू हुई थी, लेकिन डीएसपी के सीमित पदों और पात्र टीआई की अधिक संख्या के कारण प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।

वन टाइम प्रमोशन की विशेष स्वीकृति

इस बार 25 स्वीकृत पदों के विरुद्ध 50 अधिकारियों को पदोन्नति दी जाएगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर गृह विभाग ने इन पदों को “वन टाइम प्रमोशन” के आधार पर स्वीकृति देने के लिए वित्त विभाग को प्रस्ताव भेजा था, जिसे मंजूरी मिल गई है। इसका मतलब है कि ये पद केवल एक बार के लिए स्वीकृत किए गए हैं और जैसे ही संबंधित अधिकारी सेवानिवृत्त होंगे, पद स्वतः समाप्त हो जाएंगे।

यह निर्णय लंबे समय से प्रमोशन की प्रतीक्षा कर रहे पुलिस अधिकारियों के लिए एक बड़ा राहत भरा कदम माना जा रहा है।

पटवारी की नौकरी दिलाने के नाम पर 3 लाख की ठगी, महिला के खिलाफ मामला दर्ज

डोंगरगांव थाना क्षेत्र में एक महिला द्वारा पटवारी की नौकरी दिलाने के नाम पर युवक से 3 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। आरोपी महिला ने न तो नौकरी दिलाई और न ही पैसे लौटाए। पीड़ित युवक की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी महिला के खिलाफ धोखाधड़ी की धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम पहलवान चारभाठा निवासी भानूप्रसाद साहू ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। भानूप्रसाद ने बताया कि वर्ष 2022 में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा पटवारी पद की भर्ती निकाली गई थी, जिसमें उसने आवेदन किया था। इस दौरान उसके मित्र अरुण कुमार पन्द्रो ने बताया कि वह एक महिला को जानता है जो सरकारी नौकरी लगवा सकती है।

अरुण भानूप्रसाद को उस महिला के पास लेकर गया, जिसने खुद को अनिता वर्मा पति संतोष वर्मा, निवासी सरकारी मुद्रणालय चिखली बताया और मेडिकल कॉलेज पेंड्री, राजनांदगांव के एकाउंट विभाग में पदस्थ होना बताया। अनिता वर्मा ने पटवारी की नौकरी दिलाने के बदले 3 लाख रुपये की मांग की।

इसके बाद भानूप्रसाद, अरुण, परमानंद नेताम और उसके पिता राजकुमार के साथ अनिता के घर चिखली गया और वहां 2 लाख 40 हजार रुपये नकद दिए। शेष 60 हजार रुपये अनिता के बैंक खाते में तीन बार में ऑनलाइन ट्रांसफर किए गए।

हालांकि, काफी समय बीतने के बावजूद न तो भानूप्रसाद को नौकरी मिली और न ही रकम वापस की गई। अंततः उसने डोंगरगांव थाने में शिकायत की, जिसके आधार पर पुलिस ने अनिता वर्मा के खिलाफ IPC की धारा 420 के तहत केस दर्ज कर लिया है और मामले की जांच जारी है।