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छत्तीसगढ़: सरायपाली में भीषण सड़क हादसा, तीन युवकों की मौत, एक गंभीर घायल

छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के सरायपाली क्षेत्र में शनिवार दोपहर एक भीषण सड़क दुर्घटना हुई, जिसमें तीन युवकों की जान चली गई और एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। यह हादसा उस वक्त हुआ जब बेलमुंडी गांव के चार युवक एक ही मोटरसाइकिल पर सवार होकर सरायपाली की ओर जा रहे थे। तेज रफ्तार बाइक अनियंत्रित होकर मोड़ पर विद्युत पोल से जा टकराई।

हादसे में बाइक चला रहे किशन भोई (उम्र 19 वर्ष) की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि उसका सिर दो हिस्सों में बंट गया और शरीर का एक हिस्सा सड़क पर जा गिरा। उसका पैर बाइक में फंस गया था, जिसे कटर की मदद से निकालना पड़ा। पीछे बैठे अनीष बांक (19) को भी गंभीर सिर की चोट लगी, जिससे उसकी भी मौके पर ही मौत हो गई।

तीसरे युवक गोपाल कोडाकू (21) को सिर में गंभीर चोटें आईं, जिसे प्राथमिक उपचार के बाद रायपुर रेफर किया गया। वहीं, सबसे पीछे बैठा मनीष बांक (20) भी गंभीर रूप से घायल हो गया और रायपुर ले जाते समय रास्ते में उसकी भी मौत हो गई।

जानकारी के अनुसार चारों युवक शनिवार सुबह बलौदा के लिए निकले थे और लौटते समय सरायपाली की एक शराब भट्ठी से शराब पीकर लौट रहे थे। सभी नशे की हालत में थे, और बाइक पर चार लोगों के सवार होने व अत्यधिक गति के कारण वाहन पर नियंत्रण नहीं रह पाया, जिससे हादसा हुआ।

इस दर्दनाक दुर्घटना ने दो परिवारों से उनके इकलौते बेटे छीन लिए। किशन और मनीष दोनों ही अपने-अपने परिवार में अकेले बेटे थे। हादसे ने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया है, और पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

युक्तियुक्तकरण आदेश से शिक्षकों में मचा हड़कंप, नौकरी पर फिर छाए अनिश्चितता के बादल

छत्तीसगढ़ में जिला शिक्षा अधिकारियों द्वारा जारी नए युक्तियुक्तकरण आदेश ने शिक्षकों और सहायक शिक्षकों के बीच चिंता की लहर दौड़ा दी है। अंबिकापुर के डीईओ द्वारा जारी एक पत्र में सहायक शिक्षकों और शिक्षकों की जानकारी वर्तमान युक्तियुक्तकरण सेटअप के आधार पर मांगी गई है, जबकि व्याख्याताओं की जानकारी 2008 के सेटअप के अनुसार देने को कहा गया है। इससे अलग-अलग पदों के लिए भिन्न मानदंड अपनाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।

छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय शर्मा ने इस आदेश को डीपीआई द्वारा जारी मार्गदर्शी निर्देशों के विरुद्ध बताया है। उनका कहना है कि जब राज्य स्तर पर एक समान निर्देश दिए गए हैं तो अंबिकापुर में अलग व्यवस्था क्यों लागू की जा रही है।

शिक्षकों का कहना है कि 2008 के सेटअप के आधार पर व्याख्याताओं के पदों में कटौती की आशंका है, जिससे हायर सेकेंडरी और हाईस्कूल में शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

इस मुद्दे को लेकर प्रदेश के 23 शिक्षक संगठनों ने एकजुटता दिखाई है और 28 मई को मंत्रालय का घेराव करने का ऐलान किया है। वहीं जब लोक शिक्षण संचालनालय के संचालक ऋतुराज रघुवंशी से इस विषय पर प्रतिक्रिया मांगी गई, तो कोई जवाब नहीं मिला।

शिक्षक संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया पारदर्शी और एकसमान होनी चाहिए, ताकि किसी वर्ग के साथ भेदभाव न हो और सभी को न्याय मिल सके।

PM Modi के सामने CM साय ने रखा आत्मनिर्भर बस्तर का खाका, 2047 तक 75 लाख करोड़ की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य

नई दिल्ली में शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की बैठक आयोजित हुई। इस बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राज्य की ओर से ‘आत्मनिर्भर बस्तर’ का विजन प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि बस्तर, जो कभी नक्सल हिंसा का केंद्र था, अब विकास, रोजगार और आत्मनिर्भरता का नया प्रतीक बन रहा है।

मुख्यमंत्री ने देश के लिए 2047 तक 75 लाख करोड़ रुपये की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य साझा किया। उन्होंने राज्य के विकास के लिए थ्री टी मॉडल — टेक्नोलॉजी, ट्रांसपेरेंसी और ट्रांसफॉर्मेशन — को अहम बताया। उन्होंने कहा कि शासन प्रणाली को तकनीक-आधारित और पारदर्शी बनाया जा रहा है, जिससे योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन हो सके।

साय ने बताया कि बस्तर अब संघर्ष नहीं बल्कि संभावनाओं की धरती बन रही है। जहां पहले हिंसा की गूंज थी, वहां अब मशीनें, तकनीकी उपकरण और स्टार्टअप्स की बात हो रही है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इस रणनीति से न केवल छत्तीसगढ़ विकसित राज्यों की कतार में शामिल होगा, बल्कि देश को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने ‘छत्तीसगढ़ अंजोर विजन डॉक्यूमेंट’ नाम से एक समग्र योजना तैयार की है, जिसमें 13 प्रमुख क्षेत्रों — शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, आईटी, पर्यटन, अधोसंरचना और कौशल विकास आदि — को प्राथमिकता दी गई है। इस विजन के तहत प्रति व्यक्ति आय में 10 गुना वृद्धि का अनुमान है।

बैठक के दौरान एक भावुक क्षण तब आया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लंच ब्रेक के समय मुख्यमंत्री साय का हाथ थामते हुए कहा, “छत्तीसगढ़ की बात अभी बाकी है।” इस दौरान आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन भी मौजूद थे और मुस्कुराते हुए इस पल के साक्षी बने। पीएम मोदी ने आदिवासी क्षेत्रों में हो रहे बदलाव और आत्मनिर्भर बस्तर की दिशा में हो रहे प्रयासों की प्रशंसा की।

लाइफ सेविंग दवाओं की गुणवत्ता पर सवाल, घटिया इंजेक्शन से मरीजों की जान खतरे में

छत्तीसगढ़ में सरकारी अस्पतालों को सप्लाई की जा रही जीवनरक्षक दवाओं की गुणवत्ता पर फिर सवाल खड़े हो गए हैं। हाल ही में ओपन हार्ट सर्जरी के बाद दिए जाने वाले प्रोटामिन सल्फेट इंजेक्शन को लेकर गंभीर मामला सामने आया है। जानकारी के मुताबिक, नासिक की वाइटल हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी द्वारा निर्मित यह इंजेक्शन तय समय पर असर नहीं कर रहा है, जिससे मरीजों की ब्लीडिंग नहीं रुक रही और जान का खतरा बढ़ गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस इंजेक्शन को देने के 1-2 मिनट में खून सामान्य हो जाना चाहिए, लेकिन खराब गुणवत्ता के कारण इसमें 20-25 मिनट तक लग रहे हैं। इससे मरीजों में अत्यधिक रक्तस्राव हो रहा है। डॉक्टर मजबूरी में बाहर से दवाएं मंगाकर मरीजों को दे रहे हैं, जिससे पता चलता है कि सीजीएमएससी द्वारा सप्लाई की गई दवा मानकों पर खरी नहीं उतर रही।

क्वालिटी कंट्रोल पर भी सवाल

उल्लेखनीय है कि दवाएं सप्लाई से पहले सीजीएमएससी द्वारा लैब टेस्ट में पास बताई जाती हैं, लेकिन अस्पताल पहुंचते-पहुंचते उनकी गुणवत्ता गिर जाती है। सवाल उठ रहा है कि जांच में पास होने के बावजूद दवाएं मरीजों पर असर क्यों नहीं कर रहीं?

केस स्टडी: नर्स को सीरप पीने के बाद चक्कर

एक अन्य मामले में आंबेडकर अस्पताल की नर्स ने खांसी के लिए सीजीएमएससी से सप्लाई सीरप का सेवन किया। कुछ ही देर में उन्हें चक्कर आ गया और वे बेहोश हो गईं। हालत बिगड़ने पर उन्हें भर्ती किया गया, जहां उनकी धड़कन 140 तक पहुंच गई थी, जो सामान्यतः 100 से नीचे होनी चाहिए।

कई दवाओं पर संदेह

केवल प्रोटामिन ही नहीं, बल्कि प्रेमाडॉल 50 मिग्रा, लिनिन जोनाड्रिल सीरप, और नॉर्मल व डेक्सट्रोज स्लाइन जैसी अन्य दवाओं को लेकर भी साइड इफेक्ट और रिएक्शन की शिकायतें सामने आई हैं।

कार्रवाई की शुरुआत

शिकायतों के बाद अस्पताल प्रबंधन ने सीजीएमएससी को पत्र लिखकर इन दवाओं की गुणवत्ता पर आपत्ति जताई है और सभी विभागों को निर्देश दिया गया है कि संदिग्ध दवाओं को सेंट्रल स्टोर में जमा करें, ताकि किसी और मरीज की जान जोखिम में न पड़े।

डॉ. संतोष सोनकर, आंबेडकर अस्पताल अधीक्षक के अनुसार:

> “शिकायतों के आधार पर इंजेक्शन और अन्य दवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठे हैं। जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि ये दवाएं मरीजों पर असर क्यों नहीं कर रहीं।”

यह मामला न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे मानकों से समझौता करके लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा है।

प्रदेश के सरकारी कार्यालयों में 5-दिवसीय कार्य प्रणाली हो सकती है समाप्त, शिकायतों के बाद सरकार विचार में

प्रदेश में सरकारी दफ्तरों में लागू पांच दिवसीय कार्य प्रणाली को लेकर अब सरकार पुनर्विचार कर रही है। कांग्रेस शासनकाल में शुरू की गई यह व्यवस्था अब समाप्त की जा सकती है। सूत्रों के अनुसार, शासन स्तर पर इस व्यवस्था को खत्म करने का निर्णय लगभग ले लिया गया है, हालांकि इसे अभी लागू नहीं किया गया है क्योंकि राज्य में फिलहाल सुशासन तिहार मनाया जा रहा है।

कर्मचारियों में नाराजगी की आशंका

सरकार को आशंका है कि अगर यह निर्णय तुरंत लागू किया गया, तो कर्मचारियों में असंतोष फैल सकता है। इससे विरोध प्रदर्शन, हड़ताल और दफ्तरों में कामकाज ठप होने की स्थिति बन सकती है। ऐसे में आम जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है, जिससे सरकार की छवि प्रभावित हो सकती है। इसी कारण फिलहाल इस निर्णय को टाल दिया गया है।

जनता और जनप्रतिनिधियों की लगातार शिकायतें

सरकार का यह फैसला जनता और जनप्रतिनिधियों की लगातार मिल रही शिकायतों के आधार पर लिया जा रहा है। लोगों का कहना है कि 5 दिन काम होने के कारण सरकारी सेवाएं बाधित हो रही हैं और आम जनता को समय पर कार्य नहीं मिल पा रहा है।

समय की अनदेखी कर रहे कर्मचारी

पांच दिवसीय कार्य प्रणाली के तहत कर्मचारियों को सुबह 10 बजे से शाम 5:30 बजे तक कार्यालय में रहना अनिवार्य है, लेकिन अधिकतर अधिकारी और कर्मचारी समय का पालन नहीं कर रहे हैं। कुछ ही लोग समय पर आते हैं, जबकि अधिकांश लोग देर से आते हैं और जल्दी चले जाते हैं, जिससे सरकारी कार्य प्रभावित हो रहा है।

इस सब को देखते हुए, सरकार जल्द ही 5-दिवसीय कार्य प्रणाली को समाप्त कर पुनः 6-दिवसीय कार्य प्रणाली लागू कर सकती है, ताकि प्रशासनिक कार्यों में गति लाई जा सके और जनता को बेहतर सेवाएं मिल सकें।

रेल यात्रियों के लिए जरूरी खबर: 1 से 8 जून तक ये 18 ट्रेनें रहेंगी रद्द, यात्रा से पहले जांचें लिस्ट

जून के पहले सप्ताह में ट्रेन से सफर करने वाले यात्रियों के लिए बड़ी जानकारी सामने आई है। झलावारा स्टेशन पर चल रहे रेल ट्रैक कार्य के चलते 1 से 8 जून 2025 के बीच रायपुर से कटनी रूट पर चलने वाली 18 ट्रेनों को रद्द किया गया है। कटनी ग्रेड सेपरेटर लाइन और सिंगरौली दिशा की टाई-लाइन की कनेक्टिविटी व कमीशनिंग के लिए नॉन-इंटरलॉकिंग कार्य किया जा रहा है। इस कारण हजारों यात्रियों की यात्रा योजनाएं प्रभावित होंगी और कई ट्रेनों के मार्ग भी बदले जाएंगे।

रद्द रहने वाली ट्रेनों की सूची

18236 बिलासपुर-भोपाल एक्सप्रेस: 1 से 7 जून तक रद्द

18235 भोपाल-बिलासपुर एक्सप्रेस: 3 से 9 जून तक रद्द

11265 जबलपुर-अंबिकापुर एक्सप्रेस: 2 से 7 जून तक रद्द

11266 अंबिकापुर-जबलपुर एक्सप्रेस: 3 से 8 जून तक रद्द

11751 रीवा-चिरमिरी एक्सप्रेस: 2, 4 और 6 जून को रद्द

11752 चिरमिरी-रीवा एक्सप्रेस: 3, 5 और 7 जून को रद्द

12535 लखनऊ-रायपुर एक्सप्रेस: 2 और 5 जून को रद्द

12536 रायपुर-लखनऊ एक्सप्रेस: 3 और 6 जून को रद्द

22867 दुर्ग-निजामुद्दीन एक्सप्रेस: 3 और 6 जून को रद्द

22868 निजामुद्दीन-दुर्ग एक्सप्रेस: 4 और 7 जून को रद्द

18213 दुर्ग-अजमेर एक्सप्रेस: 1 जून को रद्द

18214 अजमेर-दुर्ग एक्सप्रेस: 2 जून को रद्द

18205 दुर्ग-नवतनवा एक्सप्रेस: 5 जून को रद्द

18206 नवतनवा-दुर्ग एक्सप्रेस: 7 जून को रद्द

51755 चिरमिरी-अनूपपुर पैसेंजर: 3, 5 और 7 जून को रद्द

51756 अनूपपुर-चिरमिरी पैसेंजर: 3, 5 और 7 जून को रद्द

61601 कटनी-चिरमिरी पैसेंजर: 2 और 7 जून को रद्द

61602 चिरमिरी-कटनी पैसेंजर: 3 और 8 जून को रद्द

बदले मार्ग से चलेंगी ये ट्रेनें

15231 बरौनी-गोंदिया एक्सप्रेस: 2 से 6 जून तक यह ट्रेन बरौनी, कटनी, जबलपुर, नैनपुर, बालाघाट और गोंदिया होकर चलेगी।

15232 गोंदिया-बरौनी एक्सप्रेस: 2 से 6 जून तक यह ट्रेन गोंदिया, बालाघाट, नैनपुर, जबलपुर, कटनी और फिर बरौनी होकर चलेगी।

रेलवे यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे यात्रा से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति की जांच IRCTC या रेलवे के संबंधित पोर्टल से जरूर कर लें।

पेंशनर्स परेशान: आंबेडकर अस्पताल में दवा वितरण व्यवस्था चरमराई, 13 दिन बाद मिल रही दवा

आंबेडकर अस्पताल की अव्यवस्थित दवा वितरण प्रणाली से पेंशनर्स भारी परेशानी झेल रहे हैं। पर्ची जमा करने के 13 से 15 दिन बाद दवा मिल रही है, जिससे विशेष रूप से हाइपरटेंशन और डायबिटीज जैसी बीमारियों से पीड़ित पेंशनर्स की स्थिति और गंभीर हो रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, इन बीमारियों में नियमित दवा बेहद जरूरी होती है, ऐसे में इतनी देर से दवा मिलना मरीजों की सेहत से खिलवाड़ है।

पेंशनर्स ने बताया कि अस्पताल में दी जाने वाली सभी दवाएं जेनेरिक होती हैं, इसके बावजूद फार्मासिस्ट की मनमानी जारी है। उनका आरोप है कि जान-पहचान वालों को प्राथमिकता दी जाती है और उन्हें दो से तीन दिन में ही दवा दे दी जाती है, जबकि अन्य पेंशनर्स को लंबा इंतजार करना पड़ता है।

शिकायत करने पर गार्ड वरिष्ठ अधिकारियों से मिलने नहीं देते और मरीजों को टालने की कोशिश की जाती है। बुजुर्गों को अक्सर अस्पताल परिसर में बहस करते देखा जा सकता है।

सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, पर्ची जमा करने के 2 से 3 दिन बाद दवा मिलनी चाहिए, लेकिन अस्पताल में इस नियम की अनदेखी हो रही है। पेंशनर्स ने दवा वितरण प्रणाली में तत्काल सुधार की मांग की है, ताकि दूरदराज से आने वाले मरीजों को राहत मिल सके।

भारत में फिर से बढ़ने लगा कोरोना संक्रमण, सरकारें सतर्क, नई एडवाइजरी जारी

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देश में एक बार फिर कोविड-19 संक्रमण धीरे-धीरे बढ़ता दिखाई दे रहा है। दिल्ली, हरियाणा, गुजरात, केरल और कर्नाटक जैसे राज्यों में नए मामलों के सामने आने से केंद्र और राज्य सरकारें सतर्क हो गई हैं। लोगों से कोविड-उपयुक्त व्यवहार जैसे मास्क पहनना, हाथ धोना और भीड़ से बचाव करने की अपील की गई है।

दिल्ली में तैयारियां तेज, अस्पताल अलर्ट पर

दिल्ली सरकार ने सभी सरकारी और निजी अस्पतालों को हाई अलर्ट पर रहने का निर्देश दिया है। अस्पतालों में पर्याप्त संख्या में बेड, ऑक्सीजन, दवाएं, वैक्सीन और अन्य जरूरी संसाधन सुनिश्चित करने को कहा गया है। इसके अलावा, वेंटिलेटर और ऑक्सीजन कंसंट्रेटर को सक्रिय रखने, स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षण देने और पॉजिटिव सैंपल्स को जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं। स्वास्थ्य मंत्री पंकज कुमार सिंह के अनुसार, दिल्ली में इस समय 23 सक्रिय कोविड केस हैं।

हरियाणा में हल्के लक्षण, चार एक्टिव केस

हरियाणा में फिलहाल चार सक्रिय कोविड मरीज हैं—दो गुरुग्राम में और दो फरीदाबाद में। सभी मरीज होम आइसोलेशन में हैं और उनमें केवल हल्के लक्षण हैं। स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने बताया कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और चिंता की कोई बात नहीं है। सभी सिविल सर्जनों को सतर्क रहने और मेडिकल सुविधाएं तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं।

गुजरात, केरल और कर्नाटक में भी नए केस

गुजरात में हाल ही में 15 नए मामले दर्ज किए गए हैं। वहीं केरल में मई महीने में अब तक 182 संक्रमण के मामले सामने आए हैं। राज्य की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने कहा कि सभी केस पर बारीकी से निगरानी रखी जा रही है। कर्नाटक में 16 सक्रिय मामले हैं और बेंगलुरु में 9 महीने का एक बच्चा भी संक्रमित पाया गया है।

सरकार की अपील: सजग रहें, लेकिन घबराएं नहीं

केंद्र सरकार ने लोगों से घबराने की बजाय सतर्क रहने की अपील की है। फिलहाल संक्रमण के लक्षण सामान्य और हल्के हैं, लेकिन सावधानी जरूरी है। मास्क पहनना, हाथों को साफ रखना, भीड़भाड़ से बचना और किसी भी स्वास्थ्य लक्षण को नजरअंदाज न करने की सलाह दी गई है।

मुकेश देवांगन को मिली नई जिम्मेदारी, हिन्द सेना में बने युवा ब्रिगेड के राष्ट्रीय संगठन मंत्री

देश सेवा और सामाजिक कार्यों में उनके सक्रिय योगदान को ध्यान में रखते हुए हिन्द सेना समाजसेवी संगठन ने छत्तीसगढ़ के युवा नेता मुकेश देवांगन को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मंगेश वैद्य की अनुशंसा पर युवा ब्रिगेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष दक्ष वैद्य ने उन्हें युवा ब्रिगेड के राष्ट्रीय संगठन मंत्री पद पर पदोन्नत किया है।

इस अवसर पर दक्ष वैद्य ने मुकेश देवांगन को देशहित में सामाजिक जागरूकता और संगठन के विस्तार की दिशा में सतत कार्य करने के निर्देश दिए। नवनियुक्त संगठन मंत्री मुकेश देवांगन ने अपने मनोनयन पर आभार जताते हुए कहा कि हिन्द सेना की विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए वह पूर्ण समर्पण के साथ कार्य करेंगे। उन्होंने बताया कि आगामी माह में देशभर के प्रदेशों का दौरा कर संगठन को नई ऊर्जा और दिशा देने वाले प्रतिभाशाली नेतृत्वकर्ताओं को आगे लाने का कार्य किया जाएगा।

इस नियुक्ति पर संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने खुशी व्यक्त की है। बधाई देने वालों में डॉ. रामदयाल मीणा, बोया मैड्डुलेटी, चंद्रभान सिंह परिहार, योगेश वैद्य, संजीव मल्होत्रा, कुलदीप सिंह, लक्ष्मण सिंह, डॉ. गोपालकृष्णन, आशीष शर्मा, गुरदीप सिंह भाटिया, रत्नावली कौशल, धीरज सोनकुसरे, राजेश राठौर खलीफा, अनीता रेड्डी कोडंगल, मनीष ठाकुर, इंदरचंद अग्रवाल, प्रो. प्रीतम सिंह, राकेश शर्मा, बिहारी लाल जसावत, दुलीचंद शर्मा, लक्ष्मी नारायण बालू, डॉ. गुरनाम सिंह, धर्मपाल जांगड़ा सहित देश के विभिन्न राज्यों के प्रदेशाध्यक्ष, कार्यकारी अध्यक्ष, महिला व युवा ब्रिगेड, छात्र और मानवाधिकार सेल के प्रतिनिधियों सहित सैकड़ों पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने बधाई दी।

मुकेश देवांगन की यह नियुक्ति संगठन की युवा शक्ति को संगठित करने और देशभर में सामाजिक चेतना को फैलाने में मील का पत्थर साबित होगी।

अब सड़क दुर्घटना में तीन घायलों को मिलेगा 4.50 लाख रुपये तक कैशलेस इलाज

छत्तीसगढ़ में सड़क दुर्घटना पीड़ितों को राहत देने के लिए एक नई योजना लागू कर दी गई है। इसके तहत यदि किसी परिवार के तीन सदस्य एक ही दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होते हैं, तो प्रत्येक को अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की सुविधा दी जाएगी। यानी एक परिवार को कुल 4.5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मिलेगा। यह सुविधा 23 मई से लागू हो गई है और यह पूरे प्रदेश के आयुष्मान भारत योजना से जुड़े सरकारी और निजी अस्पतालों में उपलब्ध होगी।

प्रदेश में करीब 1,000 अस्पताल इस योजना के अंतर्गत पंजीकृत हैं। यह योजना केंद्र सरकार की “सड़क दुर्घटना कैशलेस उपचार योजना-2025” के तहत लागू की गई है। इसके अंतर्गत पीड़ित को दुर्घटना के 7 दिनों तक उपचार के लिए कोई भी अग्रिम राशि नहीं देनी होगी।

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने बताया कि यदि घायल व्यक्ति को नजदीकी आयुष्मान अस्पताल में ले जाया जाता है, और वहां इलाज की पूरी व्यवस्था नहीं है, तो अस्पताल उसे तुरंत किसी विशेषज्ञ अस्पताल में रेफर करेगा और पोर्टल पर इसका विवरण दर्ज करेगा, जिससे समय पर उचित इलाज मिल सके।

इस योजना की खास बात यह है कि इसमें इलाज के लिए किसी प्रकार की आय सीमा नहीं रखी गई है। गरीब हो या अमीर, सभी को कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी। बीमा पॉलिसी या एडवांस भुगतान की जरूरत भी नहीं होगी।

पूरी प्रक्रिया डिजिटल होगी। दुर्घटना का विवरण पुलिस की ई-डीएआर एप पर दर्ज होगा और अस्पताल इलाज से संबंधित क्लेम ऑनलाइन अपलोड करेगा। इसके बाद राज्य स्वास्थ्य एजेंसी या कलेक्टर स्तर पर जांच के बाद क्लेम मंजूर किया जाएगा और राशि सीधे अस्पताल के खाते में भेजी जाएगी।

यह योजना सड़क दुर्घटना पीड़ितों को समय पर बेहतर इलाज और आर्थिक सहायता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।