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क्रेडिट कार्ड के नाम पर कांस्टेबल से साइबर ठगी, 50 हजार से ज्यादा की चपत

राजभवन में पदस्थ सीएएफ के सिपाही साइबर अपराध का शिकार हो गए हैं। अज्ञात ठगों ने उन्हें क्रेडिट कार्ड देने के बहाने 50,428 रुपए की ठगी कर ली। पीड़ित की शिकायत पर सिविल लाइन थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

बैंक मैनेजर बनकर किया कॉल

मिली जानकारी के अनुसार सिपाही किशोर कुमार को एक शख्स ने फोन किया और खुद को एचडीएफसी बैंक का मैनेजर बताया। उस व्यक्ति ने सिपाही को उनके बैंक खाते से जुड़ी कुछ सही जानकारियाँ दीं और कहा कि उनके लिए एक विशेष क्रेडिट कार्ड ऑफर उपलब्ध है। सटीक जानकारी मिलने के बाद सिपाही ने भरोसा कर लिया और क्रेडिट कार्ड लेने के लिए सहमति दे दी।

ओटीपी लेकर उड़ाई रकम

कुछ दिनों बाद उनके पते पर क्रेडिट कार्ड पहुंचा। फिर उन्हें एक कॉल आया जिसमें कार्ड की लिमिट एक्टिवेट करने के लिए भेजे गए ओटीपी की जानकारी मांगी गई। भरोसे में आकर सिपाही ने ओटीपी साझा कर दिया। इसके बाद उनके कार्ड से दो दिन में कुल 50,428 रुपए निकाल लिए गए।

जांच जारी

अज्ञात आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है और साइबर अपराध शाखा इस घटना की विस्तृत जांच में जुट गई है। पुलिस लोगों से अपील कर रही है कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर ओटीपी या बैंक संबंधी जानकारी साझा न करें।

नई दिल्ली में नीति आयोग की बैठक में शामिल होंगे सीएम साय, पीएम मोदी करेंगे अध्यक्षता

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय शुक्रवार रात लगभग 10 बजे दो दिवसीय दौरे पर नई दिल्ली पहुंचेंगे। इस दौरान वे केंद्र सरकार और भाजपा की कई अहम बैठकों में हिस्सा लेंगे।

शनिवार सुबह 9 बजे वे प्रगति मैदान स्थित भारत मंडपम में आयोजित नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की बैठक में भाग लेंगे, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं करेंगे।

इस बैठक में देश के सभी राज्यों के मुख्यमंत्री और केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल शामिल होंगे। मुख्यमंत्री साय इस मंच से छत्तीसगढ़ की प्रमुख जरूरतों और चुनौतियों को साझा करेंगे।

वे राज्य में औद्योगिक विकास, कृषि क्षेत्र की मजबूती, महिला सशक्तिकरण, स्वास्थ्य सेवाओं में नवाचार और सुदूर आदिवासी अंचलों तक योजनाओं की पहुंच जैसे अहम मुद्दों पर अपने विचार रखेंगे।

मुख्यमंत्री ने शहीद जवान को दी अंतिम विदाई, बोले- मार्च 2026 तक खत्म करेंगे नक्सलवाद

नक्सल विरोधी अभियान के दौरान शहीद हुए सीआरपीएफ कोबरा बटालियन के कांस्टेबल सोलंकी मेहुल भाई नंदलाल को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने शहीद के पार्थिव शरीर को कांधा देकर उन्हें अंतिम विदाई दी और उनके बलिदान को नमन किया।

शुक्रवार को मुख्यमंत्री माना स्थित छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल की चौथी वाहिनी पहुंचे, जहां उन्होंने शहीद जवान के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित किए। इस मौके पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा भी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार मार्च 2026 तक नक्सलवाद का जड़ से खात्मा करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जवानों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा और सरकार शहीद के परिवार को हर संभव सहायता प्रदान करेगी। उन्होंने कांस्टेबल सोलंकी के शौर्य और देशभक्ति की सराहना करते हुए उन्हें राष्ट्र की सर्वोच्च परंपरा का प्रतीक बताया।

गढ़चिरौली में सुरक्षा बलों की बड़ी कामयाबी, चार नक्सली ढेर

महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में सुरक्षाबलों ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए चार नक्सलियों को मार गिराया है। यह मुठभेड़ शुक्रवार को छत्तीसगढ़ की सीमा से सटे एफओबी कवांडे क्षेत्र में हुई। ऑपरेशन में महाराष्ट्र पुलिस की स्पेशल यूनिट सी-60 के साथ सीआरपीएफ के जवान भी शामिल थे।

पुलिस को नक्सलियों की गतिविधियों की जानकारी पहले ही मिल गई थी। इसके बाद एडिशनल एसपी रमेश के नेतृत्व में करीब 300 कमांडो और सीआरपीएफ की एक टुकड़ी को गुरुवार दोपहर कवांडे और नेलगुंडा से रवाना किया गया। ऑपरेशन के दौरान लगातार बारिश हो रही थी, बावजूद इसके जवानों ने मोर्चा संभाले रखा।

शुक्रवार सुबह जब नदी किनारे सर्च ऑपरेशन चल रहा था, तभी घात लगाए नक्सलियों ने अचानक हमला कर दिया और भारी गोलीबारी शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में सुरक्षाबलों ने दो घंटे तक रुक-रुक कर फायरिंग की, जिसमें चार नक्सली मारे गए।

घटनास्थल की तलाशी में सुरक्षाबलों ने एक सेल्फ लोडिंग राइफल, दो .303 राइफल, वॉकी-टॉकी, कैंपिंग का सामान और नक्सली दस्तावेज बरामद किए हैं। अधिकारियों का कहना है कि बारिश से पहले नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अभियान तेज कर दिया गया है और नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।

कोई भूखा न सोए: 10 साल से जरूरतमंदों को भोजन करा रही हैं महिलाएं अंबिकापुर से एक प्रेरणादायक पहल

अंबिकापुर की समाजसेवी वंदना दत्ता ने 10 साल पहले एक नेक सोच के साथ एक पहल की शुरुआत की थी—”रात्रिकालीन भोजन सेवा”। उनका उद्देश्य था कि कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति रात में भूखा न सोए। उन्होंने इस सेवा की शुरुआत अपने घर पर बना भोजन लेकर कंपनी बाजार में जरूरतमंदों को खिलाकर की।

धीरे-धीरे उनके इस पुनीत कार्य से कई महिलाएं जुड़ती गईं और आज यह संख्या 20 तक पहुंच चुकी है। ये महिलाएं सप्ताह में तीन दिन—सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को—अपने-अपने घरों में भोजन तैयार कर कंपनी बाजार में पहुंचती हैं और लगभग 50 जरूरतमंद लोगों को प्रेमपूर्वक भोजन कराती हैं।

यह सेवा केवल सामान्य दिनों तक सीमित नहीं रही, बल्कि कोविड जैसी आपात स्थिति में भी निरंतर जारी रही। कुछ लोगों ने समय के साथ दूरी बना ली, लेकिन आज भी कई महिलाएं पूरे समर्पण भाव से इस सेवा में जुटी हैं।

Vandana Dutta 

वंदना दत्ता का कहना है कि यह प्रयास सिर्फ पेट भरने के लिए नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना और सामाजिक ज़िम्मेदारी का प्रतीक है। उनकी यह प्रेरणादायक पहल समाज को यह संदेश देती है कि अगर मन में इच्छा हो, तो बदलाव की शुरुआत किसी एक इंसान से भी की जा सकती है।

900 साल पुरानी विरासत उपेक्षा की शिकार, खुले संग्रहालय में पसरा है सन्नाटा

बालोद (छत्तीसगढ़): प्रदेश के पहले खुले संग्रहालय की हालत इन दिनों बेहद खराब है। 1992 में बालोद के बूढ़ातालाब क्षेत्र में स्थापित इस ऐतिहासिक स्थल की अनदेखी के चलते यहां असामाजिक तत्वों का अड्डा बन गया है। कभी जिन प्राचीन मूर्तियों को बड़े गर्व से प्रदर्शित किया गया था, आज वे झाड़ियों में छिपी हैं, टूट चुकी हैं या गायब हो गई हैं।

यह संग्रहालय मध्यप्रदेश शासनकाल के दौरान बालोद एसडीएम और नगर पालिका प्रशासक आशुतोष अवस्थी की पहल पर पुरातत्व विभाग के सहयोग से बनाया गया था। उस समय यहां 105 प्राचीन मूर्तियां रखी गई थीं, जिनमें से 5 की 1993 में चोरी हो चुकी है। इसके बावजूद आज तक यहां कोई सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई है।

स्थानीय प्रशासन और नगर पालिका इस संग्रहालय की हालत से लगभग अनजान हैं। इसकी बाउंड्रीवाल के पीछे का गेट टूट चुका है और आए दिन नशेड़ी वहां शराब पीते देखे जाते हैं। कुछ ग्रामीण अपने मवेशियों को अंदर घुसा देते हैं, जिससे मूर्तियों को नुकसान पहुंच रहा है।

संग्रहालय में रखी गई मूर्तियां 12वीं से 16वीं शताब्दी के बीच की हैं और इनका निर्माण बालोद के राजा बलदेव शाह द्वारा अपने वीर सैनिकों की स्मृति में कराया गया था। मूर्तियों में भगवान गणेश, चामुंडा देवी, भगवान बुद्ध के याचक स्वरूप और योद्धाओं की आकृतियां शामिल हैं।

इतिहासकार अरमान अश्क के अनुसार, ये मूर्तियां नर्राटोला गांव के तालाब किनारे पाई गई थीं और इनका ऐतिहासिक महत्व न सिर्फ छत्तीसगढ़ बल्कि अविभाजित मध्यप्रदेश में भी था।

अब जबकि मूर्तियां टूट रही हैं, चोरी हो रही हैं और झाड़ियों में छिप गई हैं, नगर पालिका के सीएमओ सौरभ शर्मा का कहना है कि वे इस विषय में जानकारी लेकर आवश्यक कार्रवाई करेंगे। हालांकि यह कब होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

इतिहास को सहेजने की जरूरत: इस संग्रहालय की दुर्दशा न केवल प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाती है, बल्कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर के प्रति उदासीनता भी उजागर करती है। यदि जल्द कार्रवाई नहीं की गई, तो यह विरासत पूरी तरह से नष्ट हो सकती है।

धमतरी जिले में मेडिकल कॉलेज खुलने की संभावना, युवाओं को मिलेगा रोजगार और शिक्षा का लाभ

धमतरी जिले के परेवाडीह गांव में मेडिकल कॉलेज की स्थापना की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। महापौर रामू रोहरा सहित जिले के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण किया। लगभग 50 एकड़ भूमि पर बनने वाले इस कॉलेज को लेकर प्रशासनिक टीम ने जमीन की बनावट और आवश्यक बुनियादी सुविधाओं का जायजा लिया।

स्थानीय सरपंच नारद राम साहू और ग्रामीणों ने इस पहल का उत्साहपूर्वक स्वागत किया और कॉलेज को लेकर उम्मीद जताई। सरपंच ने बताया कि कॉलेज खुलने से न केवल बच्चों को मेडिकल शिक्षा के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा, बल्कि गांव में रोजगार और व्यापार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

निरीक्षण के दौरान एसडीएम पीयूष तिवारी, निगम आयुक्त प्रिया गोयल, तहसीलदार सूरज बंछोर, सिविल सर्जन डॉ. अरुण टोंडर, पटवारी इंद्रजीत सहित कई अधिकारी मौजूद थे। ग्रामीणों ने अधिकारियों का गर्मजोशी से स्वागत किया।

यह मेडिकल कॉलेज न केवल क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था को मजबूती देगा, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं को भी बेहतर बनाएगा। स्थानीय लोगों के लिए यह एक नई आशा की किरण है, जो आर्थिक और सामाजिक विकास को गति देगा।

धमतरी जिले के हाईस्कूल लोहरसी में शिक्षकों की कार्यशैली पर उठे सवाल, ग्रामीणों ने की सख्त कार्रवाई की मांग

धमतरी ज़िले के ग्राम लोहरसी स्थित शासकीय हाईस्कूल में शिक्षा के गिरते स्तर को लेकर ग्रामीणों और छात्राओं ने गहरी नाराजगी जताई है। उन्होंने आरोप लगाया है कि स्कूल के शिक्षक और शिक्षिकाएं अपनी जिम्मेदारी निभाने में लापरवाह हैं, जिससे छात्रों की पढ़ाई पर बुरा असर पड़ रहा है।

गांव के लोगों ने सरपंच महेश्वरी गजेन्द्र के नेतृत्व में कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा और चेतावनी दी कि यदि जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो स्कूल में तालाबंदी की जाएगी।

ग्रामीणों के अनुसार स्कूल में कक्षा 9वीं से 12वीं तक की पढ़ाई होती है और कुल 75 विद्यार्थी नामांकित हैं। हाल ही में आयोजित 10वीं बोर्ड परीक्षा में 34 छात्र शामिल हुए, जिनमें से केवल 3 ही ग्रेस मार्क्स के जरिए पास हो सके। 19 छात्र गणित और अंग्रेजी में फेल हुए जबकि 7 को सप्लीमेंट्री मिली। इस तरह स्कूल का कुल परीक्षा परिणाम महज 23.52% रहा।

छात्राओं का भी आरोप है कि शिक्षक ठीक से पढ़ाते नहीं और कुछ शिक्षक निजी कोचिंग के लिए दबाव भी बनाते हैं। इससे न सिर्फ शिक्षा की गुणवत्ता घट रही है, बल्कि अभिभावकों में भी आक्रोश है।

पूर्व में शाला विकास समिति और ग्रामीणों ने इस विषय में स्कूल प्रबंधन और जिला शिक्षा अधिकारी को कई बार शिकायत दी, लेकिन किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया।

अब छात्राएं और पालक समिति के सदस्य अपर कलेक्टर से मिले और उन्होंने निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि व्यवस्था में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

रायगढ़ मेडिकल कॉलेज में भर्ती युवक की संदिग्ध हालात में मौत, शव नाले में मिला

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती एक युवक की लाश अस्पताल परिसर के पास बने नाले में मिली है। मृतक की पहचान सक्ति जिले के ग्राम निमतरा निवासी बिहारी लाल जांगड़े के रूप में हुई है, जो हाल ही में एक सड़क दुर्घटना में घायल हो गया था।

घटना के अनुसार, बिहारी लाल को पहले सक्ति में इलाज मिल रहा था, लेकिन हालत में सुधार न होने पर उसे रायगढ़ मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। उसकी पत्नी दिलेश्वरी जांगड़े ने उसे अस्पताल के ऑर्थो वार्ड में भर्ती कराया था।

बुधवार रात करीब 2 बजे परिजन सो रहे थे, तभी बिहारी लाल अचानक वार्ड से गायब हो गया। सुबह उसकी पत्नी ने देखा कि वह बिस्तर पर नहीं है, जिसके बाद उसकी तलाश शुरू की गई।

गुरुवार शाम को डीन बंगले के पास बने नाले में एक शव दिखाई दिया, जो बाद में बिहारी लाल का निकला। सूचना मिलने पर चक्रधरनगर पुलिस मौके पर पहुंची और मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि यह दुर्घटना थी, आत्महत्या या कुछ और।पुलिस हर पहलू से मामले की जांच कर रही है।

कान्स फिल्म फेस्टिवल 2025: छत्तीसगढ़ की जूही व्यास ने रेड कार्पेट पर जलवायु परिवर्तन का दिया संदेश

फ्रांस में आयोजित प्रतिष्ठित कान्स फिल्म फेस्टिवल 2025 में इस बार फैशन और सिनेमा की भव्यता के साथ-साथ एक महत्वपूर्ण सामाजिक संदेश भी देखने को मिला। इस मंच पर छत्तीसगढ़ के दुर्ग की रहने वाली जूही व्यास ने अपने अनोखे अंदाज़ और उद्देश्यपूर्ण पहनावे से सबका ध्यान खींचा।

जूही ने न सिर्फ भारत का प्रतिनिधित्व किया, बल्कि ग्रीनपीस इंडिया के साथ मिलकर चलाए जा रहे “वॉयस ऑफ द प्लैनेट” अभियान को भी वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत किया। उनकी राष्ट्रीय निदेशक मोहिनी शर्मा भी इस मौके पर उनके साथ मौजूद रहीं। इस अभियान के ज़रिए जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय असमानता जैसे मुद्दों को दुनिया के सामने प्रमुखता से रखा गया।

जूही द्वारा पहना गया गाउन भी चर्चा का विषय बना रहा। यह परिधान वियतनाम के एक प्रसिद्ध डिज़ाइनर द्वारा तैयार किया गया था और केवल फैशन स्टेटमेंट नहीं बल्कि एक प्रतीकात्मक संदेश भी था। लाल रंगों और अंगारों जैसी बनावट वाला यह गाउन जलते हुए ग्रह, बढ़ते तापमान और गर्मी की गंभीर समस्याओं को दर्शाता है। यह परिधान पर्यावरण प्रदूषण फैलाने वालों को कठघरे में खड़ा करता है और उनसे जवाबदेही की मांग करता है।

जूही व्यास की इस पहल ने न सिर्फ ग्लैमर की दुनिया में एक नई सोच का संचार किया, बल्कि यह भी दिखाया कि फैशन का उपयोग सामाजिक और वैश्विक मुद्दों की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए कैसे किया जा सकता है।