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उरकुरा में गुप्त धर्मांतरण का खुलासा, बजरंग दल की तत्परता से खमतराई पुलिस ने की कार्रवाई

रायपुर के उरकुरा क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 16 में रविवार को एक घर में चल रहे कथित धर्मांतरण कार्यक्रम का भंडाफोड़ हुआ। बजरंग दल के बंजारी प्रखण्ड द्वारा मिली सूचना के आधार पर यह कार्रवाई की गई। संगठन के सहमंत्री रमन जी के निर्देश पर कार्यकर्ताओं ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया और खमतराई पुलिस को सूचित किया।

बताया जा रहा है कि पिछले पांच वर्षों से इस क्षेत्र में गुपचुप तरीके से धर्मांतरण की गतिविधियाँ संचालित की जा रही थीं। शनिवार को जब एक विशेष धार्मिक सभा चल रही थी, उसी दौरान बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने छापा मारा और वहां मौजूद ईसाई मिशनरी से जुड़े लोगों को रंगे हाथों पकड़ा।

बाद में खमतराई थाना पुलिस मौके पर पहुंची और सभी संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि यह नेटवर्क कितना बड़ा है और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस घर में हर सप्ताह बैठकें होती थीं, जहां बाहरी लोग आकर प्रचार करते थे।

बजरंग दल का कहना है कि यह धर्मांतरण का सुनियोजित प्रयास था, जिसे समय रहते रोका गया। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे मामलों में कड़ी से कड़ी कार्रवाई हो ताकि भविष्य में कोई इस तरह का दुस्साहस न कर सके।

रायपुर: खमतराई ओवरब्रिज पर हादसा, नगर निगम की लापरवाही उजागर

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अंधेरे में हादसा: खमतराई ओवरब्रिज पर बेकाबू बस दुर्घटनाग्रस्त, बड़ा हादसा टला

खमतराई ओवरब्रिज पर मंगलवार रात करीब 9:30 बजे एक बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई। यह बस गोदावरी इस्पात कंपनी की थी और घटना के समय उसमें कोई भी यात्री सवार नहीं था। हादसे के तुरंत बाद बस का चालक मौके से फरार हो गया।

गनीमत रही कि इस हादसे में किसी को कोई चोट नहीं आई, लेकिन यह घटना बड़ी अनहोनी का संकेत भी देती है। स्थानीय लोगों के अनुसार, खमतराई ओवरब्रिज पर पिछले कई दिनों से स्ट्रीट लाइट काम नहीं कर रही हैं। पूरी सड़क अंधेरे में डूबी रहती है, जिससे छोटे वाहन चालकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

स्थानीय नागरिकों ने रायपुर नगर निगम पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। लोगों की मांग है कि ओवरब्रिज पर जल्द से जल्द स्ट्रीट लाइट सुधार कर चालू की जाए, ताकि भविष्य में कोई जानलेवा हादसा न हो।

यह घटना नगर निगम की लापरवाही और प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल खड़े कर रही है। यदि समय रहते मरम्मत और निगरानी होती, तो इस प्रकार की घटनाओं को टाला जा सकता था।

खमतराई में लिफ्ट देना पड़ा महंगा, दोपहिया से ढाई लाख की चोरी

रायपुर के खमतराई क्षेत्र में एक युवक को अनजान शख्स को लिफ्ट देना भारी पड़ गया। लिफ्ट देने के कुछ ही देर बाद युवक की दोपहिया गाड़ी से ढाई लाख रुपये से भरा बैग रहस्यमय तरीके से गायब हो गया। घटना की शिकायत पर पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

मिली जानकारी के अनुसार, संदीप रहेजा नामक व्यवसायी के यहां कलेक्शन एजेंट के रूप में काम करने वाला पितांबर चंद्राकर ढाई लाख रुपये लेकर दोपहर करीब 2 बजे निकला था। भनपुरी चौक से पाटीदार भवन चौक के बीच रास्ते में एक युवक ने उससे लिफ्ट मांगी। पितांबर ने उसे बैठा लिया और पाटीदार भवन चौक पर उतार दिया।

लेकिन जब पितांबर ऑफिस पहुंचा, तो उसने देखा कि दोपहिया में रखा रुपयों से भरा बैग गायब है। आशंका है कि लिफ्ट लेने वाला युवक ही बैग लेकर फरार हुआ। खमतराई पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और अज्ञात आरोपी की तलाश में जुट गई है।

छत्तीसगढ़ में नौतपा के दौरान झमाझम बारिश के आसार, 26-27 मई को येलो अलर्ट

दक्षिण-पश्चिम मानसून ने 24 मई को केरल में दस्तक दे दी है। आमतौर पर केरल में मानसून आने के करीब 10 दिन बाद छत्तीसगढ़ पहुंचता है। इस हिसाब से राज्य में 3 से 5 जून के बीच मानसून के आने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि इससे पहले नौतपा के दौरान प्रदेश में तेज बारिश देखने को मिल सकती है। मौसम विभाग ने 26 और 27 मई के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। इस दौरान गरज-चमक के साथ तेज बारिश और बिजली गिरने की चेतावनी दी गई है।

मानसून के आगमन को लेकर क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि केरल में मानसून जल्दी आने का मतलब यह नहीं है कि पूरे देश में यह जल्दी पहुंचेगा। छत्तीसगढ़ में मानसून समय पर यानी 3-5 जून के बीच ही पहुंचने की उम्मीद है। पिछले साल मानसून यहां 7 जून को पहुंचा था।

देशभर में मानसून की रफ्तार

सामान्य रूप से मानसून 1 जून को केरल में प्रवेश करता है और 8 जुलाई तक पूरे देश में फैल जाता है। इसके बाद 17 सितंबर के आसपास उत्तर-पश्चिम भारत से इसकी वापसी शुरू हो जाती है और 15 अक्टूबर तक मानसून पूरी तरह विदा हो जाता है।

कई राज्यों में भारी बारिश की संभावना

भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, अगले कुछ दिनों में देश के 15 राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। इसमें छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, केरल, कर्नाटक, गोवा, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, ओडिशा, बिहार, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, असम और मेघालय शामिल हैं। खासकर मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में तेज हवाओं और बिजली के साथ मध्यम बारिश की संभावना जताई गई है। अरब सागर में दबाव का क्षेत्र बनने से मौसम में और बदलाव आ सकता है।

हर जिले में सिम्स खोलने की योजना ठप, डेढ़ साल में नहीं बढ़ा एक भी कदम

राज्य में एम्स की तर्ज पर हर जिले में सिम्स (छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस) स्थापित करने की महत्वाकांक्षी योजना सिर्फ घोषणाओं तक सिमट कर रह गई है। प्रदेश सरकार के गठन के लगभग डेढ़ साल बाद भी इस दिशा में कोई ठोस कार्यवाही नहीं हो सकी है। न केवल नई पहल ठप है, बल्कि पहले से शुरू किए गए सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल भी पूरी तरह से काम नहीं कर पा रहे हैं।

बिलासपुर और जगदलपुर के अस्पताल अधूरे

बिलासपुर के सिम्स में कुछ विभागों की ओपीडी सीमित रूप से चल रही है, जबकि जगदलपुर में सुपर स्पेशलिटी अस्पताल शुरू ही नहीं हो पाया है। यहां इसे निजी हाथों में सौंपने की प्रक्रिया अधर में है, क्योंकि अब तक टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है।

संकल्प पत्र में था वादा, ज़मीनी हकीकत शून्य

प्रदेश भाजपा ने विधानसभा चुनाव के समय अपने संकल्प पत्र में सिम्स की घोषणा की थी, ताकि सभी जिलों के मरीजों को उच्चस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। लेकिन पत्रिका की पड़ताल में सामने आया कि इस दिशा में एक भी कार्य नहीं हुआ है।

10 सरकारी मेडिकल कॉलेज, लेकिन ज़्यादातर रेफरल सेंटर

राज्य में मौजूद 10 सरकारी मेडिकल कॉलेजों की स्थिति चिंताजनक है। अधिकांश संस्थान गंभीर मरीजों को रायपुर रेफर कर देते हैं क्योंकि जरूरी सुविधाएं और विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी है।

रायपुर का नेहरू मेडिकल कॉलेज: राज्य का सबसे बड़ा मेडिकल कॉलेज, लेकिन ट्रांसप्लांट सुविधाएं नहीं हैं।

जगदलपुर और कांकेर: बस्तर संभाग के मेडिकल कॉलेजों में सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर नहीं हैं, और मूलभूत सुविधाएं भी अधूरी हैं।

राजनांदगांव, महासमुंद, कोरबा: फैकल्टी की कमी, ट्रामा सेंटर में विशेषज्ञ नहीं।

बिलासपुर सिम्स: सुपर स्पेशलिटी अस्पताल नाममात्र का, अधिकांश मरीज रायपुर भेजे जाते हैं।

रायगढ़ और दुर्ग: इन्फ्रास्ट्रक्चर मौजूद, लेकिन सुविधाएं नदारद।

अंबिकापुर: अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति, लेकिन गंभीर मामलों में रेफरल की जरूरत।

चुनौती: डॉक्टरों की भारी कमी

राज्य में नई चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार करना तो आवश्यक है, लेकिन सबसे बड़ी समस्या डॉक्टरों की उपलब्धता है। ना केवल छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे देश में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी है। इसे दूर करने के लिए मेडिकल सीटें बढ़ाई जा रही हैं, लेकिन गुणवत्ता पर भी ध्यान देना जरूरी है।

धमतरी: लालबगीचा वार्डवासियों को नहीं मिल रहा पीएम आवास योजना का लाभ, महापौर को सौंपा ज्ञापन

छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के लालबगीचा वार्ड के रहवासी बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर शुक्रवार को नगर निगम कार्यालय पहुंचे। वार्ड पार्षद हिमानी भागवत साहू के नेतृत्व में वार्डवासियों ने महापौर रामू रोहरा को ज्ञापन सौंपा और आबादी पट्टा दिलाने, साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था समेत कई समस्याओं को उठाया।

वार्ड की निवासी सुकृति महिलांगे, दुर्गा महिलांगे और योगमाया चंदेल ने बताया कि वे वर्षों से इस क्षेत्र में रह रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें आबादी पट्टा नहीं मिला है। इसके अभाव में प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है।

वार्ड में नालियों की सफाई न होने और दूषित पानी की निकासी व्यवस्था ठीक न होने के कारण बरसात के दिनों में घरों में पानी घुस जाता है। साथ ही, वार्ड में संचालित डेयरी के मवेशी खुले में घूमते हैं, जिससे गोबर की गंदगी सड़कों पर फैल जाती है और आवागमन में दिक्कत होती है।

इसके अलावा, कुछ इलाकों में स्ट्रीट लाइट की कमी के चलते अंधेरा छा जाता है, जिससे असामाजिक गतिविधियों का खतरा बना रहता है। लोगों ने प्रकाश व्यवस्था बेहतर करने की भी मांग की है।

वार्ड की महिलाओं ने आंगनबाड़ी भवन के लिए स्थान उपलब्ध कराने की भी मांग उठाई। उन्होंने बताया कि भवन के अभाव में आंगनबाड़ी किराए के मकान में संचालित हो रही है, जबकि वर्षों से इसके लिए भूमि की मांग की जा रही है।

महापौर रामू रोहरा ने सभी समस्याएं सुनने के बाद आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिलाया। इस दौरान बड़ी संख्या में वार्डवासी मौजूद रहे।

धमतरी में पीएम रोजगार सृजन योजना के 242 आवेदन हुए खारिज, युवाओं में निराशा

छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में युवाओं को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के तहत आवेदन प्रक्रिया चल रही है। इस योजना के अंतर्गत जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र को वर्ष 2024-25 में कुल 331 आवेदन प्राप्त हुए। हालांकि, इनमें से केवल 89 प्रकरणों को मंजूरी मिल पाई, जबकि 242 आवेदन निरस्त कर दिए गए।

अधिकारियों के अनुसार, अधिकांश आवेदन रिजेक्ट होने के पीछे प्रमुख वजहों में आवेदकों का कम सिविल स्कोर, दस्तावेजों की कमी और आवेदन में त्रुटियां शामिल हैं। इससे परेशान होकर कई युवा विभागीय कार्यालयों और बैंकों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।

यह योजना शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में लागू की जा रही है और खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग इसके राष्ट्रीय नोडल एजेंसी के रूप में कार्य कर रहा है। राज्य में इसका संचालन छत्तीसगढ़ खादी ग्रामोद्योग बोर्ड और जिला उद्योग केंद्रों के माध्यम से किया जा रहा है।

योजना के तहत नए व्यवसाय के लिए ही ऋण दिया जाता है, जिसमें विनिर्माण इकाइयों को 50 लाख रुपए और सेवा इकाइयों को 20 लाख रुपए तक का ऋण दिया जा सकता है। पात्र आवेदकों को सरकार की ओर से कुल 3 करोड़ 5 लाख 96 हजार रुपए की सब्सिडी स्वीकृत की गई है।

शहरी क्षेत्र के सामान्य आवेदकों को 15 प्रतिशत और विशेष श्रेणी (महिला, दिव्यांग, अनुसूचित जाति/जनजाति) के आवेदकों को 35 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाती है।

आवेदन अस्वीकृत होने की बढ़ती संख्या ने युवाओं की उम्मीदों को झटका दिया है और वे अब योजना की प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुधार की मांग कर रहे हैं।

छात्रा से छेड़छाड़ के आरोपी शिक्षक की बहाली पर उठे सवाल, शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में

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छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। छात्राओं के साथ अनुचित व्यवहार और “बैड टच” जैसे गंभीर आरोपों के बावजूद दोषी पाए गए शिक्षकों को बहाल किया जा रहा है।

हालिया मामला बिल्हा विकासखंड के शासकीय प्राथमिक शाला मंगला का है, जहां एक प्रधान पाठक रामकिशोर निर्मलकर पर एक छात्रा के साथ अशोभनीय हरकत करने का आरोप लगा था। जांच में दोषी पाए जाने के बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया था। लेकिन महज दो महीने में ही जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) द्वारा उन्हें बहाल कर महमंद स्कूल में पदस्थ कर दिया गया।

बिल्हा बीईओ सुनीता ध्रुव ने बताया कि घटना की शिकायत के बाद जांच की गई थी, जिसमें प्रधानपाठक की गलती पाई गई थी। निलंबन की कार्रवाई तो हुई, लेकिन पुलिस में मामला दर्ज नहीं हो सका क्योंकि थाना प्रभारी ने परिजनों की सहमति के बिना एफआईआर लिखने से इनकार कर दिया।

इससे पहले तखतपुर ब्लॉक में एक अन्य शिक्षक, जो पॉक्सो एक्ट के तहत आरोपी था और काफी समय तक फरार रहा, उसे भी डीईओ द्वारा बहाल कर दिया गया था। अब दोबारा एक ऐसे ही गंभीर आरोप वाले शिक्षक की पुनः नियुक्ति से शिक्षा विभाग में पारदर्शिता को लेकर संदेह गहराता जा रहा है।

शिक्षक संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस स्थिति पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि दोषियों को बिना विभागीय जांच पूरी हुए बहाल करना न केवल पीड़ित बच्चियों के साथ अन्याय है, बल्कि इससे ऐसे आपराधिक व्यवहार को बढ़ावा मिल सकता है।

इस पूरे मामले ने शिक्षा विभाग की नीतियों और डीईओ की भूमिका पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

मॉनसून 2025: बारिश से राहत, मौसम में बनी रहेगी नरमी

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में शनिवार को मौसम ने अचानक रुख बदल लिया। दिन भर बादलों और धूप के बीच खेल चलता रहा, लेकिन दोपहर करीब 3 से 4 बजे के बीच हल्की बारिश ने मौसम को खुशनुमा बना दिया। लगभग आधे से पौन घंटे की बारिश के बाद तापमान में करीब दो डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई, जिससे गर्मी और उमस से राहत मिली।

मौसम में बने रहेंगे ऐसे ही हालात

शुक्रवार तक तेज धूप और उमस ने लोगों को परेशान किया था, तापमान 37 से 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। लेकिन शनिवार को अचानक बदले मौसम के कारण राहत महसूस की गई। दोपहर बाद छाए काले बादलों के साथ बारिश हुई और शाम तक रुक-रुक कर बूंदाबांदी जारी रही। इस दौरान बिलासपुर में अधिकतम तापमान 35.0 डिग्री और न्यूनतम तापमान 27.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

आने वाले दिनों में बारिश की संभावना

मौसम विभाग के अनुसार, आगामी सप्ताह के दौरान जिले में कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ हल्की बारिश की संभावना बनी हुई है। साथ ही, अगले पांच दिनों तक अधिकतम तापमान में खास बदलाव की उम्मीद नहीं है

बिलासपुर में रजिस्ट्री के साथ ही अब नामांतरण की सुविधा, तीन दिन में 100 से ज्यादा मामलों में तुरंत अपडेट

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छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में भूमि रजिस्ट्री की प्रक्रिया को अब पहले से अधिक आसान और तेज बना दिया गया है। जिला प्रशासन द्वारा 20 मई से लागू की गई नई प्रणाली के तहत अब जमीन की रजिस्ट्री होते ही खरीदार का नाम राजस्व रिकॉर्ड में तत्काल दर्ज किया जा रहा है। इससे पुराने नामांतरण की जटिल प्रक्रिया से लोगों को मुक्ति मिल गई है।

नई व्यवस्था के तहत रजिस्ट्री के समय ही संबंधित दस्तावेज जैसे बी-वन, खतौनी आदि खरीदार को उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इस सुविधा से अब नामांतरण के लिए अलग से आवेदन, शुल्क या प्रतीक्षा की आवश्यकता नहीं रह गई है।

बीते तीन दिनों में लगभग 100 जमीन रजिस्ट्री के मामले इस नई प्रणाली के तहत पूरे किए गए हैं, जिनमें तत्काल नामांतरण भी हो गया। हालांकि, सॉफ्टवेयर में बदलाव के कारण शुरुआती कुछ तकनीकी समस्याएं आईं, जिन्हें विभाग की तकनीकी टीम द्वारा मौके पर ही सुलझाया गया।

रजिस्ट्री के समय आधार की सत्यता सुनिश्चित करने के लिए बॉयोमीट्रिक थंब वेरिफिकेशन की सुविधा भी शुरू की गई है। अधिकारियों का मानना है कि सोमवार से इस प्रक्रिया में और तेजी आएगी, जिससे जमीन से जुड़े अन्य कार्य भी बिना किसी देरी के पूरे किए जा सकेंगे।

नई सुविधा से नागरिकों को समय और मेहनत दोनों की बचत हो रही है, साथ ही पारदर्शिता और दक्षता भी बढ़ी है।