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राजधानी के स्पा सेंटरों में देहव्यापार का बड़ा खुलासा, विदेशी कॉलगर्ल्स भी ऑन डिमांड उपलब्ध

रायपुर: राजधानी के स्पा सेंटरों में लंबे समय से चल रहे अनैतिक कारोबार का भंडाफोड़ हुआ है। देहव्यापार की बढ़ती शिकायतों के बाद रायपुर पुलिस ने सोमवार को व्यापक कार्रवाई की। पुलिस ने अलग-अलग टीम बनाकर 100 से अधिक स्पा सेंटरों की अचानक जांच की, जो देर रात तक जारी रही। इस दौरान कई संदिग्ध युवक-युवतियां पकड़ी गईं, जिनसे पूछताछ की जा रही है।

मसाज की आड़ में संचालित देहव्यापार

पुलिस के अनुसार, स्पा सेंटरों में मसाज सेवा के बहाने देहव्यापार किया जा रहा है। अधिकांश स्पा सेंटरों में दूसरे राज्यों से युवतियों को रखा गया है। साथ ही ऑन डिमांड कॉलगर्ल सेवाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। पहले भी कई बार स्पा सेंटरों में सेक्स रैकेट के मामले सामने आ चुके हैं।

अधिकारियों की उदासीनता पर कार्रवाई

शहर के विभिन्न थाना क्षेत्रों में लगभग 200 स्पा सेंटर संचालित हैं, जहां थानेदार जांच या कार्रवाई करने में लापरवाह रहे हैं। इस पर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायतें मिलीं, जिसके बाद एक बड़ी टीम गठित कर छापेमारी की गई। इस टीम में करीब 200 पुलिसकर्मी शामिल थे।

कार्रवाई के दौरान युवतियों के निवास और स्पा सेंटर के आवश्यक कागजात की भी जांच की जा रही है। पुलिस मामले की गहनता से जांच कर आगे की कार्रवाई करेगी।

मानसून ने बिगाड़ा हवाई उड़ानों का शेड्यूल, रायपुर एयरपोर्ट पर यात्रियों को घंटों इंतजार

बारिश के कारण फ्लाइटों के संचालन में भारी बाधा, यात्री हो रहे हैं परेशान

स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट, रायपुर पर फ्लाइटें लगातार 1 से 2 घंटे से अधिक देरी से आ रही हैं। देश के कई हिस्सों में मानसूनी और प्री-मानसून की बारिश के चलते उड़ानों में रुकावट आई है। सोमवार को इंडिगो एयरलाइंस की मुंबई के लिए निर्धारित 5:45 बजे वाली फ्लाइट लगभग 1 घंटे 45 मिनट की देरी से शाम 7:30 बजे पहुंची, वहीं चेन्नई के लिए 3:40 बजे उड़ने वाली फ्लाइट 2 घंटे 10 मिनट लेट होकर शाम 5:55 बजे आई।

इसके अलावा, रात 9:05 बजे आने वाली पुणे की फ्लाइट भी 1 घंटे 10 मिनट देर से रात 10:15 बजे पहुंची। हैदराबाद, पुणे, कोलकाता समेत कई अन्य शहरों के लिए उड़ानों पर भी इसका असर पड़ा है।

विमानन कंपनियों ने यात्रियों से अनुरोध किया है कि वे उड़ान की वर्तमान स्थिति के बारे में जानकारी लेते रहें। मुंबई में लगातार हो रही बारिश के कारण कई फ्लाइटों को डायवर्ट या रद्द भी किया गया है।

सीएसवीटीयू ने वोकेशनल ट्रेनिंग को किया सुव्यवस्थित: केवल प्रमाणित कंपनियों से ही ट्रेनिंग, डिजिवर्सिटी पोर्टल पर पंजीयन अनिवार्य

छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय (CSVTU) ने वोकेशनल ट्रेनिंग प्रक्रिया को सरल और व्यवस्थित करने का फैसला लिया है। अब CSVTU से जुड़े इंजीनियरिंग और अन्य डिग्री कोर्स के छात्रों को वोकेशनल ट्रेनिंग के लिए कंपनियों का चयन करने में आसानी होगी। इसके लिए विश्वविद्यालय ने डिजिवर्सिटी पोर्टल लॉन्च किया है, जहां से छात्र ही वोकेशनल ट्रेनिंग के लिए आवेदन कर सकेंगे।

डिजिवर्सिटी पोर्टल पर छात्रों को सरकारी और निजी कंपनियों समेत लगभग 150 विकल्प मिलेंगे। छात्र इनमें से किसी भी कंपनी का चयन कर वहां ट्रेनिंग कर सकते हैं। इससे पहले छात्र अपनी मर्जी से कंपनियों का चुनाव करते थे, जिससे विश्वविद्यालय को सही जानकारी नहीं मिल पाती थी। अब केवल पोर्टल पर सूचीबद्ध कंपनियों में ही वोकेशनल ट्रेनिंग करने की अनुमति मिलेगी।

यह सुविधा CSVTU से संबद्ध यूजी और डिप्लोमा कोर्स के छात्रों को दी जाएगी, विशेष रूप से चौथे और छठे सेमेस्टर के विद्यार्थियों के लिए। उन्हें निर्धारित समय के अनुसार ट्रेनिंग पूरी करनी होगी। ट्रेनिंग के दौरान छात्रों को इंडस्ट्री के चल रहे प्रोजेक्ट्स से जुड़ने का मौका मिलेगा, जिससे वे वास्तविक समस्याओं को समझकर समाधान की दिशा में काम कर सकेंगे।

CSVTU ने कई सरकारी विभागों और निजी कंपनियों के साथ समझौते किए हैं, और कॉलेजों को भी यह अधिकार दिया गया है कि वे अपने स्तर पर अधिक कंपनियों को पोर्टल पर जोड़ सकें। फिलहाल, बीएसपी, पीडब्ल्यू जैसे कई सरकारी विभाग और देश-प्रदेश की बड़ी निजी कंपनियां इस ट्रेनिंग में शामिल हैं।

CSVTU ट्रेनिंग की मॉनिटरिंग भी करेगा, जिससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि छात्र प्रमाणित कंपनियों से ही प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं और उनकी उपस्थिति सही ढंग से दर्ज हो रही है। इस नए पोर्टल में कोर इंजीनियरिंग, आईटी, मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमेशन, डिजाइन और नई तकनीकों पर आधारित कंपनियां शामिल हैं।

CSVTU के कुलसचिव डॉ. अंकित अरोरा ने बताया कि छात्रों को इस पोर्टल पर पंजीकरण करना अनिवार्य होगा और केवल इसमें सूचीबद्ध कंपनियों से ही ट्रेनिंग कराई जाएगी। इसका उद्देश्य वोकेशनल ट्रेनिंग की गुणवत्ता और विश्वसनीयता को बढ़ाना है।

छत्तीसगढ़ शिक्षा समाचार: कक्षा 5वीं और 8वीं में फेल होने पर अब नहीं होगा प्रमोशन

केंद्रीय सरकार ने शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE) में संशोधन करते हुए ‘नो-डिटेंशन पॉलिसी’ को समाप्त कर दिया है। अब केंद्रीय विद्यालयों सहित सरकारी स्कूलों में कक्षा 5वीं और 8वीं के छात्र यदि वार्षिक परीक्षा में फेल होते हैं, तो उन्हें अगली कक्षा में प्रमोट नहीं किया जाएगा।

मुख्य बिंदु:

  • पुनः परीक्षा का अवसर: यदि छात्र पहली परीक्षा में फेल होते हैं, तो उन्हें दो महीने के भीतर पुनः परीक्षा देने का अवसर मिलेगा। यदि वे इस परीक्षा में भी असफल रहते हैं, तो उन्हें उसी कक्षा में रोक लिया जाएगा।

  • शिक्षकों द्वारा सहायता: फेल होने वाले छात्रों को शिक्षकों द्वारा अतिरिक्त मार्गदर्शन और विशेष शिक्षा प्रदान की जाएगी, ताकि उनकी शैक्षणिक कमियों को दूर किया जा सके।

  • कॉपिटेटिव दक्षता आधारित प्रश्न: परीक्षा में 50% प्रश्न कॉपिटेटिव दक्षता पर आधारित होंगे, जिससे छात्रों की समग्र योग्यता का मूल्यांकन किया जा सकेगा।

  • अनिवार्य शिक्षा: हालांकि छात्रों को फेल किया जा सकता है, लेकिन किसी भी छात्र को कक्षा 8वीं तक स्कूल से निष्कासित नहीं किया जाएगा।

यह निर्णय राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत लिया गया है, जिसका उद्देश्य छात्रों की शिक्षा गुणवत्ता में सुधार लाना है। इस बदलाव से छात्रों में प्रतिस्पर्धात्मक भावना बढ़ेगी और वे अपनी पढ़ाई को अधिक गंभीरता से लेंगे।

छुरिया में सुशासन तिहार के दौरान हंगामा, पूर्व विधायक छन्नी साहू ने जताया विरोध, मंच पर हुई तीखी नोकझोंक

राजनांदगांव जिले के छुरिया ब्लॉक के बेंदाड़ी गांव में आयोजित सुशासन तिहार के समाधान शिविर में उस वक्त हंगामा हो गया जब पूर्व विधायक छन्नी साहू ने मंच से सड़क निर्माण को लेकर सवाल उठाए। छन्नी साहू के विरोध पर भाजपा नेताओं ने उन्हें और ग्रामीणों को जेल भेजने की चेतावनी दी, जिससे माहौल गरमा गया।

पूर्व विधायक छन्नी इस धमकी से इतनी नाराज़ हो गईं कि उन्होंने अधिकारियों से कहा कि अगर प्रशासन ऐसी धमकियों पर चुप है तो उन्हें चूड़ियां पहन लेनी चाहिए। उन्होंने मंच पर ही चूड़ियां निकालकर अफसरों की निष्क्रियता पर तंज कसा। मंच पर भाजपा और कांग्रेस के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गया। कई ग्रामीण भी छन्नी के समर्थन में आ गए और स्थिति तनावपूर्ण हो गई।

छन्नी साहू ने कहा कि उनके कार्यकाल में मरकाकसा से जोब के बीच सड़क निर्माण के लिए 1.40 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिल चुकी थी और टेंडर भी हो गया था, लेकिन आचार संहिता लागू होने के कारण काम शुरू नहीं हो सका। अब डेढ़ साल से भाजपा सरकार है, पर सड़क का निर्माण नहीं हुआ।

छन्नी ने आरोप लगाया कि भाजपा नेताओं की वजह से यह काम रुका हुआ है। जब उन्होंने इस मामले में सवाल पूछे, तो भाजपा नेता एमडी ठाकुर ने उन्हीं के कार्यकाल पर सवाल उठाना शुरू कर दिया, जिससे बहस और तेज हो गई।

शिविर में उपस्थित ग्रामीणों ने भी हाथों में ततियां लेकर प्रदर्शन किया। अफसरों ने स्थिति को संभालते हुए मौके का मुआयना किया और बताया कि अब वित्तीय स्वीकृति लेकर फिर से टेंडर किया जा रहा है और निर्माण कार्य जल्द शुरू होगा।

इस समाधान शिविर में कुल 13 गांवों के लोग पहुंचे थे और 2603 आवेदन पत्रों का निपटारा किया गया।

28 मई को शिक्षकों का मंत्रालय घेराव, युक्तियुक्तकरण की विसंगतियों पर विरोध तेज

स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा चलाए जा रहे युक्तियुक्तकरण (रैशनलाइजेशन) की प्रक्रिया और उसके मापदंडों में पाई जा रही विसंगतियों के विरोध में शिक्षक संगठनों ने 28 मई को मंत्रालय का घेराव करने की तैयारी कर ली है। इस आंदोलन का नेतृत्व विभिन्न शैक्षिक संगठन कर रहे हैं, जिन्होंने शिक्षा व्यवस्था की खामियों और शिक्षकों से जुड़े मुद्दों को जोर-शोर से उठाया है।

युक्तियुक्तकरण की शर्तों पर ऐतराज, उद्देश्य पर नहीं

शालेय शिक्षक संघ के प्रांताध्यक्ष वीरेंद्र दुबे का कहना है कि शिक्षक संगठनों को राज्य की एकल शिक्षकीय और शिक्षकविहीन स्कूलों में शिक्षकों की पदस्थापना से आपत्ति नहीं है। विरोध केवल उन मापदंडों और नीतिगत खामियों को लेकर है जो शिक्षा की गुणवत्ता और पहुंच को प्रभावित कर रही हैं। उनका मानना है कि यह प्रक्रिया न केवल विद्यार्थियों के समग्र विकास में बाधा बन रही है, बल्कि शिक्षकों के हितों के भी खिलाफ है।

प्रभारी प्राचार्यों के सहारे चल रही हैं स्कूलें

कार्यकारी प्रांताध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी और प्रदेश महासचिव धर्मेश शर्मा ने बताया कि राज्य में स्कूल शिक्षा विभाग की व्यवस्था बेहद खराब हो चुकी है। विभागाध्यक्ष के पद पर नियुक्त आईएएस अधिकारियों का कार्यकाल निश्चित नहीं होता, जिससे नेतृत्व में निरंतरता नहीं रहती।

संचालनालय में अपर संचालक, संयुक्त संचालक और उपसंचालक जैसे कई महत्वपूर्ण पद लंबे समय से खाली पड़े हैं या प्रभारी अधिकारियों के हवाले हैं, जो वर्षों से वहीं टिके हुए हैं। इसी प्रकार, राज्य के लगभग 80 प्रतिशत हाई स्कूल और हायर सेकंडरी स्कूल भी प्रभारी प्राचार्यों के भरोसे ही संचालित हो रहे हैं।

तदर्थवाद को बढ़ावा देने का आरोप

संघ का आरोप है कि शिक्षा विभाग खुद इस अस्थायी व्यवस्था को बनाए रखना चाहता है। यही वजह है कि पिछले 6-8 वर्षों में इन पदों पर कोई नियमित पदोन्नति नहीं की गई है। संगठन का कहना है कि अव्यवस्था के लिए जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों की भी युक्तियुक्तकरण के माध्यम से समीक्षा की जानी चाहिए।

इस आंदोलन के माध्यम से शिक्षक संगठन चाहते हैं कि स्कूल शिक्षा विभाग इन गंभीर मुद्दों पर ध्यान दे और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार लाए।

सूरजपुर: विराट सॉल्वेंट फैक्ट्री में हमला, भारी तोड़फोड़ व मारपीट – राजनीतिक दलों ने लिया जायजा

छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के नेवरा गांव स्थित विराट सॉल्वेंट फैक्ट्री में सोमवार रात (21 मई) को हिंसक घटना सामने आई, जिसमें अज्ञात हमलावरों ने फैक्ट्री में घुसकर जबरदस्त तोड़फोड़ और मारपीट की। घटना के बाद अब तक पुलिस की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे स्थानीय व्यापारी समुदाय में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।

बताया जा रहा है कि करीब 50 से अधिक लोगों की भीड़ ने फैक्ट्री पर अचानक हमला कर दिया। इस हमले में फैक्ट्री संचालक और एक कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

फैक्ट्री मालिक का कहना है कि इस हमले में उन्हें लगभग 1 करोड़ रुपए की आर्थिक क्षति हुई है, साथ ही हमलावरों ने मौके से 27 लाख रुपए नकद भी लूट लिए। हालांकि, यह भी सामने आया है कि कुछ दिन पहले फैक्ट्री संचालक पर एक मजदूर से मारपीट करने का आरोप लगा था, जिससे यह आशंका जताई जा रही है कि हमले की यही घटना वजह हो सकती है।

घटना के बाद भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के प्रतिनिधियों ने फैक्ट्री पहुंचकर हालात का जायजा लिया और पीड़ितों से मुलाकात की। अब सभी की नजरें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

झीरम घाटी हमला: 12 साल बाद भी मास्टरमाइंड हिडमा की तलाश जारी, 2026 तक नक्सलमुक्त भारत का लक्ष्य

जगदलपुर, 26 मई 2025: छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में नक्सल विरोधी अभियान तेज गति से जारी है। वर्ष 2025 को ‘झीरम घाटी हमले के न्याय का वर्ष’ माना जा रहा है क्योंकि इस साल कई वांछित नक्सलियों का सफाया किया गया है। वहीं झीरम घाटी हमले का मास्टरमाइंड, माडवी हिडमा, अब भी सुरक्षाबलों की गिरफ्त से बाहर है। केंद्र और राज्य सरकारें मार्च 2026 तक नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त करने के अभियान में जुटी हैं।

अब तक की बड़ी कार्रवाई:

साल 2025 में बस्तर में करीब 20 नक्सली घटनाएं सामने आईं। सुरक्षाबलों के अभियान में अब तक 183 नक्सली मारे गए और 718 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। हाल ही में नारायणपुर जिले में हुए एनकाउंटर में भाकपा (माओवादी) के महासचिव नंबाला केशव राव उर्फ बसवराजू को मार गिराया गया। उस पर डेढ़ करोड़ रुपये का इनाम था।

झीरम घाटी नरसंहार और हिडमा:

25 मई 2013 को झीरम घाटी में नक्सलियों ने कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर हमला कर दिया था। इस हमले में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, वरिष्ठ नेता महेंद्र कर्मा और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्या चरण शुक्ल समेत 30 से ज्यादा लोग मारे गए थे। इस हमले का मास्टरमाइंड माडवी हिडमा अब भी फरार है। हिडमा सुकमा जिले का निवासी है और माओवादी संगठन की PLGA बटालियन नंबर-1 का कमांडर है। उस पर कुल मिलाकर लगभग 1 करोड़ रुपये का इनाम घोषित किया गया है।

हिडमा की वर्तमान स्थिति:

सूत्रों के अनुसार, बढ़ते दबाव के चलते हिडमा को नक्सली संगठन की सेंट्रल कमेटी से हटा दिया गया है। वह अब गुप्त स्थान पर छिपा हुआ है। हालांकि उसकी गतिविधियों पर सुरक्षा एजेंसियों की नजर बनी हुई है और उसे पकड़ने की कोशिशें तेज हैं।

महिला नक्सली सुजाता की भी तलाश जारी:

बीजापुर हमले की सह-आरोपी सुजाता नामक महिला नक्सली भी सुरक्षाबलों की निगरानी में है। उस पर 25 लाख रुपये का इनाम घोषित है और वह नक्सली संगठन में सक्रिय भूमिका निभा रही है।

रेड कॉरिडोर का विस्तार:

देश के 11 राज्यों के करीब 90 जिलों में नक्सलवाद सक्रिय है, जिसे रेड कॉरिडोर कहा जाता है। इसमें छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, बिहार, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश जैसे राज्य शामिल हैं।

रायपुर में बनेगा देश का प्रमुख AI डेटा सेंटर, ESDS करेगी 600 करोड़ का निवेश

छत्तीसगढ़ जल्द ही देश के डिजिटल परिदृश्य में एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। रायपुर में अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित डेटा सेंटर की स्थापना के लिए टेक्नोलॉजी कंपनी ESDS Software Solution Ltd ने 600 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश का प्रस्ताव पेश किया है। यह प्रस्ताव नई दिल्ली स्थित छत्तीसगढ़ सदन में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के समक्ष रखा गया।

कंपनी के चेयरमैन पीयूष सोमानी और उपाध्यक्ष लोकेश शर्मा ने इस दौरान बताया कि यह डेटा सेंटर छत्तीसगढ़ को ही नहीं, बल्कि पूरे देश के डिजिटल विकास को गति देगा। इस परियोजना के तहत राज्य को AI, क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा और डिजिटल स्टोरेज के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में एक ठोस प्रयास होगा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस प्रस्ताव का स्वागत करते हुए कहा कि यह निवेश डिजिटल इंडिया के विजन को जमीन पर उतारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने यह भी आश्वस्त किया कि राज्य सरकार इस परियोजना को शीघ्रता से साकार करने के लिए हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी।

ESDS की यह योजना न केवल छत्तीसगढ़ को टेक्नोलॉजी हब के रूप में विकसित करेगी, बल्कि यहां के युवाओं के लिए उच्च गुणवत्ता वाले रोजगार के नए रास्ते भी खोलेगी। यह डेटा सेंटर राज्य के IT इकोसिस्टम को मजबूती देगा और डिजिटल आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह और राज्य की इनवेस्टमेंट कमिश्नर ऋतु सेन भी उपस्थित थीं।

छत्तीसगढ़ में देश का सबसे आधुनिक ट्रांसफॉर्मर उत्पादन केंद्र स्थापित होगा, जिसमें 300 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश होगा।

विकसित भारत के विजन को आगे बढ़ाते हुए, करमवीर इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड ने रायपुर में अत्याधुनिक ट्रांसफॉर्मर निर्माण इकाई लगाने का प्रस्ताव दिया है। यह परियोजना छत्तीसगढ़ को देश के सबसे बड़े ट्रांसफॉर्मर उत्पादन केंद्रों में शामिल कर देगी।

कंपनी के प्रबंध निदेशक विवेक जैन ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से नई दिल्ली में मुलाकात की और इस योजना के निवेश, रोजगार सृजन एवं तकनीकी पहलुओं पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि यह यूनिट तकनीकी रूप से देश की सबसे उन्नत होगी और भविष्य में ऊर्जा क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस निवेश का स्वागत करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में एक मजबूत आधार बनेगा। राज्य सरकार इस परियोजना को हर संभव सहायता प्रदान करेगी।

यह परियोजना न केवल राज्य के बिजली क्षेत्र के आधुनिकीकरण में मदद करेगी, बल्कि स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर भी देगी और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देगी। “मेक इन छत्तीसगढ़” पहल को भी यह मजबूत करेगी, जिससे छत्तीसगढ़ में बनी तकनीकी रूप से उन्नत ट्रांसफॉर्मर पूरे देश को ऊर्जा प्रदान करेंगे।

इस दौरान मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह और छत्तीसगढ़ के इनवेस्टमेंट कमिश्नर ऋतु सेन भी नई दिल्ली में मौजूद थे।