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छत्तीसगढ़: अब नहीं बंद होंगे हजारों स्कूल, केवल 166 का होगा समायोजन – शिक्षा विभाग ने दी स्पष्ट जानकारी

छत्तीसगढ़ में स्कूल बंद होने की खबरों को लेकर फैलाई जा रही अफवाहों पर अब विराम लग गया है। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि राज्य में हजारों स्कूल बंद नहीं किए जा रहे हैं, बल्कि केवल 166 स्कूलों का समायोजन किया जाएगा। विभाग ने इसे “युक्तियुक्तकरण” की प्रक्रिया का हिस्सा बताया है, जिसका उद्देश्य बच्चों को बेहतर शिक्षा और संसाधन उपलब्ध कराना है, न कि स्कूलों को बंद करना।

केवल कम छात्र संख्या वाले स्कूल होंगे समायोजित

राज्य के कुल 10,463 स्कूलों में से सिर्फ 166 स्कूलों को समायोजित किया जाएगा। इनमें 133 स्कूल ग्रामीण क्षेत्रों में हैं, जहां छात्रों की संख्या 10 से कम है और एक किलोमीटर के दायरे में दूसरा स्कूल मौजूद है। वहीं, शहरी इलाकों में 33 स्कूल ऐसे हैं जहां 30 से कम छात्र हैं और पास में ही अन्य स्कूल संचालित हो रहे हैं।

शेष 10,297 स्कूल रहेंगे पूरी तरह संचालित

शिक्षा विभाग ने कहा कि बाकी 10,297 स्कूलों में कोई बंदी नहीं होगी। केवल प्रशासनिक और शैक्षणिक स्तर पर आवश्यक बदलाव किए जाएंगे। समायोजित स्कूलों के भवनों का भी उपयोग पहले की तरह ही होगा और जहां जरूरत होगी, वहां शिक्षकों की व्यवस्था भी की जाएगी।

समायोजन का मतलब बंद करना नहीं

विभाग ने स्पष्ट किया है कि स्कूलों का “समायोजन” और “बंद” होना दो अलग बातें हैं। समायोजन का उद्देश्य है कि आस-पास के कम छात्र संख्या वाले स्कूलों को मिलाकर संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जाए और छात्रों को अधिक योग्य शिक्षक और सुविधाएं मिलें।

शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में कदम

शिक्षा विभाग के अनुसार, इस बदलाव से छात्रों को बेहतर लाइब्रेरी, कंप्यूटर, विज्ञान प्रयोगशाला और अनुभवी शिक्षकों जैसी सुविधाएं मिलेंगी। छोटे स्कूलों के छात्रों को अब पास के बेहतर स्कूलों में पढ़ने का अवसर मिलेगा, जिससे उनकी शिक्षा का स्तर बढ़ेगा।

सरकार की मंशा – हर बच्चे को बेहतर शिक्षा

छत्तीसगढ़ सरकार की यह पहल शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक ठोस प्रयास है। विभाग ने कहा है कि यह केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि शिक्षा की नींव को मजबूत करने का एक ठोस प्रयास है ताकि हर बच्चे को समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।

लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील

शिक्षा विभाग ने आम जनता और संगठनों से अपील की है कि वे भ्रामक खबरों और अफवाहों से बचें। सरकार का मकसद किसी स्कूल को बंद करना नहीं, बल्कि बच्चों को बेहतर भविष्य देना है।

इस तरह, राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि स्कूल बंद नहीं हो रहे हैं, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए योजनाबद्ध रूप से समायोजन किया जा रहा है।

मुझे मरना है…” कहते हुए युवक ने पुलिस थाने में ही कर लिया आत्मघाती प्रयास, अस्पताल में भर्ती

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रायपुर के मौदहापारा थाने में गुरुवार रात एक चौंकाने वाली घटना सामने आई, जब एक युवक ने सिपाही के सामने अचानक खुद का गला काट लिया। युवक की पहचान कुशालपुर निवासी सूरजनाथ योगी के रूप में हुई है।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, रात करीब 8 बजे सूरजनाथ थाने पहुंचा और सीधे एक सिपाही के पास जाकर बोला, “मुझे मरना है।” इससे पहले कि सिपाही कुछ समझ पाता, युवक ने जेब से ब्लेड निकाला और गले पर वार कर लिया। घटना से थाने में हड़कंप मच गया। सिपाही ने फुर्ती दिखाते हुए उसके हाथ को पकड़ लिया और उसे तुरंत थाने के भीतर आराम से बैठाया गया।

घटना के समय थाने में सीएसपी और थाना प्रभारी (टीआई) भी मौजूद थे। घायल अवस्था में युवक को तुरंत अंबेडकर अस्पताल ले जाया गया, जहां उसका इलाज जारी है। सौभाग्य से गले पर गहरी चोट नहीं आई है और उसकी हालत सामान्य बताई जा रही है।

फिलहाल युवक द्वारा आत्महत्या जैसा कदम उठाने की वजह साफ नहीं हो सकी है। पुलिस के अनुसार, सूरजनाथ को किसी ने थाने बुलाया नहीं था, वह खुद ही वहां आया था।

युवक के भाई नीरज योगी ने बताया कि वह नशे का आदी है और लंबे समय से बेरोजगार है। वह पहले तीन नौकरियां छोड़ चुका है और मानसिक तनाव में रहता है।

मौदहापारा पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और युवक के मानसिक स्वास्थ्य एवं पारिवारिक स्थिति को भी जांच के दायरे में लिया जा रहा है।

बिरगांव में फल विक्रेता पर दिनदहाड़े हमला, पुलिस की निष्क्रियता पर सवाल

रायपुर/बिरगांव: राजधानी रायपुर के बिरगांव इलाके में शुक्रवार को दोपहर के समय अपराधियों के हौसले सातवें आसमान पर नजर आए, जब एक फल विक्रेता पर खुलेआम हमला कर दिया गया। यह घटना बुधवारी बाजार के पास करीब 2 बजे हुई, जहां फुटपाथ पर ठेले में फल बेच रहे सुरेंद्र गुप्ता पर एक युवक ने धारदार हथियार से हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, हमलावर की पहचान राहुल भुंकार (उम्र 25 वर्ष) के रूप में हुई है, जो इलाके में आपराधिक गतिविधियों के लिए बदनाम है। राहुल ने सुरेंद्र से शराब के लिए पैसे मांगे थे। जब सुरेंद्र ने देने से मना किया तो दोनों में कहासुनी हो गई और बात बढ़ते-बढ़ते हिंसा में बदल गई। आरोपी ने अचानक सुरेंद्र पर हमला कर दिया, जिससे उन्हें चेहरे और हाथ में गंभीर चोटें आईं। इस दौरान एक राहगीर, जो बचाव के लिए आगे आया था, वह भी घायल हुआ।

हमले के तुरंत बाद सुरेंद्र घायल अवस्था में उरला थाने पहुंचे, लेकिन पुलिस ने तत्काल कोई कार्रवाई नहीं की। पुलिस की इस उदासीनता का परिणाम यह हुआ कि आरोपी शाम करीब 5 बजे फिर से घटनास्थल पर लौटा और पीड़ित से मारपीट करते हुए करीब ₹3000 नकद लूटकर फरार हो गया।

लोगों में गुस्सा, पुलिस पर सवाल
इलाके में लगातार हो रहे अपराधों और पुलिस की निष्क्रियता से जनता में भारी आक्रोश है। स्थानीय दुकानदारों और निवासियों का कहना है कि असामाजिक तत्वों को किसी का डर नहीं रह गया है और पुलिस मूकदर्शक बनी हुई है।

सख्त कार्रवाई की मांग
इलाके के लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि आरोपी राहुल भुंकार को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर उस पर कठोर कानूनी कार्यवाही की जाए, ताकि ऐसे अपराधियों में कानून का भय पैदा हो और आम नागरिक खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें।

कोयला घोटाले में सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत, लेकिन अन्य मामलों के चलते जेल में रहेंगे आरोपी

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोयला लेवी घोटाले में सुप्रीम कोर्ट ने प्रमुख आरोपियों को अंतरिम जमानत प्रदान की है। हालांकि, अन्य मामलों में आरोपित होने के कारण वे फिलहाल जेल में ही रहेंगे।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस दीपांकर दत्ता की पीठ ने गुरुवार को सुनवाई के दौरान पूर्व नौकरशाह सौम्या चौरसिया, रानू साहू, समीर विश्नोई और व्यवसायी सूर्यकांत तिवारी को अंतरिम जमानत दी। हालांकि, कोर्ट ने इन चारों को छत्तीसगढ़ राज्य में रहने पर प्रतिबंध लगाया है, यह कहते हुए कि वे जांच को प्रभावित कर सकते हैं।

जमानत की शर्तें

  • आरोपियों को रिहाई के एक सप्ताह के भीतर राज्य के बाहर अपने निवास का पता जांच एजेंसी और संबंधित थाना को सूचित करना होगा।

  • उन्हें अपने पासपोर्ट विशेष अदालत में जमा करने होंगे।

  • वे गवाहों से संपर्क नहीं कर सकते और न ही साक्ष्यों से छेड़छाड़ कर सकते हैं; ऐसा करना अंतरिम जमानत का दुरुपयोग माना जाएगा।

  • उन्हें जांच एजेंसी और ट्रायल कोर्ट के समक्ष आवश्यकतानुसार उपस्थित होना होगा।

अन्य मामलों में गिरफ्तारी

हालांकि, इन आरोपियों को अंतरिम जमानत मिली है, लेकिन वे अन्य मामलों में भी आरोपी हैं। विशेष रूप से, जिला खनिज निधि (DMF) घोटाले में इन पर गंभीर आरोप हैं। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इस मामले में उनकी जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं, जिससे वे फिलहाल जेल में ही रहेंगे।

निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट ने कोयला लेवी घोटाले में आरोपियों को अंतरिम जमानत दी है, लेकिन अन्य मामलों में आरोपित होने के कारण वे जेल में ही रहेंगे। कोर्ट ने उन्हें छत्तीसगढ़ से बाहर रहने और जांच में सहयोग करने की सख्त शर्तें दी हैं।

छत्तीसगढ़ में 10,000 से अधिक स्कूलों का एकीकरण, शिक्षकों में बढ़ी चिंता, आंदोलन की चेतावनी

छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में 10,463 सरकारी स्कूलों का युक्तियुक्तकरण (रैशनलाइजेशन) किया है, जिसका उद्देश्य शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार और संसाधनों का बेहतर उपयोग है। हालांकि, इस निर्णय से शिक्षकों में असंतोष व्याप्त है, क्योंकि इससे लगभग 43,000 शिक्षकों की नौकरियों पर खतरा मंडरा रहा है। शिक्षक संघों का कहना है कि इस नीति से सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता प्रभावित होगी और शिक्षकों पर कार्यभार बढ़ेगा।

शिक्षकों के अनुसार, कई स्कूलों में पहले से ही एक या कोई शिक्षक नहीं है, और इस नीति से स्थिति और बिगड़ सकती है। राज्य में वर्तमान में छात्र-शिक्षक अनुपात 22 से 26 के बीच है, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुसार स्वीकार्य है। हालांकि, शिक्षकों को आशंका है कि युक्तियुक्तकरण से यह संतुलन बिगड़ सकता है।

शिक्षक संघों ने सरकार को दो दिन का अल्टीमेटम दिया है और चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो वे 31 मई से संभाग स्तर पर धरना प्रदर्शन शुरू करेंगे। इस आंदोलन में 23 शिक्षक संगठनों ने भाग लेने की घोषणा की है।

सरकार का कहना है कि यह कदम शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और संसाधनों के समान वितरण के लिए आवश्यक है। हालांकि, शिक्षकों का मानना है कि यह नीति शिक्षकों की संख्या में कटौती और सरकारी स्कूलों को कमजोर करने की दिशा में उठाया गया कदम है।

इस मुद्दे पर सरकार और शिक्षकों के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है, और आने वाले दिनों में यह आंदोलन और तेज हो सकता है।

मर्ज होने वाले स्कूलों की संख्या

जिला – स्कूल
बिलासपुर – 431
मुंगेली – 337
कोरबा – 469
जांजगीर-चांपा – 366
रायगढ़ – 557
सक्ती – 342
सारंगढ़-बिलाईगढ़ – 378
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही – 205

गरियाबंद में 6 वर्षीय बालक की नदी में डूबने से मौत, परिजनों में शोक की लहर

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के नवापारा नगर में एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां 6 वर्षीय बालक प्रेयस साहू का शव नदी से बरामद किया गया। प्रेयस गुरुवार सुबह करीब 11 बजे घर से निकला था, लेकिन दोपहर तक वापस न लौटने पर परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। इस दौरान किसी ने सूचना दी कि एक साइकिल नदी किनारे लावारिस हालत में पड़ी है। परिजन मौके पर पहुंचे और साइकिल की पहचान कर तत्काल पुलिस को सूचना दी।

स्थानीय पुलिस और मोहल्लेवालों की मदद से नदी में सर्च अभियान चलाया गया, जिसके बाद कुछ देर में बालक का शव बरामद किया गया। शव को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित किया। पुलिस ने पंचनामा और प्रारंभिक पोस्टमॉर्टम कार्यवाही पूरी कर शव परिजनों को सौंप दिया है।

प्रेयस की माता आंगनबाड़ी सहायिका हैं, जबकि पिता कृषि उपज मंडी में कार्यरत हैं। बालक की असमय मौत से नगर में शोक की स्थिति है और परिजन गहरे सदमे में हैं। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और मौत के कारणों की स्पष्ट जानकारी विस्तृत पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगी।

छत्तीसगढ़ में तेंदुए की खाल के साथ तीन शिकारी गिरफ्तार, वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत मामला दर्ज

छत्तीसगढ़ के उडांति-सितानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कार्रवाई की गई है। मंगलवार को, वन विभाग की संयुक्त टीम ने ओडिशा के नबरंगपुर वन प्रभाग और छत्तीसगढ़ के वन विभाग के सहयोग से, धुगियामुड़ा गांव में एक गुप्त सूचना के आधार पर तीन व्यक्तियों को गिरफ्तार किया। इनके पास से एक तेंदुए की खाल बरामद की गई, जिसकी लंबाई 195 सेंटीमीटर थी और जो जहर से मरे होने के संकेत दे रही थी। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान किशोर महानंद (33), करट छत्रिया (36) और लखी मझी (29) के रूप में हुई है। इनके पास से एक मोटरसाइकिल, तीन मोबाइल फोन और अन्य साक्ष्य भी जब्त किए गए हैं।

आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि तेंदुए को एक साल पहले मारा गया था और वे उसकी खाल को बेचने की योजना बना रहे थे। इस मामले में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है और आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। वन विभाग की टीम अब इस गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी हुई है।

यह गिरफ्तारी वन्यजीवों की सुरक्षा और अवैध शिकार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की सफलता को दर्शाती है। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत तेंदुए जैसे संरक्षित प्रजातियों का शिकार और उनके अंगों का व्यापार अपराध माना जाता है, जिसके लिए कठोर दंड का प्रावधान है। इस कार्रवाई से यह संदेश जाता है कि वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए विभाग पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और अवैध शिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए विभाग की यह पहल सराहनीय है और इसे अन्य क्षेत्रों में भी लागू किया जाना चाहिए ताकि हमारे वन्यजीवों को सुरक्षित रखा जा सके।

छत्तीसगढ़ में सर्दी, खांसी और बुखार वाले मरीजों की पोर्टल पर एंट्री अनिवार्य, स्वास्थ्य विभाग का आदेश

छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग ने सर्दी, खांसी, जुकाम और बुखार जैसे लक्षणों वाले मरीजों की पोर्टल पर ऑनलाइन एंट्री अनिवार्य कर दी है। यह कदम संभावित कोरोना संक्रमण और अन्य श्वसन संबंधी बीमारियों की निगरानी और प्रबंधन को प्रभावी बनाने के लिए उठाया गया है।

स्वास्थ्य आयुक्त डॉ. प्रियंका शुक्ला ने सभी सरकारी और निजी अस्पतालों को निर्देशित किया है कि वे आईएचआईपी पोर्टल पर इन मरीजों की एंट्री करें। इसके लिए निर्धारित “एल-फॉर्म” का उपयोग किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, मितानिनों के माध्यम से समुदाय स्तर पर लक्षणों की रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है।

राज्य में अब तक कोरोना के तीन मरीज मिल चुके हैं, जिनमें से सभी में हल्के लक्षण पाए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों में आवश्यक दवाइयों और सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इलाज के बाद भी यदि मरीज ठीक नहीं होते हैं, तो उनका स्वाब सैंपल लेकर कोरोना जांच करवाई जाएगी। जरूरत पड़ने पर उनके सैंपल जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजे जाएंगे।

स्वास्थ्य विभाग ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे सर्दी, खांसी, जुकाम और बुखार जैसे लक्षणों के प्रति सतर्क रहें और उचित स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाएं।

छत्तीसगढ़ में आकाशीय बिजली गिरने से दो लोगों की मौत, आठ घायल

छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों में हाल ही में हुई तेज बारिश और आंधी-तूफान के दौरान आकाशीय बिजली गिरने की घटनाओं में दो लोगों की मौत हो गई और आठ अन्य घायल हो गए।

बलौदाबाजार जिले के पहंदा गांव में गुरुवार दोपहर करीब 3:00 से 3:30 बजे के बीच 26 वर्षीय प्रतीक कोसले की आकाशीय बिजली की चपेट में आने से मौत हो गई। वह बारिश से बचने के लिए पुराने आंगनबाड़ी भवन के पास आठ बच्चों के साथ रुके हुए थे। बिजली गिरने से प्रतीक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि आठ बच्चे घायल हो गए। सभी घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। कलेक्टर दीपक सोनी ने घायलों के बेहतर इलाज के निर्देश दिए हैं और मृतक के परिजनों को सहायता राशि प्रदान करने की बात कही है।

कोरबा जिले में हसदेव नदी किनारे स्थित जंगल में लकड़ी लेने गई 30 वर्षीय महिला सविता मांझी की आकाशीय बिजली की चपेट में आने से मौत हो गई। वह ग्राम जोगियाडेरा, कोहड़िया, बालकोनगर थाना क्षेत्र की निवासी थीं और अपनी देवरानी के साथ जंगल में लकड़ी लेने गई थीं। इसी दौरान मौसम खराब होने से आकाशीय बिजली गिरी, जिससे सविता की मौके पर ही मौत हो गई। एक सप्ताह में कोरबा जिले में आकाशीय बिजली गिरने से दो लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि डेढ़ दर्जन से अधिक बकरियां भी मारी गई हैं।

मौसम विभाग ने छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में आगामी दिनों में भारी बारिश और आकाशीय बिजली गिरने की संभावना जताई है। लोगों को सावधानी बरतने और खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है।

धमतरी में भाजपा कार्यालय में तोड़फोड़: 7 कार्यकर्ताओं को पार्टी से निष्कासित

छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यालय में तोड़फोड़ और आगजनी की घटना के बाद पार्टी ने कड़ा कदम उठाते हुए 7 कार्यकर्ताओं को तत्काल प्रभाव से निष्कासित कर दिया है। यह कार्रवाई पार्टी के अनुशासन और संगठन की गरिमा को ठेस पहुँचाने के आरोप में की गई है। 

निष्कासित कार्यकर्ताओं के नाम:

  • निखिल साहू – भारतीय जनता युवा मोर्चा, प्रदेश कार्य समिति के सदस्य

  • शैलेन्द्र धेनुसेवक – नगरी मंडल, पिछड़ा वर्ग मोर्चा के मंडल अध्यक्ष

  • सुनील निर्मलकर – युवा मोर्चा के मंडल अध्यक्ष

  • भोला शर्मा – सक्रिय कार्यकर्ता

  • गज्जू शर्मा – सक्रिय कार्यकर्ता

  • संत कोठारी – सक्रिय कार्यकर्ता

  • रवेंद्र सिंह – सक्रिय कार्यकर्ता

  • इन सभी कार्यकर्ताओं को पार्टी से 6 वर्षों के लिए निष्कासित किया गया है।

घटना का पृष्ठभूमि:

यह घटना धमतरी जिला पंचायत अध्यक्ष के टिकट वितरण को लेकर हुए विवाद के बाद सामने आई। टिकट को लेकर पार्टी नेताओं के बीच तीखी बहस और संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हो गई थी, जो इतना बढ़ गया कि पार्टी के स्थानीय कार्यालय में तोड़फोड़ और आगजनी की घटना घटित हुई।

पार्टी का रुख:

भाजपा ने इस कार्रवाई के माध्यम से स्पष्ट संदेश दिया है कि अनुशासनहीनता और संगठन विरोधी गतिविधियों के लिए पार्टी में कोई स्थान नहीं है। पार्टी के वरिष्ठ सूत्रों के अनुसार, यह घटना संगठन के अनुशासन और प्रतिष्ठा के खिलाफ है, जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

आदेश का निष्पादन:

इस मामले को संज्ञान में लेते हुए भाजपा छत्तीसगढ़ की प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंहदेव ने कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद, प्रदेश महामंत्री एवं मुख्यालय प्रभारी रामू रोहरा ने आधिकारिक आदेश जारी कर सातों नेताओं को निष्कासित करने की घोषणा की।

यह घटना पार्टी के अनुशासन और संगठन की गरिमा को बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है।