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CCPL 2025: 6 जून से शुरू होगा क्रिकेट का महासंग्राम, आज रायपुर में दिखेगी ट्रॉफी की झलक, फ्री वीआईपी टिकटों की बुकिंग भी शुरू

छत्तीसगढ़ में क्रिकेट को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित छत्तीसगढ़ क्रिकेट प्रीमियर लीग (CCPL) के दूसरे संस्करण की शुरुआत 6 जून से होने जा रही है। टूर्नामेंट से पहले ट्रॉफी को प्रदेश के विभिन्न शहरों में प्रदर्शित किया जा रहा है। इसी कड़ी में 1 जून, रविवार को यह ट्रॉफी राजधानी रायपुर पहुंचेगी।

रायपुर में ट्रॉफी का प्रदर्शन और खिलाड़ियों से मुलाकात

ट्रॉफी का भव्य प्रदर्शन रविवार शाम 7 बजे मरीन ड्राइव, तेलीबांधा में किया जाएगा। इस दौरान मौजूदा चैंपियन रायपुर रायनोस टीम के सभी खिलाड़ी मौजूद रहेंगे, जिससे रायपुरवासियों को टीम से मिलने और तस्वीरें खिंचवाने का मौका मिलेगा।

नवा रायपुर में होंगे सभी मुकाबले

CCPL 2025 के सभी मैच शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम, नवा रायपुर में खेले जाएंगे। यह टूर्नामेंट युवाओं में क्रिकेट के प्रति बढ़ती दिलचस्पी का प्रतीक बनता जा रहा है।

फ्री वीआईपी टिकट बुकिंग शुरू

टूर्नामेंट के लिए मुफ्त वीआईपी टिकटों की बुकिंग भी शुरू हो गई है। इच्छुक दर्शक TicketGenie मोबाइल ऐप के जरिए अपने मोबाइल नंबर से लॉगिन करके टिकट बुक कर सकते हैं। हर दिन के लिए पहले 500 दर्शकों को फ्री टिकट मिलेंगे, और एक व्यक्ति अधिकतम दो टिकट ले सकता है। टिकट बुक करने के बाद प्राप्त क्यूआर कोड के माध्यम से स्टेडियम में प्रवेश किया जा सकेगा।

क्रिकेट प्रेमियों के लिए सुनहरा मौका

यह आयोजन न केवल रोमांचक मुकाबले पेश करेगा, बल्कि दर्शकों को अपने पसंदीदा खिलाड़ियों से मिलने और बेहतरीन क्रिकेट का आनंद लेने का अवसर भी देगा।

किराए पर मकान देने वाले मकान मालिक रहें सावधान! नए आदेश का उल्लंघन करने पर होगी कार्रवाई

छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में पुलिस अधीक्षक (एसपी) विजय कुमार पांडेय के कार्यभार संभालने के बाद से कानून व्यवस्था को सख्ती से लागू किया जा रहा है। हाल ही में एसपी द्वारा जारी एक अहम आदेश ने जिले के मकान मालिकों को सतर्क कर दिया है। अब मकान मालिकों को अपने किराएदारों की पूरी जानकारी पुलिस थाने में जमा करना अनिवार्य कर दिया गया है। ऐसा न करने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

मकान मालिकों को जारी किया गया सख्त निर्देश

पुलिस प्रशासन का कहना है कि जिले में बाहरी राज्यों और जिलों से आकर कई लोग किराए पर रह रहे हैं। इनमें से कुछ की आपराधिक पृष्ठभूमि हो सकती है, जो अपराध करके रिहायशी इलाकों में छिप जाते हैं, जिससे शांति व्यवस्था और नागरिकों की सुरक्षा को खतरा हो सकता है।

इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए एसपी ने कलेक्टर और जिला दंडाधिकारी से समन्वय कर यह निर्देश जारी करवाया है कि सभी मकान मालिक अपने किराएदारों का नाम, पता, मोबाइल नंबर, और वैध पहचान पत्र की जानकारी संबंधित पुलिस थाने में अनिवार्य रूप से जमा करें।

संदिग्ध गतिविधि की जानकारी देना होगा जरूरी

अगर किसी किराएदार या आगंतुक द्वारा संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिलती है तो उसकी जानकारी तुरंत पुलिस को देना आवश्यक होगा।

किसे न दें मकान किराए पर?

यदि कोई किराएदार अपना सही नाम, पता या पहचान छिपाता है, तो ऐसे व्यक्ति को मकान किराए पर देना पूरी तरह वर्जित रहेगा। मकान मालिक को उसके पहचान पत्र की जांच करने और पुलिस को सूचित करने के बाद ही किराया देना होगा।

जो मकान मालिक इस आदेश का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 223 के तहत कार्रवाई की जाएगी।

डिप्टी कलेक्टर की फर्जी नंबर प्लेट लगाकर युवती से वसूली की कोशिश, दो युवक गिरफ्तार

दुर्ग जिले के अंजोरा क्षेत्र में एक कॉलेज छात्रा से एक लाख रुपए की जबरन वसूली का प्रयास करने वाले दो युवकों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने डिप्टी कलेक्टर का फर्जी नंबर प्लेट लगाकर युवती को डराने और धमकाने की कोशिश की थी।

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार आरोपी वैभव भारती गोस्वामी उर्फ दाऊ और उसका साथी प्रियम जैन 29 मई को एक कार में कॉलेज पहुंचे, जिस पर ‘डिप्टी कलेक्टर’ लिखा हुआ था। उन्होंने कॉलेज परिसर में युवती से मुलाकात की और उससे एक लाख रुपए की मांग की। रकम न देने पर उन्होंने उसके पूर्व प्रेम संबंध का खुलासा करने और जान से मारने की धमकी दी। जब युवती के दोस्त वहां पहुंचे, तो दोनों आरोपी गाली-गलौज करते हुए मौके से फरार हो गए।

एएसपी पद्मश्री तवर ने बताया कि पीड़िता और वैभव के बीच पहले प्रेम संबंध थे, लेकिन बाद में आरोपी उसे सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक मैसेज भेजने लगा। युवती ने उससे रिश्ता तोड़कर उसे ब्लॉक कर दिया था।

पुलिस को 30 मई को सूचना मिली कि आरोपी रायपुर भागने की फिराक में हैं। इस पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने दोनों को दुर्ग बस स्टैंड से गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपियों ने कबूला कि उन्होंने रायपुर से किराए की कार ली थी और उसकी नंबर प्लेट हटाकर ‘डिप्टी कलेक्टर’ लिखा हुआ फर्जी प्लेट लगाई थी, जिससे युवती को डरा-धमकाकर पैसे ऐंठे जा सकें।

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 308(2), 308(4), 296, 351(3), और 3(5) के तहत मामला दर्ज कर लिया है। साथ ही घटनास्थल से कार, मोबाइल फोन और असली नंबर प्लेट को भी बरामद कर लिया गया है।

छत्तीसगढ़ कोल और डीएमएफ घोटाले के आरोपी IAS रानू साहू समेत 6 लोगों को जेल से रिहाई, सुप्रीम कोर्ट की शर्तों के साथ राज्य से बाहर रहना अनिवार्य

छत्तीसगढ़ में बहुचर्चित कोल और डीएमएफ घोटाले में गिरफ्तार किए गए निलंबित IAS अधिकारी रानू साहू, समीर विश्नोई, राज्य सेवा की अधिकारी सौम्या चौरसिया, रजनीकांत तिवारी, वीरेंद्र जायसवाल और संदीप नायक को जेल से रिहा कर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद शुक्रवार को रायपुर स्थित प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) की विशेष अदालत में आदेश की प्रति प्रस्तुत की गई थी, लेकिन शाम सात बजे जेल पहुंचने की वजह से उसी दिन रिहाई नहीं हो सकी थी। आज सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उन्हें जेल से छोड़ा गया।

सुप्रीम कोर्ट की शर्तें – राज्य से बाहर रहना होगा

सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देते समय स्पष्ट शर्त रखी है कि सभी आरोपियों को अगली सूचना तक छत्तीसगढ़ राज्य से बाहर रहना होगा। उन्हें अपने निवास स्थान और अन्य जानकारी स्थानीय अदालत को देना अनिवार्य होगा। केवल जब जांच एजेंसी या ट्रायल कोर्ट उन्हें बुलाएगी, तभी वे राज्य में प्रवेश कर सकेंगे। इसके अलावा सभी आरोपियों को अपने पासपोर्ट विशेष अदालत में जमा करने होंगे।

गिरफ्तारी और मामले की पृष्ठभूमि

ईडी ने कोल घोटाले में समीर विश्नोई को 13 अक्टूबर 2022, सौम्या चौरसिया को 2 दिसंबर 2022 और रानू साहू को 22 जुलाई 2023 को गिरफ्तार किया था। बाद में ईओडब्ल्यू ने कोल और डीएमएफ दोनों मामलों में प्राथमिकी दर्ज की थी।

कुछ आरोपियों की रिहाई अभी लंबित

सूर्यकांत और निखिल चंद्राकर को सुप्रीम कोर्ट से जमानत तो मिल गई है, लेकिन डीएमएफ मामले की अगली सुनवाई 18 जून को होनी है। जब तक यह सुनवाई नहीं होती, तब तक उन्हें जेल से रिहाई नहीं मिलेगी।

यह मामला राज्य में प्रशासनिक भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों को उजागर करता है, और आने वाले समय में इसकी सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी होंगी।

यूट्यूब से सीखा चोरी का तरीका, शोरूम से 17 iPhone उड़ाए, 5 आरोपी गिरफ्तार

रायपुर। सरस्वती नगर थाना क्षेत्र में स्थित जीई रोड पर एक इलेक्ट्रॉनिक्स शोरूम से चोरी की बड़ी वारदात सामने आई है। पुलिस ने इस मामले में 5 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें चोरी करने वाला मुख्य आरोपी और चोरी का माल खरीदने वाले चार अन्य शामिल हैं। मुख्य आरोपी मयंक दीक्षित ने चोरी की योजना यूट्यूब वीडियो देखकर बनाई थी।

शौक के चलते बढ़ा कर्ज, बना चोर

पुलिस के अनुसार, मयंक दीक्षित एक बड़े कारोबारी परिवार से ताल्लुक रखता है, लेकिन अपने महंगे शौकों के कारण उसने काफी उधार ले रखा था। कर्ज चुकाने के लिए उसने चोरी का रास्ता अपनाया। उसने ऑनलाइन हथौड़ी मंगवाई और यूट्यूब पर वीडियो देखकर शोरूम में चोरी की प्लानिंग की।

रिलायंस डिजिटल से की चोरी

मयंक दीक्षित रात को दोपहिया वाहन से जीई रोड स्थित रिलायंस डिजिटल स्टोर पहुंचा। निर्माणाधीन इमारत के सहारे वह स्टोर के पहले मंजिल तक पहुंचा और हथौड़ी से शीशा तोड़कर भीतर घुसा। वहां से 17 iPhone, घड़ियां और अन्य कीमती सामान चुराकर भाग निकला।

चोरी का सामान सस्ते में बेचा, फर्जी बिल भी बनाया

अगले दिन मयंक ने चोरी किए गए मोबाइल सस्ते दामों में जान-पहचान के लोगों को बेच दिए। उसने ओला ड्राइवर चंदन वर्मा को 4 मोबाइल, कारोबारी अमित अग्रवाल को 8, आशीष लखवानी को 1 और निखिल गर्ग को 2 मोबाइल दिए। इसके लिए उसने रविभवन से फर्जी बिल भी बनवाया।

सभी गिरफ्तार, 20 लाख का माल बरामद

पुलिस ने छानबीन कर सभी आरोपियों को पकड़ लिया और उनके पास से चोरी का पूरा माल बरामद किया। कुल मिलाकर करीब 20 लाख रुपये का सामान जब्त किया गया। पुलिस की इस कार्रवाई में सरस्वती नगर थाना और क्राइम ब्रांच की विशेष भूमिका रही।

सीसीटीवी फुटेज से खुला राज

पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज की मदद से आरोपी मयंक दीक्षित को गिरफ्तार किया। पूछताछ में उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने बताया कि वह चोरी से पहले कई बार शोरूम जाकर रेकी कर चुका था।

पांच महीनों में 8,000 लोग पहुंचे नशामुक्ति केंद्र, लगातार चलाए जा रहे हैं जागरुकता अभियान

नशे की लत अब समाज के हर वर्ग तक पहुंच चुकी है, जिसमें किशोर और युवा भी बड़ी संख्या में शामिल हैं। इसके गंभीर परिणामस्वरूप लोग कैंसर समेत कई जानलेवा बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। हालांकि, एक सकारात्मक पहलू यह है कि बड़ी संख्या में लोग नशा छोड़ने के लिए सामने आ रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिला अस्पताल के नशामुक्ति केंद्र में जनवरी से मई 2025 तक कुल 8177 लोग इलाज के लिए पहुंचे हैं। सभी को उनकी स्थिति के अनुसार इलाज व परामर्श प्रदान किया जा रहा है। मरीजों को हर 15 दिन या 1 से 3 महीने के भीतर फॉलोअप के लिए बुलाया जा रहा है ताकि उन्हें स्थायी रूप से नशे से मुक्ति दिलाई जा सके।

राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के तहत चल रहा जनजागरण

सरकार द्वारा चलाए जा रहे राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत जिले भर में 110 से अधिक जागरुकता कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। इनमें स्कूली छात्रों और विभिन्न विभागों के कर्मचारियों को तंबाकू से होने वाले नुकसान के बारे में जानकारी दी गई और तंबाकू छोड़ने के लिए प्रेरित किया गया।

विशेष जागरुकता कार्यक्रम आज

विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर शुक्रवार को सुबह 11 बजे भिलाई नगर निगम में विशेष नशामुक्ति जागरुकता कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इसमें लोगों को तंबाकू के खतरों के बारे में बताया जाएगा और इससे छुटकारा पाने के उपायों पर चर्चा की जाएगी।

कोटपा एक्ट के तहत कार्रवाई जारी

फूड और ड्रग विभाग ने पिछले पांच महीनों में तंबाकू बेचने वाले विक्रेताओं पर कोटपा अधिनियम के तहत 19,500 रुपए की चालानी कार्रवाई की है। दुर्ग जिले के भिलाई, धमधा और पाटन जैसे क्षेत्रों में 10 से 200 रुपए तक के चालान काटे गए हैं। बावजूद इसके तंबाकू की अवैध बिक्री जारी है। इसे रोकने के लिए अब एसपी और नगर निगम अधिकारियों के साथ मिलकर सख्त कदम उठाए जाएंगे। खासकर स्कूलों और अस्पतालों के 100 गज के दायरे में तंबाकू बेचने वालों पर कार्रवाई तेज की जाएगी।

हर साल 8 लाख मौतें, WHO ने बताया गंभीर खतरा

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत में हर साल तंबाकू सेवन से लगभग 8 लाख लोग जान गंवाते हैं। यानी हर दिन औसतन 2200 लोगों की मौत तंबाकू से जुड़ी बीमारियों के कारण होती है। कैंसर, दिल की बीमारी और सांस संबंधी रोगों के प्रमुख कारणों में तंबाकू का नाम सबसे ऊपर है। तंबाकू निषेध दिवस का उद्देश्य लोगों को इस लत से बाहर निकालकर स्वस्थ जीवन की ओर प्रेरित करना है।

धमतरी जिले में किसानों को मिलेगा 300 करोड़ का कृषि ऋण, खरीफ फसल की तैयारी जोरों पर

छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में खरीफ सीजन 2022 के लिए 1.38 लाख हेक्टेयर में धान समेत अन्य फसलें उगाने का लक्ष्य तय किया गया है। किसानों को कृषि कार्यों में सहायता प्रदान करने के लिए सरकार ने इस वर्ष 300 करोड़ रुपये का कृषि ऋण वितरण करने की योजना बनाई है। जिले की विभिन्न सहकारी समितियों के माध्यम से अब तक 25,629 किसान 92 करोड़ 6 लाख 99 हजार रुपये का ऋण प्राप्त कर चुके हैं।

कर्ज लेने में गातापार के किसान सबसे आगे हैं। यहां के 889 किसानों ने अब तक 3 करोड़ 6 लाख 49 हजार रुपये का कर्ज लिया है। वहीं, पिछली बार के सीजन में 1,831 किसानों ने 6 करोड़ 73 लाख रुपये का ऋण लिया था और निर्धारित समय सीमा में 1,937 किसानों ने कर्ज लिया। इनमें से 1,922 किसानों ने कर्ज की राशि भी चुका दी है, जबकि अब भी 16 किसानों से 5 लाख 83 हजार रुपये की वसूली शेष है।

कुछ किसान ऐसे भी हैं जिन्होंने अब तक अपने पूर्व के ऋण का भुगतान नहीं किया है। ऐसे किसानों को वर्तमान योजना के अंतर्गत किसी प्रकार की सहायता नहीं दी जा रही है। जब तक वे बकाया चुकता नहीं करते, उन्हें खाद, बीज और अन्य कृषि सामग्री उपलब्ध नहीं कराई जाएगी।

कर्ज वितरण के मामले में फरसियां गांव सबसे पीछे है। यहां केवल 181 किसानों ने कुल 35 लाख 15 हजार रुपये का कर्ज लिया है। इस साल 30 सितंबर तक 300 करोड़ रुपये का वितरण लक्ष्य पूरा करने की योजना है।

सहकारिता विभाग के नोडल अधिकारी बलरामपुरी गोस्वामी ने बताया कि किसानों को सहकारी बैंकों से ऋण मुहैया कराया जा रहा है। जिन किसानों ने पूर्व में लिया गया कर्ज नहीं चुकाया है, उन्हें इस बार ऋण नहीं मिलेगा।

पिछले कुछ वर्षों में भी ऋण वितरण की स्थिति यही रही है। खरीफ सीजन 2013 में 64,817 किसानों को 265 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज दिया गया था, जिसमें से 64,453 किसानों ने 244 करोड़ रुपये से अधिक राशि चुका दी थी। लेकिन 364 किसान अब भी 1 करोड़ 6 लाख रुपये का बकाया नहीं चुका पाए हैं।

इसके अलावा कई किसान जो दस्तावेजों की कमी या पंजीयन की समस्याओं के कारण सरकारी ऋण योजना का लाभ नहीं ले पा रहे हैं, वे साहूकारों से ऊंची ब्याज दर पर कर्ज लेने को मजबूर हैं।

सरकार द्वारा की गई इस पहल से उम्मीद की जा रही है कि जिले के किसानों को कृषि कार्यों में बड़ी राहत मिलेगी और खरीफ सीजन की फसल उत्पादन में वृद्धि होगी।

कोरबा में शुरू हुई अतिशेष शिक्षकों की काउंसिलिंग, शिक्षकों ने चुने पसंदीदा विद्यालय

कोरबा, 31 मई 2025 – छत्तीसगढ़ शासन के निर्देशानुसार कोरबा जिले में अतिशेष प्रधान पाठकों और सहायक शिक्षकों की पदस्थापना के लिए काउंसिलिंग की प्रक्रिया का शुभारंभ हुआ। यह कार्यक्रम कलेक्टर अजीत वसंत की उपस्थिति में राजीव गांधी ऑडिटोरियम, ट्रांसपोर्ट नगर में आयोजित किया गया।

प्रक्रिया के प्रथम चरण में वरिष्ठता के आधार पर प्रधान पाठकों की काउंसिलिंग की गई, जिसमें उन्होंने उपलब्ध रिक्त पदों में से अपनी पसंद के विद्यालयों का चयन किया। इसके बाद सहायक शिक्षकों की काउंसिलिंग जारी रही, जहां उन्होंने भी तय सूची के आधार पर विद्यालय चयन किया।

कलेक्टर अजीत वसंत ने बताया कि शासन के निर्देशों के अनुरूप इस काउंसिलिंग प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया से जिले के दूरदराज के क्षेत्रों में शिक्षकविहीन या एकल शिक्षक वाले विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति होगी, जिससे विद्यार्थियों को नियमित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लाभ मिलेगा।

काउंसिलिंग में भाग लेने वाले शिक्षकों को चयन के तुरंत बाद नवीन पदस्थापना आदेश भी सौंपे जा रहे हैं। प्राथमिक शाला जेन्जरा की शिक्षिका देकुमारी साहू ने काउंसिलिंग प्रक्रिया की प्रशंसा करते हुए बताया कि वे अब ढेलवाडीह स्कूल में शिक्षा का कार्यभार संभालेंगी और पसंद का विद्यालय मिलने पर उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की।

इस पहल से जिले में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

पत्नी की हत्या के बाद फरार हुआ पति, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हुआ सनसनीखेज खुलासा

रायपुर जिले के पुरानी बस्ती इलाके से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक युवक ने पहले अपनी पत्नी को शराब पिलाई और फिर फिनाइल पिलाकर बेरहमी से उसकी हत्या कर दी। घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया।

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, भाठागांव क्षेत्र में स्थित डोमनलाल साहू के मकान में रमेश गुप्ता नामक युवक गीता यादव के साथ रह रहा था। रमेश पेशे से ड्राइवर है और गीता को उसने पत्नी के रूप में रखा था। बताया जा रहा है कि गीता के पहले पति की मृत्यु हो चुकी थी। 13 फरवरी को गीता अपने कमरे में मृत अवस्था में पाई गई थी। उसके मुंह से झाग निकल रहा था और कमरे का दरवाजा बाहर से बंद था, जबकि रमेश वहां से फरार हो गया था।

मामले की जांच करते हुए पुरानी बस्ती थाना पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। अब आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ है कि महिला की मौत शराब और फिनाइल के सेवन से हुई है। रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने रमेश गुप्ता के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया है। आरोपी अभी भी फरार है और उसकी तलाश जारी है।

थाने में युवक ने खुद का गला रेतकर किया आत्महत्या का प्रयास

एक दूसरी चौंकाने वाली घटना मौदहापारा थाने में हुई, जहां एक युवक ने पुलिसकर्मी के सामने ही खुद का गला काट लिया। युवक ने “मुझे मरना है” कहते हुए अचानक यह खौफनाक कदम उठा लिया। गंभीर रूप से घायल युवक को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज जारी है।

फिलहाल युवक ने यह कदम क्यों उठाया, इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है। मौदहापारा पुलिस इस घटना की भी जांच कर रही है।

कोरबा डीएमएफ घोटाला: चार पूर्व सीईओ की जमानत याचिका कोर्ट ने की खारिज, अब तक 90.48 करोड़ के गबन का खुलासा

कोरबा जिले की जनपद पंचायत से जुड़े बहुचर्चित डीएमएफ घोटाले में शामिल चार पूर्व मुख्य कार्यपालन अधिकारियों (सीईओ) की जमानत याचिकाएं शुक्रवार को विशेष ईओडब्ल्यू न्यायालय ने खारिज कर दीं। इन अधिकारियों पर करीब 90 करोड़ 48 लाख रुपये के वित्तीय अनियमितता का आरोप है।

जमानत के लिए आवेदन करने वालों में डीएमएफटी के पूर्व नोडल अधिकारी भरोसाराम ठाकुर, और पूर्व जनपद सीईओ भुनेश्वर सिंह राज, राधेश्याम मिर्झा तथा वीरेंद्र कुमार राठौर शामिल हैं। इन सभी ने अदालत में दलील दी कि उन्हें जांच के लिए बुलाकर झूठे मामले में फंसाया गया है और चूंकि 27 मई 2025 को मामले में चालान पेश किया जा चुका है, इसलिए अब साक्ष्यों से छेड़छाड़ की कोई गुंजाइश नहीं है। उन्होंने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि जमानत मिलने पर वे सभी शर्तों का पालन करेंगे।

हालांकि, अभियोजन पक्ष ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि अपराध की गंभीरता, गबन की राशि की अधिकता और साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की संभावनाओं को देखते हुए जमानत नहीं दी जानी चाहिए। कोर्ट ने अभियोजन की दलीलों को स्वीकार करते हुए सभी आरोपियों की जमानत याचिका को खारिज कर दिया।

अब तक की जांच में डीएमएफ (जिला खनिज निधि) से जुड़ी परियोजनाओं में 90 करोड़ 48 लाख रुपये के घोटाले का खुलासा हो चुका है, और मामले में आगे भी जांच जारी है।