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भिलाई में कॉन्स्टेबल पर नाबालिग से रेप का आरोप, पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज, आरोपी फरार

दुर्ग, छत्तीसगढ़: दुर्ग जिले में एक पुलिस कॉन्स्टेबल पर नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार का गंभीर आरोप लगा है। आरोपी विवेक पोद्दार के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई है, लेकिन वह फरार है।

घटना की भयावह जानकारी

पीड़िता के अनुसार, आरोपी कॉन्स्टेबल ने उसके घर में घुसकर उसके साथ दुष्कर्म किया। जब उसने चिल्लाने की कोशिश की, तो उसने उसके कपड़े फाड़ दिए, मुंह दबाया और मारपीट कर धमकी दी कि अगर किसी को बताया तो जान से मार देगा। यह घटना भिलाई के छावनी थाना क्षेत्र की है।

लगातार अत्याचार और परिवार की लापरवाही

पीड़िता ने बताया कि पहली बार 2021 में जब वह घर पर अकेली थी, तो आरोपी ने उसका शोषण किया। उसने अपनी मां और भाई को बताया, लेकिन उन्होंने उसकी बात नहीं मानी और आरोपी को बचाने की कोशिश की। इसके बाद आरोपी ने बार-बार उसके साथ दुर्व्यवहार किया।

बाद में, पीड़िता ने मई 2023 में अपने मोहल्ले के एक युवक से शादी कर ली ताकि वह इस अत्याचार से बच सके। लेकिन उसकी मां ने आरोपी के दबाव में आकर पुलिस में झूठी शिकायत दर्ज करा दी कि उसकी बेटी का अपहरण और बलात्कार हुआ है। हालांकि, पीड़िता ने अपने जन्म प्रमाण पत्र के जरिए साबित किया कि शादी के वक्त वह वयस्क थी।

आरोपी का आपराधिक इतिहास

विवेक पोद्दार पहले बेमेतरा में तैनात था और उस पर पहले भी गैरकानूनी हरकतों के आरोप लग चुके हैं। 2024 में उसे एक मामले में निलंबित किया गया था, जहां उस पर गैंगस्टर दीपक नेपाली के इशारे पर किसी के वाहन में नकली गांजा और पिस्तौल रखकर फंसाने का आरोप था।

पुलिस जांच जारी

एएसपी पद्मश्री तंवर ने बताया कि आरोपी की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। उन्होंने कहा, “पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए तेजी से कार्रवाई की जा रही है।”

यह मामला सुरक्षा बलों में काम करने वाले कुछ अधिकारियों की आपराधिक गतिविधियों पर सवाल खड़ा करता है, जिसके बाद सख्त कार्रवाई की मांग की जा रही है।

पत्रकारों से मारपीट करने वाले बाउंसरों की रिहाई पर हुआ जश्न, माला पहनाकर किया स्वागत, पुलिस बनी दर्शक

छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में पत्रकारों से मारपीट करने वाले बाउंसरों को जेल से रिहा होते ही फूल-मालाओं से स्वागत कर जश्न मनाया गया। जिन आरोपियों को कुछ दिन पहले पुलिस ने अजीबोगरीब तरीके से सजा देते हुए आड़े-तिरछे बाल काटकर सड़क पर जुलूस निकाला था, अब वही आरोपी उसी सड़क पर माला पहनकर घूमते नजर आए। इस दौरान उनके स्वागत में जमकर पटाखे भी फोड़े गए।

हैरानी की बात यह रही कि जब यह पूरा घटनाक्रम चल रहा था, उस दौरान पुलिसकर्मी भी वहां मौजूद थे, लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की।

घटना की पूरी पृष्ठभूमि

यह मामला उस वक्त सुर्खियों में आया था जब उरला क्षेत्र में चाकूबाजी की एक घटना के बाद घायल को अंबेडकर अस्पताल लाया गया था। इसकी जानकारी मिलते ही कुछ टीवी पत्रकार मौके पर कवरेज के लिए पहुंचे। अस्पताल में तैनात प्राइवेट बाउंसर जतिन ने उन्हें अंदर जाने से रोका। इस पर जब पत्रकारों ने विरोध जताया, तो बाउंसर ने गाली-गलौज करते हुए धक्का-मुक्की शुरू कर दी।

बात बढ़ने पर अन्य पत्रकार भी वहां पहुंच गए। तभी बाउंसरों ने अपने साथियों को बुलाकर हमला कर दिया। इस हिंसक झड़प में कई पत्रकार घायल हो गए।

पत्रकार पर पिस्टल तानने का भी आरोप

हंगामे के दौरान बाउंसर वसीम अकरम उर्फ वसीम बाबू ने एक पत्रकार पर पिस्टल तान दी और जान से मारने की धमकी दी। पुलिस ने गंभीर धाराओं के तहत वसीम समेत चार आरोपियों—जतिन गंजीर, सूरज राजपूत, मोहन राव गौरी के खिलाफ केस दर्ज किया। पुलिस ने वसीम के पास से एक पिस्टल और 22 जिंदा कारतूस भी जब्त किए। इसके बाद चारों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।

जुलूस के बाद अब जश्न

पुलिस ने इन आरोपियों को पकड़ने के बाद शहर की सड़कों पर आड़े-तिरछे बाल काटकर जुलूस निकाला था। लेकिन अब जेल से रिहा होने के बाद यही आरोपी उसी जगह माला पहनकर जश्न मनाते घूमते नजर आए।

अस्पताल में बाउंसरों की मनमानी और ‘कमीशन राज’

इस पूरे मामले के बाद अंबेडकर अस्पताल प्रबंधन की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। सूत्रों की मानें तो अस्पताल में बाउंसरों की तैनाती में भारी कमीशन का खेल चलता है। आरोपी वसीम अकरम कई सरकारी संस्थानों में सुरक्षा ठेके चला रहा है। कुछ समय पहले उसका एक ऑडियो भी सामने आया था जिसमें वह नेताओं और अधिकारियों को कमीशन देने की बात करता हुआ सुना गया था।

कहा जा रहा है कि रसूखदार कैदियों को अस्पताल में विशेष सुविधा दिलवाने, उनके लिए फर्जी बीमारियों के बहाने अस्पताल में जगह दिलवाने और सुरक्षा देने का जिम्मा भी इन्हीं बाउंसरों के पास रहता है।

अब सवाल उठता है कि पत्रकारों से मारपीट करने वालों को किसके संरक्षण में इतनी जल्दी रिहा कर स्वागत किया जा रहा है, और पुलिस मूकदर्शक क्यों बनी रही?

फेसबुक पोस्ट से गरमाई सियासत: बीरगांव पार्षद की टिप्पणी पर बजरंग दल ने जताया विरोध, थाने में दर्ज कराई आपत्ति

बीरगांव नगर निगम के वार्ड क्रमांक 24 के पार्षद दिकेंद्र सिन्हा की एक फेसबुक पोस्ट ने विवाद को जन्म दे दिया है। उन्होंने हाल ही में एक वीडियो साझा करते हुए लिखा कि “दारू की भट्टी से बजरंग दल, क्रांति सेना और भाजपा के कार्यकर्ता अवैध वसूली करते हैं।” इस टिप्पणी के सामने आने के बाद बजरंग दल की ओर से तीव्र प्रतिक्रिया देखने को मिली।

इस मामले में बजरंग दल के संयोजक मोनू और पार्षद सिन्हा के बीच तीखी बहस और गाली-गलौज तक की नौबत आ गई। हालांकि विवाद बढ़ता देख पार्षद ने विवादित पोस्ट को फेसबुक से हटा लिया, लेकिन मामला शांत नहीं हुआ।

इसके बाद बजरंग दल के सैकड़ों कार्यकर्ता, खासकर बनजारी प्रखंड से जुड़े सदस्य, उरला थाना पहुंचे और पार्षद के खिलाफ शिकायत दर्ज करने की मांग की। सहसंयोजक वीरेंद्र विश्वकर्मा ने पार्षद के बयान को गैरजिम्मेदाराना बताया और कहा कि एक जनप्रतिनिधि को इस तरह के आरोपों से बचना चाहिए, जिससे किसी संगठन की छवि पर आंच आए।

उरला थाना प्रभारी बी.एल. चंद्राकर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

बढ़ते विवाद के बीच पार्षद दिकेंद्र सिन्हा ने दोबारा फेसबुक पर पोस्ट साझा कर माफी मांगी। उन्होंने लिखा कि उन्होंने जिसे संगठन से जुड़ा समझकर टिप्पणी की थी, वह वास्तव में किसी संगठन से संबंधित नहीं था, इसलिए वे क्षमा चाहते हैं।

इस घटनाक्रम ने स्थानीय राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है और फिलहाल पुलिस मामले की पड़ताल में जुटी हुई है।

बिलासपुर: अवैध प्लाटिंग पर नगर निगम की सख्ती, 142 प्लॉटों की रजिस्ट्री पर रोक की तैयारी

बिलासपुर नगर निगम ने शहर में बढ़ती अवैध प्लाटिंग पर सख्त कदम उठाते हुए सात क्षेत्रों में स्थित 142 भूखंडों की रजिस्ट्री पर रोक लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। नगर निगम आयुक्त अमित कुमार के निर्देश पर उप पंजीयक कार्यालय को पत्र भेजकर इन जमीनों की रजिस्ट्री पर रोक लगाने की मांग की गई है।

बिना स्वीकृति के कॉलोनी काटी जा रही

नगर निगम को राजस्व विभाग से मिली रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि मोपका, खमतराई, चांटीडीह, लिंगियाडीह, बिजौर, मंगला और तिफरा इलाकों में भू-स्वामियों द्वारा बिना ले-आउट प्लान और व्यपवर्तन के नियमों की अनदेखी करते हुए जमीनों को टुकड़ों में बांटकर अवैध रूप से बेचा जा रहा है। इससे ना केवल शहरी विकास की रूपरेखा प्रभावित हो रही है, बल्कि भवन निर्माण नक्शा स्वीकृति में भी परेशानियां आ रही हैं।

142 भूखंडों की सूची के साथ पत्र भेजा

नगर निगम ने उप पंजीयक को भेजे पत्र में संबंधित भूखंडों के मालिकों के नाम, खसरा नंबर और अन्य ज़रूरी जानकारी भी संलग्न की है। भेजी गई सूची के मुताबिक, मंगला क्षेत्र में 39, मोपका में 33, खमतराई में 40, तिफरा में 10, बिजौर में 10, चांटीडीह में 6 और लिंगियाडीह में 4 प्लॉट अवैध प्लाटिंग की श्रेणी में आए हैं।

तीन भू-स्वामियों को नोटिस जारी

इस कार्रवाई के तहत निगम ने मोपका और घुरू क्षेत्रों के तीन भू-स्वामियों को नोटिस भेजा है। इनमें घुरू के रामनाथ मिश्रा और उत्तम कुमार मिश्रा पर खसरा नंबर 126/1 की 0.535 एकड़ भूमि पर अवैध प्लाटिंग कर भूखंड बेचने का आरोप है। वहीं, मोपका में शुभम ताम्रकार और अन्नू मसीह ने अलग-अलग खसरा नंबरों पर बिना अनुमति प्लॉट काटकर बिक्री की है। निगम ने तीनों को नोटिस जारी कर तीन दिनों के भीतर जवाब मांगा है। तय समय में जवाब न देने पर निगम द्वारा सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

पहले भी हो चुकी है कार्रवाई

नगर निगम द्वारा इससे पहले भी कई बार अवैध कॉलोनियों में बनाई गई सड़कों, बाउंड्रीवॉल और अन्य निर्माणों को ध्वस्त किया गया है। अब रजिस्ट्री पर प्रतिबंध लगने से अवैध प्लाटिंग पर बड़ी रोक लग सकती है।

अबूझमाड़ की बेटी खुशबू नाग ने रचा इतिहास, इंटरनेशनल बॉडी बिल्डिंग चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर बढ़ाया छत्तीसगढ़ का मान

छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले की आदिवासी क्षेत्र अबूझमाड़ से निकलकर 22 वर्षीय खुशबू नाग ने राष्ट्रीय स्तर पर नया इतिहास रच दिया है। दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित NPC रीजनल इंटरनेशनल बॉडी बिल्डिंग चैंपियनशिप 2025 में उन्होंने कांस्य पदक जीतकर देशभर के खिलाड़ियों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई है।

खुशबू की जिंदगी किसी प्रेरणादायक फिल्म से कम नहीं है। एक साधारण परिवार की बेटी, जिनके पिता लकड़ी के औजार बनाने का काम करते हैं, खुशबू ने संघर्षों के बीच अपनी राह खुद बनाई। 2019 में मां को कैंसर के चलते खोने के बाद उनका जीवन जैसे थम सा गया था, लेकिन भाई की सलाह पर उन्होंने जिम जॉइन किया, और यहीं से उनकी फिटनेस यात्रा की शुरुआत हुई।

दुख को ताकत में बदलने वाली खुशबू ने लगातार मेहनत कर खुद को निखारा और प्रोफेशनल बॉडी बिल्डिंग की दुनिया में कदम रखा। उनके कोच दिलीप यादव ने उनके टैलेंट को पहचाना और उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया। NPC चैंपियनशिप में पदक जीतकर खुशबू ने यह साबित कर दिया कि समर्पण और साहस के दम पर कोई भी बाधा पार की जा सकती है।

उनकी इस उपलब्धि से न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश की बेटियों को नई प्रेरणा मिली है। सोशल मीडिया पर लोग उन्हें “बस्तर की शेरनी”, “फिटनेस आइकन” और “मसल्स गर्ल” जैसे नामों से सराह रहे हैं।

खुशबू की कहानी यह बताती है कि बड़े सपनों के लिए बड़ा शहर नहीं, बस बड़ा हौसला चाहिए।

खरोरा में बन रहा मेडिकल कॉलेज ले रहा तेजी से आकार, दिसंबर 2025 तक पूरा होगा निर्माण कार्य

खरोरा के पास निर्माणाधीन शासकीय मेडिकल कॉलेज का काम तेज़ी से जारी है। दिसंबर 2025 तक इसे पूरी तरह से तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। 325 करोड़ की लागत से 89.19 एकड़ ज़मीन पर कॉलेज का निर्माण हो रहा है, जिसमें करीब 58 प्रतिशत कार्य अब तक पूरा हो चुका है।

कॉलेज का सात मंजिला अकादमिक भवन बनकर तैयार हो चुका है और अब इसके अंदरूनी साज-सज्जा (इंटीरियर) का काम चल रहा है। इस इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर प्रशासनिक कार्यालय बनाया गया है, जबकि प्रथम मंजिल में डेमो रूम, रिसर्च रूम और फैकल्टी ऑफिस तैयार किए जा रहे हैं। तीसरी मंजिल पर सेंट्रल लाइब्रेरी और चौथी मंजिल पर अत्याधुनिक लैब और डेमो कक्ष की योजना है।

कॉलेज परिसर में हॉस्टल सुविधाओं का भी तेजी से विकास किया जा रहा है। दो मंजिला अंडरग्रेजुएट हॉस्टल में ग्राउंड और फर्स्ट फ्लोर पर 17-17 सिंगल शेयरिंग रूम और 34-34 डबल शेयरिंग रूम होंगे। वहीं, सेकंड फ्लोर पर 18 सिंगल और 31 डबल शेयरिंग रूम तैयार किए जा रहे हैं।

इसके अतिरिक्त इंटर्न्स के लिए तीन मंजिला हॉस्टल भवन भी बन रहा है, जिसमें ग्राउंड, प्रथम और द्वितीय तल पर 16-16 सिंगल रूम और तृतीय मंजिल पर चार सिंगल रूम होंगे।

कॉलेज तक पहुंचने के लिए फिलहाल कच्ची सड़क है, जिससे आवाजाही में दिक्कत हो रही है। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने इस परेशानी को दूर करने के लिए नेशनल हाईवे-353 से कॉलेज तक फोरलेन सड़क निर्माण के लिए कलेक्टर को प्रस्ताव भेजा है। प्रस्ताव को स्वीकृति मिलते ही पक्की सड़क बनाई जाएगी।

कॉलेज प्रबंधन के अनुसार, छात्रों के लिए हॉस्टल भवन पूरी तरह से बनकर तैयार है, लेकिन मार्ग की असुविधा के कारण अभी उपयोग में नहीं लाया गया है। जैसे ही सड़क की व्यवस्था हो जाती है, हॉस्टल संचालन शुरू किया जाएगा।

प्रोफेसर अलख राम वर्मा ने जानकारी दी कि निर्माण कार्य में लगातार प्रगति हो रही है और तय समय सीमा में पूरा करने का प्रयास जारी है।

अगला चरण: अस्पताल और स्टाफ क्वार्टर

कॉलेज परिसर में भविष्य में एक बड़े अस्पताल और स्टाफ क्वार्टर का भी निर्माण प्रस्तावित है। फिलहाल 40 एकड़ क्षेत्र में कार्य हो चुका है, जबकि बाकी की लगभग 50 एकड़ जमीन पर अस्पताल व अन्य भवन बनाए जाएंगे। उम्मीद है कि इस साल के अंत तक हॉस्टल की सुविधा पूरी तरह से शुरू हो जाएगी, जिससे छात्रों को पढ़ाई के साथ बेहतर आवासीय व्यवस्था मिल सकेगी।

इस मेडिकल कॉलेज के पूरा होने से न केवल चिकित्सा शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि छात्रों को किराए के भवनों से मुक्ति मिलकर एक स्थायी और आधुनिक कैंपस मिलेगा।

किराए के मकान से 850 नशीले इंजेक्शन बरामद, तस्कर गिरफ्तार

सरगुजा में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त कार्रवाई लगातार जारी है। ताजा मामले में आबकारी विभाग की उड़नदस्ता टीम ने गांधीनगर क्षेत्र के एक युवक को 850 अवैध नशीले इंजेक्शन के साथ गिरफ्तार किया है। आरोपी ने ये इंजेक्शन चर्चपारा ठाकुरपुर स्थित किराए के मकान में छिपा रखे थे और वहीं से नशे की सप्लाई किया करता था।

मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर सहायक जिला आबकारी अधिकारी रंजीत गुप्ता के नेतृत्व में टीम ने बुधवार सुबह कार्रवाई की। टीम जब आरोपी के किराए के मकान पर पहुंची, तो वह वहां मौजूद नहीं था। इसके बाद उसे गांधीनगर स्थित उसके स्थायी पते से हिरासत में लिया गया और फिर मकान की तलाशी ली गई।

तलाशी के दौरान 850 नशीले इंजेक्शन – जिनमें 425 टैलजेसिक और 425 एविल शामिल हैं – बरामद किए गए। इनकी कुल कीमत करीब डेढ़ लाख रुपये आंकी गई है। आरोपी बंटी राव उर्फ टीयस (39) को गिरफ्तार कर एनडीपीएस एक्ट की धारा 22(सी) के तहत न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।

पूछताछ के दौरान आरोपी ने अन्य नशा तस्करों के नाम भी उजागर किए हैं, जिनके खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस पूरी कार्रवाई में आबकारी विभाग के प्रधान आरक्षक कुमारू राम, रमेश दुबे, अशोक सोनी, नगर सैनिक गणेश पांडेय, रणविजय सिंह, ओमप्रकाश गुप्ता, महिला नगर सैनिक राजकुमार व अंजु तथा चालक कुशल खुंटे शामिल रहे।

छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड का बड़ा फैसला: निकाह पढ़ाने पर 1100 रुपये से अधिक नहीं ले सकेंगे मौलवी

छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड ने एक अहम आदेश जारी किया है, जिसके तहत अब राज्य के इमाम और मौलवी निकाह पढ़ाने के एवज में अधिकतम 1100 रुपये ही ले सकेंगे। यह रकम बतौर नजराना या उपहार स्वीकार की जा सकेगी, लेकिन इससे अधिक राशि लेना प्रतिबंधित होगा।

शिकायत के बाद लिया गया निर्णय

वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने बताया कि हाल ही में उनके पास एक शिकायत आई थी, जिसमें एक मौलवी ने निकाह पढ़ाने के लिए 5100 रुपये की मांग की थी। जब यह राशि नहीं दी गई तो मौलवी ने निकाह पढ़ाने से मना कर दिया और मौके से चले गए। ऐसी घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए यह नया आदेश लागू किया गया है।

उल्लंघन पर होगी कार्रवाई

प्रदेश भर में लगभग 800 से ज्यादा इमाम और मौलवी निकाह पढ़ाने का कार्य करते हैं। बोर्ड ने साफ कर दिया है कि यदि कोई भी व्यक्ति इस आदेश का उल्लंघन करता है या ज्यादा पैसे की मांग करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

शरीयत के सिद्धांतों के अनुरूप निर्णय

डॉ. सलीम राज ने कहा कि इस्लाम में निकाह को आसान बनाने की बात कही गई है। इसलिए यह फैसला गरीब और पिछड़े वर्ग के हितों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। उन्होंने बताया कि 5100 रुपये जैसी राशि गरीब परिवारों के लिए बोझ बन जाती है। नया आदेश सामाजिक समानता और सुविधा सुनिश्चित करने की दिशा में एक जरूरी कदम है।

इस पहल का मकसद समाज में फैली आर्थिक असमानता को दूर करना और निकाह जैसी धार्मिक प्रक्रिया को हर वर्ग के लिए सुलभ बनाना है।

राज्य उपभोक्ता आयोग का बड़ा फैसला: वन विभाग को मृतक तेंदूपत्ता संग्राहक के परिजनों को 4.30 लाख देने का आदेश

राज्य उपभोक्ता आयोग ने एक अहम निर्णय में वन विभाग को करंट हादसे में जान गंवाने वाले तेंदूपत्ता संग्राहक के परिजनों को 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ 4.30 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया है। यह राशि बीमा क्लेम, मानसिक पीड़ा और वाद व्यय के रूप में दी जानी है।

यह मामला 11 अक्टूबर 2021 को कोमल पटेल की मौत से जुड़ा है, जो तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य से जुड़े थे और करंट की चपेट में आकर उनकी मृत्यु हो गई थी। उनकी पत्नी संतोषी पटेल ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने के साथ-साथ वनोपज समिति को सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ मुआवजे का आवेदन भी सौंपा। लेकिन समिति ने यह कहते हुए क्लेम खारिज कर दिया कि आवेदन तय समयसीमा (45 दिन) के भीतर नहीं किया गया।

पीड़िता ने जिला उपभोक्ता फोरम राजनांदगांव में केस दायर किया, लेकिन वहां भी उसका दावा समयसीमा के उल्लंघन के आधार पर निरस्त कर दिया गया। इसके बाद वह राज्य आयोग पहुंची, जहां न्यायमूर्ति गौतम चौरड़िया ने पूरे प्रकरण की समीक्षा की और वन विभाग की समयसीमा संबंधी आपत्ति को खारिज कर दिया।

आयोग ने माना कि मृतक तेंदूपत्ता संग्राहक शहीद महेन्द्र कर्मा तेंदूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजना के तहत बीमा कवरेज में आते थे। इस योजना के तहत सामान्य मृत्यु पर 2 लाख और दुर्घटनाजन्य मृत्यु पर अतिरिक्त 2 लाख रुपये का प्रावधान है। आयोग ने बीमा की यह दोनों राशि मंजूर की और 30 हजार रुपये अतिरिक्त मानसिक क्षतिपूर्ति और वाद व्यय के रूप में देने का आदेश दिया।

यह फैसला तेंदूपत्ता संग्राहकों और अन्य असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए राहतकारी साबित हो सकता है, जो अकसर तकनीकी आधारों पर मुआवजे से वंचित रह जाते हैं।

छत्तीसगढ़ में कोरोना संक्रमण फिर सक्रिय, 4 नए मरीज सामने आए – डॉक्टरों ने कहा, घबराने की जरूरत नहीं

छत्तीसगढ़ में कोरोना वायरस का संक्रमण एक बार फिर रफ्तार पकड़ता नजर आ रहा है। मंगलवार को राज्यभर में कोरोना के चार नए मामले दर्ज किए गए हैं, जिससे कुल सक्रिय मरीजों की संख्या बढ़कर 17 हो गई है। इनमें से दो मरीज होम आइसोलेशन में स्वस्थ हो चुके हैं, जबकि बाकी 15 मरीजों का इलाज चल रहा है। राहत की बात यह है कि अब तक संक्रमण से किसी की मृत्यु नहीं हुई है, और राजधानी रायपुर के आंबेडकर अस्पताल में कोई भी मरीज भर्ती नहीं है।

डॉक्टरों का कहना है कि नए मरीजों में अधिकतर को हल्के लक्षण हैं और गंभीर स्थिति वाले अधिकांश मरीज पहले से अन्य बीमारियों से ग्रसित थे। राजधानी में 22 मई को पहला मरीज सामने आया था, जिसके बाद धीरे-धीरे संक्रमण के मामले बढ़े हैं।

एम्स और नेहरू मेडिकल कॉलेज की वायरोलॉजी लैब में सैंपलों की जांच जारी है। स्वास्थ्य विभाग की मानें तो मामलों की संख्या कम होने के कारण फिलहाल कोई विस्तृत बुलेटिन जारी नहीं किया जा रहा है।

सावधानी जरूरी – मास्क पहनें और लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें

अगर किसी को सांस लेने में तकलीफ, सर्दी, खांसी या लगातार बुखार जैसी समस्याएं हो रही हैं तो यह कोरोना के संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में लोगों को डरने की बजाय सतर्क रहने की सलाह दी गई है। सार्वजनिक स्थानों पर मास्क पहनने और लक्षण दिखने पर डॉक्टर से तुरंत संपर्क करने की अपील की गई है।