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“बस्तर के उस गांव में जवान क्या सिखा रहे हैं? हकीकत जानकर आप भी सोच में पड़ जाएंगे!”

बस्तर के गर्जन में बदलाव: अब हिड़मा के गांव में शिक्षा की गूंज

बस्तर के जिन इलाकों में कभी नक्सलियों का बोलबाला था, अब वहीं शिक्षा की एक नई अलख जल रही है। नक्सली संगठन के शीर्ष नेता हिड़मा के गांव पूवर्ती में अब बंदूक नहीं, किताबों की बात हो रही है। सीआरपीएफ ने यहां ‘गुरुकुल’ की स्थापना कर 100 से अधिक बच्चों की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ली है।

सीआरपीएफ का शिक्षा मिशन: ‘गुरुकुल’ मॉडल की शुरुआत
राज्य और केंद्र सरकार की संयुक्त रणनीति और सुरक्षाबलों की बहादुरी ने बस्तर को नक्सलवाद से काफी हद तक मुक्त कर दिया है। अब बस्तर की पहचान सिर्फ संघर्ष से नहीं, बल्कि बदलाव और शिक्षा से भी हो रही है। सुकमा, बीजापुर जैसे जिलों में सीआरपीएफ ने ‘गुरुकुल’ मॉडल शुरू किया है – एक ऐसी पहल जहां जवान खुद बच्चों को पढ़ा रहे हैं।

हिड़मा का गांव अब बन रहा बदलाव की मिसाल
कभी हिड़मा जैसे दुर्दांत नक्सली का गढ़ रहा पूवर्ती गांव अब शिक्षा की ओर बढ़ चला है। सीआरपीएफ द्वारा संचालित गुरुकुल में टेकलगुड़ेम और सिलगेर जैसे गांवों के करीब 80 बच्चे नियमित रूप से शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इन बच्चों को ‘शिक्षादूत’ नामक टीम पढ़ाई के साथ-साथ खेल-कूद और नैतिक मूल्यों की शिक्षा भी दे रही है।

100 किलोमीटर दूर तक पढ़ाई की लगन
कुछ बच्चे 100 किलोमीटर दूर कुआकोंडा स्थित पोटाकेबिन स्कूल में रहकर शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इनके माता-पिता ने नक्सली माहौल से बच्चों को निकालकर छात्रावासों में भेजने का फैसला लिया।

अधिकारियों की पहल और वादा
सीआरपीएफ के डीआईजी आनंद सिंह राजपुरोहित ने जानकारी दी कि वर्तमान में तीन गुरुकुल संचालित किए जा रहे हैं। कॉपी, किताब, खेल सामग्री से लेकर पोषण तक की जिम्मेदारी सीआरपीएफ उठा रही है।
सुकमा के जिला शिक्षा अधिकारी जीआर मंडावी ने बताया कि पढ़ाई छोड़ चुके 35 बच्चों को दोबारा स्कूलों से जोड़ा जा रहा है, और पूवर्ती में एक स्थायी स्कूल का निर्माण कार्य भी शुरू हो चुका है।

बचे हुए इंटरनेट डेटा से कमाएं पैसे, सरकार की योजना से उठाएं फायदा

आज के समय में इंटरनेट सिर्फ मनोरंजन या काम का साधन नहीं, बल्कि कमाई का जरिया भी बन सकता है। अगर आपके पास अतिरिक्त इंटरनेट डेटा है, तो आप उसे दूसरों के साथ साझा कर पैसे कमा सकते हैं। भारत सरकार की पीएम वाणी योजना (PM-WANI) खासतौर पर ऐसे लोगों के लिए शुरू की गई है, जो बिना भारी खर्च के डिजिटल उद्यमी बनना चाहते हैं।

क्या है पीएम वाणी योजना?

प्रधानमंत्री वाई-फाई एक्सेस नेटवर्क इंटरफेस (PM-WANI) योजना का उद्देश्य देशभर में सार्वजनिक वाई-फाई नेटवर्क तैयार करना है। इसके तहत कोई भी व्यक्ति या व्यवसायी पब्लिक डेटा ऑफिस (PDO) बनकर अपने इंटरनेट को आम जनता के लिए उपलब्ध करा सकता है। खास बात यह है कि इसके लिए लाइसेंस या बड़ी पूंजी की आवश्यकता नहीं होती — केवल एक वाई-फाई कनेक्शन और हॉटस्पॉट डिवाइस से काम चल जाता है।

योजना से जुड़ने की प्रक्रिया

1. इंटरनेट कनेक्शन लें – किसी भी इंटरनेट सेवा प्रदाता से अनलिमिटेड प्लान खरीदें।

2. हॉटस्पॉट डिवाइस लगवाएं – अपनी सुविधा अनुसार क्षेत्र में हॉटस्पॉट डिवाइस लगाएं।

3. PDOA से जुड़ें – जैसे कि C-DOT से, जो तकनीकी सहायता और लॉगिन सेवाएं देगा।

कमाई कैसे होगी?

आप अपने क्षेत्र में वाई-फाई नेटवर्क के जरिए लोगों को इंटरनेट सेवा दे सकते हैं और इसके लिए 5-10 रुपये जैसे छोटे-छोटे प्लान बेच सकते हैं।

उदाहरण: अगर आप प्रतिदिन 50 लोगों को 5 रुपये का डेटा प्लान बेचते हैं, तो महीने में लगभग ₹7500 तक की कमाई संभव है।

आप चाहें तो अपने अनुसार डेटा प्लान बना सकते हैं, जैसे:

₹6 में 1GB (1 दिन)

₹18 में 5GB (3 दिन)

₹49 में 40GB (14 दिन)

₹99 में 100GB (30 दिन)

कैसे करें रजिस्ट्रेशन?

pmwani.gov.in पर जाकर पब्लिक डेटा ऑफिस के रूप में पंजीकरण करें।

लॉगिन आईडी मिलने के बाद अपनी डेटा प्लान सेट करें और सेवा शुरू करें।

किसके लिए है फायदेमंद?

यह योजना खासकर छोटे दुकानदारों, बेरोजगार युवाओं, छात्रों और डिजिटल स्टार्टअप्स के लिए एक बेहतरीन अवसर है। इससे न केवल कमाई का जरिया मिलता है, बल्कि डिजिटल इंडिया मिशन को भी बढ़ावा मिलता है।

राज्यपाल ने फिंगेश्वर के दो गांवों को लिया गोद, विकास के लिए दिए अहम निर्देश

गरियाबंद जिले के फिंगेश्वर ब्लॉक के दो गांव—मड़वाडीह और बिजली—अब राज्यपाल रमेन डेका के गोद लिए गांव बन गए हैं। पहले उन्होंने सिर्फ मड़वाडीह गांव को गोद लिया था, लेकिन अब बिजली ग्राम पंचायत को भी इसमें शामिल कर लिया गया है। मंगलवार को राजिम रेस्ट हाउस में आयोजित समीक्षा बैठक में राज्यपाल ने जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों के साथ चर्चा कर दोनों गांवों के विकास के लिए दिशा-निर्देश दिए।

बैठक के दौरान राज्यपाल ने अधिकारियों से इन गांवों की जनसंख्या, वर्तमान सुविधाएं और विकास की आवश्यकता से जुड़ी जानकारी ली। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की सभी योजनाओं का दोनों गांवों में पूरी तरह से क्रियान्वयन हो, ताकि ग्रामीणों को हर आवश्यक सेवा मिल सके।

राज्यपाल ने खास तौर पर जल, बिजली, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, रोजगार और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। इसके साथ ही उन्होंने अगले तीन महीने के भीतर दोनों गांवों के लिए विस्तृत विकास रोडमैप तैयार करने को कहा।

उन्होंने यह भी कहा कि आयुष्मान भारत योजना के तहत कार्ड वितरण, जल जीवन मिशन के अंतर्गत पेयजल उपलब्धता, टीबी उन्मूलन, और स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की संख्या घटाने जैसे विषयों पर विशेष अभियान चलाए जाएं।

इस बैठक में राज्यपाल के सचिव सीआर प्रसन्ना, कलेक्टर बीएस उइके, पुलिस अधीक्षक निखिल राखेचा, सीईओ जीआर मरकाम, डीएफओ लक्ष्मण सिंह और अपर कलेक्टर नवीन भगत समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

बिरगांव में मोबाइल दुकानदार की रहस्यमयी मौत, टॉयलेट में फांसी पर झूलता मिला शव – इलाके में सनसनी

रायपुर। राजधानी के बिरगांव इलाके से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। शिवानंद नगर खमतराई निवासी 39 वर्षीय रोहित जैन, जो ‘मां लक्ष्मी मोबाइल’ नाम से दुकान चलाते थे, बुधवार दोपहर को अपनी ही दुकान के टॉयलेट में फांसी पर झूलते पाए गए। इस घटना से पूरे क्षेत्र में शोक और सन्नाटा पसरा हुआ है।

जानकारी के अनुसार, रोज की तरह दुकान का कामकाज सामान्य रूप से चल रहा था। करीब दोपहर 1 बजे रोहित ने अपने स्टाफ से कहा कि वह वॉशरूम जा रहे हैं। लेकिन जब काफी देर तक वह बाहर नहीं आए, तो कर्मचारियों को चिंता हुई। दरवाजा खटखटाने पर जब कोई जवाब नहीं मिला, तो दरवाजा तोड़ा गया – अंदर का नजारा देख सभी सन्न रह गए।

रोहित जैन टॉयलेट में फंदे से झूलते मिले। तत्काल उन्हें पास के NKD अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए मेकाहारा अस्पताल भेजा गया है।

क्या है आत्महत्या की वजह?

फिलहाल आत्महत्या के कारणों का पता नहीं चल पाया है। न कोई सुसाइड नोट मिला है, न ही परिवार की ओर से किसी खास परेशानी का खुलासा हुआ है। पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं पर जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिवारजनों के बयान के बाद ही स्पष्ट जानकारी सामने आ सकेगी।

स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर शोक और हैरानी का माहौल है। हर कोई यही सवाल कर रहा है –

“आखिर ऐसा क्या हुआ कि हंसते-खेलते रोहित जैन ने ये खौफनाक कदम उठाया?”

पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आत्महत्या है या इसके पीछे कोई और रहस्य छिपा है

, इसका खुलासा आगामी जांच और रिपोर्ट से होगा।

(जैसे-जैसे अपडेट मिलेगा, हम खबर को आगे बढ़ाएंगे।)

संजू वर्मा के खिलाफ अभद्र टिप्पणी मामले में FIR की मांग, कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उरला थाने में किया विरोध प्रदर्शन

रायपुर/उरकुरा। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री सत्यनारायण शर्मा पर सोशल मीडिया में की गई अभद्र टिप्पणी के मामले में अब सियासी संग्राम शुरू हो गया है। उरकुरा निवासी संजू वर्मा द्वारा फेसबुक पर किए गए अपमानजनक पोस्ट को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ता आक्रोशित हैं।

बताया गया कि संजू वर्मा ने अपने फेसबुक अकाउंट के माध्यम से सत्यनारायण शर्मा के खिलाफ अशोभनीय व आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग करते हुए पोस्ट किया, जिससे न सिर्फ उनकी छवि धूमिल हुई है, बल्कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भावनाओं को भी ठेस पहुंची है।

इस मामले को लेकर कांग्रेस ब्लॉक कमेटी एवं स्थानीय पार्षद डिकेंद्र सिन्हा के नेतृत्व में 4 जून को उरला थाना पहुंचकर पुलिस के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया गया। कांग्रेस जनों का आरोप है कि शिकायत देने के बावजूद उरला पुलिस द्वारा अब तक संजू वर्मा के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मांग की कि संजू वर्मा द्वारा की गई अभद्र टिप्पणी और तथ्यहीन आरोपों को लेकर उनके विरुद्ध तत्काल FIR दर्ज कर कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही यह भी कहा गया कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो कांग्रेस कार्यकर्ता बड़ा आंदोलन करने को बाध्य होंगे।

इस दौरान प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी, स्थानीय पार्षद व कार्यकर्ता मौजूद रहे। प्रदर्शन के दौरान पुलिस प्रशासन से ज्ञापन सौंपा गया जिसमें संजू वर्मा द्वारा की गई टिप्पणी की प्रति भी संलग्न की गई थी।

कांग्रेस की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि पार्टी के वरिष्ठ नेता की गरिमा को ठेस पहुंचाने और जानबूझकर द्वेष फैलाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: पत्नी के अफेयर और अश्लील चैटिंग पर पति को मिला तलाक

रायपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में पति को तलाक की मंजूरी दी है, जिसमें पत्नी पर गैरमर्द से अवैध संबंध और अश्लील सोशल मीडिया गतिविधियों के आरोप साबित हुए। हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले को उचित ठहराया और पत्नी की अपील को खारिज कर दिया।

📌 क्या था मामला?

जशपुर जिले के रहने वाले व्यक्ति ने 2008 में शादी की थी। कुछ वर्षों बाद पत्नी का व्यवहार बदल गया। पति के अनुसार, पत्नी घरेलू जिम्मेदारियों से हटकर फेसबुक पर अश्लील चैटिंग करने लगी थी। वह दो बार अपने प्रेमी के साथ घर से भाग भी गई थी। पहली बार जब वह परिवार के साथ मैहर गई थी, वहां उसने पुरुष मित्र को बुलाकर उसके साथ चली गई। पुलिस ने उसे प्रेमी के साथ किराए के मकान से बरामद किया।

पति ने पत्नी को सुधार का मौका देते हुए दोबारा घर बुलाया, लेकिन उसका व्यवहार पहले जैसा ही रहा। परेशान होकर पति ने फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी लगाई।

🧾 फैसले का आधार क्या रहा?

  • पत्नी द्वारा सोशल मीडिया पर की गई अश्लील बातचीत

  • दो बार प्रेमी के साथ भागने की घटना

  • पति द्वारा मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना के सबूत

  • चिकित्सीय रिपोर्ट व अन्य दस्तावेज

इन सभी बिंदुओं को कोर्ट ने गंभीर और विश्वसनीय माना। हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि यदि विवाह के दौरान पत्नी का एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर होता है, तो पति तलाक का अधिकारी है।

⚖️ पत्नी की याचिका और मांगें

पत्नी ने दावा किया कि उसे ससुराल में प्रताड़ित किया गया और 8 लाख रुपए लाने का दबाव बनाया गया। इसके अलावा उसने तलाक के दौरान:

  • ₹1.5 करोड़ की दहेज वापसी

  • ₹50 लाख मानसिक पीड़ा का मुआवजा

  • सोने-चांदी के गहने

  • बच्चों की पढ़ाई और जीवन यापन की मांग की

लेकिन कोर्ट ने इन मांगों को नकारते हुए पति के पक्ष में फैसला सुनाया।

एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर के कारण?

रिश्तों में बेवफाई के कई कारण हो सकते हैं –

  • भावनात्मक दूरी

  • शारीरिक जरूरतों की पूर्ति न होना

  • शादी में रुचि की कमी

  • संवाद की कमी

  • कम उम्र में विवाह

  • अकेलापन या ध्यान न मिलना

हालांकि, कोर्ट का यह स्पष्ट कहना था कि शादीशुदा महिला का ऐसा आचरण पति की छवि और मानसिक स्थिति पर गंभीर असर डालता है।

बिलासपुर में युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया पर विवाद: शिक्षकों ने की पारदर्शिता की मांग

बिलासपुर। जिले में संचालित युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। शिक्षकों ने जिला प्रशासन पर पदस्थापन में मनमानी करने और नियमों को दरकिनार करने का आरोप लगाया है। कई मामलों में शिक्षकों को एक स्कूल में पदस्थ किया गया है, जबकि उनका वेतन दूसरे स्कूल से दिया जा रहा है।

प्रमुख आरोप:

  • पारदर्शिता की कमी: काउंसलिंग से पहले रिक्त पदों की सूची साझा नहीं की गई

  • विषय बंधन की अनदेखी: विज्ञान शिक्षकों को कला विषय की सूची में डाला गया

  • असंगत पदस्थापन: कम छात्र संख्या वाले स्कूलों में अधिक रिक्त पद दिखाए गए

  • रातोंरात सूची में बदलाव: चहेतों के नाम हटाकर नए नाम जोड़े गए

शिक्षकों की आपत्तियाँ:

  • 150 से अधिक शिक्षकों ने सूची पर आपत्ति दर्ज कराई

  • 50 शिक्षकों ने लिखित असहमति देकर प्रक्रिया का बहिष्कार किया

  • सेवानिवृत्ति के करीब 19 शिक्षकों को भी अतिशेष घोषित किया गया

प्रशासन का पक्ष:

जिला प्रशासन ने प्रक्रिया को पारदर्शी बताते हुए कहा कि:

  • काउंसलिंग स्थल पर प्रोजेक्टर के माध्यम से जानकारी प्रदर्शित की गई

  • शिक्षकों को स्कूल चयन के तुरंत बाद पोस्टिंग ऑर्डर दिया गया

  • 3 दिन के भीतर नए पदस्थापन स्थल पर ज्वाइन करने का निर्देश दिया गया

विरोध की तैयारी:

शिक्षक साझा मंच के प्रदेश संचालक संजय शर्मा ने बताया:

  • “प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएँ की गई हैं”

  • “शिक्षकों से चर्चा के बाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की जाएगी”

  • “विषय बंधन समाप्त करने के नियमों को नजरअंदाज किया गया”

युक्तियुक्तकरण क्या है?

युक्तियुक्तकरण (रेशनेलाइजेशन) एक प्रशासनिक प्रक्रिया है जिसमें:

  • संसाधनों का कुशल आवंटन किया जाता है

  • अतिशेष कर्मचारियों का पुनर्वितरण होता है

  • संस्थानों/विभागों का समेकन किया जाता है

इस मामले में शिक्षकों का आरोप है कि प्रक्रिया का उपयोग पसंदीदा शिक्षकों को शहरी स्कूलों में पदस्थापित करने के लिए किया गया है, जबकि योग्य शिक्षकों को दूरस्थ क्षेत्रों में भेज दिया गया है। जिला प्रशासन ने इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए जाँच का आश्वासन दिया है।

छत्तीसगढ़ के चावल: कैंसर से लेकर डायबिटीज तक में मददगार, देश-विदेश में बढ़ी डिमांड

रायपुर। छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है, लेकिन अब यहां औषधीय गुणों वाले चावल भी उगाए जा रहे हैं। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने ऐसी विशेष किस्में विकसित की हैं जो कैंसर, डायबिटीज, कुपोषण और डायरिया जैसी बीमारियों से लड़ने में मददगार हैं। इन चावलों की मांग अब चीन और अफ्रीका तक पहुंच गई है।

प्रमुख तथ्य:

  • संजीवनी चावल: कैंसर मरीजों की इम्यूनिटी बढ़ाने में सहायक

  • मधुराज-55: शुगर पेशेंट्स के लिए विशेष रूप से विकसित

  • जिंक राइस-2: बच्चों में कुपोषण दूर करने में कारगर

  • 23,250 किस्में: विश्वविद्यालय के पास धान की विशाल विविधता

  • अंतर्राष्ट्रीय मांग: चीन और अफ्रीका समेत कई देशों से आ रही डिमांड

विशेष किस्मों के गुण:

1. संजीवनी चावल:

  • कैंसर रोगियों के लिए प्राकृतिक इम्यूनिटी बूस्टर

  • 135-140 दिन में तैयार होती है फसल

  • 35-38 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन

2. मधुराज-55:

  • मधुमेह रोगियों के लिए उपयुक्त

  • शर्करा की मात्रा कम

  • 130-135 दिन में तैयार होती है फसल

3. जिंक राइस-2:

  • कुपोषण दूर करने में सहायक

  • बच्चों को डायरिया से जल्दी उबरने में मदद

  • 130-135 दिन में तैयार होती है फसल

वैज्ञानिकों का दावा:

विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ. अभिनव साव के अनुसार, “हमारे द्वारा विकसित जीरा फूल, दुबराज, बादशाह भोग जैसी प्रीमियम किस्मों की मांग देश-विदेश में बढ़ी है। जीआई टैग मिलने के बाद छत्तीसगढ़ के चावलों की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनी है।”

उत्पादन और उपलब्धता:

  • सभी विशेष किस्मों की फसल 110-145 दिन में तैयार

  • उत्पादन क्षमता 35-60 क्विंटल प्रति हेक्टेयर

  • बाजार और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध

अन्य महत्वपूर्ण किस्में:

  1. छत्तीसगढ़ जिंक राइस-1: प्रोटीन, जिंक और आयरन से भरपूर

  2. बादशाहभोग सिलेक्शन-1: 140-145 दिन में तैयार होने वाली सुगंधित किस्म

  3. दुबराज सिलेक्शन-1: 2016 में विकसित प्रीमियम क्वालिटी चावल

  4. छत्तीसगढ़ संकर धान-2: अधिक उपज वाली संकर किस्म

भविष्य की संभावनाएं:

विश्वविद्यालय के अक्ति जैव विविधता संग्रहालय में धान की 23,250 किस्में संरक्षित हैं, जिन पर निरंतर शोध जारी है। वैज्ञानिकों का मानना है कि ये औषधीय चावल न सिर्फ स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान हैं, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने में भी सहायक सिद्ध हो रहे हैं।

रायपुर: ‘गोल्डन मैन’ रोहित तोमर के घर से 35 लाख नकद, हथियार और नोट-गिनती मशीन बरामद

रायपुर। छत्तीसगढ़ पुलिस ने इतिहासशीटर और फरार आरोपी रोहित तोमर के भाटागांव स्थित आवास पर बड़ी छापेमारी की है। तेलीबांधा पुलिस, क्राइम ब्रांच और रक्षा टीम की संयुक्त कार्रवाई में घर से 35 लाख रुपये नकद, 734 ग्राम सोने के जेवर, बीएमडब्ल्यू समेत लग्जरी वाहन और अवैध हथियार बरामद हुए हैं।

प्रमुख तथ्य:

  • संपत्ति जब्ती: 35 लाख रुपये नकद, सोने-चांदी के जेवर, बीएमडब्ल्यू, थार और ब्रेजा कार

  • अवैध हथियार: 1 रिवॉल्वर, 1 पिस्टल, 5 तलवार और लाइव कारतूस

  • अन्य सामग्री: नोट गिनने की मशीन, लेन-देन के रजिस्टर, जमीन के दस्तावेज

  • कानूनी कार्रवाई: भारतीय अस्त्र अधिनियम सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज

पृष्ठभूमि:

रोहित तोमर पर 31 मई को प्रॉपर्टी डीलर दशमीत चावला के साथ मारपीट और जान से मारने की धमकी देने का आरोप है। घटना के बाद से वह फरार है। पुलिस ने न्यायिक मजिस्ट्रेट से सर्च वारंट प्राप्त कर 4 जून को छापेमारी की।

आरोपी का आपराधिक इतिहास:

  • उपनाम: ‘गोल्डन मैन’ के नाम से कुख्यात

  • पंजीकृत मामले: रायपुर के विभिन्न थानों में 9 से अधिक केस

  • आरोप: सूदखोरी (मासिक 10% ब्याज), ब्लैकमेलिंग, हिंसक अपराध

  • पूर्व रिकॉर्ड: हाइपर क्लब गोलीकांड सहित कई मामलों में जेल यात्रा

वर्तमान स्थिति:

पुलिस संपत्ति के स्रोत की जांच कर रही है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि तोमर सूदखोरी से प्राप्त धन को विभिन्न व्यवसायों में निवेश करता था। उसके द्वारा कारोबारियों को धमकाने और जबरन वसूली के कई शिकायतें दर्ज हैं।

अगले कदम:

  • जब्त की गई संपत्ति की फोरेंसिक जांच

  • बैंक लेनदेन और जमीन दस्तावेजों की विस्तृत समीक्षा

  • फरार आरोपी को गिरफ्तार करने के लिए विशेष टीम गठित

यह मामला रायपुर में संगठित अपराध और सूदखोर गिरोहों की बढ़ती गतिविधियों को उजागर करता है। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि आरोपी को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

दुर्ग-भिलाई में 2 और बांग्लादेशी घुसपैठिए गिरफ्तार, कुल 7 हुए अरेस्ट 12 साल से भारत में रह रहे थे, फर्जी दस्तावेज बनाकर छिप रहे थे

दुर्ग/भिलाई। छत्तीसगढ़ पुलिस ने दुर्ग-भिलाई क्षेत्र में दो और बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। एसटीएफ और छावनी थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने कैंप-2 इलाके में छापेमारी कर इन्हें पकड़ा। ये दोनों करीब 12 साल पहले अवैध रूप से भारत-बांग्लादेश सीमा पार कर देश में घुसे थे।

 

मुख्य तथ्य:

  • गिरफ्तार आरोपी मोहम्मद अब्दुल रौब हुसैन (48) और साथी खातून बांग्लादेश के जेस्सोर जिले के रहने वाले हैं

  • दोनों ने पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के फर्जी पते से आधार कार्ड, पैन कार्ड समेत कई नकली दस्तावेज बनवाए

  • पिछले 6-8 महीने से भिलाई के कैंप-2 इलाके में किराए के मकान में रह रहे थे

  • दुर्ग जिले में अब तक 7 बांग्लादेशी घुसपैठिए गिरफ्तार किए जा चुके हैं

कैसे हुई गिरफ्तारी?

एएसपी पद्मश्री तंवर ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि अमन लकड़ी टाल के पास कुछ बांग्लादेशी रह रहे हैं। 3 जून को हुई छापेमारी में दोनों को पकड़ा गया। पूछताछ में पता चला कि मोहम्मद अब्दुल 2012 में और साथी खातून 2014 में भारत आए थे।

ऐसे कर रहे थे गैरकानूनी गतिविधियां:

  • मोबाइल इंटरनेट के जरिए बांग्लादेश में रिश्तेदारों से संपर्क बनाए रखा

  • भारत में फर्जी नाम और पहचान बनाकर रह रहे थे

  • घरेलू काम, टेंट हाउस और मजदूरी का काम करते थे

  • एक बांग्लादेशी युवक ने उन्हें यहां गार्ड की नौकरी के बहाने लाया था

पुलिस ने दोनों के खिलाफ विदेशी अधिनियम, पासपोर्ट एक्ट और जाली दस्तावेज बनाने के मामले में केस दर्ज किया है। दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। अब पुलिस उन लोगों की तलाश कर रही है जिन्होंने इन्हें संरक्षण दिया और फर्जी दस्तावेज बनाने में मदद की।