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दुर्ग समेत 8 ऑटोनोमस कॉलेजों में इस बार एडमिशन की प्रक्रिया होगी अलग, कॉलेज की वेबसाइट से ही भरना होगा फॉर्म

दुर्ग समेत 8 ऑटोनोमस कॉलेजों में इस बार एडमिशन की प्रक्रिया होगी अलग, कॉलेज की वेबसाइट से ही भरना होगा फॉर्म

दुर्ग। नए शैक्षणिक सत्र से छत्तीसगढ़ के 8 ऑटोनोमस कॉलेजों में एडमिशन प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है। अब छात्रों को इन कॉलेजों में दाखिले के लिए विश्वविद्यालय पोर्टल का सहारा नहीं लेना होगा। इसके बजाय हर कॉलेज अपनी वेबसाइट के माध्यम से सीधे एडमिशन फॉर्म स्वीकार करेगा। खासकर साइंस कॉलेज दुर्ग में इस बार हेमचंद यादव विश्वविद्यालय की बजाय कॉलेज की वेबसाइट से आवेदन करना होगा।

साइंस कॉलेज दुर्ग में एडमिशन प्रक्रिया शनिवार से शुरू हो रही है। कॉलेज की वेबसाइट पर ऑनलाइन फॉर्म का लिंक जोड़ दिया गया है, जो तय तारीख से लाइव हो जाएगा। यह सुविधा पूरी तरह नि:शुल्क होगी और यूजी व पीजी दोनों कोर्सों के लिए मान्य रहेगी।

सीटों में बढ़ोतरी

उच्च शिक्षा विभाग ने दुर्ग जिले के कन्या महाविद्यालय में सीटों में भी इजाफा किया है। बीकॉम की सीटें 370 से बढ़कर 400 हो गई हैं, वहीं एमकॉम में 20 सीटों की बढ़ोतरी के बाद अब 100 छात्राएं एडमिशन ले सकेंगी। इसके अलावा एमएससी बॉटनी (वनस्पतिशास्त्र) की सीटें 15 से बढ़कर 20 हो गई हैं। यह बढ़ोतरी नए सत्र से लागू होगी।

एडमिशन सिस्टम को लेकर नई पहल

अब तक सभी साइंस कॉलेजों में एक ही पोर्टल के माध्यम से एडमिशन होते थे, जिससे छात्रों को आवेदन के दौरान काफी परेशानी झेलनी पड़ती थी। लेकिन अब साइंस कॉलेज दुर्ग जैसे बड़े कॉलेजों को अपने पोर्टल से एडमिशन देने की अनुमति दी गई है। इससे एडमिशन प्रोसेस पारदर्शी, सुगम और सुविधाजनक होगा।

इन कॉलेजों में लागू होगा अलग पोर्टल सिस्टम:

  • साइंस कॉलेज, दुर्ग

  • दिग्विजय कॉलेज, राजनांदगांव

  • नागार्जुन कॉलेज, रायपुर

  • छत्तीसगढ़ कॉलेज, रायपुर

  • डिग्री गर्ल्स कॉलेज, रायपुर

  • साइंस कॉलेज, बिलासपुर

  • बिलासा कॉलेज, बिलासपुर

  • साइंस कॉलेज, अंबिकापुर

प्राचार्य का बयान

डॉ. ए.के. सिंह, प्राचार्य साइंस कॉलेज दुर्ग ने बताया कि शासन से ऑटोनोमस कॉलेजों के लिए अलग पोर्टल से एडमिशन लेने के निर्देश मिले हैं। इसी के तहत कॉलेज की वेबसाइट पर आवेदन लिंक जोड़ दिया गया है।

गौरतलब है…

दुर्ग साइंस कॉलेज प्रदेश का पहला कॉलेज था, जिसे ऑटोनोमस दर्जा मिला था और इसे नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) से सबसे पहले जोड़ा गया। इसका शैक्षणिक और तकनीकी ढांचा इसे बाकी कॉलेजों से अलग बनाता है।

धमाकेदार खुलासा: 2161 करोड़ का शराब घोटाले , दिल्ली एयरपोर्ट से हुई थी गिरफ्तारी!

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छत्तीसगढ़ में बहुचर्चित शराब घोटाले की जांच तेज़ हो गई है। आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने शराब कारोबारी विजय भाटिया को दूसरी बार तीन दिन की रिमांड पर लिया है। रिमांड की अवधि पूरी होने पर भाटिया को 9 जून को कोर्ट में पेश किया जाएगा।

शुक्रवार को EOW ने विजय भाटिया को रायपुर की अपर सत्र न्यायाधीश पल्लवी तिवारी की अदालत में पेश किया। सुनवाई के दौरान जांच एजेंसी ने अदालत से 16 जून तक रिमांड की मांग की, ताकि तलाशी में जब्त दस्तावेज़ों और डिजिटल उपकरणों के आधार पर विस्तृत पूछताछ की जा सके। हालांकि, अदालत ने केवल तीन दिन की रिमांड को ही मंजूरी दी।

EOW के उपसंचालक अभियोजन मिथिलेश वर्मा ने जानकारी दी कि विजय भाटिया को 31 मई को दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद भिलाई-दुर्ग क्षेत्र में उसके आठ ठिकानों पर छापेमारी की गई, जहां से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए गए हैं।

इस बीच, 2161 करोड़ रुपये के इस शराब घोटाले में अन्य आरोपियों पर भी शिकंजा कसता जा रहा है। मामले में डिस्टलरी संचालकों को भी जांच के दायरे में लाने की तैयारी चल रही है। वहीं, इस घोटाले में आरोपी पूर्व आबकारी मंत्री और सुकमा विधायक कवासी लखमा की न्यायिक रिमांड को 20 जून तक बढ़ा दिया गया है। अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि मामले की जांच जारी है, इसलिए रिमांड बढ़ाने की जरूरत है जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।

यह मामला प्रदेश की राजनीति और प्रशासन में हलचल मचाए हुए है, और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे होने की संभावना है।

मातृ-शिशु अस्पताल में बढ़ेगी स्वास्थ्य सेवाओं की ताकत: मिलेंगे नए मेडिकल अफसर, स्टाफ नर्स और जल्द खुलेगा

रायपुर। कालीबाड़ी स्थित मातृ-शिशु अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए जल्द ही 4 मेडिकल अफसर और 25 स्टाफ नर्सों की नियुक्ति की जाएगी। शुक्रवार को राज्य के स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने अस्पताल का निरीक्षण करते हुए इस बाबत घोषणा की। उन्होंने प्रसव पूर्व देखभाल कक्ष, पोषण पुनर्वास केंद्र सहित विभिन्न वार्डों का जायजा लिया और मरीजों व उनके परिजनों से अस्पताल में दी जा रही सेवाओं को लेकर बातचीत भी की।

निरीक्षण के बाद आयोजित चिकित्सकीय बैठक में मंत्री जायसवाल ने मरीजों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए 10 वार्ड आया, 5 वार्ड बॉय, 2 लैब टेक्नीशियन और 2 लैब असिस्टेंट की पदस्थापना की भी घोषणा की।

स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने की दिशा में मंत्री ने अस्पताल परिसर में विधायक निधि से जल्द ही जेनेरिक मेडिकल स्टोर खोले जाने की जानकारी दी। इसके साथ ही परिजनों के लिए प्रतीक्षा कक्ष निर्माण और अस्पताल के दूसरे तल स्थित हॉल में एयर कंडीशनर लगाने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए।

निरीक्षण के दौरान क्षेत्रीय विधायक सुनील सोनी, सीएमएचओ डॉ. मिथिलेश चौधरी समेत अन्य स्वास्थ्य अधिकारी मौजूद थे। जानकारी के अनुसार यह मातृ-शिशु अस्पताल, जिला अस्पताल पंडरी का ही एक प्रमुख भाग है, जहां ऑब्स्टेट्रिक्स एवं गायनी तथा पीडियाट्रिक विभाग संचालित हो रहे हैं।

“क्या ये हादसा था या सुनियोजित हत्या? रात को झगड़ा… सुबह मिली बहू की लाश!”

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भाटापारा निवासी अनमोल आहूजा (27) की रहस्यमयी परिस्थितियों में मौत हो गई। उसका शव शुक्रवार सुबह जबलपुर स्थित ससुराल में मिला। ससुराल पक्ष का दावा है कि अनमोल दूसरी मंजिल से गिर गई थी, लेकिन मायके वालों का कहना है कि यह कोई हादसा नहीं बल्कि सुनियोजित हत्या है।

गंभीर रूप से घायल अनमोल को गुरुवार रात अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान शुक्रवार को उसकी मौत हो गई। पति विपुल आहूजा ने पुलिस को बताया कि वह घर की दूसरी मंजिल से गिर गई थी, लेकिन मृतका की मां और भाई ने इस पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

परिवार का आरोप है कि अनमोल को शादी के बाद से ही दहेज सहित कई बातों को लेकर मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। मृतका के भाई भावेश खत्री ने बताया कि गुरुवार रात अनमोल ने अपनी मां को फोन पर बताया था कि उसका पति से झगड़ा हुआ है और वह उसे परेशान कर रहा है। मां ने उसे समझाने की कोशिश की, लेकिन इसके तुरंत बाद विपुल ने फोन कर अनमोल की मां से बदतमीजी की और फिर कॉल काट दी। देर रात विपुल ने बताया कि अनमोल छत से गिर गई है और उसे मामूली चोटें आई हैं। मगर जब परिजन अस्पताल पहुंचे तो उन्हें उसकी मौत की जानकारी मिली।

मायके पक्ष ने स्पष्ट रूप से आरोप लगाया कि अनमोल आत्महत्या नहीं कर सकती, उसे जानबूझकर छत से धक्का देकर गिराया गया है। उन्होंने पुलिस से निष्पक्ष जांच की मांग की है और ससुराल वालों पर कड़ी कार्रवाई की अपील की है।

फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर सभी पहलुओं की जांच शुरू कर दी है।

भिलाई: रंगटा कॉलेज के बाहर CNG कार में लगी अचानक आग, बाल-बाल बचा ड्राइवर, छात्रों में मचा हड़कंप

भिलाई के रंगटा कॉलेज के बाहर आज उस समय अफरा-तफरी मच गई जब एक CNG कार में अचानक आग लग गई। बताया जा रहा है कि कार में शॉर्ट सर्किट की वजह से आग लगी, हालांकि आग लगने के कारणों की अब तक पुष्टि नहीं हो पाई है।

कार में जैसे ही धुंआ और आग दिखी, ड्राइवर ने समझदारी दिखाते हुए तुरंत गाड़ी छोड़ दी और वहां से निकल गया, जिससे उसकी जान बच गई। आग इतनी तेज़ी से फैली कि कुछ ही मिनटों में कार धू-धू कर जलने लगी।

मौके पर मौजूद छात्रों और लोगों में हड़कंप मच गया, लेकिन किसी को कोई चोट नहीं पहुंची है। सभी लोग सुरक्षित हैं।

सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची और थोड़ी देर की मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया। घटना के कारण कॉलेज परिसर के बाहर कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित हुआ।

फिलहाल पुलिस और दमकल विभाग मामले की जांच कर रहे हैं कि आग किन परिस्थितियों में लगी।

सौभाग्य से इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन यह हादसा एक बड़ी चेतावनी जरूर है कि गाड़ियों की नियमित जांच और रखरखाव कितना जरूरी है।

कोंडागांव में तहसीलदार रिश्वत लेते गिरफ्तार, ACB की बड़ी कार्रवाई

छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले से भ्रष्टाचार के खिलाफ एक और बड़ी कार्रवाई सामने आई है। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने यहां पदस्थ प्रभारी नायब तहसीलदार दिनेश सिंह ठाकुर को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। आरोपी तहसीलदार पर नजूल भूमि से जुड़े मामले में शिकायतकर्ता से 15,000 रुपये की अवैध मांग करने का आरोप था।

जानकारी के मुताबिक, शिकायतकर्ता राधाकृष्ण देवांगन ने ACB को बताया कि उसने अपनी भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराने के लिए आवेदन दिया था। इस पर कार्यवाही करने के एवज में तहसीलदार ने उससे 15 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की। शिकायतकर्ता ने पूरा मामला एसीबी के समक्ष रखा, जिसके बाद टीम ने योजना बनाकर आरोपी को रंगे हाथों पकड़ने की कार्रवाई शुरू की।

ACB ने जाल बिछाकर तहसीलदार को रिश्वत लेते हुए धर दबोचा। गिरफ्तारी के बाद टीम ने आरोपी के निवास पर भी छापा मारा, जहां कई दस्तावेज और सबूत खंगाले जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि ACB की टीम अब तक की गई कार्रवाई के आधार पर आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर चुकी है।

ACB की कार्रवाई अभी जारी है, और संभावना जताई जा रही है कि आरोपी के खिलाफ और भी सबूत सामने आ सकते हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने जिले के प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा दिया है।

गौरतलब है कि हाल के महीनों में छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार के खिलाफ ACB और EOW (आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा) की सक्रियता बढ़ी है। सरकारी अधिकारियों द्वारा की जा रही रिश्वतखोरी और अनियमितताओं पर लगातार शिकंजा कसा जा रहा है।

ACB अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि राज्य में भ्रष्टाचार को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वे लगातार ऐसे मामलों की निगरानी कर रहे हैं और जनता से अपील कर रहे हैं कि वे किसी भी तरह की रिश्वत या दबाव की स्थिति में तत्काल शिकायत दर्ज कराएं।

इस मामले ने यह संकेत दिया है कि भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों के खिलाफ अब सख्त रुख अपनाया जा चुका है।

सागौन की 10 एकड़ नर्सरी हुई उजाड़, तस्करों ने काट दिए सैकड़ों कीमती पेड़ — वन विभाग बना खामोश गवाह!

सरगुजा के ग्राम केशवपुर में वन विभाग की 10 एकड़ भूमि पर लगभग 4 साल पहले लगाए गए सागौन के पौधों की नर्सरी अब ठूंठ में तब्दील हो गई है। इस नर्सरी में सैकड़ों सागौन के पौधे तस्करों द्वारा कटाई कर दिए गए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस क़त्ल की योजना में वन विभाग के बीट गार्ड और रेंजर की मिलीभगत भी शामिल है।

वन भूमि पर चल रही यह कटाई और अतिक्रमण की घटना लंबे समय से जारी है, लेकिन वन विभाग की उदासीनता और भ्रष्टाचार के कारण इसे रोकने में विफलता सामने आ रही है। अंबिकापुर वन मंडल ने शासन के निर्देश पर वन संरक्षण व विकास के लिए यहां सागौन के पौधे लगाए थे, लेकिन विभागीय लापरवाही के चलते यह प्रयास व्यर्थ साबित हुआ है।

स्थानीय निवासी बताते हैं कि वन भूमि पर लगे सागौन के छोटे-छोटे पेड़ों को काटकर ठूंठ बना दिया गया है ताकि जमीन पर अतिक्रमण किया जा सके। इस तरह वन क्षेत्र लगातार घटता जा रहा है और पर्यावरण को भारी नुकसान हो रहा है। ग्रामीणों की शिकायतों के बावजूद वन विभाग के अधिकारी इस गंभीर समस्या पर चुप्पी साधे हुए हैं।

वन विभाग के डीएफओ अभिषेक जोगावत ने मीडिया रिपोर्ट्स के बाद मामले को संज्ञान में लिया है। उन्होंने उप वन मंडलाधिकारी को मामले की जांच के निर्देश दिए हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है। जांच में यदि विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कठोर कदम उठाए जाएंगे।

यह मामला वन संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। वन विभाग को चाहिए कि वह इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए और वन भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित करे। साथ ही वन क्षेत्रों में तस्करी व अतिक्रमण रोकने के लिए निगरानी बढ़ाए ताकि प्रकृति की सुरक्षा हो सके।

सरकार द्वारा वन संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों को सफल बनाने के लिए विभागीय स्तर पर भी पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है। तभी वन संपदा को बचाया जा सकेगा और भविष्य की पीढ़ियों के लिए स्वच्छ व हरित पर्यावरण सुनिश्चित किया जा सकेगा।

ग्राम केशवपुर की सागौन नर्सरी में हुई कटाई वन विभाग की लापरवाही का स्पष्ट संकेत है। इस घटना से पता चलता है कि संरक्षण के नाम पर केवल दिखावा हो रहा है और असल में वन संपदा की रक्षा नहीं हो पा रही। प्रशासनिक स्तर पर ठोस कार्रवाई व सतर्कता की सख्त आवश्यकता है ताकि इस तरह की घटनाओं को रोक कर वन भूमि व पेड़ों की सुरक्षा की जा सके।

कोरोना ने फिर से फिरौती ली: 9 नए मरीज मिले, एक्टिव केस बढ़कर 24 — खतरा अभी टला नहीं!

छत्तीसगढ़ में कोरोना संक्रमण ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। गुरुवार को राज्य में कुल 9 नए मरीज सामने आए हैं, जिनमें से 5 रायपुर और 4 बिलासपुर से हैं। इसके साथ ही प्रदेश में एक्टिव मामलों की संख्या बढ़कर 24 हो गई है। राहत की बात यह है कि इनमें से 23 मरीज होम आइसोलेशन में हैं, जबकि सिर्फ एक मरीज को गंभीर हालत के चलते ICU में भर्ती किया गया है। जानकारी के मुताबिक, यह मरीज पहले से अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित है।

हल्के लक्षण, कम खतरा
डॉक्टरों का कहना है कि फिलहाल जो मरीज मिल रहे हैं, उनमें कोरोना के लक्षण बेहद हल्के हैं और अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत नहीं पड़ रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस मौसम में ऐसे ही मामूली लक्षणों वाले मरीज मिलते रहेंगे।

आइसोलेशन और इलाज की व्यवस्था
राजधानी रायपुर के आंबेडकर अस्पताल में इस वक्त आइसोलेशन वार्ड खाली है, लेकिन पेइंग वार्ड में कोरोना मरीजों के इलाज की पूरी व्यवस्था की गई है। रेस्पिरेटरी मेडिसिन के साथ-साथ जनरल मेडिसिन और एनेस्थीसिया विभाग के डॉक्टरों की ड्यूटी तय कर दी गई है। इसके अलावा नर्सिंग और पैरा-मेडिकल स्टाफ भी उपलब्ध है ताकि जरूरत पड़ने पर मरीजों को बेहतर इलाज दिया जा सके।

विशेष सतर्कता जरूरी
विशेषज्ञों ने यह चेतावनी भी दी है कि जिन लोगों को पहले से गंभीर बीमारियां हैं, उनके लिए कोरोना खतरनाक साबित हो सकता है। ऐसे मरीजों को खास एहतियात बरतने की सलाह दी गई है। 

कौन है इस आगजनी के लिए जिम्मेदार?

टेहका गांव स्थित सर्वोत्तम इंडस्ट्रीज के बायोमास प्लांट में गुरुवार दोपहर अचानक भीषण आग लग गई। आग ने इतनी तेजी से विकराल रूप ले लिया कि पूरे प्लांट को अपनी चपेट में ले लिया। प्लांट में मौजूद ज्वलनशील सामग्री—जैसे एग्रो वेस्ट, विनीयर वेस्ट और जलाऊ लकड़ी—ने आग को और भड़का दिया, जिससे लपटें कई किलोमीटर दूर से दिखाई देने लगीं।

सूचना मिलते ही दमकल की टीमें मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का अभियान शुरू कर दिया। नगर पालिका के साथ-साथ अंबुजा सीमेंट और अल्ट्राटेक सीमेंट की दमकल गाड़ियां भी मौके पर जुटीं। समाचार लिखे जाने तक आग पर करीब 60 से 70 प्रतिशत तक काबू पा लिया गया था। राहत एवं बचाव कार्य में एसडीएम अभिषेक गुप्ता स्वयं मौके पर उपस्थित रहे और स्थिति की निगरानी करते रहे।

सौभाग्य से इस हादसे में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है, लेकिन प्लांट को भारी आर्थिक क्षति हुई है। कई महंगे उपकरण, मशीनें, कच्चा और तैयार माल पूरी तरह जलकर राख हो गए। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, नुकसान लाखों रुपए में हो सकता है, हालांकि वास्तविक आंकलन बाद में किया जाएगा।

प्लांट संचालक राकेश ईदवानी ने दमकल विभाग, प्रशासन और सहयोगी संस्थाओं का आभार प्रकट किया। प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। आग लगने के कारणों का खुलासा जांच के बाद किया जाएगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए सुरक्षा उपायों को और कड़ा करने की बात कही जा रही है।

छत्तीसगढ़ के तीन बॉडी बिल्डर्स को भारतीय टीम में मिला स्थान, एशिया और वर्ल्ड चैंपियनशिप में दिखाएंगे दम

छत्तीसगढ़ ने बॉडी बिल्डिंग के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है। प्रदेश के तीन प्रतिभाशाली खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाली एशिया और वर्ल्ड बॉडी बिल्डिंग चैंपियनशिप के लिए भारतीय टीम में अपनी जगह पक्की की है। यह पहली बार है जब राज्य से एक साथ तीन खिलाड़ी इंटरनेशनल इवेंट में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।

इस चयन की जानकारी छत्तीसगढ़ प्रदेश बॉडी बिल्डर्स एसोसिएशन के महासचिव बी. राजशेखर राव ने दी। उन्होंने बताया कि 2 और 3 जून को पुणे के सिल्वर पैलेस में इंडियन बॉडी बिल्डर्स फेडरेशन और महाराष्ट्र बॉडी बिल्डिंग एसोसिएशन के संयुक्त आयोजन में ट्रायल हुआ, जिसमें पूरे देश से 185 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

चयनित खिलाड़ी:

  • आभा कुजूर (रायगढ़): वूमेन्स वेलनेस फिजिक मॉडल कैटेगरी (एशिया व वर्ल्ड चैंपियनशिप)

  • निशा भोयर (दुर्ग): वूमेन्स एथलेटिक फिजिक कैटेगरी (एशिया व वर्ल्ड चैंपियनशिप)

  • मुकेश कुमार गुप्ता: स्पोर्ट्स फिजिक कैटेगरी (वर्ल्ड चैंपियनशिप)

इन तीनों खिलाड़ियों का चयन राज्य के लिए गर्व का विषय है और इससे प्रदेश के युवा बॉडी बिल्डर्स को प्रेरणा मिलेगी