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अनुज शर्मा ने जताया आभार, कहा – सतीश जैन नहीं मिलते तो फिल्मों में न होता सफर

प्रेस क्लब में आयोजित छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘पुरखा के सुरता में’ के दौरान पद्मश्री अभिनेता अनुज शर्मा ने अपनी फिल्मी यात्रा से जुड़ी एक भावुक याद साझा की। जनकवि लक्ष्मण मस्तूरिहा की स्मृति में आयोजित इस आयोजन में अनुज ने बताया कि उन्हें जब पद्मश्री सम्मान मिला, तो उन्होंने सबसे पहले तीन महत्वपूर्ण व्यक्तित्वों को फोन किया — जनकवि लक्ष्मण मस्तूरिहा, समाजसेवी मनु नायक और प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक सतीश जैन।

अनुज ने कहा, “अगर सतीश जैन मुझे फिल्मों में मौका नहीं देते, तो शायद मैं कभी अभिनय की दुनिया में कदम ही नहीं रख पाता।” उन्होंने यह बात पूरी विनम्रता और कृतज्ञता के साथ कही, जिससे साफ होता है कि सतीश जैन का उनके करियर में बड़ा योगदान रहा है।

सतीश जैन और मस्तूरिहा की रचना यात्रा भी आई सामने

कार्यक्रम के दौरान निर्देशक सतीश जैन ने भी अपनी छत्तीसगढ़ी फिल्म ‘मोर छैंया भुइयां’ के निर्माण से जुड़ी एक दिलचस्प घटना सुनाई। उन्होंने बताया कि जब फिल्म बन रही थी, तब उनके पिताजी ने कहा था कि “लक्ष्मण मस्तूरिहा से गीत लिखवाए बिना छत्तीसगढ़ी फिल्म बनाना संभव नहीं।”

पहली मुलाकात में जब सतीश जैन मस्तूरिहा से मिले तो उन्होंने फिल्मी लोगों पर भरोसा न होने की बात कहकर उन्हें लौटा दिया। लेकिन कहानी सुनाने के बाद दो दिन के भीतर मस्तूरिहा ने न केवल टाइटल सॉन्ग लिखा, बल्कि ‘देख के तोला’, ‘झूठ के रद्द’, और ‘जान ले पहचान ले’ जैसे कालजयी गीत भी रचे। जैन ने कहा कि मस्तूरिहा की विशेषता यह थी कि वे गीतों में रिदम और मीटर का भी गहराई से ध्यान रखते थे।

इस आयोजन ने छत्तीसगढ़ी सिनेमा और साहित्य जगत के उन अनछुए पहलुओं को सामने लाया जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देने वाले हैं।

भूपेश बघेल का तीखा हमला: नेताम विरोध नहीं करते तो बन जाता बोधघाट, आरएसएस पर भी साधा निशाना

छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बोधघाट परियोजना और आदिवासी नेताओं के बयानों को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि अगर अरविंद नेताम पहले विरोध नहीं करते, तो बोधघाट परियोजना बहुत पहले बन चुकी होती। अब जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय बोधघाट पर चर्चा कर रहे हैं, तो यह परियोजना उद्योगों के हित में बनाई जा रही है, जबकि पहले इसका उद्देश्य आम लोगों के लिए पेयजल, सिंचाई और अन्य उपयोग था।

भूपेश बघेल ने आगे कहा कि नेताम और आरएसएस का रिश्ता अब साफ हो चुका है। उन्होंने नेताम को “आरएसएस की झूठ की पाठशाला” का उत्पाद बताया और कहा कि उनका वैचारिक दृष्टिकोण हमेशा बदलता रहता है। “जिसका कोई स्थायी विचार नहीं होता, उसका जीवन दिशाहीन होता है,” उन्होंने कहा।

कांग्रेस ने भी नेताम-कश्यप के बयानों की निंदा की

प्रदेश कांग्रेस ने अरविंद नेताम और भाजपा नेता केदार कश्यप द्वारा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज को लेकर दिए गए बयानों की आलोचना की है। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि दीपक बैज को अपनी धार्मिक आस्था साबित करने के लिए न तो नेताम, न कश्यप और न ही आरएसएस से प्रमाण पत्र की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि बस्तर की खनिज संपदा की लूट के खिलाफ दीपक बैज के नेतृत्व में जो आंदोलन हो रहे हैं, उससे भाजपा बौखलाई हुई है और नेताम को अपना मोहरा बना रही है।

दीपक बैज का बस्तर से गहरा जुड़ाव”

शुक्ला ने कहा कि दीपक बैज बस्तर दशहरा में 5 वर्षों तक लगातार 75 दिन तक दंतेश्वरी माई की सेवा करते रहे हैं। सांसद रहते उन्होंने देवगुड़ी और घोटुल जैसी परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए कई प्रयास किए।

भ्रष्टाचार के आरोपों पर पलटवार

ट्रांसफर-पोस्टिंग पर बैन हटने को लेकर भाजपा नेताओं द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों पर भी बघेल ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि राइस मिलर्स, खदान संचालकों और कारोबारियों से पूछें – असली तस्वीर सामने आ जाएगी।

ग्रामीणों के आंदोलन को समर्थन

नकटी गांव में हो रहे ग्रामीण प्रदर्शन पर भूपेश बघेल ने कांग्रेस पार्टी की ओर से समर्थन जताया। उन्होंने कहा कि सरकार को ग्रामीणों को सम्मानजनक ढंग से पुनर्व्यवस्थित करना चाहिए या फिर विधायक के लिए नई जगह देखनी चाहिए। “किसी गांव को जबरन हटाकर समाधान नहीं निकलेगा,” उन्होंने कहा।

यह पूरा घटनाक्रम राज्य की राजनीति में नई गर्मी लेकर आया है और कांग्रेस तथा भाजपा के बीच वैचारिक टकराव एक बार फिर सतह पर आ गया है।

महिलाएं जब निडर होती हैं, तभी बनती हैं बदलाव की मिसाल: फूलोदेवी नेताम

राज्यसभा सांसद, महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष और कांग्रेस वर्किंग कमेटी की सदस्य फूलोदेवी नेताम, न केवल राजनीति में सक्रिय हैं, बल्कि समय मिलने पर खेतों में धान की रोपाई भी करती हैं। फरसगांव की रहने वाली नेताम की पहचान एक निडर और जमीनी नेता के रूप में है। वे उन चंद नेताओं में से हैं, जिन्होंने साल 2013 के झीरम घाटी नक्सली हमले के दौरान अपनी बहादुरी से नक्सलियों को गोलीबारी रोकने के लिए मजबूर कर दिया था।

फूलोदेवी नेताम का मानना है कि जब महिलाएं डर के बिना काम करती हैं, तो वे हर जिम्मेदारी को बेहतर तरीके से निभा सकती हैं। वे कहती हैं कि पंचायती राज में मिले आरक्षण ने महिलाओं के लिए राजनीति के द्वार खोले हैं, और अब प्रदेश की महिलाएं सिर्फ घरेलू कार्यों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि शिक्षा, राजनीति, व्यापार और सामाजिक कार्यों में भी कदम से कदम मिलाकर चल रही हैं।

नक्सली हमले में भी नहीं टूटी हिम्मत

झीरम घाटी हमले की बात करें तो इस माओवादी हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता मारे गए थे। इस काफिले में फूलोदेवी नेताम भी शामिल थीं, जिन्हें गोली लगी थी, लेकिन फिर भी उन्होंने साहस दिखाते हुए नक्सलियों से संवाद किया और गोलीबारी बंद कराई। उनकी इसी हिम्मत और निडरता ने उन्हें आज की महिलाओं के लिए प्रेरणा बना दिया है।

महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्यरत

नेताम का कहना है कि बस्तर और अन्य क्षेत्रों की महिलाएं अब केवल महुआ-इमली बीनने तक सीमित नहीं हैं, वे बाजारों में अपने उत्पाद बेच रही हैं और स्व-सहायता समूहों के ज़रिए आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं। कई महिलाएं अब खुद के उद्योग चला रही हैं और समाज में बदलाव की वाहक बन रही हैं।

गांधी के आदर्शों पर चलने वाली नेता

फूलोदेवी नेताम कहती हैं कि उन्हें परिवार से पूरा समर्थन मिला और वे महात्मा गांधी के उस विचार को मानती हैं जिसमें कहा गया है कि समाज के सबसे कमजोर वर्ग के साथ खड़े होकर ही असली सेवा की जा सकती है। इसी सोच के साथ उन्होंने बस्तर की कई महिलाओं को सामाजिक कार्यों के साथ ही राजनीति में भी सक्रिय किया है।

उनका स्पष्ट संदेश है: “हालात चाहे जैसे भी हों, अगर आप मजबूत इरादों के साथ डटे रहते हैं, तो रास्ते खुद बन जाते हैं।”

मानसून का असर: हरी सब्जियों की कीमतों में जबरदस्त उछाल, टमाटर-मिर्ची बनीं महंगी

देशभर में मानसून और प्री-मानसून बारिश के चलते हरी सब्जियों की कीमतों में 25 से 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी देखी जा रही है। लगातार बदलते मौसम—कभी तेज बारिश तो कभी तीखी धूप—की वजह से सब्जियों की खेती को खासा नुकसान पहुंचा है, जिससे लोकल बाजार में सप्लाई प्रभावित हुई है।

75% सब्जी बाहर से आ रही, लोकल आपूर्ति कमजोर

सब्जी व्यापारियों के अनुसार, फिलहाल बाजार में 75 प्रतिशत तक सब्जी की आपूर्ति कर्नाटक, ओडिशा और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों से हो रही है। टमाटर, शिमला मिर्च, गोभी, बीट, बीन्स, खेक्सी जैसी कई सब्जियां अन्य राज्यों से आ रही हैं।

बारिश बढ़ी तो और चढ़ेंगी कीमतें

जैसे ही तेज बारिश शुरू होगी और नदी-नालों में पानी बढ़ेगा, बाढ़ की स्थिति बनने पर हरी सब्जियों के साथ आलू, प्याज और धनिया की कीमतों में और इजाफा होगा। फिलहाल टमाटर का थोक मूल्य 400–450 रुपये प्रति कैरेट है, जबकि फुटकर बाजार में यह 25–30 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। गोभी, पत्ता गोभी, खेक्सी, तोरई और शिमला मिर्च जैसे सब्जियों के दाम 50 से 80 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं।

अभी सस्ते हैं आलू-प्याज, लेकिन उछाल तय

फिलहाल आलू और प्याज की कीमतों में थोड़ी राहत है, लेकिन अगले 15 दिनों में इनके दामों में भी तेजी आने की संभावना जताई जा रही है। थोक फल-सब्जी विक्रेता संघ के अध्यक्ष टी. श्रीनिवास रेड्डी का कहना है कि बाहरी सप्लाई के भरोसे चल रहा बाजार फिलहाल महंगाई झेल रहा है।

कुछ भाजी गायब, कुछ ने संभाला मोर्चा

तेज धूप और बारिश के कारण पालक, मेथी, लाल भाजी, कुलथी और कांदा भाजी जैसी पत्तेदार सब्जियां बाजार से लगभग गायब हो गई हैं। सीमित मात्रा और बढ़ती मांग के कारण इनकी कीमतें भी ऊंची हो गई हैं। हालांकि, चरोटा, करमता, खेड़ा जैसी कुछ स्थानीय और बरसाती भाजियों की अच्छी आवक बनी हुई है। इसके साथ ही ढेस, भिड़ी, ग्वार और बरबट्टी जैसी सब्जियों से फिलहाल बाजार की जरूरतें पूरी हो रही हैं।

बस्तर के देसी आमों की धूम, ‘मियाजाकी’ ने बटोरी सुर्खियां, कीमत 3 लाख रुपये किलो तक पहुंची

रायपुर – लाभांडी स्थित एग्रीकल्चर कॉलेज परिसर में चल रहे मेंगो फेस्टिवल में आमों की मिठास के साथ उनके अनोखे नामों ने भी लोगों को खूब आकर्षित किया। इस फेस्ट में बस्तर से आए रामकुमार देवांगन ने 120 पारंपरिक प्रजातियों के आमों का अनूठा संग्रह प्रस्तुत कर दर्शकों का ध्यान खींचा। हालांकि, ‘हूर पाकिस्तानी’ नामक एक किस्म पर कुछ लोगों ने आपत्ति भी जताई।

जगदलपुर के हॉर्टीकल्चर कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर रामकुमार ने बताया कि उन्होंने यह संग्रह अपनी पीएचडी के दौरान बस्तर, नारायणपुर, सुकमा और कोंडागांव जैसे आदिवासी क्षेत्रों से इकट्ठा किया। उन्होंने बताया कि बस्तर का यह जर्मप्लाज्म (बीज-संपदा) देश के लिए वरदान बन सकता है, क्योंकि इन किस्मों में स्वाद, रंग, बनावट और टीएसएस (कुल घुलनशील ठोस पदार्थ) की गुणवत्ता असाधारण है। वे चाहते हैं कि इन देसी किस्मों को राष्ट्रीय पहचान मिले।

इस आयोजन में करीब 200 किस्मों के आम शामिल किए गए, जिनमें सेव पल्ली, महागजा, भैंसमुड़ी और स्वर्ण जांजगीर जैसी प्रजातियों ने लोगों को खूब लुभाया।

मियाजाकी बना शो स्टॉपर

इस आयोजन में भिलाई-चरोदा से आए एक आम प्रेमी ने जापानी नस्ल के मियाजाकी आम को प्रदर्शित किया, जिसकी कीमत 2.5 से 3 लाख रुपये प्रति किलो तक बताई गई। इसके अलावा ‘हाथीजुड़’ नामक देसी किस्म भी आकर्षण का केंद्र रही, जिसका वजन ढाई किलो था और आकार हाथी की सूंड जैसा था।

यह फेस्ट देसी स्वाद, जैव विविधता और अनुसंधान की ताकत को सामने लाने का एक बेहतरीन उदाहरण बन गया, जिसमें पारंपरिक विरासत और आधुनिकता का अनूठा संगम देखने को मिला।

किसानों को याद तभी क्यों आती है, जब राजनीतिक दल विपक्ष में होते हैं?

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छत्तीसगढ़ में किसानों की समस्याएं हर साल चर्चा का विषय बनती हैं, लेकिन समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल अब तक नजर नहीं आई है। खासकर, जब बात खेती के सीजन की होती है, तब खाद और बीज की किल्लत जैसे मुद्दे फिर से सामने आ जाते हैं। इस बार भी हालात कुछ अलग नहीं हैं। खरीफ सीजन 2025 शुरू होने से पहले प्रदेश में खाद की भारी कमी देखने को मिल रही है। सहकारिता विभाग ने 10.72 लाख मीट्रिक टन खाद का लक्ष्य तय किया है, लेकिन अब तक केवल 4.10 लाख मीट्रिक टन का ही भंडारण हो पाया है, जो लक्ष्य का महज 38.23 प्रतिशत है।

इस बार सबसे ज्यादा परेशानी डीएपी खाद की कमी को लेकर हो रही है। किसान मजबूरी में महंगे दामों पर बाजार से खाद खरीदने को मजबूर हैं। इस स्थिति ने विपक्ष को सरकार के खिलाफ बोलने का मौका दे दिया है। विपक्ष जोरशोर से किसानों की समस्याएं उठा रहा है, लेकिन सवाल यह है कि सत्ता में रहते समय यही दल किसानों के लिए कितने संवेदनशील थे?

दरअसल, छत्तीसगढ़ की राजनीति में किसानों का मुद्दा हमेशा से अहम रहा है। पिछले दो विधानसभा चुनावों में भी किसान फैक्टर निर्णायक रहा। चुनावी घोषणाओं में किसानों के हितों की बात जोर-शोर से कही जाती है, लेकिन सत्ता में आने के बाद वही वादे अक्सर कागजों में सिमट जाते हैं।

राजनीतिक दलों की किसानों को लेकर सोच में एक पैटर्न साफ दिखता है — जब तक विपक्ष में रहते हैं, तब तक किसान हितैषी दिखाई देते हैं, लेकिन सत्ता में आते ही प्राथमिकताएं बदल जाती हैं। किसानों की समस्याएं बैठकों और भाषणों तक सीमित रह जाती हैं। लालफीताशाही के कारण योजनाएं जमीन पर उतरने से पहले ही दम तोड़ देती हैं।

हर साल खाद-बीज की किल्लत किसानों के सामने आती है, और हर साल इसे लेकर सियासत गर्म हो जाती है। लेकिन इस बार किसानों को सिर्फ इंतजार नहीं करना चाहिए। उन्हें खुद अपनी आवाज बुलंद करनी होगी और इस बात को समझना होगा कि वे सिर्फ ‘अन्नदाता’ नहीं, बल्कि ‘वोटदाता’ भी हैं — और उनके वोट की ताकत से सत्ता तय होती है।

अब समय आ गया है कि किसान अपनी राजनीतिक समझदारी दिखाएं, ताकि हर बार उनके हिस्से में सिर्फ वादे और समस्याएं न आएं, बल्कि वे भी नीति निर्धारण की प्रक्रिया में सशक्त भागीदार बन सकें।

रायपुर में सूदखोरी का आतंक: तोमर बंधुओं पर पुलिस का शिकंजा

रायपुर में करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह तोमर उर्फ रूबी सिंह और उनके भाई रोहित तोमर पर सूदखोरी और जबरन वसूली के गंभीर आरोप लगे हैं। इन पर आरोप है कि इन्होंने व्यापारियों को कर्ज देकर अत्यधिक ब्याज वसूला, धमकाया और संपत्तियों पर कब्जा किया।

व्यापारियों का उत्पीड़न

कई व्यापारियों ने आरोप लगाया है कि उन्होंने तोमर बंधुओं से कर्ज लिया, लेकिन ब्याज की रकम अत्यधिक बढ़ा दी गई। उदाहरण के लिए, एक व्यापारी ने 5 लाख रुपये का कर्ज लिया, लेकिन उससे 2 करोड़ 5 लाख रुपये की वसूली की गई। जब व्यापारियों ने विरोध किया, तो उन्हें धमकाया गया और उनके परिवारों को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी गई।

पुलिस की कार्रवाई

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कई मामले दर्ज किए हैं। गुढ़ियारी थाना क्षेत्र में एक व्यापारी की शिकायत पर रोहित तोमर और उनके मैनेजर योगेश सिन्हा को गिरफ्तार किया गया। आरोप है कि इन्होंने व्यापारी को अगवा कर बंधक बनाया, मारपीट की और जबरन चेक व बॉन्ड पेपर पर हस्ताक्षर करवाए।

जेल से भी जारी धमकियां

हालांकि रोहित तोमर जेल में हैं, लेकिन आरोप है कि वे अपने गुर्गों के माध्यम से पीड़ितों को धमकियां दिलवा रहे हैं। एक व्यापारी ने एएसपी को पत्र लिखकर सुरक्षा की मांग की है, जिसमें कहा गया है कि रोहित तोमर के गुर्गे उन्हें केस वापस लेने के लिए धमका रहे हैं।

तोमर बंधुओं के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है, लेकिन पीड़ितों का कहना है कि उन्हें अभी भी डर है। वे चाहते हैं कि आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और उन्हें न्याय मिले

बिरगांव: सर्वोदय होटल में सेक्स रैकेट का पर्दाफाश, पार्षदों की सतर्कता से सामने आया मामला

बिरगांव, 7 जून – शहर के सर्वोदय  होटल में चल रहे देह व्यापार के गोरखधंधे का आज दोपहर भंडाफोड़ हुआ। यह कार्रवाई वार्ड क्रमांक 33 के पार्षद पुत्र राजू सिन्हा और वार्ड क्रमांक 24 के पार्षद डिकेन सिन्हा की सजगता से संभव हो सकी, जिन्हें इस अवैध गतिविधि की भनक बीते कुछ समय से लग रही थी।

सूचना पुख्ता होने पर दोनों जनप्रतिनिधियों ने दोपहर करीब 1:30 बजे होटल में छापा मारा। मौके पर आपत्तिजनक स्थिति में महिलाएं और एक पुरुष मिलने पर तुरंत 112 डायल सेवा और उरला थाना पुलिस को सूचित किया गया। पुलिस मौके पर पहुंची और होटल संचालक गणेश सहित दो महिलाओं व एक पुरुष को गिरफ्तार किया।

थाना प्रभारी बी.एल. चंद्राकर ने बताया कि होटल में अनैतिक गतिविधियों की पुष्टि के बाद मामले में गंभीरता से जांच की जा रही है। यह भी जांचा जा रहा है कि होटल में ठहरे लोगों की पहचान क्या है और उनका इन गतिविधियों में कितना संलिप्त होना सामने आता है।

पार्षद डिकेन सिन्हा ने बताया कि कुछ दिन पहले उन्होंने क्षेत्र में अवैध शराब बिक्री को लेकर भी पुलिस को जानकारी दी थी, जिस पर कार्रवाई हुई थी। अब सर्वोदय  होटल में देह व्यापार का खुलासा होने के बाद नागरिकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि सर्वोदय होटल को तत्काल सील किया जाए, क्योंकि यह अपराधियों का अड्डा बनता जा रहा है। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि मामले में सख्त कार्रवाई होगी और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।

यह घटना क्षेत्र में कानून व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर  रही है

छत्तीसगढ़ में मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलें तेज, सीएम साय लौटे दिल्ली दौरे से – जल्द हो सकती है घोषणा

छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के हालिया दिल्ली दौरे ने इस चर्चा को और हवा दे दी है। सीएम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और बीजेपी के अन्य वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की। इससे संकेत मिल रहे हैं कि विधानसभा के मानसून सत्र से पहले मंत्रिमंडल में विस्तार संभव है। वर्तमान में दो मंत्री पद रिक्त हैं, जिनकी नियुक्ति की संभावना है।

लंबे समय से लंबित है विस्तार

राज्य में मंत्रिमंडल विस्तार कई महीनों से टलता आ रहा है। पहले लोकसभा और नगरीय निकाय चुनावों के चलते यह मामला आगे बढ़ा नहीं। फिर बजट सत्र से पहले विस्तार की चर्चा चली, लेकिन दावेदारों को मायूसी हाथ लगी। अब सुशासन तिहार के बाद सीएम का दिल्ली दौरा नए संकेत दे रहा है।

दावेदारों की लंबी कतार

पार्टी संगठन से जुड़े सूत्रों का कहना है कि दो पदों के लिए कई नाम सामने आए हैं, जिससे चयन में देरी हो रही है। संगठन इस बात का खास ध्यान रख रहा है कि जातीय और भौगोलिक संतुलन बना रहे। बताया जा रहा है कि बस्तर से एक चेहरा मंत्रिमंडल में आना लगभग तय है, जबकि बिलासपुर, रायपुर और दुर्ग क्षेत्रों में भी दावेदारी की जोर-आजमाइश जारी है।

पुराने चेहरों की जगह नए को तरजीह

पूर्ववर्ती रमन सरकार के कई मंत्री अब मंत्री पद से बाहर हैं और संगठन युवा और नए चेहरों को प्राथमिकता देना चाहता है। सुशासन तिहार के दौरान मुख्यमंत्री ने न केवल विभागीय कार्यों का मूल्यांकन किया, बल्कि मंत्रियों के प्रदर्शन पर भी नजर रखी। ऐसे में यह भी चर्चा है कि अगर कोई बदलाव हुआ तो प्रदर्शन आधारित हो सकता है।

मौजूदा मंत्रियों को राहत

हालांकि फिलहाल किसी मौजूदा मंत्री को हटाए जाने की संभावना कम ही बताई जा रही है। चुनावी व्यस्तताओं के चलते वर्तमान मंत्रियों को खुद को साबित करने का समय कम मिला है। फिर भी सीएम लगातार विभागीय कामकाज की समीक्षा कर रहे हैं।

राज्यपाल से मुलाकातें बढ़ीं

पिछले कुछ दिनों में मुख्यमंत्री और कुछ विधायकों की राज्यपाल से हुई मुलाकातों ने भी राजनीतिक गलियारों में कयासबाज़ी बढ़ा दी है। हालांकि इसे औपचारिक भेंट बताया जा रहा है। फिर भी इन मुलाकातों का समय और क्रम मंत्रिमंडल विस्तार की संभावनाओं से जोड़ा जा रहा है।

13 दिन पहले मरा समझा गया युवक दिल्ली में जिंदा मिला: गंगरेल डैम के किनारे मिला था मोबाइल और चप्पल, निकली खुद से लापता होने की साजिश

छत्तीसगढ़ के गंगरेल डैम में युवक के डूबने की आशंका के बाद जिसे सभी मरा हुआ मान बैठे थे, वो 13 दिन बाद दिल्ली में जिंदा मिला। यह युवक कवर्धा निवासी 30 वर्षीय हेमंत चंद्रवंशी है, जिसने खुद के लापता होने की एक पूरी कहानी रची थी।

दरअसल, 24 मई को हेमंत अपने एक कर्मचारी के साथ गंगरेल बांध स्थित एक रिसॉर्ट में रुका था। अगले दिन यानी 25 मई की सुबह वह टहलते हुए अंगारमोती मंदिर के पीछे डैम किनारे पहुंचा और वहां नहाने लगा। इसी दौरान उसने अपने कर्मचारी को ब्रश लाने के लिए दुकान भेज दिया। जब कर्मचारी लौटा, तो हेमंत वहां से गायब था। मौके पर सिर्फ उसकी चप्पल और मोबाइल पड़े मिले थे।

कर्मचारी ने तत्काल रूद्री पुलिस को सूचना दी। चूंकि घटनास्थल बांध के पास था, इसलिए पुलिस को यह शक हुआ कि हेमंत पानी में डूब गया है। घंटों रेस्क्यू ऑपरेशन चला, रायपुर से एक्सपर्ट्स और अंडरवाटर कैमरे तक मंगवाए गए, लेकिन हेमंत का कोई सुराग नहीं मिला।

इस बीच दो दिन तक युवक का कोई अता-पता नहीं चला, तब पुलिस ने टेक्निकल सर्विलांस शुरू किया। कॉल डिटेल और मोबाइल ट्रैकिंग के जरिए जांच की गई। आखिरकार खुलासा हुआ कि हेमंत चंद्रवंशी दिल्ली में है। यह जानकारी मिलने पर पुलिस ने परिजनों से संपर्क किया, जिन्होंने पुष्टि की कि उनका बेटा वाकई दिल्ली में है।

एएसपी मणीशंकर चंद्रा ने बताया कि युवक ने आर्थिक परेशानी और पारिवारिक तनाव के चलते खुद को गायब करने की साजिश रची थी। फिलहाल पुलिस ने हेमंत को दिल्ली से वापस बुला लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है।

इस घटना ने न सिर्फ परिजनों को झकझोर दिया, बल्कि पुलिस और रेस्क्यू टीम की मेहनत भी बेकार कर दी। अब पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस ‘नाटक’ के पीछे और कौन-कौन शामिल था और क्या कोई कानूनी कार्रवाई बनती है।