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राजधानी रायपुर में युवतियों से मारपीट करने वाले चार आरोपी गिरफ्तार

रायपुर। राजधानी में देर रात पार्टी कर रही युवतियों के साथ मारपीट करने वाले चार आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। यह घटना डीडी नगर थाना क्षेत्र के महादेवघाट इलाके की है, जहां बीते बुधवार-गुरुवार की दरम्यानी रात कुछ युवतियां अपनी सहेली का जन्मदिन मना रही थीं। इस दौरान शराब के नशे में धुत चार युवकों ने युवतियों के बाल पकड़कर उनके साथ मारपीट की। पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और आरोपियों को पकड़ लिया।

बर्थडे पार्टी बना बवाल की वजह

जानकारी के अनुसार, बिलासपुर और कोरबा से आई युवतियां कार में डीजे लगाकर डांस कर रही थीं और जन्मदिन मना रही थीं। वहीं कुछ दूरी पर रहने वाले युवक प्रवीर जांबुलकर भी अपने दोस्तों के साथ बर्थडे सेलिब्रेट कर रहे थे। दोनों पक्षों के बीच बातचीत के दौरान किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई, जो देखते ही देखते गाली-गलौज और हाथापाई में बदल गई। युवकों ने नशे की हालत में लड़कियों से बदसलूकी की और मारपीट की।

घटना के बाद शिकायत नहीं, वायरल वीडियो बना सबूत

घटना के तुरंत बाद कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी। लेकिन जब यह वीडियो 5 जून को सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, तब पुलिस के पास मामला पहुंचा। वायरल वीडियो में युवतियों को बाल पकड़कर पीटते हुए आरोपी साफ नजर आ रहे थे। इसके बाद पुलिस हरकत में आई और जांच शुरू की।

बताया जा रहा है कि घटना के बाद युवतियां डर की वजह से थाने नहीं पहुंचीं। तो पीड़ित युवतियों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। डीडी नगर थाना पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों – भूपेंद्र मरकाम, गोपी मरकाम, मनीष साहू और प्रवीर जांबुलकर (सभी निवासी देवनगरी, महादेवघाट) को गिरफ्तार कर लिया है।

पुलिस अब मामले की गहराई से जांच कर रही है और यह भी पता लगाया जा रहा है कि घटना में और कौन लोग शामिल थे।

छत्तीसगढ़: जल्द शुरू होगी बाघों की गणना, इंद्रावती और कांगेर घाटी में पहली बार लगेंगे ट्रैप कैमरे

छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्रों में एक बार फिर बाघों की गणना का कार्य शुरू होने जा रहा है। राज्य में यह गणना चार साल बाद हो रही है, जिसमें बाघों की मौजूदा संख्या का पता लगाया जाएगा। पिछली बार 2022 में हुई गणना में प्रदेश में 17 बाघ होने की पुष्टि हुई थी, लेकिन वन विभाग का मानना है कि अब इनकी संख्या में बढ़ोतरी हुई है।

इस बार बाघों की गणना वैज्ञानिक तरीके से की जाएगी और इसके लिए वन्यजीव संस्थान (WII) के निर्देशों का पालन करते हुए इंद्रावती टाइगर रिजर्व और कांगेर घाटी नेशनल पार्क में पहली बार ट्रैप कैमरे लगाए जाएंगे। ये दोनों क्षेत्र पहले नक्सल प्रभावित होने के कारण कैमरा सर्वे के लिए उपयुक्त नहीं माने जाते थे, लेकिन अब हालात में बदलाव के चलते वन विभाग यहां बाघों की गतिविधियों को रिकॉर्ड करने की तैयारी में जुट गया है।

गणना के साथ-साथ जंगलों में शिकार प्रजातियों की संख्या बढ़ाने पर भी काम हो रहा है। बाघों और तेंदुओं के प्राकृतिक आहार चीतलों को जंगलों में छोड़ा जाएगा। भिलाई स्थित मैत्री बाग जू और रायपुर जंगल सफारी से कुल 100 से अधिक चीतल उदंती-सीतानदी और गुरु घासीदास टाइगर रिजर्व भेजे जाएंगे। इससे प्रे-बेस (शिकार योग्य प्रजातियों) को बढ़ावा मिलेगा, जो मांसाहारी जीवों की उपस्थिति के लिए जरूरी है।

वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी प्रेम कुमार (एपीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ) ने बताया कि बाघों की सटीक संख्या का पता लगाने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी की जा रही हैं। ट्रैप कैमरों से मिले डेटा के आधार पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसे केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। देशभर में यह गणना हर चार साल में एक बार की जाती है और यह रिपोर्ट राष्ट्रीय स्तर पर जारी की जाती है।

जोगी प्रतिमा विवाद गहराया: अमित जोगी का सरकार पर तीखा हमला, दी आंदोलन की चेतावनी

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री दिवंगत अजीत जोगी की प्रतिमा हटाए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस मुद्दे पर अब जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी ने सख्त रुख अपनाया है। रविवार को रायपुर में आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए और चेतावनी दी कि यदि आगामी एक महीने के भीतर प्रतिमा को दोबारा नहीं स्थापित किया गया, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे।

अमित जोगी ने आरोप लगाया कि जिस तरीके से प्रतिमा को हटाया गया, वह पूरी तरह से अलोकतांत्रिक और अपमानजनक है। उन्होंने कहा कि यह प्रतिमा उनके पिता की स्मृति में उनके ही निजी भूमि पर स्थापित की गई थी, फिर भी उसे चोरी-छिपे हटाया गया। उन्होंने पूछा कि यदि किसी को प्रतिमा से आपत्ति थी, तो लोकतांत्रिक तरीके से बात की जा सकती थी, न कि इस तरह गुपचुप कार्रवाई करके।

उन्होंने भाजपा और सरकार से अपील करते हुए कहा कि अजीत जोगी की प्रतिमा को राजनीतिक हथियार न बनाया जाए। “कुछ मुद्दे राजनीति नहीं, नैतिकता से सुलझते हैं,” ऐसा कहते हुए उन्होंने याद दिलाया कि अजीत जोगी केवल एक राजनीतिक नेता नहीं, बल्कि हर छत्तीसगढ़वासी के प्रिय नेता थे। उनके सम्मान में किसी भी दल या संगठन को राजनीति नहीं करनी चाहिए।

अमित जोगी का यह बयान प्रदेश की सियासत में नई हलचल पैदा कर सकता है। साथ ही, यह देखना दिलचस्प होगा कि राज्य सरकार इस मामले में क्या रुख अपनाती है। 

“नवतपा में प्री‑मानसून: बारिश के बाद फिर लौट रही लू, उमस बढ़ी परेशानी”

छत्तीसगढ़ के नवतपा क्षेत्र में मौसम ने एक बार फिर अचानक पलटा मारा है। सुबह तेज धूप और 42°C तक पहुंचते तापमान में लोग तपते रहे, लेकिन दोपहर में हुई थोड़ी सी बारिश ने उन्हें गर्मी से कुछ राहत दी। हालांकि, इसके तुरंत बाद मौसम में बढ़ी उमस ने परेशानी दोगुनी कर दी और लोगों को सांस लेने में दिक्कत होने लगी। इससे स्वास्थ्य संबंधी शिकायतें भी बढ़ने लगीं, खासकर वायरल फीवर और सर्दी-जुकाम के मामले आम हो गए हैं।

मौसम विभाग ने प्रदेश में मानसून की शुरूआत की पुष्टि की है, लेकिन राजनांदगांव जिले में अभी तक यह पूर्ण रूप से सक्रिय नहीं हुआ है। यहाँ अभी जो बारिश हो रही है, उसे प्री-मानसून बारिश माना जा रहा है। तकनीकी रूप से, पूरे जून से सितंबर तक की वर्षा ही मानसून वर्षा के रूप में दर्ज होती है।

रविवार को नवतपा और आसपास के ग्रामीण इलाकों में हल्की से मध्यम दर्जे की बारिश हुई, साथ में तेज हवा भी चली। जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज अस्पताल तथा कई निजी अस्पतालों में मौसमी बीमारियों से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ रही है। कोरोना संक्रमण के डर से लोग सरकारी संस्थानों की बजाय निजी अस्पतालों में जा रहे हैं।

बारिश का सीधा असर खेती-किसानी पर भी देखने को मिल रहा है। चार दिनों तक चली बारिश ने खरीफ सीजन की तैयारियों को गति दी है। किसान खाद, बीज की व्यवस्था कर खेतों की साफ-सफाई और जुताई कर रहे हैं, वहीं धान के रोपण के लिए नर्सरी तैयार कर रहे हैं। लेकिन, DAP खाद, बीज और दवाइयों की बढ़ी कीमतें उनकी आर्थिक हालत पर भारी पड़ रही हैं, कहते हैं कि हर साल खेती महंगी होती जा रही है।

मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में तापमान 44°C तक पहुंच सकता है। 12 जून से शुरू होने वाले आषाढ़ में 14 जून को अच्छी बारिश की संभावना है, जो खेती-किसानी को और मजबूती देगी और किसान अपने खेतों को बेहतर तरीके से तैयार कर सकेंगे।

रायपुर न्यूज़: नया रायपुर में देश का पहला एआई आधारित विशेष आर्थिक क्षेत्र, 1000 करोड़ का निवेश करेगा Rackbank

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नया रायपुर देश के डिजिटल भविष्य की नई पहचान बनने जा रहा है। यहां भारत का पहला आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) विकसित किया जा रहा है। इस जोन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कंप्यूटर डेटा से संबंधित अत्याधुनिक तकनीकों के विकास और संचालन पर फोकस किया जाएगा।

इस परियोजना में Rackbank Data Centres Private Limited द्वारा ₹1000 करोड़ का निवेश किया जा रहा है। सरकार ने इस SEZ को तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने के लिए टैक्स और अन्य कानूनी रियायतें प्रदान की हैं।

नया रायपुर बनेगा टेक्नोलॉजी हब

यह भारत में पहली बार है जब किसी विशेष आर्थिक क्षेत्र को पूरी तरह से AI तकनीक पर केंद्रित किया जा रहा है। इससे नया रायपुर को देश का अगला डिजिटल और टेक्नोलॉजिकल हब बनने का मौका मिलेगा।

आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और हरित तकनीक

करीब 6 एकड़ क्षेत्र में फैले इस SEZ में 1.5 लाख वर्गफुट का डेटा सेंटर विकसित किया जाएगा, जो अत्याधुनिक तकनीक से लैस होगा। भविष्य में यहां चार हाई-डेंसिटी डेटा सेंटर्स बनाए जाने की योजना है, जिनकी कुल क्षमता 80 मेगावाट होगी। ये सेंटर कई राज्यों के डिजिटल नेटवर्क का संचालन संभालने में सक्षम होंगे।

इस डेटा सेंटर का निर्माण ग्रीन बिल्डिंग सर्टिफिकेशन मानकों के अनुसार किया जाएगा। इसमें सौर ऊर्जा, जल संरक्षण तकनीक, और ऊर्जा-कुशल उपकरणों का उपयोग किया जाएगा, जिससे यह पर्यावरण के अनुकूल भी रहेगा।

नया रायपुर में बन रहा यह एआई स्पेशल ज़ोन न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे भारत के तकनीकी परिदृश्य को एक नई दिशा देगा। इससे रोजगार, निवेश और नवाचार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

नक्सल मोर्चे पर सफलता से गदगद हुए शाह, अफसरों को किया सम्मानित, बोले-जवानों से मिलने को उत्सुक हूं…

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छत्तीसगढ़ नक्सलवाद की खात्मे के लिए अग्रसर है। पिछले महीने अबूझमाड़ में नक्सलियों के सुप्रीम लीडर बसव राजू के मारे जाने के बाद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को नक्सल अभियान में अहम भूमिका निभाने वाले पुलिस के आला अफसरों को दिल्ली बुलाया।

मुलाकात के बाद शाह ने एक्स पर लिखा कि हाल ही में नक्सलवाद के विरुद्ध चलाए गए अभियानों में अहम भूमिका निभाने वाले अधिकारियों से भेंट कर इन अभियानों की ऐतिहासिक सफलता पर उन्हें बधाई दी। अभियानों को अपनी बहादुरी से सफल बनाने वाले जवानों से भी मिलने के लिए उत्सुक हूं और जल्द ही छत्तीसगढ़ जाकर उनसे भेंट करूंगा।
मोदी सरकार नक्सलवाद के दंश से भारत को मुक्त करने के लिए संकल्पित है। मुलाकात के दौरान बस्तर आईजी पी. सुंदरराज, बस्तर एसपी शलभ कुमार सिन्हा, नारायणपुर एसपी प्रभात कुमार, बीजापुर एसपी जितेंद्र कुमार यादव समेत अन्य आला अधिकारी मौजूद थे। इसके अलावा इस ऌअवसर पर केन्द्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, आसूचना ब्यूरो के निदेशक तपन डेका सहित कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

शाह ने अफसरों को सम्मानित किया

शाह ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और डिप्टी सीएम विजय शर्मा की मौजूदगी में डीजीपी अरुण देव गौतम और एडीजी नक्सल ऑपरेशन विवेकानंद सिन्हा समेत बस्तर के आईजी और अलग-अलग जिलों के एसपी को शॉल पहनाकर सम्मानित किया था। शाह ने अफसरों से करीब आधे घंटे तक बातचीत की और उनके कामों को सराहा।

बस्तर को संजीवनी देगी 49 हजार करोड़ की दो परियोजनाएं, सीएम साय ने दिल्ली में पीएम मोदी से की चर्चा

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर छत्तीसगढ़ की बहुप्रतीक्षित दो बड़ी परियोजनाओं को शीघ्र स्वीकृति दिलाने की मांग की। इन दोनों योजनाओं की कुल लागत करीब 49 हजार करोड़ रुपये आंकी गई है। इसमें बस्तर अंचल में प्रस्तावित बोधघाट बहुउद्देशीय बांध परियोजना और इंद्रावती-महानदी इंटरलिंकिंग परियोजना शामिल हैं।

सीएम साय ने कहा कि बस्तर लंबे समय से नक्सल प्रभावित रहा है, जिसके चलते सिंचाई एवं आधारभूत ढांचे के विकास में यह क्षेत्र काफी पिछड़ गया है। ऐसे में इन परियोजनाओं का शुरू होना न केवल बस्तर के लिए आर्थिक संजीवनी साबित होगा, बल्कि इससे क्षेत्र का समग्र विकास भी सुनिश्चित होगा।

बोधघाट परियोजना: 45 साल से लंबित सपना

बोधघाट बहुउद्देशीय परियोजना की आधारशिला 1979 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने रखी थी, लेकिन अब तक यह योजना धरातल पर नहीं उतर पाई।
मुख्य बिंदु:

  • लागत: लगभग ₹29,000 करोड़

  • विद्युत उत्पादन: 125 मेगावाट

  • मत्स्य उत्पादन: 4,824 टन प्रतिवर्ष

  • सिंचाई सुविधा: 3.78 लाख हेक्टेयर

  • पेयजल आपूर्ति: 49 मिलियन क्यूबिक मीटर

  • लाभार्थी गांव: 269

  • संभावित डुबान क्षेत्र: 36 गांव

यह परियोजना दंतेवाड़ा के गीदम ब्लॉक के बारसूर गांव के पास प्रस्तावित है, जो जगदलपुर से करीब 100 किलोमीटर दूर है। इन्द्रावती नदी पर आधारित यह योजना न केवल सिंचाई बल्कि बिजली, मत्स्य पालन और पेयजल आपूर्ति के क्षेत्र में भी बड़ी भूमिका निभाएगी।

इंद्रावती-महानदी लिंक परियोजना: कांकेर को मिलेगा बड़ा लाभ

दूसरी बड़ी योजना है इंद्रावती और महानदी को जोड़ने वाली इंटरलिंकिंग परियोजना, जिसकी अनुमानित लागत ₹20,000 करोड़ है।

  • सिंचाई सुविधा: 3 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में

  • प्रमुख लाभार्थी: कांकेर जिला और आस-पास के क्षेत्र

इस योजना से बस्तर संभाग के कृषि विकास को गति मिलेगी और पानी की स्थायी उपलब्धता सुनिश्चित होगी।

केंद्र से मिली हरी झंडी, डीपीआर पर काम जारी

सीएम साय ने जानकारी दी कि बोधघाट परियोजना की हाइड्रोलॉजी रिपोर्ट को केंद्र सरकार पहले ही स्वीकृति दे चुकी है। केंद्रीय एजेंसियों ने सर्वे कर रिपोर्ट सौंप दी है और अब विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जा रही है।

पर्यावरण और नक्सल चुनौती

इन परियोजनाओं पर पहले पर्यावरणीय चिंताओं के कारण आपत्तियां दर्ज की गई थीं। साथ ही नक्सलवाद के चलते निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका। लेकिन अब राज्य सरकार का मानना है कि सुरक्षा व्यवस्था में सुधार के बाद परियोजनाएं संभव हो सकेंगी।

16 जून से खुलेंगे स्कूल, लेकिन पढ़ाई को लेकर गहराया संकट — कमरों की भारी कमी, जर्जर भवनों में पढ़ाई को मजबूर बच्चे

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में 16 जून से नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने जा रहा है, लेकिन एक बार फिर छात्रों को जर्जर भवनों में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ेगी। जिले के कई गांवों में स्कूल भवन खस्ताहाल हैं, इसके बावजूद अब तक नए भवनों या अतिरिक्त कमरों के निर्माण की दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं हो सकी है।

शासन ने भले ही खराब हालत वाले स्कूल भवनों की जानकारी मंगाई हो, लेकिन युक्तियुक्तकरण और सुशासन त्यौहार की तैयारियों में व्यस्त अधिकारियों के कारण ज़्यादातर स्कूलों से जानकारी नहीं पहुंच पाई।

शिक्षा विभाग के सूत्रों के मुताबिक जिले के 53 स्कूलों के लिए अतिरिक्त कक्षों के निर्माण हेतु प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। इनमें से करीब 30 स्कूल जर्जर अवस्था में हैं। यानी फिर से बच्चों को कमजोर और खतरनाक भवनों में पढ़ाई करनी होगी।

सबसे चिंताजनक बात यह है कि जिले के तीन स्कूलों — सांकरा, पीपरछेड़ी और कमकापार — के लिए स्कूल भवन निर्माण की स्वीकृति तो तीन साल पहले ही मिल गई थी, लेकिन आज तक निर्माण कार्य की शुरुआत नहीं हो सकी। इन गांवों में पुराने स्कूल भवनों को ढहा दिया गया था, ताकि नए निर्माण को शुरू किया जा सके, मगर अब तक सिर्फ इंतज़ार ही हाथ आया है।

इन तीन स्कूलों के लिए 1 करोड़ 21 लाख 16 हजार रुपए की राशि मंजूर की गई थी, लेकिन सरकार बदलने के बाद वित्त विभाग ने पूर्ववर्ती सरकार द्वारा स्वीकृत योजनाओं पर रोक लगा दी। इसका असर स्कूल भवन निर्माण पर भी पड़ा और तब से स्थिति जस की तस बनी हुई है।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने कार्यकाल के दौरान इन स्कूलों को स्वीकृति दी थी और बजट में राशि भी आवंटित कर दी गई थी। मगर नई सरकार के सत्ता में आते ही यह योजना ठंडे बस्ते में चली गई और तब से प्रशासनिक स्तर पर भी कोई ठोस पहल नहीं हुई है।

नतीजा: स्कूली बच्चे अब भी बुनियादी सुविधाओं के बिना, खस्ताहाल इमारतों में शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं।

10 जून को माओवादियों ने किया भारत बंद का ऐलान, बसवराजू की मौत के विरोध में बड़ा कदम

अबुझमाड़। माओवादी संगठन CPI (माओवादी) ने 10 जून 2025 को पूरे देश में भारत बंद का आह्वान किया है। यह ऐलान मुठभेड़ में मारे गए शीर्ष माओवादी नेता नंबाला केशव राव उर्फ बसवराजू समेत 27 नक्सलियों की मौत के विरोध में किया गया है। माओवादी केंद्रीय समिति के प्रवक्ता ‘अभय’ ने इस बंद की घोषणा करते हुए सरकार पर दमनात्मक कार्रवाई का आरोप लगाया है।

बसवराजू की मौत के विरोध में माओवादी नाराज़

माओवादियों के अनुसार 21 मई को छत्तीसगढ़ के अबुझमाड़ जंगलों में सुरक्षा बलों से हुई मुठभेड़ में उनके महासचिव बसवराजू समेत 27 नक्सली मारे गए। प्रवक्ता अभय ने कहा कि बसवराजू संगठन के लिए रणनीति तैयार करने वाला अहम नेता था और उसकी हत्या एक ‘पूर्व नियोजित साजिश’ के तहत की गई। माओवादियों ने इसे गृह मंत्रालय की योजना बताया है।

शांति वार्ता का आरोप-प्रत्यारोप

माओवादी प्रवक्ता ने बताया कि मार्च 2025 में केंद्र सरकार ने हैदराबाद में न्यायमूर्ति चंद्रकुमार की अध्यक्षता में शांति वार्ता समिति बनाई थी। संगठन ने वार्ता के समर्थन में संघर्ष विराम की घोषणा की, लेकिन इसके बावजूद सुरक्षाबलों की कार्रवाई जारी रही। माओवादियों के अनुसार संघर्ष विराम के दौरान 85 कार्यकर्ता मारे गए जिससे सरकार पर से उनका भरोसा उठ गया।

11 जून से 3 अगस्त तक श्रद्धांजलि सभाएं

भारत बंद के अगले दिन से 3 अगस्त तक माओवादियों ने स्मृति समारोह और जागरूकता कार्यक्रम चलाने की योजना बनाई है। इस दौरान उन माओवादियों को याद किया जाएगा जो इस सैन्य अभियान में मारे गए।

सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर

भारत बंद की घोषणा के बाद नक्सल प्रभावित इलाकों में पुलिस और अर्धसैनिक बलों को सतर्क कर दिया गया है। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त बलों की तैनाती की गई है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।

माओवादी नेता की पृष्ठभूमि

नंबाला केशव राव उर्फ बसवराजू करीब 70 साल का था और आंध्रप्रदेश के श्रीकाकुलम जिले का रहने वाला था। नवंबर 2018 से वह माओवादी संगठन का महासचिव था। उस पर लगभग डेढ़ करोड़ रुपये का इनाम था और वह छत्तीसगढ़, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना व महाराष्ट्र में सक्रिय था। बताया जाता है कि वह हमेशा AK-47 लेकर चलता था।

प्रशासन का जवाब

महाराष्ट्र के नक्सल विरोधी अभियान प्रमुख संदीप पाटिल ने माओवादियों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ये बयान उनके नेता की मौत से उपजे गुस्से का परिणाम हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल शांति बहाल करना है और सुरक्षा बलों की कार्रवाई उसी दिशा में है।

महतारी वंदन योजना से हटाई गईं 70 हजार महिलाएं, सामने आई पंजीयन की बड़ी खामी

छत्तीसगढ़ में महिलाओं को आर्थिक सहायता देने वाली महतारी वंदन योजना में एक बड़ा अपडेट सामने आया है। योजना के लिए पहले कुल 70 लाख 27 हजार 154 महिलाओं का पंजीयन हुआ था, लेकिन जांच के बाद करीब 70 हजार महिलाओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। अब योजना का लाभ 69 लाख 63 हजार 621 महिलाओं को ही मिल रहा है।

दोहरी एंट्री और निष्क्रिय आधार बने कारण

जांच में सामने आया कि कई महिलाओं के एक से अधिक पंजीयन हो गए थे – यानी एक ही महिला का नाम दो बार जुड़ा हुआ था। इसके अलावा बड़ी संख्या में महिलाओं के आधार कार्ड इनऐक्टिव (निष्क्रिय) मिले, जिनका पिछले 10 वर्षों से कोई अपडेट नहीं हुआ था। यही कारण रहा कि तकनीकी गड़बड़ियों और डुप्लीकेट नामों के चलते करीब 70 हजार नामों को हटाना पड़ा।

ऑफलाइन-ऑनलाइन दोनों आवेदन बन गए उलझन

जानकारी के अनुसार, बड़ी संख्या में महिलाओं ने पहले ऑनलाइन आवेदन किया और फिर आंगनबाड़ी केंद्रों में ऑफलाइन फार्म भी जमा कर दिए। सुपरवाइजरों ने इन सभी आवेदनों को मंजूरी दे दी थी, जिससे एक ही महिला के दो-दो आवेदन दर्ज हो गए। शुरुआत में बिना सत्यापन लाभ देने की प्रक्रिया अपनाई गई, लेकिन बाद में शिकायतें आने पर विस्तृत जांच की गई, जिससे यह गड़बड़ी उजागर हुई।

जल्द खुलेगा नया पंजीयन पोर्टल

राज्य सरकार अब जल्द ही ऐसे नामों को दोबारा जोड़ने के लिए पोर्टल खोलने की तैयारी में है। 21 वर्ष से अधिक उम्र और विवाहित महिलाएं, जिनके नाम तकनीकी कारणों से हटाए गए थे, वे पुनः पंजीयन कर लाभ प्राप्त कर सकेंगी।

किस जिले में कितनी लाभार्थी महिलाएं?

  • रायपुर: 5.29 लाख से अधिक

  • बिलासपुर: 4.21 लाख

  • दुर्ग: 4 लाख से अधिक

  • बलौदाबाजार: 3.26 लाख

  • महासमुंद: 3.21 लाख

  • कोरबा: 2.92 लाख

  • जांजगीर-चांपा: 2.87 लाख

  • रायगढ़: 3 लाख से अधिक

  • राजनांदगांव: 2.55 लाख

  • कबीरधाम: 2.52 लाख

सरकार का वादा और पालन

गौरतलब है कि भाजपा ने विधानसभा चुनाव 2023 के दौरान महिलाओं को हर माह 1,000 रुपये देने का वादा किया था। सत्ता में आने के बाद भाजपा सरकार ने इसे लागू करते हुए राज्य की महिलाओं को महतारी वंदन योजना के तहत आर्थिक सहायता देना शुरू कर दिया।