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सरकारी दफ्तरों में लेटलतीफी नहीं चलेगी! 15 जून से लागू हुआ नया अटेंडेंस सिस्टम, देरी पर कटेगी सैलरी

राज्य सरकार ने सभी सरकारी कर्मचारियों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए एक नया नियम लागू कर दिया है। 15 जून से पूरे प्रदेश में यह आदेश प्रभावी हो गया है, जिसके तहत अब सभी कर्मचारियों को हर दिन सुबह 10 बजे से शाम 5:30 बजे तक कार्यालय में उपस्थित रहना अनिवार्य कर दिया गया है।

इस नए आदेश के अनुसार, आधार आधारित उपस्थिति प्रणाली को अनिवार्य रूप से लागू किया गया है। यानी अब कर्मचारियों को मोबाइल ऐप के माध्यम से आधार प्रमाणीकरण कर अपनी हाजिरी और छुट्टी का रिकॉर्ड दर्ज करना होगा। यह नियम नियमित, संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों सहित सभी सरकारी कर्मचारियों पर लागू होगा।

ऑफिस प्रमुखों पर जिम्मेदारी तय

सरकार ने सभी कार्यालय प्रमुखों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने अधीनस्थ संस्थानों में इस प्रणाली को शीघ्र स्थापित करें। इसके लिए उन्हें NIC से तकनीकी सहायता लेकर समय रहते सभी जरूरी इंतजाम करने होंगे।

गड़बड़ी पर वेतन कटौती और कार्रवाई तय

यदि कोई कर्मचारी निर्धारित समय में अटेंडेंस दर्ज नहीं करता है तो उसकी जिम्मेदारी स्वयं उसकी और उसके संस्था प्रमुख की होगी। ऐसे मामलों में वेतन कट सकता है और आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि समयपालन शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

स्वास्थ्य विभाग के लिए भी विशेष निर्देश

स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों के लिए भी यही नियम लागू रहेगा। सचिव अमित कटारिया ने आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि सभी स्वास्थ्यकर्मियों को भी मोबाइल ऐप से हाजिरी लगानी होगी, चाहे वे मंत्रालय में हों या मैदानी स्तर पर।

इस नई व्यवस्था के तहत सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि सभी अधिकारी और कर्मचारी समय पर कार्यालय पहुंचे और अपने कर्तव्यों का गंभीरता से पालन करें।

रायगढ़ मरीन ड्राइव विवाद: तोड़फोड़ की आशंका से डरे लोग, ज्ञापन सौंपकर जताई नाराजगी

रायगढ़, 14 जून 2025 — रायगढ़ में प्रस्तावित मरीन ड्राइव परियोजना को लेकर स्थानीय निवासियों में भय और नाराजगी है। शुक्रवार को वार्ड क्रमांक 29 के प्रगति नगर, जेलपारा और कयाघाट क्षेत्र के प्रभावित नागरिक बड़ी संख्या में नगर निगम पहुंचे। वहां उन्होंने आयुक्त को ज्ञापन सौंपा और परियोजना को कम से कम तोड़फोड़ के साथ लागू करने की मांग की।

लोगों ने कहा कि वे वर्षों से इन इलाकों में रह रहे हैं और अपनी मेहनत की कमाई से घर बनाए हैं। नगर निगम द्वारा हाल ही में क्षेत्र के 295 मकानों को नोटिस जारी कर 12 जून तक निर्माण अनुमति और नक्शा प्रस्तुत करने को कहा गया था। इस कार्रवाई ने लोगों में भारी दहशत पैदा कर दी है।

ज्ञापन में निवासियों ने अनुरोध किया कि मरीन ड्राइव का मार्ग इस तरह से बदला जाए जिससे पुराने शिव मंदिर, शनि मंदिर, मुक्ति धाम और छठ घाट के किनारे होते हुए सड़क निकाली जा सके। इससे लगभग 200 परिवारों के मकान टूटने से बच सकते हैं।

निवासियों ने यह भी कहा कि वे आर्थिक रूप से कमजोर तबके से आते हैं और अपने घर बनाने में वर्षों की मेहनत लगी है। अब जब तोड़फोड़ की बात सामने आई है, तो वे बेहद डरे और परेशान हैं।

निचोड़: रायगढ़ में प्रस्तावित मरीन ड्राइव परियोजना को लेकर लोगों में भारी असंतोष है। नागरिक चाहते हैं कि सरकार जनहित को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक रास्ते से निर्माण कार्य करे ताकि बेघर होने से बचा जा सके।

बिरगांव की मिनी आंगनबाड़ियों की दुर्दशा उजागर: बिना शौचालय और जगह के चल रहे हैं केंद्र, बच्चों और महिलाओं को हो रही भारी परेशानी

रायपुर (बिरगांव)। राजधानी से लगे बिरगांव क्षेत्र में संचालित मिनी आंगनबाड़ी केंद्रों की हालत बेहद चिंताजनक है। इन केंद्रों में न तो शौचालय की सुविधा है, न ही बच्चों के लिए पर्याप्त जगह। हालात ऐसे हैं कि बच्चे खुले में शौच जाने को मजबूर हैं, जिससे उनकी सेहत और साफ-सफाई पर गंभीर असर पड़ रहा है।

मानकों को दरकिनार कर चल रहे हैं केंद्र

सरकारी दिशानिर्देशों के अनुसार, एक मिनी आंगनबाड़ी केंद्र का न्यूनतम क्षेत्रफल 300 वर्गमीटर होना चाहिए, जिसमें शौचालय, खेल का मैदान और पढ़ाई की पर्याप्त जगह शामिल हो। लेकिन बिरगांव के कई वार्डों में यह केंद्र मात्र 150 से 200 वर्गफुट की छोटी-सी जगह में संचालित हो रहे हैं।

गर्भवती महिलाएं और बच्चे दोनों प्रभावित

हर वार्ड में 3 से 4 मिनी आंगनबाड़ी केंद्र मौजूद हैं। प्रत्येक केंद्र में औसतन 40 से 50 छोटे बच्चे और 8 से 14 गर्भवती महिलाएं नियमित रूप से आती हैं। लेकिन अव्यवस्थित भवन और बुनियादी सुविधाओं की कमी इनके स्वास्थ्य और विकास में बाधा बन रही है।

मायूसी भरी हकीकत – जमीनी रिपोर्ट

वार्ड 35, आचोली – केंद्र 1:

कुल 22 बच्चों और 8 गर्भवती महिलाओं के लिए केवल 150 वर्गफुट जगह है। न शौचालय है और न खेलने की व्यवस्था।

वार्ड 35, आचोली – केंद्र 2:

70 पंजीकृत बच्चों में से लगभग 30 बच्चे रोज आते हैं। यहां भी क्षेत्रफल मात्र 150 वर्गफुट है और शौचालय नदारद है।

वार्ड 30, केंद्र 25:

यहां 60 बच्चे और 14 गर्भवती महिलाएं पंजीकृत हैं। बच्चों को खेलने और पढ़ाई दोनों के लिए एक ही तंग कमरा उपलब्ध है और शौचालय की सुविधा नहीं है।

पोषण बेहतर, लेकिन बाकी व्यवस्थाएं कमजोर

इन केंद्रों में पोषण कार्यक्रम के तहत Ready-to-Eat नाश्ता और पौष्टिक दोपहर का भोजन जरूर दिया जा रहा है। गर्भवती महिलाओं को भी पोषक आहार दिया जा रहा है। लेकिन जिस छोटी सी जगह में यह सब किया जा रहा है, वहां सफाई और स्वास्थ्य सुरक्षा एक बड़ी चुनौती है।

स्थानीय लोगों की मांग – हो तुरंत कार्रवाई

बिरगांव के नागरिकों और अभिभावकों ने प्रशासन से अपील की है कि वे जल्द से जल्द इन केंद्रों का निरीक्षण कर सुविधाएं सुधारें। बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए एक सुरक्षित, स्वच्छ और पर्याप्त स्थान जरूरी है।

यह समस्या केवल बच्चों की शिक्षा या पोषण की नहीं है, बल्कि यह महिलाओं की गरिमा और स्वास्थ्य से भी सीधा जुड़ा हुआ मुद्दा है। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से अपेक्षा है कि वे इसे प्राथमिकता देते हुए ठोस कदम उठाएं।

रायपुर के उरला में डामर फैक्ट्री में लगी भीषण आग, बड़ा हादसा टला – लपटें 5 किलोमीटर दूर तक दिखीं

रायपुर, 14 जून। राजधानी रायपुर के उरला गुमा औद्योगिक क्षेत्र स्थित Western Tar Production Pvt. Ltd. नामक डामर निर्माण फैक्ट्री में शनिवार सुबह भीषण आग लग गई। घटना सुबह करीब 11:30 बजे की है, जब फैक्ट्री के ऑयल टैंक में अचानक आग भड़क उठी। देखते ही देखते आग ने पूरी इकाई को अपनी चपेट में ले लिया। आग की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि फैक्ट्री से उठती लपटें और धुएं का गुबार 5 किलोमीटर दूर से भी दिखाई दे रहा था।

इस आगजनी से पूरे औद्योगिक क्षेत्र में हड़कंप मच गया। जानकारी के अनुसार, फैक्ट्री एक छोटी इकाई है और वहां न तो आग बुझाने के पर्याप्त इंतजाम थे और न ही कोई फायर सेफ्टी गार्ड तैनात था। आग लगते ही आसपास की अन्य फैक्ट्रियों ने फौरन प्रतिक्रिया दी और अपनी दमकल गाड़ियाँ भेजीं, जिससे आग को शुरुआती स्तर पर काबू में लाने में मदद मिली।

सूचना मिलते ही 112 इमरजेंसी सेवा की टीम और फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियाँ मौके पर पहुँचीं। घंटों की मशक्कत के बाद आग को पूरी तरह बुझा लिया गया, लेकिन तब तक फैक्ट्री का बड़ा हिस्सा जलकर खाक हो चुका था।

सबसे बड़ी राहत की बात यह रही कि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई और सभी कर्मचारी सुरक्षित हैं। हालांकि, इस घटना ने औद्योगिक क्षेत्रों में फायर सेफ्टी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अब यह मांग उठ रही है कि जिला प्रशासन और उद्योग विभाग ऐसी फैक्ट्रियों पर कड़ी नजर रखें और जहां सुरक्षा के मानकों की अनदेखी हो रही है, वहां सख्त कार्रवाई की जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आग समय पर नहीं बुझाई जाती, तो यह घटना एक बड़ी औद्योगिक त्रासदी बन सकती थी।

भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए अब जरूरी है कि हर औद्योगिक इकाई में अग्नि सुरक्षा से जुड़ी बुनियादी व्यवस्थाएं अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाएं।

रायपुर में 31 मेधावी श्रमिक बच्चों को मिलेंगे 2-2 लाख रुपए, मुख्यमंत्री करेंगे सम्मानित

रायपुर में 15 जून को न्यू सर्किट हाउस में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें राज्य के पंजीकृत श्रमिकों के 31 होनहार बच्चों को सम्मानित किया जाएगा। ये छात्र-छात्राएं 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं में शीर्ष 10 में स्थान प्राप्त करने वाले हैं। उन्हें “मुख्यमंत्री नोनी बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना” के तहत दो-दो लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि होंगे, वहीं श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन और छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. राम प्रताप सिंह भी उपस्थित रहेंगे।

श्रम मंत्री देवांगन ने जानकारी दी कि 10वीं के 26 और 12वीं के 5 बच्चों को यह पुरस्कार मिलेगा। हर छात्र को दो लाख रुपये दिए जाएंगे, जिसमें एक लाख रुपये दोपहिया वाहन के लिए और एक लाख रुपये नकद प्रोत्साहन स्वरूप होंगे।

इसके अतिरिक्त, छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल द्वारा राज्यभर के करीब 38,200 निर्माण श्रमिकों को 19.71 करोड़ रुपये की सहायता राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से उनके बैंक खातों में जमा की जाएगी। यह सहायता विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत दी जा रही है।

विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत लाभ और वितरित राशि इस प्रकार है:

मिनीमाता महतारी जतन योजना: 1,915 श्रमिकों को ₹3.83 करोड़

मुख्यमंत्री सायकल सहायता योजना: 279 श्रमिकों को ₹10.33 लाख

औजार सहायता योजना: 6,319 श्रमिकों को ₹2.19 करोड़

सिलाई मशीन योजना: 12 श्रमिकों को ₹94,800

नौनिहाल छात्रवृत्ति: 4,825 श्रमिकों को ₹96.17 लाख

मेधावी शिक्षा सहायता योजना: 155 श्रमिकों को ₹37.63 लाख

दीर्घायु सहायता योजना: 2 श्रमिकों को ₹40,000

सुरक्षा उपकरण सहायता योजना: 4,939 श्रमिकों को ₹74.08 लाख

खेल प्रोत्साहन योजना: 1 श्रमिक को ₹50,000

दीदी ई-रिक्शा योजना: 7 श्रमिकों को ₹7 लाख

मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता योजना: 264 श्रमिकों को ₹2.64 करोड़

नोनी सशक्तिकरण योजना: 2,486 श्रमिकों को ₹4.97 करोड़

श्रमिक सियान सहायता योजना: 372 श्रमिकों को ₹74.40 लाख

निशुल्क गणवेश एवं कॉपी-किताब सहायता: 15,066 श्रमिकों को ₹2 करोड़

आवास सहायता योजना: 25 श्रमिकों को ₹25 लाख

यह पहल राज्य के निर्माण श्रमिकों और उनके परिवारों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे उनके जीवनस्तर में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद की जा रही है।

फर्जी दस्तावेज़ से करोड़ों की ठगी: मृतकों के नाम पर बनाई पावर ऑफ अटॉर्नी, बुजुर्ग महिला की जमीन बेच दी

रायपुर। राजधानी में भूमाफियाओं के हौसले बुलंद हैं। ताजा मामला माना इलाके से सामने आया है, जहां कुछ आरोपियों ने फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार कर एक बुजुर्ग महिला की करोड़ों की जमीन हड़प ली। हैरानी की बात यह है कि जिन लोगों के नाम से सहमति दर्शाई गई, उनमें से कुछ की पहले ही मौत हो चुकी थी।

64 वर्षीय पुष्पा माखीजा के पति शीतल माखीजा ने साल 1990 में डूमरतराई के पास कमल विहार चौक क्षेत्र में 4 एकड़ जमीन खरीदी थी। यह जमीन उन्होंने अपने कुछ जानकारों के नाम से ली थी। बाद में इनमें से 2 एकड़ जमीन बेच दी गई और बाकी जमीन को बाकी साझेदारों ने पुष्पा माखीजा के नाम पर हक त्याग कर रजिस्ट्री करवा दी थी। हालांकि, कानूनी रूप से नामांतरण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई थी।

मृत व्यक्तियों की फर्जी सहमति दिखाकर किया सौदा

फरवरी 2024 में प्रशांत शर्मा नाम के व्यक्ति ने मृत हो चुके लोगों के नाम से फर्जी आम मुतियारनामा तैयार करवाया। इसमें आधार नंबर सहित 9 व्यक्तियों की सहमति दर्शाई गई, जिनमें से तीन की मृत्यु पहले ही हो चुकी थी। इसी जाली दस्तावेज के आधार पर प्रशांत ने पहले गजानंद मेश्राम को जमीन बेची, और फिर गजानंद ने वही जमीन महेश गोयल और विशाल शर्मा को 2 करोड़ रुपये में बेच दी।

कैसे हुआ नोटरी और रजिस्ट्री का काम?

मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब जिन तीन व्यक्तियों की मृत्यु हो चुकी थी, तो उनके नाम से फरवरी 2024 में नोटरी और रजिस्ट्री कैसे हो गई? शक है कि आरोपियों ने फर्जी पहचान वाले लोगों को खड़ा कर प्रक्रिया पूरी की। यह पूरी कार्रवाई पाटन तहसील में हुई।

पुलिस में मामला दर्ज, गिरफ्तारी बाकी

पीड़ित पुष्पा माखीजा को जब जमीन की नामांतरण प्रक्रिया की जानकारी मिली तो उन्होंने माना थाने में इसकी शिकायत की। पुलिस ने प्रशांत शर्मा समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और साजिश की धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। फिलहाल सभी आरोपी फरार हैं और पुलिस उनकी तलाश कर रही है।

प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल

यह मामला एक बार फिर से प्रशासन और रजिस्ट्री विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। यह स्पष्ट करता है कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए जमीन की खरीद-बिक्री संभव है और इसके लिए कोई मजबूत नियंत्रण प्रणाली मौजूद नहीं है।

रायपुर में बार और शराब दुकानों से परेशान मोहल्लेवासी, प्रदर्शन के बावजूद नहीं हुआ कोई ठोस एक्शन

रायपुर शहर के कई इलाकों में बार और शराब दुकानों की वजह से स्थानीय निवासियों का जीना मुश्किल हो गया है। देर रात तक बारों में शराबखोरी, गाली-गलौज और झगड़ों की घटनाएं आम हो गई हैं। नशे में धुत लोग मोहल्ले में उत्पात मचाते हैं और राहगीरों से भिड़ जाते हैं, जिससे लोगों में डर और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।

भाठागांव और संतोषी नगर में बढ़ी परेशानी

भाठागांव स्थित कराओके बार और संतोषी नगर के योगी बार को लेकर स्थानीय लोगों ने पहले भी प्रदर्शन किया है। इन बारों में देर रात तक पार्टी और शराब सेवन चलता रहता है, जिससे आसपास के निवासियों को शांति से रहना मुश्किल हो गया है। लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद इन बारों को स्थानांतरित नहीं किया गया और न ही कोई सख्त कार्रवाई हुई।

आबकारी विभाग की अनदेखी

शहर की कई शराब दुकानों में बने आहाता सेंटर देर रात तक खुले रहते हैं और चोरी-छिपे शराब परोसी जाती है। यहां प्रतिबंधित प्लास्टिक पाउच का भी खुलेआम इस्तेमाल हो रहा है, जिससे प्रदूषण की समस्या भी बढ़ रही है। हैरानी की बात यह है कि आबकारी विभाग की टीम इन जगहों की जांच करने नहीं आती, और न ही पुलिस की ओर से कोई ठोस कदम उठाए जाते हैं।

सड़क किनारे शराब दुकानें बनीं मुसीबत

मोवा, आमासिवनी, भाठागांव और फाफाडीह जैसे इलाकों में मुख्य सड़कों के किनारे स्थित शराब दुकानों से ट्रैफिक जाम और अव्यवस्था की स्थिति बनी रहती है। शराब खरीदने आए लोग अपनी गाड़ियां सड़क पर खड़ी कर देते हैं, जिससे यातायात बाधित होता है। कुछ लोग वहीं नशा करके उत्पात मचाते हैं और राह चलते लोगों से उलझ जाते हैं।

स्थानीय नागरिकों की मांग है कि इन बारों और शराब दुकानों पर नियंत्रण लगाया जाए, उनके संचालन के समय पर सख्ती हो और जिम्मेदार विभाग नियमित जांच करें ताकि मोहल्लों में शांति बनी रहे।

छत्तीसगढ़ में कोरोना के मामलों में तेजी, आंकड़ा पहुंचा 99 पर — सबसे ज्यादा केस रायपुर में

छत्तीसगढ़ में एक बार फिर कोरोना संक्रमण ने रफ्तार पकड़ ली है। शुक्रवार को प्रदेश में कुल 12 नए मामले सामने आए, जिनमें से 7 मरीज रायपुर से हैं। इसके साथ ही राज्य में कुल संक्रमितों की संख्या 99 तक पहुंच गई है। राहत की बात यह है कि इनमें से 49 लोग पूरी तरह से स्वस्थ हो चुके हैं।

इस समय 50 एक्टिव केस हैं, जिनमें 41 लोग होम आइसोलेशन में रहकर इलाज करा रहे हैं। वहीं, 6 मरीज अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें से एक की हालत गंभीर है और उसे आईसीयू में रखा गया है।

इस सप्ताह सरगुजा और दंतेवाड़ा में भी एक-एक नए संक्रमित मिले हैं, जिससे इन जिलों में पहला केस दर्ज किया गया है। इसके अलावा बिलासपुर से 2 और दुर्ग से 1 नया मामला रिपोर्ट किया गया है। अब तक प्रदेश के 9 जिलों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 24 जिले अभी भी कोरोना-मुक्त हैं।

रायपुर में सर्वाधिक मरीज मिल रहे हैं, जो कि प्रदेश की राजधानी होने के कारण यहां बाहरी लोगों की आवाजाही अधिक है। इससे संक्रमण फैलने की आशंका भी ज्यादा बनी हुई है।

प्रमुख बिंदु:

कुल संक्रमित: 99

ठीक हुए मरीज: 49

एक्टिव केस: 50

होम आइसोलेशन: 41

अस्पताल में भर्ती: 6 (1 आईसीयू में)

नए जिले: सरगुजा, दंतेवाड़ा

अब तक 9 जिलों में संक्रमण

स्वास्थ्य विभाग की टीम सभी मामलों पर निगरानी बनाए हुए है और लोगों से सतर्कता बरतने की अपील की जा रही है।

छत्तीसगढ़: पीडीएस चावल की कालाबाजारी का संदेह, जांच के लिए भेजा गया सैंपल

पुलगांव इलाके में गुरुवार को खाद्य विभाग की कार्रवाई में एक ऑटो से 20 कट्टा चावल जब्त किया गया। वाहन (सीजी 07 सीए 2164) में भरे चावल को पीडीएस (सार्वजनिक वितरण प्रणाली) का संदेह होने पर जांच शुरू की गई है।

खाद्य निरीक्षक रेणु जागड़े ने बताया कि जब वाहन को रोका गया, तो उसमें अलग-अलग बोरियों में चावल भरा हुआ था। जांच में संदेह हुआ कि यह चावल सरकारी योजना के तहत वितरित होने वाला पीडीएस चावल हो सकता है। तुरंत कार्रवाई करते हुए वाहन और चावल को पुलगांव थाना में खड़ा करा दिया गया।

इसके बाद नान (नगरीय प्रशासन निगम) को इसकी सूचना दी गई। मौके पर नान की तकनीकी अधिकारी अर्चना परगनिया और भारती साहू पहुंचीं और चावल का सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा। रिपोर्ट आने के बाद अगली कार्रवाई की जाएगी।

वाहन चालक सनद यादव को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। उसने बताया कि यह चावल सेक्टर-9 स्थित शुभम जैन की दुकान से लोड किया गया था और उसे अंडा रोड के कोनारी मोड़ पर स्थित मीनाक्षी राइस मिल तक पहुंचाना था।

खास बात यह है कि यही वाहन कुछ महीने पहले भी करही चौक में पकड़ा गया था, जिसमें 12 क्विंटल पीडीएस चावल भरा मिला था। उस समय एफआर मिलावट की पुष्टि हुई थी, लेकिन विभाग ने एफआईआर नहीं दर्ज कराई थी। वाहन को बैंक गारंटी पर छोड़ा गया था। अब वही गाड़ी फिर एक बार पीडीएस चावल की कालाबाजारी में पकड़ी गई है।

खाद्य नियंत्रक ने कहा

यह मामला छत्तीसगढ़ में पीडीएस के चावल की कालाबाजारी और संबंधित विभाग की लापरवाही पर सवाल खड़ा करता है।

16 जून से छत्तीसगढ़ में शाला प्रवेशोत्सव की शुरुआत, जानिए नए शैक्षणिक सत्र में क्या होंगे बदलाव

छत्तीसगढ़ में नया शैक्षणिक सत्र 16 जून से आरंभ होने जा रहा है। इसके तहत राज्य सरकार “शाला प्रवेशोत्सव” का आयोजन करने जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेश के सभी जनप्रतिनिधियों को पत्र लिखकर इस अभियान में सक्रिय रूप से भाग लेने की अपील की है। इस अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य का कोई भी बच्चा स्कूल से बाहर न रहे और सभी का समय पर नामांकन हो जाए।

मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में कहा कि 100% साक्षरता हासिल करना एक कठिन लक्ष्य जरूर है, लेकिन इसे समाज के सहयोग से संभव बनाया जा सकता है। उन्होंने सभी वर्गों से आग्रह किया है कि वे शिक्षा के इस महाअभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें।

शिक्षा गुणवत्ता को लेकर नई पहल

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में “मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता अभियान” की भी शुरुआत की जा रही है। इस पहल का मकसद सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारना है। इसके तहत शिक्षकों की तैनाती में सुधार लाकर एकल शिक्षक और शिक्षकविहीन स्कूलों में प्राथमिकता से शिक्षक भेजे जा रहे हैं ताकि हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।

उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि सभी जनप्रतिनिधि इस अभियान का नेतृत्व करेंगे और राज्य को शिक्षित, आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने में योगदान देंगे।

गर्मी को देखते हुए स्कूल टाइमिंग में बदलाव

राज्य में भीषण गर्मी को ध्यान में रखते हुए स्कूलों के समय में बदलाव किया गया है। अब प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्कूल सुबह 7 बजे से 11 बजे तक संचालित किए जाएंगे। वहीं दो पालियों में चलने वाले स्कूलों में उच्च कक्षाओं की पढ़ाई सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक होगी।

हालांकि, बारिश के मौसम या मौसम में बदलाव के अनुसार स्कूलों के समय में फिर से बदलाव किया जा सकता है। अनुमान है कि मानसून के बाद स्कूलों का समय सुबह 9 बजे से दोपहर 2 या 3 बजे तक किया जा सकता है।

इस तरह, राज्य सरकार ने शिक्षा की गुणवत्ता और बच्चों की स्कूल में शत-प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक और सशक्त योजना तैयार की है।