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रायपुर के 36 आत्मानंद स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी, 11वीं-12वीं के छात्र सबसे ज्यादा प्रभावित

रायपुर जिले में संचालित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी बच्चों की पढ़ाई पर सीधा असर डाल रही है। जिले के 36 स्कूलों में करीब 250 शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं, जिससे शिक्षा व्यवस्था चरमरा गई है। विशेष रूप से 11वीं और 12वीं के छात्र-छात्राओं की पढ़ाई पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ रहा है, जो प्रतियोगी परीक्षाओं की भी तैयारी कर रहे हैं।

अभिभावक परेशान, प्राचार्य असहाय

कई स्कूलों में गणित, रसायन और वाणिज्य जैसे मुख्य विषयों के शिक्षक ही नहीं हैं। छात्रों को न तो नियमित कक्षाएं मिल रही हैं और न ही पढ़ाई का माहौल। इससे चिंतित अभिभावकों ने जब शिकायत की तो कई प्राचार्यों ने साफ शब्दों में कहा कि “हम कुछ नहीं कर सकते, चाहें तो टीसी ले जाइए।” गुरुनानक चौक स्थित निवेदिता स्कूल में तो प्राचार्य आर.डी. वर्मा ने यही बात दोहराई, जिससे अभिभावकों में नाराजगी है।

शिक्षा विभाग के पास कोई ठोस योजना नहीं

शिक्षकों की इस कमी को लेकर जब जिला शिक्षा कार्यालय से संपर्क किया गया तो एडीईओ कलावती भगत ने स्पष्ट किया कि फिलहाल स्वामी आत्मानंद स्कूलों में शिक्षक नियुक्ति को लेकर कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि अभी भर्ती प्रक्रिया शुरू करने को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया गया है।

हर स्कूल में शिक्षकों की भारी कमी

जिला स्तर पर कई स्कूलों में शिक्षकों की संख्या जरूरत से बेहद कम है। निवेदिता स्कूल में मुख्य विषयों के चार शिक्षक नहीं हैं, बीपी पुजारी स्कूल में चार शिक्षकों की कमी है, वहीं आरडी तिवारी स्कूल में भी दो-तीन शिक्षक कम हैं। लगभग हर आत्मानंद स्कूल में इसी तरह की स्थिति बनी हुई है।

मांग पत्र भेजने के बावजूद नहीं हो रही भर्ती

प्राचार्य बताते हैं कि वे समय-समय पर रिक्त पदों की जानकारी मांग पत्रों के माध्यम से शिक्षा विभाग को भेजते हैं, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। ऐसे में न केवल विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित हो रही है, बल्कि शिक्षकों पर भी अतिरिक्त कक्षाएं लेने का दबाव बढ़ रहा है।

छात्रों के भविष्य पर संकट

11वीं-12वीं की कक्षाओं में पढ़ने वाले छात्र, जो जेईई, नीट जैसी प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, शिक्षकों की कमी से खासे प्रभावित हैं। मुख्य विषयों में कमजोर आधार के कारण उनका भविष्य खतरे में नजर आ रहा है। अगर जल्द ही शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हुई, तो इसका दीर्घकालिक असर छात्रों की पढ़ाई और करियर पर पड़ेगा।

मुख्यमंत्री ने ‘सार्थक एवं रक्षक अभियान’ का शुभारंभ किया, कहा- बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा से बनेगा सशक्त समाज

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के 15वें स्थापना दिवस के मौके पर ‘सार्थक एवं रक्षक अभियान’ की शुरुआत की। राजधानी रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने बाल अधिकारों को लेकर जनजागरूकता की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि आयोग की पहल से प्रदेश के दूरस्थ इलाकों में बच्चों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बच्चों में अधिकारों की समझ विकसित करना समाज को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। बस्तर और सरगुजा जैसे पिछड़े अंचलों में आज भी बच्चे कम उम्र में काम की तलाश में घर छोड़ देते हैं और कई बार शोषण का शिकार हो जाते हैं। ऐसे बच्चों की पहचान कर उन्हें शिक्षा और रोजगार से जोड़ने की जिम्मेदारी आयोग की है।

उन्होंने कहा कि सरकार बच्चों और युवाओं के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं चला रही है। शिक्षा के क्षेत्र में प्रयास आवासीय विद्यालय, नालंदा परिसर, दिल्ली का ट्राइबल यूथ हॉस्टल जैसे कदम युवाओं को बेहतर भविष्य की ओर अग्रसर कर रहे हैं। गांव-गांव में स्कूल, कॉलेज और कोचिंग सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।

आयोग की अध्यक्ष वर्णिका शर्मा ने अपने संबोधन में आयोग द्वारा किए जा रहे कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ‘सार्थक’ अभियान के माध्यम से आमजन को बाल अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाएगा, जबकि ‘रक्षक’ अभियान का उद्देश्य विश्वविद्यालयों में बाल संरक्षण कानूनों की जानकारी देना है।

इस मौके पर बाल अधिकारों के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले पुलिस कर्मियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और छात्राओं को सम्मानित किया गया। साथ ही आयोग की नई मार्गदर्शिका बुकलेट, ‘रक्षक’ बुकलेट, और ‘गुड टच-बैड टच’, मानव तस्करी व शिक्षा के अधिकार पर आधारित चित्र पुस्तकों का विमोचन किया गया।

समारोह में विधायक सुनील सोनी, पुरंदर मिश्रा, गुरु खुशवंत साहेब, नागरिक आपूर्ति निगम अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव, वक्फ बोर्ड अध्यक्ष डॉ. सलीम राज समेत कई जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

भाजपा विधायकों की बैठक 18 जून को, शीर्ष नेतृत्व करेगा कार्यों की समीक्षा

छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार बनने के बाद अब मंत्रियों और विधायकों के कामकाज पर संगठन की पैनी नजर है। इसी क्रम में 18 जून को दोपहर 12 बजे रायपुर स्थित प्रदेश भाजपा कार्यालय में भाजपा विधायक दल की बैठक बुलाई गई है। बैठक को लेकर सभी विधायकों को अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं।

भाजपा के बड़े नेता रहेंगे बैठक में शामिल

इस महत्वपूर्ण बैठक में भाजपा के राष्ट्रीय और प्रांतीय स्तर के प्रमुख पदाधिकारी शामिल होंगे। इनमें अखिल भारतीय सह संगठन मंत्री शिव प्रकाश, प्रदेश प्रभारी नितिन नबीन, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, प्रदेश अध्यक्ष किरण देव, क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल और प्रांत संगठन मंत्री पवन साय प्रमुख रूप से मौजूद रहेंगे।

संकल्प से सिद्धि अभियान की होगी समीक्षा

सूत्रों के अनुसार, बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 11 वर्ष पूरे होने पर शुरू किए गए “संकल्प से सिद्धि” अभियान की प्रगति की समीक्षा की जाएगी। सभी विधायकों से पूछा जाएगा कि उनके विधानसभा क्षेत्रों में इस अभियान के तहत अब तक कौन-कौन से कार्य किए गए हैं और भविष्य में किन गतिविधियों की योजना है। संगठन का लक्ष्य इस अभियान के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों तक सरकार की उपलब्धियों को पहुंचाना है।

मानसून सत्र की तैयारियों पर भी हो सकती है चर्चा

बैठक में राज्य विधानसभा के आगामी मानसून सत्र को लेकर भी विचार-विमर्श किया जा सकता है। विधायकों को सत्र के दौरान उठाए जाने वाले मुद्दों और रणनीति को लेकर मार्गदर्शन दिया जा सकता है।

राजस्व मंत्री की विभागीय समीक्षा बैठक आज

इस बीच, 17 जून को सुबह 11 बजे राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा मंत्रालय में अपने विभाग से संबंधित कार्यों की समीक्षा करेंगे। बैठक में राजस्व, आपदा प्रबंधन, भूमि अधिग्रहण, नक्शा निरीक्षण, डिजिटल क्रॉप सर्वे और जीआईएस प्रोजेक्ट्स की प्रगति पर चर्चा होगी। इसके अलावा नायब तहसीलदारों, भू-अभिलेख अधिकारियों और अन्य राजस्व अधिकारियों की पदोन्नति से जुड़े मुद्दों पर भी विचार किया जाएगा।

14 जुलाई से शुरू होगा छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र, केवल 5 दिन चलेगी कार्यवाही, सचिवालय ने जारी की अधिसूचना

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र 14 जुलाई 2025 से शुरू होने जा रहा है। विधानसभा सचिवालय ने सत्र को लेकर आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। इस बार सत्र केवल 5 दिन यानी 14 से 18 जुलाई तक चलेगा।

विधानसभा सचिव दिनेश शर्मा के हस्ताक्षर से जारी विज्ञप्ति में बताया गया है कि इस अवधि में कुल पांच बैठकें आयोजित की जाएंगी। मानसून सत्र के दौरान वित्तीय मामलों के साथ अन्य महत्वपूर्ण शासकीय कार्यों पर भी चर्चा की जाएगी।

यह सत्र राजनीतिक दृष्टिकोण से भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि सरकार को अपनी योजनाओं और नीतियों को सदन में रखने का अवसर मिलेगा। वहीं, विपक्ष को भी सरकार से सवाल पूछने और जवाब मांगने का पूरा मौका मिलेगा। राजनीतिक हलकों में इस सत्र के दौरान गरमागर्मी और तीखी बहस की संभावनाएं जताई जा रही हैं।

कैबिनेट बैठक 18 जून को

इसके पहले 18 जून 2025 को सुबह 10 बजे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक बुलाई गई है। यह बैठक मुख्यमंत्री निवास कार्यालय, सिविल लाइन रायपुर में होगी, जिसमें मानसून सत्र से पहले कई अहम मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने परिवहन विभाग को सौंपे 48 नए वाहन, उड़नदस्ता दल की क्षमता में होगी वृद्धि

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राज्य में सड़क सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को सशक्त बनाने के उद्देश्य से परिवहन विभाग के उड़नदस्ता दल को 48 नवीन वाहन सौंपे। अपने निवास कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने इन वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया और विभाग के निरीक्षकों को वाहन चाबियां प्रदान कीं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार सड़क परिवहन को सुरक्षित, सरल और अनुशासित बनाने के लिए लगातार ठोस प्रयास कर रही है। उन्होंने भरोसा जताया कि इन उन्नत वाहनों के जरिए उड़नदस्ता दल नियमों का उल्लंघन करने वालों पर शीघ्र कार्रवाई कर सकेगा, जिससे सड़क दुर्घटनाओं में गिरावट आएगी और यातायात नियंत्रण बेहतर होगा।

उन्होंने कहा कि इन वाहनों की तैनाती से ट्रैफिक नियमों को लेकर आम जनता में जागरूकता भी बढ़ेगी और दूरस्थ क्षेत्रों में भी निगरानी और त्वरित कार्रवाई संभव होगी। यह पहल राज्य की सड़क सुरक्षा व्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में एक अहम कदम है।

मुख्यमंत्री साय ने नागरिकों से ट्रैफिक नियमों का पालन करने, हेलमेट और सीट बेल्ट का अनिवार्य उपयोग करने तथा नशे की हालत में वाहन न चलाने की अपील की। उन्होंने कहा कि आम जनता की सहभागिता से ही एक सुरक्षित और संवेदनशील सड़क परिवेश का निर्माण संभव है।

इस अवसर पर विधायक पुरंदर मिश्रा, नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव, परिवहन सचिव सह आयुक्त एस. प्रकाश, अपर परिवहन आयुक्त डी. रविशंकर सहित कई अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।

हाईवा की चपेट में आने से 12 साल के मासूम की मौत, ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, हाईवे पर घंटों जाम

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के धरसींवा थाना क्षेत्र में एक दर्दनाक हादसा हो गया। मंगलवार दोपहर करीब 2 बजे एक 12 साल का बच्चा साइकिल चलाते हुए सड़क पर गिर गया, तभी तेज रफ्तार में आ रहे हाईवा ट्रक ने उसे कुचल दिया। हादसे में मासूम की मौके पर ही मौत हो गई। मृतक की पहचान मोंटू घृतलहरे के रूप में हुई है।

घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश फैल गया। ग्रामीण बड़ी संख्या में इकट्ठा होकर रायपुर-बिलासपुर नेशनल हाईवे पर उतर आए और सड़क को पूरी तरह जाम कर दिया। प्रदर्शनकारी ग्रामीणों ने लगभग 4 घंटे तक आवागमन बाधित रखा।

ग्रामीणों की मांग है कि जिस स्थान पर यह हादसा हुआ है, वहां काफी समय से अंडर ब्रिज बनाने की मांग की जा रही है, लेकिन प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते अंडर ब्रिज बनाया गया होता, तो यह दर्दनाक हादसा टाला जा सकता था।

घटना के बाद हाईवा ड्राइवर मौके से फरार हो गया, हालांकि पुलिस ने ट्रक को जब्त कर लिया है। हालात को संभालने के लिए इलाके के आधा दर्जन थाना प्रभारियों के साथ खमतराई के सीएसपी और एएसपी सहित कई प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को शांत कराने का प्रयास कर रहे हैं।

यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा और बुनियादी ढांचे की लापरवाही की तरफ इशारा करता है, जिससे ग्रामीणों में गुस्सा और गहराता जा रहा है।

छत्तीसगढ़ स्कूल समय में बदलाव पर असमंजस, दो पाली वाले स्कूलों के लिए कोई दिशा-निर्देश नहीं

राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ में नए शिक्षा सत्र की शुरुआत के साथ ही सभी सरकारी, अनुदानित, गैर-अनुदानित और निजी स्कूलों के समय में अस्थायी रूप से बदलाव किया है। अब 17 जून से 21 जून तक ये सभी स्कूल सुबह 7 बजे से 11 बजे तक संचालित होंगे। इसके बाद सोमवार, 23 जून से स्कूल पूर्व निर्धारित समय पर ही लगेंगे।

हालांकि, स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश अधूरा प्रतीत हो रहा है क्योंकि इसमें दो पाली में चलने वाले स्कूलों को लेकर कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं दिए गए हैं। प्रदेश में कई ऐसे सरकारी और निजी स्कूल हैं, जो आज भी दो पालियों में संचालित हो रहे हैं। ऐसे में इन स्कूलों के प्रबंधन और विद्यार्थियों में भ्रम की स्थिति बन गई है।

गर्मी से राहत देने के लिए बदला गया समय

यह फैसला लगातार बढ़ती गर्मी और उमस को देखते हुए लिया गया है। विभाग ने माना है कि इन मौसमीय परिस्थितियों का विद्यार्थियों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। इसी कारण अस्थायी रूप से स्कूलों का समय घटाया गया है।

विलंब से जारी हुआ आदेश, अभिभावकों को भी परेशानी

शिक्षक संगठनों और विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से पहले ही शाला प्रवेशोत्सव की तारीख आगे बढ़ाने की मांग की गई थी। लेकिन शिक्षा विभाग ने सत्र शुरू होने के एक दिन बाद ही यह आदेश जारी किया, जिससे कई स्कूल और अभिभावक समय पर जानकारी नहीं प्राप्त कर पाए। इससे विद्यार्थियों को भी असुविधा का सामना करना पड़ सकता है।

स्पष्ट निर्देशों की मांग

अब दो पाली में संचालित स्कूलों के शिक्षक, प्रबंधन और माता-पिता शिक्षा विभाग से जल्द से जल्द स्थिति स्पष्ट करने की मांग कर रहे हैं ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो और सभी स्कूल समय पर समन्वित रूप से संचालित हो सकें।

फ्री होल्ड में देरी से परेशान मकान खरीदार, सरकारी रिकॉर्ड में कृषि भूमि बना रोड़ा

रायपुर। हाउसिंग बोर्ड, आरडीए और एनआरडीए की कई पुरानी आवासीय परियोजनाएं अब भी फ्री होल्ड की प्रक्रिया से दूर हैं। कारण यह है कि इन परियोजनाओं में जिन जमीनों पर मकान बने हैं, वे आज भी राजस्व रिकॉर्ड में कृषि या सरकारी जमीन के रूप में दर्ज हैं। यही तकनीकी बाधा इन मकानों को फ्री होल्ड में बदलने में सबसे बड़ा अड़चन बनी हुई है।

फाइलों में उलझा मामला, आवेदक चक्कर काट रहे

राज्यभर में हजारों मकान मालिक फ्री होल्ड के लिए आवेदन दे चुके हैं, लेकिन प्रशासनिक प्रक्रिया में देरी और भूमि प्रयोजन (लैंड यूज) के अधूरे बदलाव के कारण लोगों को फ्री होल्ड अधिकार नहीं मिल पा रहा है। यह मामला विशेष रूप से रायपुर के टाटीबंध, हीरापुर जैसे इलाकों में अधिक गंभीर है, जो हाउसिंग बोर्ड के डिवीजन-1 में आते हैं। यहां 15-20 साल पहले कॉलोनियां बसाई गई थीं, पर आज भी भूमि का डायवर्सन नहीं हुआ है।

डायवर्सन न होने से अटकी प्रक्रिया

हाउसिंग बोर्ड और अन्य निकायों ने समय पर राजस्व विभाग से भूमि का उपयोग आवासीय करने की अनुमति (डायवर्सन) नहीं ली, जिससे अब तकनीकी दिक्कतें सामने आ रही हैं। जमीन के उद्देश्य में बदलाव न होने के कारण इन मकानों को मालिकाना हक यानी फ्री होल्ड नहीं दिया जा सकता।

प्रदेशभर में 3000 से ज्यादा प्रभावित

रायपुर ही नहीं, पूरे छत्तीसगढ़ में इस समस्या से लोग जूझ रहे हैं। अनुमान है कि राज्यभर में 3,000 से अधिक लोग इस तकनीकी पेच में फंसे हैं। वे चाहते हैं कि उन्हें उनके मकानों का पूर्ण मालिकाना अधिकार मिले, लेकिन विभागीय प्रक्रियाएं बाधा बनी हुई हैं।

समाधान की कोशिशें जारी

रायपुर के अपर कलेक्टर कीर्तिमान सिंह राठौर ने बताया कि कई कॉलोनियों की जमीन का प्रयोजन आज तक नहीं बदला गया है, जिससे फ्री होल्ड में दिक्कत हो रही है। उन्होंने कहा कि हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों से बातचीत की गई है और जल्द ही इस समस्या का समाधान कर भूमि प्रयोजन को राजस्व रिकॉर्ड में बदला जाएगा।

रायपुर में बड़ा खुलासा: 10 बांग्लादेशी नागरिक हिरासत में, फर्जी दस्तावेज बनाकर रह रहे थे पिछले 20 साल से

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में पुलिस ने अवैध रूप से रह रहे 10 बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। इनमें पुरुष, महिलाएं और एक नाबालिग भी शामिल हैं। सभी को टिकरापारा क्षेत्र के विभिन्न स्थानों से पकड़ा गया है। पुलिस को इनकी मौजूदगी की गुप्त सूचना मिली थी, जिसके आधार पर कार्रवाई की गई।

सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने टिकरापारा इलाके में छापा मारकर तीन अलग-अलग परिवारों से पूछताछ की। जब उनसे पहचान पत्र दिखाने को कहा गया तो वे संतोषजनक जानकारी नहीं दे सके। सख्ती से पूछताछ करने पर उन्होंने खुद को बांग्लादेशी नागरिक स्वीकार कर लिया। इनमें तीन पति-पत्नी समेत कुल 10 लोग शामिल हैं।

फर्जी पहचान पत्र बनाए गए

बताया जा रहा है कि ये लोग बीते 15 से 20 सालों से रायपुर में रह रहे हैं और इस दौरान उन्होंने आधार कार्ड, राशन कार्ड जैसे सरकारी दस्तावेज भी बनवा लिए थे। पुलिस फिलहाल उनसे गहन पूछताछ कर रही है। उनके मोबाइल की कॉल डिटेल और स्थानीय संपर्कों की जांच भी की जा रही है।

एजेंट की भूमिका संदिग्ध

इससे पहले भी पुलिस ने एक बांग्लादेशी जोड़े को हिरासत में लिया था, जिन्होंने पूछताछ में खुलासा किया था कि वे एक एजेंट की मदद से रायपुर पहुंचे थे। मौजूदा मामले में भी उसी एजेंट की संलिप्तता सामने आ रही है। जानकारी के अनुसार, बांग्लादेश से लोग पश्चिम बंगाल, मुंबई और नागपुर होते हुए रायपुर पहुंचते हैं, जिसमें कई एजेंटों की भूमिका रहती है।

पुलिस कर रही विस्तृत जांच

एएसपी पश्चिम दौलत राम पोर्ते ने बताया कि गिरफ्तार लोगों से पूछताछ जारी है और उनके दस्तावेजों की गहराई से जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क से और कितने लोग जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि मामले का जल्द ही पूरी तरह से खुलासा किया जाएगा।

टीकाकरण के बाद नवजात की मौत, परिजनों ने अस्पताल पर लापरवाही का आरोप लगाया

छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में स्थित जिला अस्पताल कबीरधाम में एक दर्दनाक घटना सामने आई है। सोमवार को एक नवजात शिशु की मौत टीका लगने के कुछ घंटों बाद हो गई। बच्चे के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है।

परिवार के सदस्य मुकेश निर्मलकर ने बताया कि तीन दिन पहले उनकी पत्नी को प्रसव के लिए जिला अस्पताल लाया गया था, जहां उसने एक स्वस्थ बालक को जन्म दिया। सोमवार को जब शिशु को नियमित टीकाकरण के लिए अस्पताल के टीकाकरण कक्ष ले जाया गया, उस समय वह पूरी तरह स्वस्थ था।

टीका लगने के कुछ समय बाद ही बच्चे की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। डॉक्टरों द्वारा जांच किए जाने पर शिशु को मृत घोषित कर दिया गया। इस घटना से गुस्साए परिजनों ने अस्पताल परिसर में विरोध प्रदर्शन किया और मौत की स्पष्ट वजह बताने की मांग करते हुए नारेबाजी की।

अस्पताल प्रबंधन की ओर से फिलहाल कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया गया है। प्रशासन का कहना है कि मौत के सही कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही की जा सकेगी। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम द्वारा नवजात का पोस्टमार्टम किया जाएगा। हालांकि, अस्पताल प्रशासन ने लापरवाही के आरोपों से इनकार किया है और मामले की जांच की बात कही है।