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रेनवाटर हार्वेस्टिंग के नाम पर वसूले 24 करोड़, जमीन पर नहीं उतरी योजना

नगर निगम ने रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के नाम पर करीब 24 करोड़ रुपये तो वसूल लिए, लेकिन उन पैसों का उपयोग जमीन पर होता नहीं दिख रहा। जिन लोगों से ये राशि ली गई, उनके घरों में न तो रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया गया और न ही निगम ने इसे लगाने की कोशिश की। इसका सीधा असर ये हो रहा है कि गर्मियों में जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है।

बुधवार को निगम मुख्यालय में नगरीय नियोजन एवं भवन अनुज्ञा विभाग की सलाहकार समिति की बैठक हुई, जिसमें ये खुलासा हुआ। बैठक में मौजूद निगम अधिकारियों ने बताया कि 2017 से 2025 तक 6270 आवासीय और 961 व्यावसायिक प्रकरणों में करीब 23.88 करोड़ रुपये की राशि रेनवाटर हार्वेस्टिंग के लिए वसूली गई है। लेकिन अधिकांश मामलों में लोगों ने न तो सिस्टम लगवाया और न ही जमा की गई राशि की वापसी के लिए आवेदन किया।

बैठक में एमआईसी सदस्य मनोज वर्मा ने अफसरों को निर्देश दिया कि अब हर दिन कम से कम 10 घरों का सर्वे कराया जाए, जिससे यह पता चल सके कि किस घर में रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया गया है और किसमें नहीं।

इसके अलावा बैठक में अवैध प्लाटिंग के मामले भी उठे। नगर निवेश विभाग ने बताया कि 2019 से फरवरी 2025 तक 329 मामलों में अवैध प्लाटिंग के तहत मुरुम रोड काटने की कार्रवाई की गई है। कुछ जगहों पर सूचना बोर्ड भी लगाए गए हैं, लेकिन असल में अवैध प्लाटिंग पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई है। राजधानी में अवैध प्लाटिंग का धंधा तेजी से फैल रहा है, और इसमें जोन स्तर पर मिलीभगत की आशंका भी जताई गई है।

नियम के अनुसार, 150 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले भूखंडों पर रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य है। सिस्टम लगवाने पर निगम द्वारा जमा राशि लौटाई जाती है, लेकिन हकीकत यह है कि न तो लोग सिस्टम लगवा रहे हैं और न ही राशि रिफंड कराने में रुचि दिखा रहे हैं।

इस लापरवाही का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है, क्योंकि जल संरक्षण की कोई व्यवस्था न होने के कारण पानी का स्तर हर साल और नीचे जा रहा है।

प्रतिबंध के बावजूद बेमेतरा में धड़ल्ले से बिक रहा जर्दायुक्त गुटखा, प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल

बेमेतरा ज़िले में प्रतिबंध के बावजूद जर्दायुक्त गुटखा की खुलेआम बिक्री ने प्रशासनिक लापरवाही की पोल खोल दी है। वर्षों पहले स्वास्थ्य कारणों से जिले में तंबाकूयुक्त गुटखा के निर्माण और विक्रय पर सख्त पाबंदी लगाई गई थी, लेकिन वर्तमान स्थिति देखी जाए तो यह प्रतिबंध केवल कागजों तक ही सीमित रह गया है।

स्थानीय बाजारों, गली-मोहल्लों, पान दुकानों, ठेलों और किराना दुकानों में यह प्रतिबंधित गुटखा धड़ल्ले से बिक रहा है। गुणवत्ताहीन और सस्ते जर्दायुक्त गुटखे की यह कालाबाजारी प्रशासन की जानकारी में होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है, जिससे प्रशासन की नीयत पर सवाल उठने लगे हैं।

यह अवैध कारोबार न केवल सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ा रहा है, बल्कि आमजन के स्वास्थ्य के साथ भी खिलवाड़ कर रहा है। डॉक्टरों की मानें तो जर्दायुक्त गुटखे के सेवन से मुंह का कैंसर होने की संभावना अत्यधिक बढ़ जाती है।

इस पूरे मामले में सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि जिम्मेदार अधिकारी और आबकारी विभाग आंखें मूंदे बैठे हैं। इससे यह आशंका बलवती होती जा रही है कि कहीं इस अवैध व्यापार में प्रशासनिक संरक्षण तो नहीं मिला हुआ है? यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह कारोबार और भी गहराई तक फैल सकता है और जनस्वास्थ्य को भारी नुकसान पहुँचा सकता है।

सील बंद पानी की बोतल में मिला कीड़ा, व्यापारी ने कलेक्टर से की शिकायत कंपनी पर कार्रवाई की मांग, बोतल पर नहीं था एक्सपायरी डेट का उल्लेख

भिलाई के सुपेला क्षेत्र में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां तुलसी कंपनी की सील बंद पानी की बोतल में कीड़ा मिलने से हड़कंप मच गया। स्थानीय व्यापारी समसुल हक ने इस संबंध में कलेक्टर अभिजीत सिंह और नगर निगम आयुक्त राजीव कुमार पांडेय को लिखित शिकायत सौंपी है। उन्होंने कंपनी पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

समसुल हक की वेंकटेश्वर टॉकीज रोड स्थित दुकान पर जब एक ग्राहक ने पानी की बोतल खरीदी, तो उसमें कीड़ा देखकर वह नाराज़ हो गया। दुकानदार ने ग्राहक से माफी मांगते हुए बोतल वापस ली और नई बोतल दी, तब जाकर मामला शांत हुआ।

शिकायतकर्ता के अनुसार, कंपनी द्वारा न सिर्फ दूषित पानी सप्लाई किया जा रहा है, बल्कि कई बोतलों पर निर्माण और समाप्ति तिथि का उल्लेख भी नहीं किया गया है। यह न केवल उपभोक्ताओं की सेहत के साथ खिलवाड़ है, बल्कि नियमों का भी खुला उल्लंघन है।

समसुल हक ने अपनी शिकायत के साथ बोतल की फोटो और वीडियो भी प्रशासन को सौंपा है, ताकि ठोस कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

कंपनी प्रबंधन की सफाई:

इस पूरे मामले पर तुलसी कंपनी के मैनेजर राजेंद्र गिल ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “कंपनी संचालक फिलहाल बाहर हैं, इसलिए फोन संपर्क नहीं हो पा रहा है। मैं भी यात्रा में हूं, लेकिन लौटकर मामले की पूरी जानकारी लेकर जवाब दूंगा।”

प्रशासन की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन व्यापारी और स्थानीय लोग इस पर त्वरित और कठोर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

खरोरा में बुलडोजर कार्यवाही जारी, विकास की ओर बढ़ते कदम

खरोरा। उत्तर प्रदेश की तर्ज पर अब छत्तीसगढ़ के खरोरा नगर पंचायत में भी बुलडोजर कार्यवाही लगातार जारी है। नगर को स्वच्छ, सुविधायुक्त और सुंदर बनाने के उद्देश्य से नगर पंचायत प्रशासन ने विकास कार्यों को अपनी प्राथमिकता में रखा है।

नगर में तेजी से हो रहे विकास कार्य

नगर पंचायत के पूर्व अध्यक्ष अनिल सोनी, जो वर्तमान में अध्यक्ष प्रतिनिधि की भूमिका निभा रहे हैं, ने बताया कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार और ट्रिपल इंजन की ताकत से नगर में विकास कार्यों को तीव्र गति से अंजाम दिया जा रहा है। सड़क से लेकर नाली तक हर मोर्चे पर काम किया जा रहा है।

मुख्य मार्ग पर लगभग दो करोड़ रुपये की लागत से डिवाइडर सहित सड़क का निर्माण कराया गया है। साथ ही आगामी वर्षा ऋतु को ध्यान में रखते हुए नालियों की सफाई और नए नालियों के निर्माण को प्राथमिकता में लिया गया है।

अवैध कब्जा हटाने में प्रशासन सख्त

विकास के रास्ते में बाधा बन रहे अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। हाल ही में वार्ड क्रमांक 7 में योगेश द्विवेदी और उनकी पत्नी द्वारा किए गए अवैध कब्जे पर नगर पंचायत ने बुलडोजर चलाया। कार्यवाही के दौरान विरोध और अभद्रता करने पर दोनों को जेल भेजा गया। इससे नगर में अवैध कब्जाधारियों में भय का माहौल है।

इसी तरह बैतालहम नगर में वर्षों पुराने अवैध कब्जे को भी हटाया गया। इस कार्रवाई के दौरान पटवारी, तहसीलदार, थाना प्रभारी सहित प्रशासनिक अमला मौजूद रहा।

अनिल सोनी का स्पष्ट संदेश

नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि अनिल सोनी ने साफ कहा,

> “अब अवैध कब्जाधारी चाहे कोई भी हो, बख्शा नहीं जाएगा। नगर की व्यवस्था और विकास को लेकर प्रशासन पूरी तरह प्रतिबद्ध है।”

आने वाले समय में नगर को मिलेगा नया रूप

अनिल सोनी ने आगे बताया कि आने वाले समय में खरोरा नगर को एक आदर्श नगर पंचायत के रूप में विकसित करने की योजना है। इसके तहत कई महत्वपूर्ण योजनाएं लागू की जाएंगी, जिनमें शामिल हैं:

तिगड्डा चौक का सौंदर्यीकरण

चौपाटी और टैक्सी स्टैंड का निर्माण व व्यवस्थापन

बस स्टैंड और सोमवारी बाजार का पुनर्गठन

हर गली में नाली निर्माण

फुटपाथ दुकानदारों व ठेले वालों को व्यवस्थित करना

इस अवसर पर अनिल सोनी ने विधायक अनुज शर्मा, सांसद बृजमोहन अग्रवाल और नगर के सभी पार्षदों के सहयोग को विशेष रूप से सराहा और कहा कि सभी के सामूहिक प्रयास से खरोरा नगर पंचायत को पूरे प्रदेश में एक आदर्श मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा।

संवादाता: रोहित वर्मा  .

 

खमतराई पुलिस की बड़ी कार्रवाई: निगरानी बदमाश से अवैध शराब जब्त, मामला दर्ज

रायपुर। पुलिस उप महानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह के निर्देश पर जिलेभर में अवैध शराब कारोबारियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में खमतराई थाना पुलिस को सूचना मिली कि डेरापारा रावाभाठा क्षेत्र में एक व्यक्ति अपने पास थैले में शराब रखकर बिक्री कर रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने मौके पर दबिश दी और एक आरोपी को गिरफ्तार किया।

पकड़े गए आरोपी की पहचान खमतराई थाने के निगरानी बदमाश प्रदीप तिवारी (38 वर्ष), पिता शिवबरन तिवारी, निवासी डेरापारा रावाभाठा आरटीओ ऑफिस के पास के रूप में हुई है। आरोपी के पास से 93 पौवा देशी मसाला शराब जब्त की गई, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 9300 रुपये बताई जा रही है।

इस मामले में थाना खमतराई में अपराध क्रमांक 645/25 धारा 34(2) छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर आरोपी के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की गई है।

पुलिस ने बताया कि अवैध शराब कारोबार के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। मुखबिर तंत्र को सक्रिय कर अन्य ऐसे मामलों पर भी निगरानी रखी जा रही है।

साय कैबिनेट की बैठक में लिए गए कई अहम फैसले, अनुकम्पा नियुक्ति की शर्तों में संशोधन सहित अनेक निर्णय

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में 18 जून 2025 को हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा कर विभिन्न प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई। बैठक मानसून सत्र से पहले आयोजित की गई थी और इसका आयोजन मुख्यमंत्री निवास में सुबह 10 बजे हुआ।

बैठक में अनुसूचित जाति और जनजाति की सूची में तकनीकी कारणों से वंचित कुछ जातियों के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति, शिष्यवृत्ति और छात्रावास की सुविधा देने की सहमति दी गई। इनमें डिहारी कोरवा, बघेल क्षत्री, संसारी उरांव, पबिया, पविया, पवीया को अनुसूचित जनजाति के समतुल्य और डोमरा जाति को अनुसूचित जाति के समकक्ष सुविधाएं मिलेंगी।

इसके अलावा “प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना” के अंतर्गत घरों की छत पर सोलर रूफटॉप प्लांट लगाने के लिए राज्य सरकार द्वारा अतिरिक्त अनुदान दिए जाने का निर्णय हुआ है। इस योजना के तहत 2025-26 में 60,000 और 2026-27 में 70,000 सोलर पावर प्लांट लगाए जाने का लक्ष्य रखा गया है। 1 किलोवाट से 3 किलोवाट तक के प्लांट्स के लिए राज्य और केंद्र सरकार की ओर से सम्मिलित वित्तीय सहायता दी जाएगी।

वन्यजीवों और विशेषकर बाघों के संरक्षण हेतु “छत्तीसगढ़ टाइगर फाउंडेशन सोसायटी” के गठन की स्वीकृति दी गई। यह सोसायटी स्व-वित्तपोषित होगी और ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय समुदाय को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराएगी।

बैठक में नारायणपुर की अशासकीय संस्था “विश्वास” को रामकृष्ण मिशन आश्रम में मर्ज करने, बेमेतरा जिले में उद्यानिकी महाविद्यालय की स्थापना के लिए भूमि आवंटन और जशपुर की महिलाओं द्वारा तैयार पारंपरिक उत्पादों के ‘JashPure’ ब्रांड को राज्य सरकार अथवा CSIDC को हस्तांतरित करने की अनुमति दी गई।

अनुकम्पा नियुक्ति नीति में संशोधन करते हुए यह निर्णय लिया गया कि नक्सली हिंसा में शहीद हुए पुलिसकर्मियों के परिजनों को अब किसी भी विभाग या जिले में नियुक्ति दी जा सकेगी, जबकि पहले उन्हें केवल उसी विभाग या कार्यालय में नियुक्ति मिलती थी, जहां मृतक कार्यरत था।

साथ ही राज्य में गौण खनिजों के सुव्यवस्थित दोहन और पूर्वेक्षण हेतु “स्टेट मिनरल एक्सप्लोरेशन ट्रस्ट” के गठन को मंजूरी दी गई। इस ट्रस्ट के माध्यम से गौण खनिजों से प्राप्त रॉयल्टी का 2% हिस्सा अनुसंधान, अधोसंरचना और मानव संसाधन विकास में इस्तेमाल किया जाएगा।

कुल मिलाकर यह बैठक राज्य की सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय संरचना को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रही।

छत्तीसगढ़ विद्युत नियामक आयोग को मिले नए सदस्य, बिजली दर निर्धारण का रास्ता साफ

छत्तीसगढ़ सरकार के ऊर्जा विभाग ने राज्य विद्युत नियामक आयोग में दो नए सदस्यों की नियुक्ति को लेकर आदेश जारी कर दिया है। इन नियुक्तियों से अब बिजली दरों के निर्धारण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकेगा, जो काफी समय से रुकी हुई थी।

नई नियुक्तियों में महाराष्ट्र मंडल के आजीवन सभासद विवेक गनोदवाले और छत्तीसगढ़ स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी के मुख्य अभियंता अजय कुमार सिंह को आयोग का सदस्य बनाया गया है। ये दोनों सदस्य नियुक्ति की तारीख से पांच वर्षों तक या फिर 65 वर्ष की आयु तक पद पर बने रहेंगे—जो भी पहले हो।

गौरतलब है कि आयोग में सदस्यों के पद रिक्त होने की वजह से इस वर्ष बिजली दरों का निर्धारण नहीं हो पाया था, जबकि राज्य की विद्युत कंपनियों ने नियत समय पर अपने प्रस्ताव आयोग को सौंप दिए थे। नियमानुसार, टैरिफ निर्धारण की प्रक्रिया के लिए आयोग के अध्यक्ष के साथ कम से कम एक सदस्य की उपस्थिति अनिवार्य होती है। इस कारण अब तक टैरिफ पर कोई सुनवाई नहीं हो सकी थी।

इन नियुक्तियों पर महाराष्ट्र मंडल अध्यक्ष अजय मधुकर काले, सचिव चेतन दंडवते और अन्य पदाधिकारियों ने विवेक गनोदवाले को शुभकामनाएं दी हैं।

उल्लेखनीय है कि आयोग के दो सदस्यीय पद काफी समय से रिक्त थे। पूर्व सदस्य प्रमोद गुप्ता का कार्यकाल जुलाई 2021 में समाप्त हुआ था, जबकि सदस्य (विधि) विनोद देशमुख का कार्यकाल सितंबर 2023 में समाप्त हुआ। इन दोनों पदों की रिक्तता के चलते आयोग का कामकाज प्रभावित हो रहा था। अब इन नियुक्तियों के साथ आयोग की कार्यप्रणाली को फिर से गति मिलेगी।

मुख्यमंत्री साय का बयान: कांग्रेस नहीं कर सकी जो काम, उसे पीएम मोदी ने पूरा किया – जातीय जनगणना पर दी प्रतिक्रिया

देश में जातिगत जनगणना को लेकर अधिसूचना जारी हो चुकी है। इस पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस केवल घोषणाओं और वादों तक ही सीमित रही, लेकिन जो कार्य वह नहीं कर सकी, उसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने करके दिखाया है। मुख्यमंत्री ने जातीय जनगणना को प्रधानमंत्री का साहसिक और जनहितैषी कदम बताया।

मुख्यमंत्री साय ने यह बातें राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के 15वें स्थापना दिवस के मौके पर कहीं। इस अवसर पर उन्होंने आयोग द्वारा शुरू की गई ‘सार्थक’ और ‘रक्षक’ योजनाओं की सराहना की और कहा कि बाल अधिकारों की सुरक्षा में आयोग की भूमिका प्रशंसनीय रही है। कार्यक्रम में प्रदेशभर से बालगृहों के बच्चों की उपस्थिति रही।

इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने आगामी छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र की जानकारी भी साझा की। उन्होंने बताया कि यह सत्र 14 जुलाई से 18 जुलाई तक चलेगा और इसमें राज्य के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।

दंतेवाड़ा में 25 करोड़ की लागत से बनेगा आधुनिक कोल्ड स्टोरेज, किसानों और वनोपज संग्राहकों को मिलेगा सीधा लाभ

दंतेवाड़ा जिले के पातररास गांव में किसानों और वनोपज संग्राहकों के लिए एक बड़ी सौगात की शुरुआत हो रही है। यहां केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना और राज्य सरकार के सहयोग से करीब 25 करोड़ रुपये की लागत से एक अत्याधुनिक कोल्ड स्टोरेज सुविधा विकसित की जा रही है। यह देश में सरकारी स्तर पर बनने वाला अपनी तरह का पहला केंद्र होगा, जहां खाद्यान्न और वनोपज को सुरक्षित रखने के लिए रेडिएशन तकनीक का भी इस्तेमाल किया जाएगा।

उपज की बर्बादी रुकेगी, आय में होगा इजाफा

बस्तर क्षेत्र की प्रमुख उपज जैसे इमली, महुआ, जंगली आम, देशी मसाले और मोटे अनाज अब लंबे समय तक सुरक्षित रह सकेंगे। अनुमान है कि हर साल 7% से 20% तक उपज खराब हो जाती है, जो अब इस सुविधा के माध्यम से रोकी जा सकेगी। कोल्ड स्टोरेज के साथ-साथ ब्लास्ट फ्रीजर, रेडिएशन मशीन और परिवहन हेतु बड़े ट्रक भी इसमें शामिल होंगे, जिससे उत्पादों की शेल्फ लाइफ बढ़ेगी और किसानों को बेहतर कीमत मिलेगी।

सुविधाओं की विस्तृत जानकारी

यह परियोजना जिला आजीविका कॉलेज सोसायटी द्वारा संचालित की जाएगी और इसके तहत निम्नलिखित प्रमुख सुविधाएं होंगी:

1500 मीट्रिक टन क्षमता वाला कोल्ड स्टोरेज

1000 मीट्रिक टन का फ्रोजन स्टोरेज

5 छोटे कोल्ड रूम

फलों के लिए ब्लास्ट फ्रीजर

पकने वाले उत्पादों के लिए अलग चैंबर

रेडिएशन मशीन

3 बड़े मालवाहक ट्रक

70 किलोवॉट का सोलर पावर सिस्टम

विस्तारित लाभ क्षेत्र

यह परियोजना केवल दंतेवाड़ा तक सीमित नहीं रहेगी। बस्तर, बीजापुर, सुकमा, कोंडागांव और नारायणपुर जिलों के किसान और वनोपज संग्राहक भी इससे लाभान्वित होंगे। इस परियोजना से सालाना 10 हजार मीट्रिक टन से ज्यादा उपज को संरक्षित किया जा सकेगा। इसमें 10 करोड़ की राशि केंद्र सरकार और 14.98 करोड़ रुपये जिला खनिज निधि से व्यय किए जाएंगे।

रोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण

इस परियोजना से हर साल लगभग 8.5 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने की संभावना है। साथ ही, स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण और रोजगार के नए अवसर भी प्राप्त होंगे, जिससे ग्रामीण क्षेत्र में आजीविका के साधनों में बढ़ोतरी होगी। यह पहल नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्थायित्व और शांति स्थापित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

बाजार और ब्रांड तैयार

इस परियोजना के लिए भूमि आवंटन हो चुका है और रेडिएशन तकनीक प्रदान करने वाली संस्था बीआरआईटी से समझौता भी किया गया है। कार्य पूरा होने में दो वर्ष का समय लगेगा। रायपुर और विशाखापत्तनम जैसे बड़े शहरों में बाजार भी तैयार किए जा चुके हैं। इसके अलावा, बस्तर के नाम से एक विशेष ब्रांड विकसित करने की योजना भी है ताकि यहां के उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल सके।

मुख्यमंत्री का बयान

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे आदिवासी समुदाय के भविष्य के लिए एक निर्णायक कदम बताया है। उन्होंने कहा, “यह केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि बस्तर के विकास की नींव है। इससे किसान और वनोपज संग्राहक सीधे बाजार से जुड़ सकेंगे और उन्हें उनके उत्पाद का पूरा मूल्य मिलेगा।”

आदर्श मॉडल बनेगा बस्तर

यह परियोजना आदिवासी इलाकों के लिए एक आदर्श मॉडल साबित हो सकती है। यह दिखाता है कि यदि सही नीति, संसाधन और स्थानीय सहभागिता मिल जाए, तो ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों की आर्थिक स्थिति में क्रांतिकारी सुधार संभव है।

इस कोल्ड स्टोरेज परियोजना के माध्यम से बस्तर का भविष्य संवरने जा रहा है – एक आत्मनिर्भर और समृद्ध बस्तर की ओर मजबूत कदम।