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गांजा तस्करों पर पुलिस का शिकंजा, तीन आरोपी गिरफ्तार, भारी मात्रा में नशा जब्त

पुलगांव थाना क्षेत्र में सक्रिय गांजा तस्करों के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इनके पास से कुल 2 किलो 110 ग्राम गांजा और 44 हजार रुपये नकद जब्त किए हैं, जो नशीले पदार्थों की बिक्री से जुटाई गई राशि बताई जा रही है। इस मामले में आरोपियों पर एनडीपीएस एक्ट की धारा 20(ब) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

पुलिस प्रवक्ता पद्मश्री तवर ने जानकारी दी कि एसएसपी विजय अग्रवाल के “जीरो टॉलरेंस” अभियान के तहत नशा कारोबारियों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है। इसी अभियान के तहत एसीसीयू की टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई की। बिना किसी को सूचना दिए टीम ने पुलगांव क्षेत्र में दबिश दी और रुआबांधा निवासी सागर कंडरा उर्फ मंग्गा को गिरफ्तार किया। उसके पास से 1 किलो 60 ग्राम गांजा और 55 हजार रुपए नकद बरामद हुए।

इसके अलावा हॉस्पिटल सेक्टर निवासी लिंगराज महानंद से 530 ग्राम गांजा और 3 हजार रुपये, जबकि तितुरडीह निवासी अंकुश नायक से 520 ग्राम गांजा, 3 हजार 500 रुपये नकद और एक मोबाइल फोन जब्त किया गया।

पुलिस की इस कार्रवाई में कुल 2 किलो 110 ग्राम गांजा और करीब 61 हजार 500 रुपये की नकदी जब्त की गई है। नशे के इस गोरखधंधे में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश भी जारी है।

आईपीएल सट्टेबाजी गिरोह का खुलासा, गोवा से 15 आरोपी गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ के भाटापारा शहर थाना क्षेत्र में आईपीएल सट्टेबाजी से जुड़ा एक बड़ा रैकेट उजागर हुआ है। पुलिस ने छत्तीसगढ़ जुआ (प्रतिषेध) अधिनियम 2022 की धारा 07 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। जांच के दौरान यह सामने आया कि आरोपियों द्वारा ऑनलाइन सट्टा ऐप्स के जरिए आईपीएल क्रिकेट मैचों पर सट्टा खिलाया जा रहा था। सट्टेबाजी का संचालन गोवा के बोगमालो इलाके से हो रहा था।

पुलिस अधीक्षक भावना गुप्ता के निर्देश पर जब मामले की विवेचना की गई तो तकनीकी विश्लेषण से यह पता चला कि आरोपियों द्वारा तीन ऑनलाइन पैनल – खेलो यार, RBC 139 और Winbuzz 7 के माध्यम से सट्टा लगाया जा रहा था।

इसके बाद अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बलौदाबाजार अभिषेक सिंह, एएसपी भाटापारा हेमसागर सिदार और एसडीओपी तारेश साहू के नेतृत्व में पुलिस टीम ने साइबर सेल के सहयोग से गोवा में छापेमारी की योजना बनाई। छापे के दौरान 15 आरोपियों को रंगे हाथों मोबाइल, लैपटॉप और टीवी के माध्यम से सट्टा खेलते पकड़ा गया।

छापेमारी के दौरान कई बैंक खाते और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त किए गए हैं। शुरुआती जांच में पता चला है कि सट्टेबाजी के इन पैनलों के जरिए करोड़ों रुपये का ऑनलाइन लेनदेन हुआ है। आरोपी देशभर में फैले अपने एजेंट्स को लॉगिन आईडी वितरित करके सट्टा चलवा रहे थे।

गिरफ्तार किए गए आरोपी छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और उत्तरप्रदेश के अलग-अलग जिलों से हैं। उनसे कुल 8.15 लाख रुपये मूल्य के इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स जब्त किए गए हैं।

गिरफ्तार आरोपी:

  • अमन देवांगन (दुर्ग)

  • गौरव पांडे (रीवा, म.प्र.)

  • चंद्रशेखर चौबे (रायपुर)

  • एजाज शेख (शोलापुर, म.हा.)

  • दीपक सबलानी, कपिल हबलानी (भाटापारा)

  • सौरभ शुक्ला, अर्पित जैन, प्रदीप यादव (दुर्ग)

  • फैजान खान, जेसन स्टेनिसलास (नागपुर)

  • मनीष पाटिल, फुरकान अहमद (अमरावती)

  • एहसान अली (भदोही, उप्र)

  • अनुराग तिवारी (सुल्तानपुर, उप्र)

पुलिस अब इनसे पूछताछ कर पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचने की कोशिश में लगी है।

जमीन हड़पने की साजिश: जीवित व्यक्ति को मृत दिखाकर किया सौदा, कोर्ट के आदेश पर चार आरोपियों पर केस दर्ज

छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक जीवित व्यक्ति को कागजों में मृत दिखाकर उसकी जमीन किसी और के नाम पर दर्ज कर दी गई और फिर उसे बेचने की कोशिश की गई। इस मामले में कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए चार लोगों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने का आदेश दिया है। कोर्ट के निर्देश पर पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

क्या है मामला?

यह मामला कोरबा के बालकोनगर क्षेत्र से जुड़ा है। यहां रहने वाले नवीन गोयल ने रिस्दा में लगभग 7 डिसमिल जमीन खरीदने के लिए अप्रैल 2023 में 15 लाख रुपये में सौदा तय किया था। उन्होंने जमीन की रजिस्ट्री के लिए 2 लाख रुपये नकद अग्रिम भी दे दिए थे। लेकिन समय पर रजिस्ट्री नहीं कराई गई।

कुछ समय बाद जब नवीन गोयल उरगा की ओर जा रहे थे, तो उन्होंने देखा कि उस जमीन पर कुछ लोग नापजोख कर रहे हैं। पूछताछ करने पर एक व्यक्ति ने खुद को उस जमीन का मालिक बताया और कहा कि यह जमीन दिनेश सिंह गहलोन और उसके साथियों ने कागजों में असली मालिक को मृत दिखाकर अपने नाम पर करा ली है।

आरोपियों ने किया फर्जी वंशवृक्ष तैयार

एफआईआर के अनुसार, आरोप है कि दिनेश सिंह गहलोन ने खुद को गणेश सिंह गहलोत का बेटा दिखाते हुए फर्जी वंशवृक्ष तैयार कराया और उसी के आधार पर जमीन का नामांतरण अपने नाम पर करवा लिया। इसके बाद उस जमीन की बिक्री के लिए पावर ऑफ अटॉर्नी (मुख्तियारनामा) भी तैयार किया गया।

आरोपियों ने रजिस्ट्री से किया इनकार, पैसे भी नहीं लौटाए

जब नवीन गोयल ने इस धोखाधड़ी की जानकारी ली और मुख्य आरोपी पवन अग्रवाल से संपर्क किया, तो उसने साफ तौर पर रजिस्ट्री से इनकार कर दिया और अग्रिम दिए गए पैसे भी लौटाने से मना कर दिया। परेशान होकर नवीन ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत की, लेकिन वहां से कोई कार्रवाई नहीं हुई। अंततः उन्होंने कोर्ट में परिवाद दायर किया।

कोर्ट का निर्देश और पुलिस की भूमिका पर सवाल

कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि पुलिस ने इस गंभीर मामले को केवल आपसी लेन-देन और सिविल विवाद मानकर अनदेखा किया, जो पूरी तरह से गलत है। कोर्ट ने थाना प्रभारी की भूमिका को गैर-जिम्मेदाराना बताया और उसे विभागीय रूप से उत्तरदायी ठहराया।

किन पर दर्ज हुआ केस?

कोर्ट के आदेश पर पवन अग्रवाल (बालकोनगर), दिनेश सिंह गहलोन (नई दिल्ली), संजय कुमार सोनी (हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी, बालकोनगर) और संदीप शर्मा (नेहरू नगर, कोरबा) के खिलाफ IPC की धाराएं 420 (धोखाधड़ी), 467 (जाली दस्तावेज बनाना), 468 (जाली दस्तावेज का उपयोग), 471 (फर्जी दस्तावेज को असली बताकर प्रयोग), 120बी/34 (षड्यंत्र) के तहत केस दर्ज किया गया है।

इस पूरे मामले में पीड़ित पक्ष की ओर से कोर्ट में पैरवी प्रिंस अग्रवाल ने की।

महिलाओं को फूलों की खेती की दी जा रही ट्रेनिंग, बन रही आत्मनिर्भर

राजनांदगांव और आसपास के ग्रामीण इलाकों में महिलाएं अब आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। पेंड्री स्थित पंडित किशोरी लाल शुक्ल उद्यानिकी कॉलेज एवं अनुसंधान केंद्र के विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के तहत गांवों में जाकर महिला स्व-सहायता समूहों को फूलों की खेती और उसके विविध उपयोगों की जानकारी दी।

कॉलेज के अंतिम वर्ष के छात्र कलश वर्मा ने दुर्ग जिले के राज गांधी मितान महिला स्व-सहायता समूह की महिलाओं को फूलों की खेती से जुड़ा प्रशिक्षण दिया। इसमें उन्होंने खेती की तकनीक, फूलों से होने वाले आर्थिक लाभ और उनके विभिन्न उत्पादों पर विस्तार से जानकारी दी। जैसे, सूखे फूलों से अगरबत्ती, गुड़हल और अपराजिता से जैम, गुलाब की पंखुड़ियों से गुलकंद और गुड़हल से फेस पैक बनाना सिखाया गया। इस तरह महिलाओं को घरेलू संसाधनों से व्यवसायिक उत्पाद बनाने की दिशा में प्रेरित किया जा रहा है।

इसी क्रम में कॉलेज के एक अन्य छात्र प्रदीप कुमार राजपूत ने राजनांदगांव के किसानों को फसलों की सुरक्षा के लिए ब्लू और येलो स्टिकी ट्रैप के उपयोग की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन ट्रैप्स से फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीट जैसे थ्रिप्स, व्हाइट फ्लाई, एफीड, हॉपर और मिलीबग से आसानी से बचाया जा सकता है। ब्लू ट्रैप थ्रिप्स को आकर्षित करता है जबकि येलो ट्रैप अन्य कीटों को। ये ट्रैप्स चिपचिपी सतह के कारण कीटों को फंसा लेते हैं और फसल सुरक्षित रहती है।

इस पहल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं और किसानों को आधुनिक कृषि विधियों और प्रसंस्करण तकनीकों से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। 

पति की हत्या की साजिश में पत्नी, बेटा और मां शामिल — मध्यप्रदेश से बुलाए थे दो शूटर

छत्तीसगढ़ के तिल्दा-नेवरा क्षेत्र में एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जिसमें एक महिला ने अपने बेटे और मां के साथ मिलकर पति की हत्या करवा दी। वारदात को अंजाम देने के लिए उन्होंने मध्यप्रदेश के कटनी जिले से दो लोगों को बुलवाया था। दोनों आरोपियों ने शराब पिलाने के बहाने पति को सुनसान जगह ले जाकर उसकी गला रेतकर हत्या कर दी।

शराब की लत बनी हत्या की वजह
पुलिस पूछताछ में महिला ने बताया कि उसका पति शराब का आदी था, जिससे तंग आकर उसने यह कदम उठाया। पति की आदतों से बेटा भी परेशान था, इसी कारण मां, बेटा और नानी तीनों ने मिलकर हत्या की योजना बनाई। पुलिस ने पांचों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और उनके खिलाफ बीएनएस की धारा 103 और 3(5) के तहत केस दर्ज किया गया है।

लाश मिलने के बाद जांच शुरू
1 मई को सांकरा के लक्ष्मण उर्फ राजू भट्ट का खून से सना शव बेमता क्षेत्र में मिला था। मामले की जांच के लिए पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू की। जब सीसीटीवी फुटेज और परिवार से पूछताछ की गई, तो पत्नी और बेटे के बयानों में विरोधाभास मिला। संदेह बढ़ने पर जब दोबारा पूछताछ की गई, तो पत्नी रौशनी शर्मा ने पूरी साजिश कबूल कर ली।

कटनी से बुलाए गए थे हमलावर
रौशनी ने बताया कि उसने अपनी मां कुसुम शर्मा और बेटे ऋषि के साथ मिलकर उमाशंकर शर्मा और मुकेश शर्मा को हत्या के लिए बुलाया था। 1 मई को तीनों ने लक्ष्मण को बेमता के गड़रिया नाले के पास बुलाया। वहां पहले सबने शराब पी, फिर उमाशंकर ने लक्ष्मण का गला काट दिया और मुकेश ने उसके सिर पर पत्थर दे मारा।

पुलिस की जॉइंट टीम ने किया पीछा
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षकों के आदेश पर एंटी क्राइम और साइबर यूनिट के साथ तिल्दा-नेवरा पुलिस की संयुक्त टीम बनाई गई। आरोपियों की लोकेशन ट्रेस कर टीम ने मध्यप्रदेश जाकर दोनों हमलावरों को धर दबोचा। आरोपियों के पास से हत्या में इस्तेमाल किया गया चाकू, पत्थर और बाइक भी जब्त कर ली गई है।

शराब घोटाले की जांच अब सीबीआई के हवाले, झारखंड से छत्तीसगढ़ तक फैला मामला, 21 लोग गिरफ्तार

झारखंड में सामने आए शराब घोटाले की जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी गई है। इस घोटाले की परछाईं अब छत्तीसगढ़ तक पहुंच चुकी है, जहां सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा और अरुणपति त्रिपाठी की भूमिका संदेह के घेरे में है। राज्य सरकार ने मामले की जांच की सिफारिश करते हुए आधिकारिक अधिसूचना भी जारी कर दी है।

मामले में CBI अब इन दोनों अफसरों से पूछताछ करेगी, जिन्होंने 2019 से 2022 के बीच झारखंड की शराब नीति तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वहीं छत्तीसगढ़ में 2161 करोड़ रुपये के शराब घोटाले में अनवर ढेबर, अरविंद सिंह, अनिल टुटेजा, कवासी लखमा और अरुणपति त्रिपाठी समेत 21 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इन पर नकली होलोग्राम लगाकर शासकीय शराब दुकानों से अवैध बिक्री करने का आरोप है।

झारखंड में इस घोटाले में आबकारी सचिव विनय कुमार चौबे और संयुक्त आबकारी आयुक्त गजेन्द्र सिंह सहित कई अन्य अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ चुकी है। दोनों राज्यों के अफसरों के बीच मिलीभगत के संकेत मिलने के बाद अब CBI पूरे नेटवर्क की तह तक जाएगी।

इससे पहले छत्तीसगढ़ में ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) और ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा) इस मामले की जांच कर रहे थे, लेकिन अब CBI भी सक्रिय हो गई है, जिससे जांच और अधिक व्यापक हो गई है।

ऑपरेशन सिंदूर: भारत-पाक सीमा पर हाई अलर्ट, अर्धसैनिक बलों की छुट्टियां रद्द

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भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के मद्देनज़र केंद्र सरकार ने बड़ा सुरक्षा कदम उठाया है। ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारतीय वायुसेना द्वारा पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकी ठिकानों पर की गई एयर स्ट्राइक के बाद, गृह मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर हाई अलर्ट घोषित कर दिया है और सभी अर्धसैनिक बलों    की छुट्टियां तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी गई हैं।

संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ाई गई

गृह मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर, पंजाब और राजस्थान की सीमाओं पर अतिरिक्त जवानों की तैनाती के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही, रेलवे स्टेशन, हवाई अड्डे, मेट्रो स्टेशन और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है।

केंद्रीय एजेंसियों और राज्य पुलिस बलों को किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर पैनी नजर रखने और तुरंत रिपोर्ट करने के निर्देश दिए गए हैं।

रणनीतिक बैठक और सरकार की सतर्कता 

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाई है, जिसमें सुरक्षा रणनीति और आगे की कार्रवाई पर चर्चा की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, यह फैसला एहतियातन लिया गया है ताकि किसी भी संभावित आतंकी या जवाबी हमले को रोका जा सके।

सोशल मीडिया पर जनता की प्रतिक्रिया

ऑपरेशन सिंदूर और सरकार के फैसलों पर सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा हो रही है। कई यूज़र्स ने इसे भारत की मज़बूत और निर्णायक सुरक्षा नीति का प्रतीक बताया है। एक यूज़र ने लिखा, “अब भारत जवाब देने में पीछे नहीं हटता!”

सुरक्षा बल अलर्ट मोड में रहेंगे

गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि जब तक हालात सामान्य नहीं हो जाते, सभी सुरक्षा बल अलर्ट मोड में रहेंगे और सीमा पर चौकसी जारी रखी जाएगी। देश की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

छत्तीसगढ़ में नक्सलियों पर बड़ा प्रहार: ‘मिशन संकल्प’ में 15 से ज्यादा नक्सली ढेर

छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में सुरक्षाबलों ने एक बड़े नक्सल विरोधी अभियान के तहत 15 से अधिक नक्सलियों को मार गिराया है। यह कार्रवाई ‘मिशन संकल्प’ के तहत की गई, जिसकी शुरुआत 21 अप्रैल को की गई थी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह अभियान कर्रेगुट्टा की पहाड़ियों और छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा से सटे इलाकों में चलाया जा रहा है।

करीब 24 हजार सुरक्षाकर्मी इस ऑपरेशन में शामिल हैं, जिनमें जिला रिजर्व गार्ड, बस्तर फाइटर्स, एसटीएफ, सीआरपीएफ और कोबरा बटालियन के जवान शामिल हैं। बताया गया है कि यह ऑपरेशन अब तक के सबसे बड़े अभियानों में से एक है, जो लगभग 800 वर्ग किलोमीटर के दुर्गम और घने जंगलों वाले इलाके में चल रहा है।

अधिकारियों के मुताबिक, पहाड़ियों में बड़ी संख्या में नक्सलियों को घेरा गया है और तलाशी अभियान अभी भी जारी है। वहीं, इससे पहले सोमवार को सुरक्षाबलों ने एक महिला नक्सली को मार गिराया था और घटनास्थल से हथियार बरामद किए थे। 24 अप्रैल को भी तीन महिला नक्सलियों के शव बरामद किए गए थे।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ऑपरेशन संकल्प के जरिए देश के भीतर सक्रिय उग्रवादियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है, ठीक वैसे ही जैसे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया था। आने वाले घंटों में इस अभियान को लेकर और भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है।

दुर्ग में 7 मई को मॉकड्रिल, एयर अटैक से बचाव की तैयारी, शाम 4 बजे बजेगा सायरन

दुर्ग | 6 मई:
भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए देशभर के 244 संवेदनशील क्षेत्रों में बुधवार 7 मई को एयर अटैक जैसी आपात स्थिति से निपटने के लिए मॉकड्रिल आयोजित की जाएगी। छत्तीसगढ़ के दुर्ग शहर को भी इस सूची में शामिल किया गया है। भिलाई स्टील प्लांट जैसे अहम औद्योगिक संस्थान के चलते दुर्ग को सुरक्षा की दृष्टि से कैटेगरी-2 क्षेत्र में रखा गया है।

दुर्ग कलेक्टर ने जानकारी दी कि बुधवार को शाम 4 बजे शहर के अलग-अलग इलाकों में सायरन बजाया जाएगा। इसके बाद सिविल डिफेंस और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा एयर स्ट्राइक जैसी परिस्थिति में नागरिकों को सुरक्षित रखने की प्रैक्टिस करवाई जाएगी।

1971 के बाद देश में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर ड्रिल

इस तरह की मॉकड्रिल देश में आखिरी बार 1971 के भारत-पाक युद्ध के समय हुई थी। हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। केंद्र सरकार किसी भी संभावित खतरे से पहले पूरी तैयारी सुनिश्चित करना चाहती है।

ड्रिल की मुख्य गतिविधियां:

  • सायरन और चेतावनी अलर्ट: शाम 4 बजे एक साथ सायरन बजाकर अभ्यास की शुरुआत होगी।

  • रेडियो और हॉटलाइन कम्युनिकेशन: इंडियन एयर फोर्स से त्वरित संपर्क की प्रक्रिया का परीक्षण किया जाएगा।

  • कंट्रोल रूम एक्टिवेशन: मुख्य और शैडो कंट्रोल रूम पूरी तरह से क्रियाशील रहेंगे।

  • लोगों को ट्रेनिंग: आम नागरिकों और छात्रों को हवाई हमले की स्थिति में सुरक्षा उपायों की जानकारी दी जाएगी।

  • ब्लैकआउट एक्सरसाइज: लाइट बंद कर संभावित निशाने को अंधेरे में छिपाने का अभ्यास किया जाएगा।

  • बंकर और रेस्क्यू: आपात बंकरों की जांच और सफाई की जाएगी, साथ ही निकासी योजना का परीक्षण होगा।

प्रशासनिक तैयारियां

इस मॉकड्रिल को लेकर कलेक्ट्रेट सभागार में उच्च स्तरीय बैठक हुई जिसमें दुर्ग संभाग के कमिश्नर, आईजी, कलेक्टर, पुलिस व केंद्रीय बलों के अधिकारी शामिल हुए। बैठक में आपातकालीन स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया के लिए विस्तृत योजना पर चर्चा हुई। इसके साथ ही नागरिकों को जागरूक करने के लिए वीडियो और गाइडलाइन भी जारी की गई हैं।

यह अभ्यास न केवल सुरक्षा व्यवस्था की जांच करेगा, बल्कि आम लोगों में भी आपदा के समय शांत और सतर्क रहने की समझ विकसित करने में मदद करेगा।

झारखंड शराब घोटाले की जांच अब सीबीआई के हाथों, छत्तीसगढ़ सरकार ने जारी किया नोटिफिकेशन

रायपुर, 6 मई:
छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाले की तर्ज पर झारखंड में भी हुए एक बड़े शराब घोटाले की जांच अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) करेगी। छत्तीसगढ़ सरकार ने आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) द्वारा दर्ज 450 करोड़ रुपये के इस घोटाले की जांच सीबीआई को सौंपते हुए आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है।

ईओडब्ल्यू को झारखंड सरकार से जांच में अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने के चलते यह निर्णय लिया गया। माना जा रहा है कि सीबीआई जल्द ही इस मामले में जांच शुरू करेगी, क्योंकि इसमें झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी जांच के दायरे में आ सकते हैं।

छत्तीसगढ़ की एफआईआर ने किया घोटाले का खुलासा

7 सितंबर 2024 को छत्तीसगढ़ एसीबी-ईओडब्ल्यू द्वारा दर्ज एफआईआर से यह घोटाला सामने आया। एफआईआर में झारखंड के तत्कालीन आबकारी सचिव आईएएस विनय कुमार चौबे और संयुक्त आबकारी आयुक्त गजेंद्र सिंह के नाम शामिल हैं। इनके अलावा छत्तीसगढ़ शराब घोटाले के चर्चित चेहरे अनिल टुटेजा, अनवर ढेबर और अरुणपति त्रिपाठी का नाम भी सामने आया है।

एफआईआर में आरोप है कि इन अधिकारियों और शराब सिंडिकेट ने मिलकर झारखंड की आबकारी नीति में बदलाव किया और टेंडर प्रक्रिया को अपने पक्ष में मोड़ा। देशी शराब की बिक्री में नकली होलोग्राम का उपयोग हुआ और विदेशी शराब के लिए नियमों में बदलाव कर नजदीकी एजेंसियों को लाइसेंस दिए गए। इसके बदले करोड़ों रुपये की अवैध कमाई हुई।

झारखंड में लागू हुआ छत्तीसगढ़ मॉडल

झारखंड में शराब नीति लागू करने से पहले जनवरी 2022 में रायपुर में अधिकारियों और सिंडिकेट के सदस्यों के बीच बैठक हुई थी। इसी मीटिंग में पूरी योजना बनाई गई। छत्तीसगढ़ के तत्कालीन आबकारी सचिव अरुणपति त्रिपाठी को झारखंड सरकार ने सलाहकार नियुक्त किया था। उन्होंने छत्तीसगढ़ मॉडल को झारखंड में लागू कराने में मुख्य भूमिका निभाई और इसके बदले ₹1.25 करोड़ की फीस भी ली।

नई नीति के तहत 2022-23 में झारखंड में शराब बिक्री का नियंत्रण सरकार से हटाकर निजी एजेंसियों को सौंपा गया। इसके बाद झारखंड के उत्पाद शुल्क राजस्व में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिसे लेकर कारोबारी विकास सिंह ने शिकायत दर्ज कराई थी।

घोटाले में शामिल अन्य नाम

घोटाले में शामिल नामों में अनिल टुटेजा, अनवर ढेबर, अरुणपति त्रिपाठी, सिद्धार्थ सिंघानिया, विधु गुप्ता, और उनके अन्य सहयोगियों के नाम प्रमुख हैं। होलोग्राम सप्लाई का जिम्मा मेसर्स प्रिज्म होलोग्राफी एंड सिक्योरिटी फिल्म्स को दिया गया, जिसने काम आगे दूसरी कंपनी को सौंप दिया।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि इस पूरे सिंडिकेट ने सरकारी व्यवस्था का दुरुपयोग कर करोड़ों की अवैध कमाई की और दोनों राज्यों — झारखंड और छत्तीसगढ़ — को राजस्व का नुकसान पहुंचाया।

इस पूरे मामले की जांच अब सीबीआई द्वारा की जाएगी, और जल्द ही कई बड़े अधिकारियों और कारोबारियों से पूछताछ की संभावना है।