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स्वास्थ्य विभाग द्वारा गाइडलाइन में किया गया बड़ा बदलाव, शाम 6 बजे के बाद मिलने वाले मरीजों को अगले दिन किया जाएगा भर्ती

स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना संक्रमित मरीजों को अस्पताल में भर्ती करने की गाइडलाइन में बड़ा बदलाव किया है।

21 june 2020,

City News – CN      City news logo

रायपुर | छत्तीसगढ़ में कोरोना वायरस ने मार्च में दस्तक दी और तब से पूरा स्वास्थ्य महकमा दिन रात से सक्रिय है। बगैर थके -बगैर रुके, घर परिवार से दूर और अपनी जान जोखिम में डालकर ये वायरस के नियंत्रण में जुटे हुए हैं।

भले ही संक्रमित मरीजों के आंकड़े 2000 पार चुके हो मगर, इन स्वास्थ्य कर्मियों (डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ, अस्पताल स्टाफ )की बदौलत 1300 से अधिक मरीज ठीक हो चुके हैं। 24 घंटे आपातकालीन सेवा देने वाले स्वास्थ्य को भी आराम की जरूरत महसूस हो रही है।

यही वजह है कि स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना संक्रमित मरीजों को अस्पताल में भर्ती करने की गाइडलाइन में बड़ा बदलाव किया है। जिन मरीजों की रिपोर्ट शाम 6 बजे के बाद आएगी, उनमें गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को छोड़कर शेष सभी को अगले दिन अस्पताल में भर्ती किया जाएगा।

स्वास्थ्य विभाग की तरफ से कहा गया है कि मरीजों को उनके पॉजिटिव आने की जानकारी दे दी जाएगी। यह कहा जाएगा कि वे खुद को परिजनों से दूर करके, कमरे में आइसोलेट कर ले। सुबह स्वास्थ्य विभाग की टीम उन्हें लेने पहुंचेगी। ऐसा इसलिए क्योंकि स्वास्थ्य दिन भर काम करता है।

रात को पॉजिटिव मिलने के बाद अफरा तफरी मचती है। इन्हीं सब कारणों के मद्देनजर यह गाइडलाइन बनी जिसे मंजूरी दे दी गई है। स्वास्थ्य विभाग के उप संचालक एवं प्रवक्ता डॉ अखिलेश त्रिपाठी ने बताया स्वास्थ्य कर्मी 3 महीने से लगातार काम करें। उन्हें भी तो थोड़ी आराम की जरूरत है। कोरोना के विरुद्ध लड़ाई लंबी है, स्टाफ का चुस्त-दुरस्त रहना बेहद जरूरी है।

मरीज मिलने के पर ऐसा सक्रिय होता है अमला

लैब से पॉजिटिव मरीज से मिलने की सूचना जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) तक पहुंची है। वहां से 108 एंबुलेंस को कॉल किया जाता है। जिला सीटीएम एंबुलेंस में बैठकर मरीज के घर तक पहुंचती है यहां उसकी जांच करती है। उसके साथ जिला स्वास्थ्य महकमा राज्य की संयुक्त कांटेक्ट ट्रेसिंग टीम भी सक्रिय हो जाती है।

जो संक्रमित मरीज से पूछते हैं कि उन से बीते दिनों में कौन-कौन संपर्क में आया था। मरीज को आधी रात भी हो क्यों ना हो अस्पताल ले जाया जाता है और वहां अस्पताल प्रबंधन को रात में ही मरीज को भर्ती करने की व्यवस्था करनी होती है। इनमें अधिकारी कर्मचारियों की रात में आया हो रही है सो भी नहीं पा रहे हैं।

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