आनंदराम साहू, रायपुर। कोरोना संक्रमण के दौर ने सामान्य जनजीवन को प्रभावित किया है। इस बीच अब बेटियों के हाथ पीले करने में गरीबों को बड़ी सुविधा हो रही है। सोशल और फिजिकल डिस्टेंसिंग की वजह से शादी समारोह का खर्च भी महज 10 से 15 प्रतिशत तक सिमट गया है। इससे खर्चीली शादी से खासकर गरीब वर्ग को बड़ी राहत मिली है।

शादी समारोह में वर और वधु दोनों पक्षों को मिलाकर अधिकतम 50 लोगों का जमावड़ा करने की अनुमति मिल रही है। इस वजह से भी शादी का खर्च घटा है। आवागमन के सीमित साधन की वजह से नेंग, दहेज में दिए जाने वाले सामानों की संख्या भी सीमित हो गई है। इससे कमजोर आय वर्ग को बड़ी राहत मिली है।

कोरोना का संक्रमण रोकने के लिए लॉकडाउन किया गया। इससे अनेक लोग प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हुए हैं। वहीं लॉकडाउन में कुछ सकारात्मक सामाजिक बदलाव भी देखने को मिल रहा है। लॉकडाउन के दौरान सबसे बड़ी समस्या उन परिवारों की थी, जिनके घर शादी जैसे मांगलिक कार्यक्रम होने हैं।

विभिन्न जाति समाजों ने पहले भी वैवाहिक कार्यक्रमो में अनावश्यक खर्चो को कम करने पर जोर दिया। लेकिन इस निर्णय को जमीनी स्तर पर लागू कर पाना मुश्किल हो रहा था। कोरोना संक्रमण के संकटकाल में अब ऐसा करने की मजबूरी है और इसे एक नए अवसर के रूप में देखा जा रहा है।

20 से 50 हजार रुपए में हो रही शादी

सामान्य दिनों में जहां मांगलिक कार्यक्रमों मे जनसामान्य अपनी व्यय क्षमता से अधिक खर्च करके अपने सामाजिक रुतबे को पहचान देने का काम करते थे। वहीं गरीब भी अपने बेटे-बेटी की शादी धूमधाम से करने के चक्कर में कर्ज के बोझ तले दब जाते थे। इसको चुकाने में कई माता-पिता की तो पूरी उम्र बीत जाती है।

बदली हुई परिस्थितियों में अब ऐसा नहीं हो रहा है। कोरोना संक्रमण के संकटकाल में लोग वैवाहिक कार्यक्रम में होने वाली बेवजह के खर्चों से बच रहे हैं। वर या वधु दोनों पक्ष के तरफ से मात्र 20 हजार से 50 हजार रुपये तक के खर्च में अब शादी जैसे बड़े कार्यक्रम होने लगे हैं।

कम खर्च में शादी से सभी खुश

महासमुंद जिले के बागबाहरा अनुविभाग के एसडीएम भागवत जायसवाल ने बताया कि विवाह के लिए न केवल गरीब परिवार अपितु संपन्न परिवार को भी अनुमति लेने की बाध्यता है। शादी समारोह आयोजित कर रहे परिवारों से पता चल रहा है कि कोरोना संक्रमण के दौर में शादियां कितनी सस्ती हो गई है।

अगर वधु पक्ष के आभूषणाें को छोड़ दिया जाए तो दोनों पक्षों का वैवाहिक अनुमानित लागत 20 हजार से 50 हजार रुपये तक ही आ रहा है। इससे वर-वधु दोनों पक्ष इस विवाह से खुश हैं। यह बदलाव की स्थिति निम्न, मध्यम और उच्च आर्थिक स्थिति वाले सभी वर्गों के लोगों को आकर्षित कर रही है।

लॉकडाउन में टालनी पड़ी थी शादी

बागबाहरा अनुविभाग में अब तक 651 लोगों को वैवाहिक कार्यक्रम के लिए अनुमति प्रदान किया जा चुका है। इसके सकारात्मक परिणाम को देखते हुए आवेदनों की संख्या बढ़ रही है, वहीं प्रशासन भी कोरोना के बीच रहकर आम जन जीवन को सामान्य बनाने में लोगों की मदद कर रहा है।

लॉकडाउन की वजह से कई जगह शादियां टालनी पड़ी। अब एक बार फिर विवाह समारोह हो रहे हैं। धार्मिक परंपराओं के अनुसार वैवाहिक कार्यक्रम के लिए कुछ ही ऐसे महीने होते हैं जिसमें विवाह शुभ माना जाता है। आम नागरिकों की चिंता इसी बात को लेकर थी कि ऐसे मांगलिक कार्यक्रम लॉकडाउन में शुभ मुहर्त पर संभव हो पाएगा कि नहीं।

जनसामान्य की इन्हीं भावनाओं को ध्यान में रखते हुए लॉक डाउन के दौरान शादी की इजाजत कुछ शर्तों के साथ दी जा रही हैं। पहले वर पक्ष और वधु पक्ष से 2 से 4 व्यक्तियों की मौजूदगी में वैवाहिक कार्यक्रम सम्पन्न कराने की बाध्यता थी। इस नियम को शिथिल करते हुए वर और वधु दोनों पक्षों को मिलाकर अब कुल 50 व्यक्तियों की जमावड़ा की अनुमति दी जा रही है।

वैवाहिक कार्यक्रमों के लिए भी प्रोटाेकाल

यह पहली बार हुआ है कि इन शादियों में कोरोना संकटकाल के प्रोटोकॉल का पालन करना पड़ रहा है। जैसे मुंह में मास्क लगाना, बार-बार हाथ धोना, सामाजिक और शारीरिक दूरी का पालन करना, अधिक भीड़-भाड़ नहीं करना, सामूहिक भोज का आयोजन नहीं करना और अनावश्यक आवागमन नहीं करना आदि प्रमुख नियमों का पालन किया जा रहा है। यह संकटकाल जनसामान्य को संदेश दे रहा है कि विवाह जैसे मांगलिक कार्यक्रम भी कम खर्चे और कुछ अनिवार्य परिवारिक सदस्यों के मध्य कराए सकते हैं। इससे अनावश्यक खर्चों पर रोक लगेगी।

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