महाराष्ट्र के बाद छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को झटका; सिंहदेव ने मुख्यमंत्री पद के लिए दावेदारी पेश करते ही गरमा गई राजनीति

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रायपुर, छत्तीसगढ के सरगुजा में दो महीने तक मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के भेंट-मुलाकात के बाद विधान सभा चुनाव के सवा साल पहले छत्तीसगढ़ के कैबिनेट मंत्री टीएस सिंहदेव ने सिर्फ एक विभाग से ही त्याग पत्र दिया है। मगर उनके इस कदम से कांग्रेस की दिक्कत बढ़ सकती है। हाल ही में महाराष्ट्र में कांग्रेस के गठबंधन वाली महाअघाड़ी सरकार के गिरने के बाद अब छत्तीसगढ़ में भी पार्टी को टीएस सिंहदेव की नाराजगी भारी न पड़ जाए।

छत्तीसगढ़ के कैबिनेट मंत्री टीएस सिंहदेव के त्याग पत्र के बाद छत्‍तीसगढ़ की राजनीति में फिर एक बार मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर ढाई-ढाई वर्ष के फार्मूला की चर्चा जोर पकड़ने लगी है। राज्य में 15 वर्ष तक विपक्ष में रहने के बाद कांग्रेस के सत्ता में आने और सरकार गठन तक मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और सिंहदेव की जोड़ी की तुलना जय और वीरू की जोड़ी से की जाती थी। मगर करीब दो वर्षों में दोनों के बीच का पूरा राजनीतिक समीकरण बदल चुका है।

बता दें कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के चुनाव जीतने के बाद तय हुआ था कि भूपेश बघेल और टीआर सिंहदेव ढाई-ढाई वर्ष मुख्यमंत्री रहेंगे। ऐसे में जब भूपेश बघेल के ढाई वर्ष पूर्ण हुए तो टीएस सिंहदेव ने मुख्यमंत्री पद के लिए अपनी दावेदारी पेश की। इससे रायपुर से लेकर दिल्ली तक कांग्रेस की राजनीति गरमाई। कई दिनों तक टीएस सिंहदेव दिल्ली में कई विधायकों के साथ डेरा भी डाले रहे, लेकिन न बघेल ने मुख्यमंत्री पद छोड़ा और न ही सिंहदेव को कुर्सी मिली। इसके बाद से बघेल और सिंहदेव में तनातनी बढ़ी हुई है।

2018 के चुनाव के लिए जनघोषणा पत्र तैयार करने की जिम्मेदारी कांग्रेस ने सिंहदेव को सौंपी थी। सिंहदेव ने इसके लिए पूरे प्रदेश का दौरा किया था। समाज के लगभग हर वर्ग के बीच जाकर उन्होंने बात की। इसके आधार पर 36 बिंदुओं का जनघोषणा पत्र तैयार हुआ। कांग्रेस को प्रदेश में प्रचंड बहुमत (90 में से 69 सीट) का प्रमुख कारण यह जनघोषणा पत्र ही था।