पुनिया सुलझा पाएंगे विवाद ?;चुनाव के पहले छत्तीसगढ़ कांग्रेस में घमासान तेज होने के आसार,सिंहदेव समर्थकों पर नजर

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रायपुर, पंचायत विभाग छोड़ने के बाद भोपाल में बैठे मंत्री टीएस सिंहदेव (बाबा) और उनसे जुड़े लोगों पर सीएम बघेल खेमे ने नजर गड़ा रखी है। विधायकों के साथ ही बाबा के समर्थक माने जाने वाले अन्य कांग्रेसियों की भी टोह ली जा रही है। दोनों गुटों में मचे घमासान के बीच संगठन भी सक्रिय हो गया है। आसन्न विधान सभा चुनाव के पहले घमासान तेज होने के आसार दिख रहे है क्योंकि चुनाव के नजदीक आते ही विधायक भी धीरे धीरे खुलकर सामने आने लगेंगे, जो अभी मौके में चौके लगाने का इंतजार कर रहे है।

संगठन को एकजुट रखने के लिए प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया छत्तीसगढ़ में डेरा डाले हुए हैं। राज्य समन्वय समिति की बैठक में पुनिया राज्य के शीर्ष नेताओं से चर्चा कर समस्या सुलझाने की पहल करेंगे। पुनिया सफल होते हैं तो सब ठीक होगा अन्यथा आने वाले दिनों में एक बार फिर विधायकों की दिल्ली में परेड शुरु हो सकती है।

राजनीति में राजा का शांत होना एवं पंडितों का नाराज होना खतरनाक माना जाता है। यहांं पर अभी यही स्थिति बनी हुई है। पिछले दिनों राजीव भवन रायपुर में सम्पन्न बैठक में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल एवं पीसीसी अध्यक्ष मोहन मरकाम के मध्य तीखी नोक-झोंक हुई थी। अब एक एक कडी जुडती जा रही है। बहरहाल तेजी से बदल रहे राजनीतिक समीकरणों के बीच टीएस बाबा के अगले कदम की ओर सब टकटकी लगी हुई हैं। भाजपा शांति से बैठकर इस घमासान का जायजा ले रही है तो आम आदमी पार्टी बाबा के विद्रोह के तीव्र होने की प्रतीक्षा में है। बाबा कह चुके हैं कि वे कांग्रेस के सच्चे सैनिक हैं और पार्टी छोड़ने का प्रशन ही नहीं उठता, परंतु जानकार कह रहे हैं कि राजनीति में कुछ भी संभव है।

टीएस बाबा के भतीजे आदितेशवर सरगुजा जिला पंचायत के सदस्य हैं। बाबा के पंचायत विभाग छोड़ने से ठीक एक दिन पहले वे केंद्रीय विमानन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से मिले थे। अब उनकी इस भेंट के अर्थ निकाले जा रहे हैं। आदितेशवर कह चुके हैं कि वे तो अंबिकापुर में विमानन सेवा के विस्तार के संबंध में मिलने गए थे, किंतु सिंधिया व सिंहदेव दोनों ही राजपरिवार की पृष्ठभूमि से राजनीति में आए हैं। इसलिए अलग संभावनाएं भी टटोली जा रही हैं। छत्तीसगढ़ में 2018 के चुनाव के बाद टीएस बाबा मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार थे। भूपेश व बाबा के बीच ढाई ढाई साल के मुख्यमंत्री का फार्मूला निशचित किया गया और भूपेश को मुख्यमंत्री बनाया गया। अब बाबा ढाई साल का फार्मूला लागू कराना चाहते हैं। बताया जा रहा है कि उनके पास तीस से अधिक विधायकों का समर्थन है। विधानसभा चुनाव में उन्होंने कई प्रत्याशियों का हर तरह से सहयोग किया था। वर्तमान द्वंद्व में दो विधायक शौलेष पांडे व छन्नी साहू तो खुलकर बाबा के समर्थन में आ गए हैं, शेष प्रतीक्षा कर रहे हैं कि पलड़ा किस ओर झुकता है।