छत्‍तीसगढ़ में कर्मचारियों की हड़ताल तीसरे दिन भी जारी, दफ्तरों में पसरा सन्नाटा, स्‍कूलों में पढ़ाई बंद,कोरोना टीकाकरण भी नहीं, धरना स्थल पर हरेली

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रायपुर ,  कर्मचारी संघों की हड़ताल की वजह से शासकीय दफ्तरों में तीसरे दिन भी जारी है। बुधवार को भी शासकीय दफ्तरों में सन्नाटा पसरा रहा। स्‍कूलों में पढ़ाई ठप रही। इससे पहले मंगलवार को दूसरे दिन भी सन्नाटा पसरा रहा। कलेक्ट्रेट, तहसील, जिला शिक्षा विभाग, राजस्व विभाग, आबकारी विभाग और अन्य शासकीय कार्यालयों में काम हो जाने की उम्मीद लेकर पहुंचे लोग मायूस लौटे। बताया जा रहा है कि कर्मचारी संघों की यह हड़ताल 29 जुलाई तक जारी रहेगी। शुक्रवार को इनके द्वारा महारैली निकाली जाएगी।

तीसरे दिन भी सरकारी दफ्तरों में पसरा रहा सन्नाटा, तहसील में आठ दिन टाली गई सुनवाई

छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के संयोजक कमल वर्मा ने बताया कि उनकी प्रमुख मांगों में 34 प्रतिशत महंगाई भत्ता, सातवें वेतनमान के अनुरूप गृह भाड़ा भत्ता शामिल है। कर्मचारी संघों की इस हड़ताल में प्रदेश के करीब 4.5 लाख कर्मचारी शामिल हैं। हड़ताल की वजह से पूरा हफ्ता शासकीय कार्यालयों में कामकाज ठप रहेगा।

बताया जा रहा है कि तहसील कार्यालय में मंगलवार 26 जुलाई को होने वाली सुनवाई चार अगस्त तक के लिए टाल दी गई है। आगामी तीन दिन भी कार्यालयों में कामकाज ठप रहेगा और सुनवाई आगे बढ़ाई जा सकती है।

आवेदन जमा करने को भटके आवेदक, आखिरी दिन था आज

शिक्षा विभाग द्वारा व्याख्याता, शिक्षक, प्राचार्य, सहायक शिक्षक आदि के लिए 232 पदों पर भर्ती की जानी है। आवेदन जमा करने की आखिरी तारीख 27 जुलाई है। इस दिन विभाग को आवेदन मिल जाना चाहिए। आवेदन रजिस्ट्री या स्पीड पोस्ट के माध्यम से ही भेजे जाने हैं। बताया जा रहा है जानकारी के अभाव में कुछ आवेदक मंगलवार को आवेदन जमा के लिए शिक्षा विभाग पहुंच गए थे, जहां उन्हें दरवाजे पर ताला लटका मिला।

धरना स्थल पर ही हरेली त्यौहार मनाया जाएगा

छत्तीसगढ़ अधिकारी कर्मचारी फेडरेशन के आवाहन पर जारी पांच दिवसीय प्रांतव्यापी आंदोलन के तहत 28 जुलाई गुरुवार को धरना स्थल पर ही हरेली त्यौहार मनाया जाएगा। प्रमुख प्रवक्ता विजय कुमार झा ने बताया है कि छत्तीसगढ़ में 2022 में पहला सशक्त व लंबा आंदोलन है व 2022 का पहला हरेली बड़ा त्यौहार है, इसलिए दोनों संयोग को जोड़ते हुए धरना स्थल पर रापा, कुदारी, हल, की पूजा कर गेड़ी चलाया जाएगा। वही महिला कर्मचारी चीला और गुलगुल भजिया बना कर लाएंगे। प्रदेश में आज आंदोलन और तेज हो गया, जब विधानसभा में मुख्यमंत्री का वेतन 70,000 रु मंत्रियों का वेतन 60,000 और विधायकों का वेतन 50,000 बढ़ गया, तब कर्मचारियों ने भेदभाव की नीति मानकर आज धरना स्थल पर व्यापक आक्रोश व्यक्त किया।

नैतिकता का परिचय दें

श्री झा ने आंदोलन के पूर्व 34% महंगाई भत्ता के लिए शपथ पत्र देने वालों की बात करने वालों से अब प्रदेश के लाखों कर्मचारी यह शपथ पत्र मांग रहे हैं कि महंगाई भत्ता, गृह भाड़ा भत्ता यदि राज्य सरकार देती है तो ऐसे लोग शपथ पत्र दें कि वह महंगाई भत्ता थोड़ा व गृहभाड़ा भत्ता नहीं लेंगे । ऐसा शपथ पत्र अपने विभाग को प्रेषित कर, नैतिकता का परिचय देने की मांग की है।