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इस महीने 12 से 14 साल तक के बच्चों के कोरोना टीकाकरण अभियान को लेकर छत्तीसगढ़ सरकार आशंकित थी। टीकाकरण के इस दौर में बिल्कुल नया टीका कॉर्बेवैक्स का उपयोग हाे रहा था। इसकी सुरक्षा चिंताओंं की वजह से सरकार ने टीकाकरण की धीमी शुरुआत की। अब जब कहीं से भी साइड इफेक्ट की सूचना नहीं आई है, सरकार इसका दायरा बढ़ाने जा रही है।

राज्य टीकाकरण अधिकारी डॉ. वी.आर. भगत ने बताया, वैक्सीन डीपो में पर्याप्त मात्रा में 12 से 14 साल आयु वर्ग के लिए अनुमोदित कॉर्बेवैक्स टीका मौजूद है। लेकिन यह नई वैक्सीन थी। ऐसे में इसको लेकर कुछ आशंकाएं भी थीं। ऐसे में 16 मार्च से इसको लगाने के लिए केवल जिला अस्पतालों में बने टीकाकरण केंद्रों में इसे लगाया गया। चार-पांच दिनों में इसकी कोई निगेटिव रिपोर्ट नहीं आई है।

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अब तय हो गया है कि यह टीका भी पहले वाले दोनों टीकों की तरह सुरक्षित है। अब इसका दायरा बढ़ाया जा रहा है। विभाग ने सभी जिलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC’s) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC’s) को भी टीका लगाने के निर्देश दे दिए हैं।

यहां कुछ दिनों तक टीकाकरण पूरा हो जाने के बाद सभी सामान्य टीकाकरण केंद्रों पर बच्चों की वैक्सीन के लिए अलग काउंटर बना दिया जाएगा। प्रदेश भर में हमने 4 हजार टीकाकरण केंद्र बनाए हैं।डॉ. भगत ने बताया, जिला कलेक्टर चाहें तो स्कूलों में कैंप लगाकर इस टीके को लगवा सकते हैं। यह पूरी तरह जिला प्रशासन पर निर्भर है।

दायरा बढ़ा तो एक दिन में 20 से अधिक टीके लग गए

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक टीकाकरण के पहले दिन यानी 16 मार्च को केवल एक हजार 618 बच्चों को यह टीका लग पाया था। बीच में होली के बावजूद 20 मार्च तक 11 हजार 170 बच्चों ने इस नए टीके की पहली खुराक लगवा लिया था। सोमवार को टीकाकरण केंद्रों का दायरा बढ़ा तो एक ही दिन में 20 हजार 324 बच्चों ने टीका लगवा लिया। अब तक 31 हजार 494 बच्चों को यह टीका लग चुका है। सरकार ने इस आयु वर्ग में 13 लाख 21 हजार 286 बच्चों के होने की अनुमान लगाया है। इस मान से 6 दिनों में दो प्रतिशत लोगों को टीके का एक डोज लग गया।

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बच्चों के लिए मिली है टीके की आपातकालीन मंजूरी

ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने फरवरी महीने में कॉर्बेवैक्स को आपातकालीन उपयोग की मंजूरी दी थी। इससे पहले DGCA वयस्कों के बीच आपातकालीन स्थिति में प्रतिबंधित उपयोग के लिए कॉर्बेवैक्स को पहले ही मंजूरी दे चुका है। इस वैक्सीन की निर्माता कंपनी बायोलॉजिकल-ई को अंतरिम परिणामों यानी क्लीनिकल ट्रायल के आधार पर 12 से 14 साल आयु वर्ग के बच्चों के टीकाकरण की अनुमति मिल गई।

चार सप्ताह में लगनी है टीके की दूसरी डोज

बच्चों को लगाया जाने वाला कॉर्बेवैक्स टीका इंट्रामस्क्युलर (मांसपेशियों के जरिए) लगाया जाता है। इसे बांह के ऊपरी हिस्से में कोविशील्ड और कोवैक्सीन की तरह ही लगाया जा रहा है। इसकी दो खुराक 28 दिनों यानी चार सप्ताह के बाद दी जानी है। कॉर्बेवैक्स 0.5 मिलीलीटर (एकल डोज) और 5 मिलीलीटर (10 डोज) की शीशी में उपलब्ध है। इसे 2 से 8 डिग्री सेल्सियस पर संरक्षित किया जाता है।