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निजी अस्पताल मांग रहे ज्यादा पैसे, इसलिए कोरोना मरीजों को सरकारी में भर्ती कर रहे

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  • टीएस सिंहदव ने कहा, जब तक सरकारी व्यवस्थाएं हैं, पहले उनका उपयोग करेंगे, जरूरत पड़ी तो निजी को भी लेंगे

11 june 2020

City News – CN

बिलासपुर | राजू शर्मा | निजी अस्पतालों में तैयारी पूरी है तो वहां कोरोना मरीजों को क्यों नहीं रख रहे हैं? सवाल के जवाब में प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा कि वहां  पैसा ज्यादा लगेगा इसलिए हम निजी अस्पतालों को अभी नहीं ले रहे हैं। सरकार ने अपने पैसों से जो व्यवस्था बनाई है, उसमें खर्चा न करके हम निजी अस्पतालों को देंगे तो हमारे सरकारी अस्पताल का खर्चा यथावत रहेगा, प्लस निजी को अलग देना पड़ेगा। इसलिए अभी हम उन्हें नहीं ले रहे हैं।

हालांकि हमने पहले निजी अस्पतालों को लेने के लिए सोचा था और ले भी लेते लेकिन उन लोगों ने बहुत ज्यादा पैसों की मांग की इसलिए हमने अभी ये निर्णय लिया है कि जब तक सरकारी व्यवस्थाएं हैं पहले उनका उपयोग करेंगे, अगर और जरूरत पड़ी तो निजी को भी लेंगे। संभाग का कोविड अस्पताल फुल हो गया है, रेलवे अभी तैयार नहीं हो पाया।

हाल ही में नए मरीजों को कहां भर्ती करेंगे?सिटी न्यूज़ के इस सवाल पर स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि पहले तो हमने हर जिले में मरीजों को रखने के लिए 10-10 बिस्तर की व्यवस्था की है। मेडिकल कॉलेज में 200 की करनी थी पर 100 की ही हो पाई है। सप्लीमेंट्री में रेलवे को तैयार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि तत्काल में जो जहां से आएगा। जहां जगह होगी वहां भर्ती किया जाएगा।

सप्ताहभर पहले हमारी बातचीत हो चुकी है निजी अस्पताल संचालकों ने सहमति दी है

सिटी न्यूज़ से खास बातचीत में स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा कि सप्ताह भर पहले हमारी निजी अस्पताल वालों से बातचीत हुई थी। तब पता चला था कि प्रदेश भर में साढ़े 17 हजार निजी अस्पतालों में बिस्तर की व्यवस्था है। अगर हमें जरूरत पड़ी तो 20 से 30 फीसदी बिस्तर लेंगे। अस्पताल संचालकों ने इसपर सहमति भी दे दी थी। फिलहाल हम सरकारी अस्पतालों में ही मरीजों को रखने की व्यवस्था कर रहे हैं और अभी किसी तरह की कहीं कमी नहीं है। आगे अगर ऐसा लगेगा कि निजी अस्पतालों की जरूरत है तो उन्हें लेंगे।

मरीजों से नहीं लेंगे इलाज के पैसे, सरकार देगी

इधर सरकार अपने से 22 हजार पलंग की व्यवस्था अलग से कर रही है। दूसरी बिल्डिंग भी लेनी पड़ेगी तो वहां इन्हें रखा जाएगा। क्योंकि इस बीमारी का कोई इलाज तो है नहीं, बस मरीज को 7 से 8 दिन यानी जब तक रखना है तब तक उनमें लक्षण हैं, गंभीर मरीज को वेंटीलेटर की जरूरत पड़ती है, उसकी व्यवस्था तो हमारे पास है ही। हालांकि अभी ऐसा कोई नौबत आई नहीं है। पहले दो टेस्ट निगेटिव होने पर मरीजों को डिस्चार्ज किया जाता था, लेकिन अब नई गाइड लाइन आ गई है।

इनमें ये है कि अगर आप मरीज को 10 दिन तक रखते हैं, और बुखार या फिर किसी तरह के कोविड-19 के लक्षण नहीं हैं तो बिना जांच किए उन्हें डिस्चार्ज कर सकते हैं। अगर लक्षण बढ़ रहे हैं तो उनका इलाज चलता रहेगा। उन्होंने बताया कि निजी अस्पताल में अगर मरीजों को रखा भी गया तो वहां उनसे किसी तरह का पैसा नहीं लिया जाएगा। उनका सरकारी जैसे निशुल्क इलाज होगा। मरीजों का खर्च सरकार देगी।

हमने संचालक को पत्र लिखा है 

सीएमएचओ डॉ प्रमोद महाजन ने कहा कि आप लोग चिंतित न रहें, यह हमारी चिंता है। हम कहीं न कहीं मरीजों की व्यवस्था कर लेंगे। निजी अस्पताल को क्यों नहीं ले रहे इस सवाल पर डॉ महाजन ने कहा कि इसके लिए हमने संचालनालय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को लेटर लिखा है। उनकी अनुमति मिलने के बाद ही हम आगे कुछ करेंगे। फिर चाहे निजी अस्पताल वाले अपनी सुविधा देने के लिए राजी हों या न हों, उनके कहने से कुछ नहीं होगा। पहले मरीजों का इलाज जरूरी है।

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