बड़ी खबर : नकली दवा बेचने वालो का खुलासा ; रद्द किया गया ड्रग लाइसेंस ; जानिए पूरा मामला

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25 june 2020,

City News – CN      City news logo

रायपुर नकली दवा के चल रहे कारोबार के आरोपी कार्रवाई से बचने के नए-नए हथकंडे अपना रहे हैं। लेबोरेटरी टेस्ट में पूरी दवाएं नकली होने की पुष्टि के बाद औषधि विभाग ने अरोपी का ड्रग लाइसेंस कर ही रद्द कर दिया था।आरोपी ने स्वास्थ्य सचिव से इसकी शिकायत करके लाइसेंस पुन: शुरू करने की मांग की है।

Raipur | The accused of running the fake drug business are adopting new tactics to avoid action. The drug department had canceled the drug license of suspect after the drug test confirmed that the drugs were fake, and the accused has sought to resume the license after complaining to the Health Secretary.

यह जानकारी खुद हमें अस्टिेंड ड्रग कंट्रोल बीआर साहू ने दी। आपको बता दें की प्रदेश का पहला नकली दवाओं के करोबार का मामला सामने आया है। नकली दवा करोबारी शिशुपाल मंधानी को फरार बताया जा रहा है। देवपुरी में नकली दवाओं का रैकेट फूटे चार माह पूरे हो हुए गए हैं।

Assistant drug controller BR Sahu gave us this information himself. Let us tell you that the first fake drug business case of the state has come up. Fake medicine businessman Shishupal Mandhani is being absconding. Four months have been completed in Devpuri racket of fake drugs.

इसके बाद भी अब केस न्यायालय में प्रस्तुत नहीं किया गया। विभाग ने आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की मदद तक नहीं ली। आरोपी की गिरफत में आने के बाद और भी राज खुल सकते हैं। मामले में अब भी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि एक माह का समय और लग सकता है।

Even after this, the case is no longer presented in the court. The department did not even seek the help of the police to arrest the accused. More secrets may open after the accused is arrested. Still in the case, department officials say that it may take another month.

सिर्फ गोदाम की दवाएं जब्त

आपको बतादें कि 24 फरवरी को देवपुरी स्थित गौतम मेडिसिन सेंटर में छापा मारकर 20 लाख की एंटीबायोटिक दवा जब्त की थी। लेकिन कितनी दवाएं प्रदेश के किन-किन दवा दुकानों सप्लाई की जा चुकी थी इसकी जानकारी विभाग को नहीं मिल पाई। छापामार कार्रवाई में भी विभाग ने स्टॉक रजिस्टर की जब्ती नहीं बनाई थी। जिससे वास्तविक स्टॉक का पता नहीं चल पाया।

On February 24, raiding Gautam Medicine Center in Devpuri seized antibiotics worth Rs 20 lakhs. But the department could not get the information about how many medicines had been supplied in the state. The department did not seize the stock register even in the guerilla operation. Due to which the actual stock could not be detected.

तीन दवाओं की जांच, तीनों निकली नकली

दवा दुकान के गोदाम से ड्रग विभाग की टीम ने तीन प्रकार की एंटीबायोटिक टेबलेट के सैंपल लिए थे। इनमें इजिथ्रोमाइसिन, सिटीग्जिम व एमोक्सिलिन टेबलेट शामिल हैं। जांच में पता चला कि दवाओं में एंटीबायोटिक का एक भी तत्व नहीं मिले थे।

The drug department team collected samples of three types of antibiotic tablets from the drugstore warehouse. These include ezithromycin, citigzim and amoxicillin tablets. Investigation revealed that not a single antibiotic element was found in the drugs.

बिना जांच के ही प्रदेश भर के मेडिकल स्टोर में हो जाती है सप्लाई

प्रदेश में मेडिकल स्टोर या गोदाम से बिक रही दवाओं की जांच का कोई सिस्टम नहीं है। दवा उत्पाद कंपनी की लैब रिपोर्ट पर ही विश्वास किया जा रहा है। बिना जांचे ही प्रदेश के अलग-अलग मेडिकल स्टोर के माध्यम से बेंची जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी दवाओं के उपयोग से मरीज ठीक नहीं उल्टा बीमार होंगे |

There is no system to check medicines being sold from medical stores or godowns in the state. The lab report of the pharmaceutical product company is being believed only. Without testing, it is sold through different medical stores in the state. According to experts, the use of such drugs will only make the patients more ill.

इसके साइड इफेक्ट किसी भी खतरनाक रूप में सामने आ सकते हैं। हमे चलान पेश करने में अभी एक माह का समय लगेगा। मैंने लैब रिपोर्ट में नकली दवा की पुष्टी होने के बाद अरोपी के फर्म का लाइसेंस रद्द कर दिया तो आरोपी ने स्वास्थ सचिव से शिकायत कर दी है की गलत तरीके से लाइसेंस रद्द किया गया है।

It’s side effects can come in any dangerous form. It will take us a month to present the challan. When the license of the firm of suspect was canceled ,after the confirmation of fake medicine in the lab report, the accused has complained to the Health Secretary that the license has been wrongly canceled.

“बेनी राम साहू, अस्टिेंट ड्रग कंट्रोलर, रायपुर”

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