• प्राइवेट अस्पतालों को कोरोना सैंपल भेजने होंगे दिल्ली-मुंबई

13 june 2020

City News – CN

रायपुर | एम्स और अंबेडकर अस्पताल की प्रयोगशालाओं (लैब) में अब ऐसे मरीजों के स्वाब सैंपल नहीं जांचे जाएंगे, जो प्राइवेट अस्पतालों में भर्ती हैं। वजह ये है कि सरकारी लैब में जांच के लिए रोजाना 6 हजार सैंपल पहुंच रहे हैं। इनमें से हजार-डेढ़ हजार की जांच रोज लंबित हो रही है। हालात ये हैं कि किसी व्यक्ति की मौत के बाद कोरोना के शक में लिए गए सैंपल की तीन-तीन बाद रिपोर्ट मिल रही है।

पेंडिंग सैंपल की संख्या लगातार बढ़ने के साथ-साथ प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा विभाग पर आर्थिक बोझ भी पड़ रहा है, क्योंकि कोरोना के शक में एक सैंपल की जांच में औसतन 6 हजार रुपए खर्च हो रहे हैं। इसीलिए विभाग ने निजी अस्पतालों से भेजे गए सैंपल की जांच से हाथ खड़े कर दिए हैं। अब इन अस्पतालों को उनके यहां भर्ती मरीजों के स्वाब सैंपल कोरोना जांच के लिए दिल्ली या मुंबई की निजी प्रयोगशालाओं में भेजने होंगे।  

अफसरों ने बताया कि प्राइवेट अस्पतालों के सैंपल की जांच बंद किए जाने से जांच की पेंडेंसी कम होने के साथ-साथ खर्च भी बचेगा। अफसरों के अनुसार निजी अस्पतालों से रोजाना औसतन 200 से ज्यादा सैंपल निजी अस्पतालों से राजधानी सहित राज्य की अलग-अलग लैब में भेजे जाते हैं। कई बार ये आंकड़ा बढ़ जाता हैं।

अब निजी अस्पताल के संचालक प्राइवेट लैब में जांच करवाएंगे। इससे सरकारी लैब में जांच की वेटिंग लिस्ट कम होगी। केंद्र सरकार ने एसआरएल को कोरोना जांच के लिए अधिकृत किया है। छत्तीसगढ़ में इसका सेंटर तो है, लेकिन जांच की सुविधा नहीं। सेंटर में सैंपल कलेक्ट कर जांच के लिए मुंबई-दिल्ली भेजा जाएगा। बड़े निजी के संचालकों के अनुसार दिल्ली और मुंबई से जांच रिपोर्ट एक-दो दिन के भीतर आ जाएगी। ऐसी स्थिति में मरीजों को अनावश्यक इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

मौत से पहले स्वाब सैंपल, फिर भी मर्चुरी में रोकने पड़ रहे शव

लैब से रिपोर्ट आने में देरी होने के कारण कोरोना संदिग्ध मरीज की मौत के बाद परिजनों को दो-दो दिन इंतजार करना पड़ रहा है। सरकारी और प्राइवेट अस्पताल की मरचुरी में दो-दो दिन शव रोककर रखे जा रहे हैं। गुरुवार को लालपुर स्थित एक निजी अस्पताल में एक संदिग्ध मरीज की मौत के तीन दिन बाद शव मिला।

हालांकि मृत्यु के पहले ही स्वाब का सैंपल जांच के लिए भेज दिया गया था, लेकिन मरीज की मौत तीन दिन बाद रिपोर्ट मिली। मरीज संदिग्ध था, इस वजह से अस्पताल प्रशासन ने शव अपने मरचुरी में रखवा दिया। कोरोना मरीज की मौत होने पर अंतिम संस्कार के बेहद कड़े नियम है। उसी के अनुसार अंतिम संस्कार किया जाना है। ऐसा न करने पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।

इसी वजह से निजी हो या सरकारी किसी भी अस्पताल में संदिग्ध कोरोना मरीज की मौत होने पर शव तब तक नहीं सौंपा जा रहा है, जब तक कि लैब से रिपोर्ट न मिल जाए। इसी वजह से सरकारी और प्राइवेट अस्पताल में मौत के बाद शव को मरचुरी में रखकर इंतजार करना पड़ता है।

कोरोना संक्रमित अब 10 दिन में किए जाएंगे डिस्चार्ज

कोरोना के मरीजों को अब अधिकतम 10 दिन में डिस्चार्ज कर दिया जाएगा। हालांकि मरीजों को इससे पहले भी स्वस्थ होने के बाद छुट्‌टी दी जाएगी। अभी तक प्रदेश में मरीजों के डिस्चार्ज होने का औसत 6 से 16 दिन रहा है। मरीजों की लगातार बढ़ती संख्या के कारण अब कुछ मरीजों को बिना रिपीट टेस्ट छुट्‌टी दी जा रही है।

नई गाइडलाइन में कहा गया है कि अगर मरीज को अस्पताल में भर्ती होने के बाद बुखार नहीं आ रहा है तो दो नेगेटिव रिपोर्ट का इंतजार किए बिना ही छुट्‌टी दी जा सकती है। शुरुआत में मरीज के इलाज के दौरान दो रिपोर्ट नेगेटिव आने पर ही छुट्‌टी दी जा रही थी। गाइडलाइन में बदलाव के बाद अस्पतालों से मरीज जल्दी-जल्दी डिस्चार्ज किए जा रहे हैं।

शुक्रवार को 79 मरीजों को डिस्चार्ज किया गया, जो अब तक का सर्वाधिक है। डाॅक्टरों का कहना है बिना लक्षण वाले मरीज जल्दी स्वस्थ होते हैं, क्योंकि उनके शरीर में वायरल लोड कम होता है। इसलिए वे जल्दी स्वस्थ भी हो रहे हैं। जिन मरीजों की मौत हुई है, वे गंभीर थे।

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