• 05 AUGUST 2020
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रायपुर। राजिम को धर्म नगरी और लोककला संस्कृति का गढ़ कहा जाता है। राजिम में पैरी, सोंढूर और महानदी का पवित्र संगम स्थल त्रिवेणी है। इसी त्रिवेणी संगम स्थल पर कुलेश्वर महादेव का प्राचीन मंदिर है।

कुलेश्वर महादेव के संबंध में किंवदंती है कि 14 वर्ष के वनवासकाल में माता सीता ने संगम स्थल में स्नान कर अपने कुल देवता की नदी के रेत से विग्रह बनाकर पूजा-अर्चना की थी। इसी कारण उनका नाम कुलेश्वर महादेव है।

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राजिम छत्तीसगढ़ के लिए जन आस्था का केन्द्र है। यहां प्रतिवर्ष माघी पुन्नी मेला से महाशिवरात्रि तक विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। यहां देश-विदेश से साधु-संतों व दर्शनार्थियों का शुभागमन होता है।

कुलेश्वर महादेव मंदिर के समीप लोमश ऋषि का आश्रम है। उसी के समीप एक माह तक लोग कल्पवास करते हैं। राजिम क्षेत्र को छत्तीसगढ़ की पंचकोशी परिक्रमा के नाम से भी जाना जाता है।

पंचकोशी परिक्रमा में 5 स्वयंभू शिवलिंग की लोग साधनापूर्वक परिक्रमा करते हैं। जिनमें प्रमुख श्री कुलेश्वर महादेव (राजिम), पठेश्वर महादेव (पटेवा), चम्पेश्वर महादेव (चंपारण), फणिकेश्वर महादेव (फिंगेश्वर) और कोपेश्वर महादेव (कोपरा) है।

राजिम पुरातत्वों एवं प्राचीन सभ्यता के लिए प्रसिद्ध है। यहां भगवान श्री राजीव लोचन की भव्य प्रतिमा स्थापित है। सीताबाड़ी में उत्खन्न कार्य किया रहा है।

जिसमें सम्राट अशोक के काल का विष्णु मंदिर, मौर्यकालीन अवशेष, 14वीं शताब्दी का स्वर्ण सिक्का, कई मूर्तियां और सिंधुघाटी सभ्यता से जुड़ी कई कलाकृतियां मिल रही हैं। राजिम माघी पुन्नी मेला महोत्सव में पूरे छत्तीसगढ़ की लोककला व संस्कृति का दर्शन होता है।

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