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रायपुर |  छत्तीसगढ़ में लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (पीएचई) के स्थानीय ठेकेदार अब मुख्यमंत्री के पास सोमवार को फरियाद लेकर पहुंच गए हैं। ठेकेदारों का कहना है कि विभाग में बाहरी लोगों को काम दिया जा रहा है। इसके चलते घर चलाने का भी संकट खड़ा हो गया है। इससे पहले जल जीवन मिशन के अंतर्गत शिकायत मिलने पर मुख्यमंत्री ने उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की है।

सीएम हाउस पहुंचे ठेकेदारों ने कहा कि वह विभाग में 25 सालों से काम कर रहे हैं, लेकिन ठेका उन्हें नहीं देकर बाहरी लोगों को दिया जा रहा है। वहीं कई नए ठेकेदारों को काम दिया गया। आरोप लगाया कि विभाग बाहर से आए नए ठेकेदारों को बिना अनुभव देखे ही काम दे रहा है। उन्होंने कहा स्थानीय ठेकेदारों को काम में प्राथमिकता नहीं दी जा रही। इसका खामियाजा छोटे ठेकेदारों को भुगतना पड़ा रहा है।

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टर्नओवर के हिसाब से हो काम का आबंटन, स्थानीय को मिले प्राथमिकता

ठेकेदारों की मांग है कि जो भी टर्नओवर है, उसके हिसाब से काम का आबंटन किया जाए। री मैपिंग कर के भी काम देने का निर्धारण हों। उन्होंने कहा कि स्थानीय ठेकेदारों को प्राथमिकता के आधार पर काम मिले। जिससे छोटे ठेकेदार भी अपना घर चला सकें। सबसे ज्यादा संकट उन्हीं के सामने खड़ा हो गया है। इतने साल काम करने के बाद भी विभाग में बेरोजगार की तरह ही हैं।

ठेकों में गड़बड़ी को लेकर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समिति कर रही जांच

जल जीवन मिशन के तहत पीएचई विभाग से अभी 7 हजार करोड़ रुपए के ठेकों के आबंटन की प्रक्रिया चल रही है। उसमें गड़बड़ी की शिकायतों को लेकर दो दिन पहले ही मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मुख्य सचिव आरपी मंडल की अध्यक्षता में एसीएस वित्त व सचिव पीएचई की जांच टीम गठित की है। आरोप है कि करीब 6 हजार करोड़ रुपए का ठेका राज्य की बाहर की कंपनियों को दे दिया गया।