13 june 2020

City News – CN

रायपुर | लॉकडाउन में कम खपत के चलते प्रदेशभर के जलाशयों में पानी औसत से ज्यादा है। दुर्ग जिले के दो प्रमुख जलाशयों तांदुला और खरखरा में पिछले पांच सालों से इस समय औसत 16.74 फीसदी पानी रहता था, इस बार 20 फीसदी है। जशपुर के 18 बड़े जलाशयों में 47 प्रतिशत तक पानी है। रायगढ़ में भी जलाशयों में पिछली बार से ज्यादा पानी है। केलो डैम से तो पानी इसलिए छोड़ा जा रहा है ताकि बारिश के पानी के लिए जगह बनाई जा सके।

15 साल में पहली बार इतना पानी

दुर्ग। कोरोना संकट व लॉकडाउन के बीच जिले में इस बार अन्य वर्षों की तुलना में जलाशयों में जलभराव अधिक है। पिछले 5 सालों का औसत जहां 16.74 प्रतिशत है। वहीं इस बार दो प्रमुख जलाशय तादुंला व खरखरा में अब भी 20 प्रतिशत के करीब पानी सुरक्षित है। हालांकि सामान्य तौर पर यह कम है, लेकिन मानसून का आगमन हो चुका है। ऐसे में जलाशयों में जलभराव तय माना जा रहा है। पिछले करीब 15 वर्षों में यह पहला मौका है जब 10 जून की स्थिति में जलाशयों में 20 प्रतिशत तक पानी स्टोर है।

जिले की औसत बारिश है 984 मिलीमीटर

मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक जिले की औसत बारिश 984 मिलीमीटर है। 15 जून से 15 सितंबर के बीच मानसून का समय माना गया है। पिछले करीब 5 वर्षों में इसमें बदलाव भी दर्ज किया गया है। जून के बजाए जुलाई में बारिश शुरू हो रही, वहीं 15 सितंबर के आसपास होने वाली बारिश से जलाशय भर पा रहे हैं। इस बार पहले से ही जलाशयों में अधिक पानी है। इसके अलावा बारिश का आगमन भी पहले हो चुका है। 

तादुंला का उपयोग सिंचाई तो खरखरा से पेयजल आपूर्ति

जिले के दो प्रमुख जलाशय तादुंला व खरखरा हैं। दोनों ही बालोद जिले में हैं, लेकिन इनका उपयोग दुर्ग जिले में होता है। तादुंला से जिले के करीब 375 गांव में 60 हजार एकड़ में सिंचाई के लिए पानी पहुंचाया जाता है। इस बार भी आपूर्ति की गई। इस बार पानी अधिक होने से छोटे खपरी जलाशय से भी 4 गांव के 800 एकड़ खेतों तक पानी पहुंचाया गया।

इधर दुर्ग व भिलाई शहर की करीब 10 लाख आबादी तक पेयजल आपूर्ति के लिए खरखरा जलाशय का उपयोग किया जाता है। गर्मी के दिनों में जलाशय से पानी शिवनाथ पहुंचाया जाता है। करीब 4 हजार मिलियन क्यूबिक मीटर (0.92 एमक्यूएम) का अनुबंध है। इस  बार 3500 क्यूबिक मीटर की पानी आपूर्ति की जरूरत पड़ी।

अच्छी बारिश के साथ अगस्त तक जलभराव का अनुमान

कृषि विज्ञान से जुड़े एक्सपर्ट डॉ. पीएल चौधरी बताते हैं कि लॉकडाउन से प्रदूषण कम हुआ, इसका असर पर्यावरण पर पड़ा। इससे अच्छी बारिश की संभावना बनी है। ऐसे पिछले करीब 15 साल बाद देखने में आया। वहीं पानी की जरूरत कम होने से जलाशयों में पानी है, पानी की खपत कम हुई। उद्योगों के बंद रहने से वातावरण में गर्मी कम रही। वाष्पीकरण कम हुआ। इस प्रकार कई ऐसे कारण रहे, जिससे चय चेंज महसूस किया जा रहा।

इस बार जलाशय में पानी अधिक

“यह बात सही है कि जलाशयों में पानी अधिक है। पेयजल के लिए पानी की खपत कम हुई है, सिंचाई के लिए हमने पर्याप्त पानी उपलब्ध कराया। जहां से जैसी डिमांड रही, वहां पानी पहुंचाया। अन्य वर्षों में किल्लत महसूस होती थी।”
-बीजी तिवारी, ईई जल संसाधन विभाग दुर्ग

क्षमता से ज्यादा भरेंगे बांध

रायगढ़ |  जिले में इस साल जनवरी से मई के शुरुआत तक बेमौसम बारिश होती, इससे अंडर ग्राउंड वाटर लेवल बढ़ा है। 25 मार्च से 31 मई तक लॉकडाउन रहने के कारण ज्यादातर उद्योग बंद रहे, खेती प्रभावित रही इसलिए पानी का उपयोग कम हुआ। इससे मानसून से पहले जिले के जलाशयों में पहली बार पानी का भराव अच्छा है।

मानसून में अच्छी बारिश के पूर्वानुमान से एक्सपर्ट मानते हैं कि इस बार जलाशयों में क्षमता या उससे अधिक पानी भरेगा।केलो डैम से उद्योगों में सिर्फ अंजनी स्टील को 1.81 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी सालाना दिया जाता है। लेकिन इस मई 24 से 3 मई तक प्लांट बंद होने के कारण पानी नहीं ही नहीं लिया।

इसी तरह कलमा से जिंदल, अदानी, एनटीपीसी, समेत कई डेढ़ दर्जन बड़े उद्योगों में लॉकडाउन की वजह से पानी की खपत कम रही। इससे जलाशयों, नदी, तालाबों में पर्याप्त पानी और इनके प्रभाव से आसपास के क्षेत्रों का जल स्तर मेंटेन रहा। केलो डैम के पानी का इस्तेमाल शहर के लिए नगर निगम ने किया। इसके अलावा किंकारी डैम में क्रेक की वजह से जल का भराव कम है। बाकी दो जलाशयों में भरपूर पानी है। इन दिनों सूख जाने वाले तालाबों में भी पानी है।  

नया पानी जमा करने खाली कर रहे केलो डैम 

केलो डैम समुद्र तल से 233 मीटर ऊंचा है और इसकी कुल क्षमता 61.95 मिलियन क्यूबिक मीटर है। 12 जून की स्थिति में अभी डैम के कैचमेंट एरिया में कुल 228.10 मीटर कुल 23.5 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी है। मानक संचालन पद्धति के नियम अनुरूप इसे 15 जून तक 225 मीटर पर मेंटेन रखना है। ताकि बारिश का नया पानी स्टोर कर सके।  

लॉकडाउन से बेअसर

“एक सीजन में केलो डैम तीन से चार बार 100 प्रतिशत तक भर जाता है, हम नया पानी स्टॉक करने के लिए पानी में नदी और सिंचाई के लिए नहरों में छोड़ते हैं। लॉकडाउन में बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ा क्योंकि सिर्फ एक ही उद्योग को पानी देते हैं।”
-पीके शुक्ला, ईई, केलो परियोजना

मानसून से पहले  47% पानी

जशपुरनगर| इस वर्ष मानसून से पहले ही जिले के जलाशयों में पर्याप्त पानी है। 18 सिंचाई बड़े जलाशयों में औसत 47 प्रतिशत तक जलभराव हो चुका है। टैंकों की यह स्थिति मार्च, अप्रैल व मई के महीने में हुई बारिश की वजह से है। जानकारों का कहना है कि यह स्थिति पहली बार निर्मित हुई है। कई जलाशयों में निर्माण के बाद पहली बार जून में इतना पानी पहले से जमा है।

बीते साल 12 जून की स्थिति में जिले के जलाशयों में जलभराव 17 प्रतिशत ही था। गर्मी की मार से जलाशय सूख चुके थे। जून के दूसरे सप्ताह में अधिकतम तापमान का पारा 42 डिग्री पर था। गर्मी की मार से नीमगांव जलाशय, डंड़गांव, लवाकेरा, कोनपारा, अंकिरा तालाब, राजामुंडा, खमगड़ा और घरजियाबथान जलाशय पूरी तरह सूख गए थे।

11 जून के आंकलन में इन आठों जलाशय में जलभराव शून्य प्रतिशत था, पर इस वर्ष इन सभी जलाशयों में 30 से 70% तक पानी जमा है। शहर के नजदीक नीमगांव जलाशय में बीते साल पानी पूरी तरह से सूख गया था। वहां इस वर्ष 70 प्रतिशत पानी जमा है। पहले से इतना अधिक पानी जमा होने के कारण इस बार अच्छी बारिश हुई तो जून के महीने में ही सत प्रतिशत जलभराव हो सकता है।

पहली बार इतनी अच्छी स्थिति

जल संसाधन विभाग के तकनीकी शाखा के कर्मचारी नोवेल टोप्पो व अश्विनी टांडे ने कहा कि वे बीते कई सालों से जलभराव का आंकड़ा दुरूस्त कर रहे हैं। पहली बार ऐसा हुआ है जब मानसून से पहले ही जलाशयों में जलभराव की यह स्थिति है। जिले के कई जलाशय ऐसे हैं जो निर्माण के बाद पहली बार गर्मी में भी नहीं सूखे हैं।

जिले में उद्योग नहीं होने के कारण जलाशयों का उपयोग सिर्फ सिंचाई के लिए होता है। इस वर्ष गर्मी के महीनों में भी हुई बरसात के कारण ग्रीष्मकालीन फसलों को भी पानी की जरूरत नहीं पड़ी। बेमौसम बारिश से ही फसलें हो गई है। इसलिए नहरों में पानी की जरूरत ही नहीं पड़ी।

जलस्तर भी ठीक, नहीं सूखे हैंडपंप

बेमौसम बारिश व जलाशयों में पर्याप्त पानी होने के कारण इस वर्ष ग्राउंड लेबल वाटर भी रिचार्ज रहा। ग्राउंड लेबल वाटर 8 मीटर पर था। पीएचई के ईई वीके उमरलिया ने बताया कि इस वर्ष गर्मी में हैंडपंप सूखने या हैंडपंप से लाल पानी निकलने की कहीं शिकायत नहीं आई। गर्मी के कारण भू-जलस्तर में हल्की गिरावट ही आई थी। बीते दस साल में यह पहली बार हुआ था जब हैंडपंप सुधार के लिए टैक्निशियनों का कहीं भेजना ना पड़ा हो।

इस वर्ष है पर्याप्त पानी

“जिले के सभी जलाशयों में इस वर्ष पर्याप्त पानी है। जशपुर व मनोरा ब्लॉक के जलाशयों में 70 से 80 प्रतिशत तक जलभराव पहले से है। जलाशयों की गेट में सुधार व मेंटेनेंस का काम कर लिया गया है।”
-डीआर दर्रो, ईई, जल संसाधन विभाग

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