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जिले में गोबर का स्टॉक होने के बावजूद 200 किलोमीटर दूर राजनांदगांव जिले से 10 टन गोबर वन विभाग द्वारा खरीदा गया

  • अब वन विभाग व जिला पंचायत के अफसर एक-दूसरे पर लगा रहे आरोप

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जिले में गोबर का स्टॉक होने के बाद भी दूसरे जिले से खरीदी हो रही है, इससे जिले काे इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। बिलासपुर वनमंडल ने राजनांदगांव जिले से 10 टन गोबर की खरीदी बर्मी कंपोस्ट खाद के लिए की है।

बिलासपुर जिले से ही गोबर खाद खरीदी न करने पर बिलासपुर वनमंडल और जिला पंचायत बिलासपुर के अफसर एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं।

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बिलासपुर वनमंडल को वर्मी कंपोस्ट खाद के लिए गोबर की जरूरत थी इसलिए उन्होंने यह खरीदी उन्होंने विभाग के उच्च अफसरों से मंजूरी लेकर जिले से 200 किलोमीटर दूर राजनांदगांव जिले से जुलाई माह में कर ली।

अब बिलासपुर जिले में गोबर रहते हुए भी दूसरे जिले से गोबर खरीदी किए जाने पर वन विभाग के अफसर अपने उच्च अफसरों से मंजूरी का हवाला दे रहे हैं।

वन विभाग के अफसरों ने खरीदी के वक्त कलेक्टर व अन्य विभागों से पत्राचार करने के बाद भी गोबर उपलब्ध नहीं होने की बात कही है।

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डीएफओ ने कहा- बकायदा पत्राचार किया उसके बाद खरीदी की

बिलासपुर वनमंडल के डीएफओ कुमार निशांत ने इस मामले में कहा कि खरीदी विभाग के उच्च अधिकारियों की मंजूरी के बाद राजनांदगांव जिले की समिति से की गई है।

जुलाई में खरीदी के पूर्व हमने कलेक्टर बिलासपुर समेत अन्य विभागों के अधिकारियों से गोबर खरीदी के लिए पत्राचार किया था लेकिन कोई जवाब नहीं मिलने पर ऐसा किया गया।

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जिला पंचायत ने कहा- कोई पत्र वन विभाग से नहीं मिला

जिला पंचायत बिलासपुर के परियोजना अधिकारी रिमन सिंह ठाकुर ने बताया कि जुलाई में गोबर खरीदी के वक्त वन विभाग से हमें कोई पत्र नहीं मिला है। यदि मिला होता तो रिक्वायरमेंट पूरी की जाती।

दूसरे जिले से खरीदी से यह नुकसान

राज्य सरकार की गोधन योजना में गोबर खरीदी और उसकी बिक्री का उद्देश्य ही हितग्राहियों को रोजगार देना है। जिससे वे आय अर्जित कर आत्मनिर्भर बन सकें लेकिन अफसर अब अपनी मनमानी कर रहे हैं।

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