मुख्य चुनाव आयुक्त को स्वतंत्र निर्णय लेने का अधिकार होना चाहिए, जो जरूरत पड़े तो प्रधानमंत्री के ऊपर भी कार्यवाही कर सके… सर्वोच्च न्यायालय

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नई दिल्ली – सीईसी, ईसी की नियुक्ति की प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट के सवालों के जवाब केंद्र ने दिए हैं. सुप्रीम कोर्ट के आरोप पर कि 2007 के बाद से सभी सीईसी का कार्यकाल ” छोटा” किया गया, अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने कहा कि हर बार नियुक्ति वरिष्ठता के आधार पर की जाती है. एक मामले को छोड़कर हमें चुनाव आयोग में व्यक्ति के पूरे कार्यकाल को देखने की जरूरत है न कि सिर्फ सीईसी के रूप में. 2-3 अलग-अलग उदाहरणों को छोड़कर पूरे बोर्ड में वह कार्यकाल 5 साल का रहा है. इसलिए मुद्दा यह है कि कार्यकाल की सुरक्षा को लेकर कोई समस्या नहीं है।

कोर्ट ने पूछा कि क्या ईसी के रूप में नियुक्ति स्तर के लिए कोई तंत्र है और क्या सीईसी के रूप में नियुक्ति के लिए कोई प्रक्रिया है. इसपर अटॉर्नी जनरल ने कहा यह परंपरा के आधार पर किया जाता है. सीईसी की कोई अलग नियुक्ति प्रक्रिया नहीं है. ईसी के रूप में नियुक्ति होती है और फिर वरिष्ठता के आधार पर सीईसी नियुक्त किया जाता है।

संविधान पीठ की अगुवाई कर रहे जस्टिस केएम जोसफ ने फिर नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कोई भी सरकार अपने किसी हां जी, हां जी करने वाले या उन जैसे अधिकारी को ही निर्वाचन आयुक्त बनाना चाहती है. सरकार को मनचाहा मिल जाता है और अधिकारी को भविष्य की सुरक्षा. ये सब दोनों पक्षों को सही लगता है लेकिन ऐसे में बड़ा सवाल है कि गुणवत्ता का क्या होगा जिस पर गंभीर असर पड़ रहा है? उनकी कार्रवाई की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं. इस पद के साथ स्वायत्ता भी जुड़ी होती है.

अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने कहा, 1991 के बाद से हमने निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में हमें कोई खामी नहीं मिली. जहां तक सूचना आयुक्त की नियुक्ति की बात है तो उसमें अंजली भारद्वाज की याचिका पर सुनवाई के दौरान खामियां पाई गई थीं. कोर्ट ने सूचना आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया के लिए गाइड लाइन बनाई थी. क्योंकि तब सूचना आयुक्तों के खाली पदों और लंबित अर्जियों का मामला भी था. लेकिन चुनाव आयोग में ऐसा कुछ भी नहीं है. छोटे कार्यकाल को लेकर भी सरकार क्या कर सकती है क्योंकि 65 साल की उम्र तक ही इस पद पर बना रहा जा सकता है. सरकार ने इसमें कोई छेड़छाड़ नहीं की है. निर्वाचन आयुक्त नियुक्त होते हैं, फिर उनमें वरिष्ठता के आधार पर ही मुख्य आयुक्त बनाए जाते हैं.

जस्टिस जोसफ ने पूछा कि जब आप किसी को निर्वाचन आयुक्त बनाते हैं तभी सरकार को पता रहता है कि कौन कब और कब तक सीईसी बनेगा. जस्टिस अजय रस्तोगी ने भी टिप्पणी की कि सरकार ही तो निर्वाचन आयुक्त नियुक्त करती है, वही तो मुख्य आयुक्त बनते हैं. ऐसे में ये कैसे कह सकते हैं कि वह सरकार से स्वायत्त हैं.क्योंकि नियुक्ति की प्रक्रिया स्वायत्तता वाली नहीं है. एंट्री लेवल से ही स्वतंत्र प्रक्रिया होनी चाहिए.