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बच्चाें पर खतरा अधिक ; जाने कैसे फैल रहा संक्रमण और बचाव के उपाय ; पढ़ें पूरी खबर

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Conjunctivitis Eye Flu: इटारसी में आइफ्लू का संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। रोजाना सरकारी अस्पताल में करीब 50 संक्रमित मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं, इनमें बच्चों की संख्या ज्यादा है। इयकसे लेकर स्कूलों ने भी बच्चों को सतर्क किया है।

शहर में आईफ्लू का संक्रमण, 400 से ज्यादा मरीज, इनमें बच्चे सबसे ज्यादा

Conjunctivitis Eye Flu: इटारसी। मानसून की आमद के साथ ही शहर में अचानक आइफ्लू का संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। रोजाना सरकारी अस्पताल में करीब 50 संक्रमित मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं, इनमें बच्चों की संख्या ज्यादा है। स्कूल जाने वाले बच्चों में संक्रमण की दर ज्यादा है। चिकित्सकों ने संक्रमण को लेकर चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि इस समस्या को नजरअंदाज न करें, सही इलाज लें, वरना आंखों को भारी नुकसान हो सकता है।

मौसम में बदलाव के कारण फैल रहा संक्रमण

चिकित्सकों के अनुसार मौसम में बदलाव के बाद आंखों में संक्रमण की बीमारी फैल रही है, बोलचाल की भाषा में इसे आंख आना कहा जाता है। आइफ्लू यानि कंजंक्टिवाइटिस संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, एक अनुमान के मुताबिक पिछले एक सप्ताह से 400 से ज्यादा लोगों को यह समस्या हो चुकी है। डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी अस्पताल में इस बीमारी से पीड़ित मरीजों की लाइन लग रही है। इसके अलावा नेत्र विशेषज्ञ चिकित्सकों के यहां अलग मामले सामने आए हैं।

आंखों का वायरल है

इस संबंध में सरकारी अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डा. उदित भट्ट, डा. वंदना मोरे ने बताया कि यह एक तरह से आंखों का वायरल है, जो कंजक्टिवा में सूजन आने की वजह से होता है, कंजक्टिवा आंख की बेहद संवेदनशील परत होती है, जो आंख के सफेद भाग व पलकों के आंतरिक हिस्से को सुरक्षित रखती है, मानसून के दौरान कम तापमान और ज्यादा नमी के कारण लोग बैक्टीरिया वायरस, और एलर्जी के संपर्क में आते हैं, जो कि एलर्जिक रिएक्शन और आई इंफेक्शन जैसे कंजंक्टिवाइटिस का कारण बनती है।

बचाव के लिए आई ड्राप उपलब्ध

इस संबंध में शिशु रोग विशेषज्ञ डा. विवेकचरण दुबे ने बताया कि आई-फ्लू वैसे तो गंभीर बीमारी नही है, इसमें संक्रमित व्यक्ति की दोनों आंखें लाल होकर सूज जाती है, आंखों में कीचड़ आता है, इससे बचाव के लिए बाजार में आई ड्राप उपलब्ध है, लेकिन चिकित्सकों की निगरानी में ही इसे लेना चाहिए, बार-बार आंखों को मलना नहीं चाहिए, काला चश्मा लगाकर रखना चाहिए, संक्रमित व्यक्ति की आंखों या हाथों के संपर्क में नहीं रहना चाहिए। 5-6 दिनों में यह संक्रमण ठीक हो जाता है, लेकिन लापरवाही से यह बीमारी आंखों को गहरा नुकसान भी कर सकती है।

ये हैं लक्षण

आंखों का लाल होना, कीचड़ आना, पानी बहना, सूजन के बाद खुजली-दर्द होना इसके लक्षण हैं। यह बीमारी एक दूसरे के संपर्क मे आने व संपर्क में आने से फैलती है, इससे बचाव के लिए आंखें साफ रखना चाहिए, गंदे हाथों को आंखों में नहीं लगाना चाहिए, परिवार में अलग तौलिए का उपयोग करना चाहिए, काला चश्मा पहनकर टीव्ही या मोबाइल से बचना चाहिए।

स्कूलों ने भी किया सतर्क

बच्चों में आंखों के संक्रमण की समस्या बढ़ते ही निजी स्कूलों ने एडवाइजरी जारी की है। वर्धमान स्कूल के संचालक प्रशांत जैन ने बताया कि इस बीमारी से संक्रमित बच्चे को सामान्य होने तक स्कूल न भेजने या काला चश्मा लगाकर स्कूल आने को कहा गया है, ज्यादा अच्छा है, संक्रमित बच्चा घर पर ही रहे, इस बारे में पालकों को सतर्क किया गया है, जिससे संक्रमण दूसरे बच्चों में न फैले, आंखों के संपर्क में आते ही दूसरे लोग इस बीमारी की चपेट में आ सकते हैं।

इस मौसम में यह बीमारी हर साल फैलती है, बाजार में इसके लिए आइड्राप एवं रोकथाम के लिए दवा उपलब्ध है, चिकित्सकों की निगरानी में आंखों में किसी भी तरह की दवा डालना चाहिए, इस बीमारी से संक्रमित व्यक्ति या बच्चे को काला चश्मा लगाना जरूरी होता है। डा. आरबी अग्रवाल, नेत्र रोग विशेषज्ञ।

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