रायपुर एम्स; पांच वर्ष में दोगुने हो गए ओपीडी में आने वाले मरीज, एक वर्ष में 7500 बड़ी सर्जरी भी हुई

249

*  1500 बच्चों का जन्म, साल भर में 18 हजार रोगियों को आयुष्मान भारत योजना का मिला लाभ

* रीनल ट्रांसप्लांट शीघ्र प्रारंभ होगा, आईवीएफ के लिए भी प्रक्रिया प्रारंभ

रायपुर, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ने शनिवार को अपनी स्थापना के 10 वर्ष पूर्ण कर लिए। इस अवसर पर विशेष पौधारोपण अभियान चलाकर स्वास्थ्य के क्षेत्र में एम्स के योगदान को रेखांकित किया गया। शीघ्र ही यहां रीनल ट्रांसप्लांट प्रारंभ होने जा रहा है जबकि आईवीएफ के लिए भी प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। अगले एक वर्ष में यहां कई और सुविधाएं भी उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।

निदेशक प्रो. (डॉ.) नितिन एम. नागरकर ने बताया कि एम्स की स्थापना के बाद पिछले पांच वर्ष में ही रोगियों की संख्या दोगुनी होकर 4.45 लाख पहुंच गई है। वर्ष 2017-18 में यह 2.56 लाख थी। वहीं पिछले वर्ष 7510 बड़े ऑपरेशन हुए जबकि 6370 छोटे ऑपरेशन भी किए गए। आईपीडी में 30 हजार से अधिक रोगियों को उपचार प्रदान किया गया। प्रो. नागरकर ने बताया कि अब शीघ्र ही रीनल ट्रांसप्लांट की सुविधा प्रदान की जाएगी। इसके लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध हो गए हैं। अगले एक माह के अंदर यह सुविधा प्रारंभ होने की उम्मीद है। इसके साथ ही महिलाओं के लिए आईवीएफ की सुविधा भी प्रदान की जा रही है।

पिछले दस वर्ष में शिक्षण, शोध और उपचार के क्षेत्र में एम्स ने उल्लेखनीय प्रगति की है। एम्स में वर्तमान में एमबीबीएस की 125 सीट हैं जबकि बीएससी (नर्सिंग) की 75 सीट उपलब्ध हैं। 14 सुपरस्पेशयल्टी विभाग में एमडी और एमसीएच की भी 35 सीट प्रतिवर्ष हो गई हैं। इससे प्रदेश को सुपरस्पेशियल्टी में चिकित्सकों की कमी नहीं होगी।

प्रो. नागरकर ने इस सफलता का श्रेय सभी चिकित्सा शिक्षकों, अधिकारियों और कर्मचारियों को दिया। उनका कहना है कि कोविड-19 के समय जिस प्रकार टीम भावना के साथ प्रदेश को नेतृत्व प्रदान किया गया उसे भविष्य में सिकलसेल, टीबी, कैंसर और गुर्दा रोग के लिए भी प्रदान करने की आवश्यकता है। इस अवसर पर पूरे एम्स के प्रशासनिक विभाग में ई-ऑफिस भी प्रारंभ हो गया है। अब फाइल के स्थान पर ई-फाइल भेजी जाएंगी जिससे कार्य और अधिक सुगमता से हो सकेगा।

पौधारोपण अभियान में उप-निदेशक अंशुमान गुप्ता, अधिष्ठाता (अकादमिक) प्रो. आलोक चंद्र अग्रवाल, वित्त सलाहकार बी.के. अग्रवाल, अधीक्षण अभियंता कर्नल राजेश सिंह, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी वी. सीतारामू, मेडिकल छात्र सहित बड़ी संख्या में शिक्षक और अधिकारी उपस्थित थे।