शारदीय नवरात्र की महाअष्टमी व नवमी कब है..? जानिए हवन और कन्या पूजन के शुभ मुहूर्त व विधि…

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नवरात्रि की अष्टमी व नवमी तिथि का हिंदू धर्म में विशेष महत्व होता है। इन दोनों तिथियों में कन्या पूजन करना अति उत्तम माना जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं।

नवरात्रि का पावन पर्व मां दुर्गा को समर्पित माना गया है। नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि में अष्टमी और नवमी तिथि का विशेष महत्व होता है। अष्टमी के दिन मां महागौरी व नवमी के दिन मां सिद्धिदात्री की विधि-विधान के साथ पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अष्टमी व नवमी तिथि पर कन्या पूजन करना शुभ फलदायी माना गया है। जानें नवरात्रि के अष्टमी व नवमी तिथि पर कन्या पूजन के शुभ मुहूर्त-

नवरात्रि की महाष्टमी 2022 कब है-

नवरात्रि की अष्टमी 3 अक्टूबर 2022, सोमवार को है। हिंदू पंचांग के अनुसार, अष्टमी तिथि 02 अक्टूबर को शाम 06 बजकर 47 मिनट से शुरू होगी, जो कि 03 अक्टूबर को शाम 04 बजकर 37 मिनट पर समाप्त होगी। अष्टमी तिथि पर अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 46 बजे से दोपहर 12 बजकर 34 मिनट तक रहेगा।

नवरात्रि की नवमी कब है?

शारदीय नवरात्रि की नवमी तिथि 3 अक्टूबर 2022 को शाम 4 बजकर 37 मिनट से प्रारंभ हो रही है। इसका समापन 4 अक्टूबर 2022 को दोपहर 2 बजकर 20 मिनट पर होगा। उदयातिथि के अनुसार नवरात्रि की नवमी 4 अक्टूबर 2022 को मनाई जाएगी।

नवरात्रि 2022 व्रत पारण का समय-

हिंदू पंचांग के अनुसार, नवरात्रि व्रत पारण का समय इस बार 04 अक्टूबर को दोपहर 02 बजकर 20 मिनट के बाद होगा।

कैसे करें कन्या पूजन

कन्या भोजन से पहले कन्याओं को आमंत्रित कर उनका स्वागत करें, उनके पैर धोएं, उनका श्रृंगार करें और उसके बाद उन्हें भोजन करवाएं। भोजन में मिष्ठान और फल शामिल करना न भूलें। इसके बाद उन्हें यथायोग्य उपहार देकर उनके घर तक पहुंचाएं। किसी भी वर्ण, जाति और धर्म की कन्या को आप कन्या पूजन के लिए आमंत्रित कर सकती हैं।

कितनी कन्याओं को करें आमंत्रित-

अगर आप सामर्थ्यवान हैं, तो नौ से ज्यादा या नौ के गुणात्मक क्रम में भी जैसे 18, 27 या 36 कन्याओं को भी आमंत्रित कर सकती हैं। यदि कन्या के भाई की उम्र 10 साल से कम है तो उसे भी आप कन्या के साथ आमंत्रित कर सकती हैं। यदि गरीब परिवार की कन्याओं को आमंत्रित कर उनका सम्मान करेंगे, तो इस शक्ति पूजा का महत्व और भी बढ़ जाएगा। यदि सामर्थ्यवान हैं, तो किसी भी निर्धनकन्या की शिक्षा और स्वास्थ्य की यथायोग्य जिम्मेदारी वहन करने का संकल्प लें।