रायपुर : शेर के अनाथ शावकों को पाल रही बाघिन मौसी…

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रायपुर, किसी बाघिन की मौत के बाद अनाथ हुए उसके शावकों को उस बाघिन की बहनें तक नहीं पालतीं, लेकिन छत्तीसगढ के गुरु घासीदास टाइगर रिजर्व से लगे संजय डबरी टाइगर रिजर्व में ऐसा हो रहा है। वन्यप्राणी विशेषज्ञों का दावा है कि यह दुनिया में पहला मामला हो सकता है।

संजय डबरी टाइगर रिजर्व में मार्च 2022 में एक बाघिन टी-18 की मौत हुई तो उसके 4 शावक अनाथ हो गए। कुछ दिन में एक की मौत भी हो गई। तब इन शावकों को उनकी मौसी यानी टी-28 नाम की बाघिन ने सहारा दिया। वह इन शावकों को अपने 3 बच्चों के साथ पाल तो रही ही है, शिकार करना भी सिखा रही है।जबकि मृतक बाघिन की एक और बहन टी-17 ने इन शावकों को एक-दो दिन में भगा दिया था, जबकि वह भी अपने 3 शावकों को पाल रही है। मृत बाघिन के शावकों को उनकी बाघिन मौसी पाल रही है, इस घटनाक्रम से मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के विशेषज्ञ ही नहीं बल्कि 200 देशों में वन्य प्राणियों के लिए काम करने वाली संस्था डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के अधिकारी भी हैरान हैं।

छत्तीसगढ़ के वन अफसरों ने भी फारेस्ट रिजर्व जाकर इन शावकों को देखा और उम्मीद जताई है कि इनसे गुरु घासीदास टाइगर रिजर्व में बाघ बढ़ेंगे क्योंकि संजय डुबरी रिजर्व से अलग होकर ही गुरु घासीदास टाइगर रिजर्व अस्तित्व में आया है।

मां की मौत के बाद बचते नहीं शावक

डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी उपेंद्र दुबे ने बताया कि अगर बाघिन की मौत हो जाए तो उसके अधिकांश शावक बचते नहीं हैं। उन्हें या तो बाघ मारकर खा जाते हैं, दूसरे वन्य जीवों का शिकार बन जाते हैं, या फिर भूख से मौत हो जाती है।

एक शावक की मौत

संजय डबरी रिजर्व के संचालक वीपी सिंह ने बताया कि बाघिन के जिस शावक की मौत हुई, संभवत: उसे उसके पिता टी-26 ने मारा हो, क्योंकि उसे लगा होगा कि वह प्रतिद्वंद्वी न हो जाए। नर बाघ अपने बच्चे को भी एक से डेढ़ साल तक ही अपने क्षेत्र में रहने देता है, मां भी डेढ़-दो साल बाद बच्चों को खदेड़ने लगती है, शिकार में हिस्सा नहीं देती ताकि वे आत्मनिर्भर बनें।

छत्तीसगढ में 6 बाघों की वृद्धि संभव…

छत्तीसगढ़ में बाघ की संख्या एक बार फिर बढ़ने के संकेत मिले हैं। खबर इसलिए राहत देने वाली है, क्योंकि पिछले 8 साल में बाघों की संख्या का यहां अजीब ट्रेंड रहा है। 2014 में यहां के जंगलों में 46 बाघ होने की रिपोर्ट जारी की गई। चार साल बाद, यानी 2018 की रिपोर्ट ने और चौंकाया क्योंकि संख्या आधी से भी कम होकर 19 रह गई। माना जा रहा है कि शुक्रवार 29 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस पर केंद्र सरकार की ओर से जारी होने वाली रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ में बाघों की संख्या में 6 की वृद्धि दर्शाई जा सकती है। बाघों की गणना करीब छह महीने पहले निर्धारित प्रक्रिया के तहत शुरू की गई थी।

बाघों के बारे में 5 तथ्य जो आपके होश उड़ा देंगे

एक बाघ की दहाड़ प्रभावशाली रूप से तेज होती है-एक बाघ की दहाड़ दो मील दूर से सुनी जा सकती है। · वे काफी तेज भी हैं-बाघ 40 मील प्रति घंटे की गति से आगे बढ़ सकते हैं। · टाइगर को दुनिया की सबसे बड़ी बिल्ली कहा जाता है- औसत बाघ का वजन 800.278 पाउंड होता है। · शिकार सीखने में थोड़ा समय लेता है- एक शावक दो या तीन साल का होने के बाद ही अपना शिकार कर सकता है। · भारत में बाघों की सबसे बड़ी आबादी है- दुनिया के जंगली बाघों की 70% आबादी भारत में है।

बाघों की विभिन्न प्रजातियां

साइबेरियाई बाघ, बंगाल बाघ, इंडोचाइनीज बाघ, मलय बाघ और दक्षिण चीन बाघ। बंगाल टाइगर मुख्य रूप से भारत में पाए जाते हैं, जिनकी आबादी बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, चीन और म्यांमार में भी कम है। यह बाघ की सभी उप-प्रजातियों में सबसे अधिक है, जिसमें 2,500 से अधिक जंगल में बचे हैं।

अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस का महत्व

वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) के अनुसार, जंगली बिल्ली की वर्तमान आबादी 3,900 है। अगले वर्ष तक, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ, बाघों की आबादी वाले देशों के साथ, उनकी संख्या को दोगुना करके 6,000 करने का लक्ष्य रखता है। यह दिन और भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि एक समय था जब अधिकांश अफ्रीकी महाद्वीप में बाघों को घूमते हुए देखा जाता था। हालांकि, अवैध शिकार, अवैध वन्यजीव व्यापार और निवास स्थान के नुकसान ने उनकी आबादी और सीमा को लगभग 7% तक कम कर दिया। · भारत 18 राज्यों में स्थित 51 बाघ अभयारण्यों का घर है। 2018 की बाघ जनगणना में भारत के राष्ट्रीय पशु की आबादी में वृद्धि देखी गई।