शरारती बच्चों को सुधारने के लिए डांट-फटकार का तरीका नहीं आता काम, इन 3 टिप्स से सिखाएं बच्चों को अनुशासन

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बच्चों को डांटना-धमकाना उन्हें अनुशासन सिखाने का सही तरीका नहीं माना जा सकता और ऐसे में पेरेंट्स को क्या करना चाहिए और कैसे अपने बच्चों को डिसिप्लीन सिखाना चाहिए इसी बारे में पढ़ें कुछ टिप्स यहां।

बच्चे शरारत और मस्ती करना पसंद करते हैं। इसीलिए, बचपन में बच्चे जहां छोटी-छोटी शरारतें करते हैं वहीं बड़े होने के साथ-साथ कई बार वे कुछ ऐसी शरारतें भी कर जाते हैं जो काफी गम्भीर होती हैं या उस शरारत से बच्चे को या किसी और को चोट लगने का डर होता है। ऐसे में बच्चे को अनुशासन सिखाना और ऐसी शरारतें करने से बचने के लिए प्रोत्साहित करना महत्वपूर्ण है।

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लेकिन, पेरेंट्स के सामने सबसे बड़ी समस्या यहीं पर आती है कि जब वे अपने बच्चों को कुछ अच्छा सिखाने की कोशिश करते हैं तो बच्चे उनकी बात नहीं सुनते या बार-बार वही काम करते हैं जिसके लिए उन्हें मना किया जाता है। ऐसे में कई बार खीजकर मां-बाप बच्चे को डांट देते हैं या उनपर चिल्ला उठते हैं। ऐसे में बच्चे जिद्दी और बहस करने वाले भी बन सकते हैं और उनकी शरारतें कम होने की बजाय बढ़ती ही जाती है।

बच्चों को डांटना-धमकाना उन्हें अनुशासन सिखाने का सही तरीका नहीं माना जा सकता और ऐसे में पेरेंट्स को क्या करना चाहिए और कैसे अपने बच्चों को डिसिप्लीन सिखाना चाहिए इसी बारे में पढ़ें कुछ टिप्स यहां।

रिवर्स काउंटडाउन…

बच्चों को जब गुस्सा आए तो पहले उनका गुस्सा शांत कराएं और उसके बाद उन्हें समझाने की कोशिश करें। बच्चे को शांत करने के लिए उनके सामने उल्टी गिनती करने या रिवर्स काउंटडाउन का तरीका अपनाएं। यह तरीका 2-5 साल के बच्चों में काफी कारगर साबित हो सकता है। जब बच्चा गुस्से में चीखना-चिल्लाना शुरू करे तो उसके सामने 10 से 1 की उल्टी गिनती करें। धीरे-धीरे बच्चा शांत होने लगेगा, उसके बाद आप उससे बात कर सकते हैं।

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समझें बच्चे के गुस्से का कारण…

बच्चे की शरारत या गुस्से की वजह समझें, फिर उसके साथ शांति से बात करें। प्यार से बात करने से बच्चे आप पर विश्वास करना शुरू कर सकते हैं। इससे बच्चे आपके सामने धीरे-धीरे खुल भी सकते हैं और उसके बाद अपनी बात भी आपके सामने रखना शुरू करेंगे जिससे आपको उसे अच्छा व्यवहार सिखाने में मदद हो सकती है।

बच्चे को समझाएं क्यों उसका व्यवहार है गलत…

अनुशासन सिखाते समय बच्चे को यह समझाना महत्वपूर्ण है कि उसके व्यवहार में क्या गलत बातें हैं और क्या सही।लेकिन बच्चों को सीधे-सीथे गलत कहनाे से वे और भी अधिक शरारत कर सकते हैं या आपके ऊपर गुस्सा हो सकते हैं।बच्चे को सुधारने के लिए उन्हें उनकी गलती बताकर उन्हें पिटने या डांटने का पुराना तरीका ना अपनाएं। इससे बच्चे बहुत जिद्दी भी बन सकते हैं। इसीलिए, बच्चों को उनकी गलती का अहसास दिलाने के लिए बातचीत का तरीका अपनाएं।

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बच्चे को समझाएं कि उसने जो गलती की है वह उसके लिए और उसके आसपास के लोगों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। इससे उसे चोट लग सकती है, मां-बाप और टीचर के सामने उसका छवि खराब हो सकती है या इससे उसे भविष्य में भी नुकसान हो सकता है। इस तरह से बात करने से बच्चा आपकी बात भी समझ सकता हैऔर जिद या बहस करने की संभावना भी नहीं रहेगी।