बच्चों को दिल और दिमाग से कमजोर बना देती हैं ये 8 पेरेंटिंग मिस्टेक्स, बच्चे नहीं कर पाते मुश्किलों का सामना

593

माता-पिता भी अक्सर ऐसी गलतियां कर बैठते हैं जिनसे बच्चे मानसिक स्तर पर मजबूत नहीं बन पाते। यहां पढ़ें कुछ ऐसी ही पेरेंटिंगं मिस्टेक्स के बारे में।पेरेंट्स की ये गलतियां बच्चों को बना सकती हैं कमजोर

Parenting mistakes that makes kids weak: हम और हमारा परिवार एक ऐसी दुनिया में रहते हैं जहां लगातार स्ट्रेस और मानसिक दबाव बढ़ता जा रहा है और ऐसे में यह अहम हो जाता है कि हम अपने बच्चों की इमोशनल और मेंटल हेल्थ को बेहतर बनाएं और उसे जरूरी सपोर्ट दें। मेंटली स्ट्रन्ग रहने वाले बच्चे ना केवल भविष्य की मुश्किल स्थितियों का सामना करने के लिए तैयार हो पाते हैं बल्कि वे पढ़ाई-लिखाई और स्कूल में होने वाली एक्टिविटीज में भी बेहतर प्रदर्शन करते हैं। वहीं, भविष्य में अपने करियर या नौकरी में भी ये बच्चे काफी बेहतर कर पाते जो मानसिक स्तर पर अधिक मजबूत हों।

पेरेंटिंग मिस्टेक्स जो पड़ सकती हैं भारी

लेकिन, बच्चे अपने आसपास के माहौल में बहुत कुछ ऐसा भी अनुभव करते हैं जिससे उनकी मेंटल हेल्थ कमजोर हो सकती है। वहीं, परिवार और माता-पिता भी अक्सर ऐसी गलतियां कर बैठते हैं जिनसे बच्चे मानसिक स्तर पर मजबूत नहीं बन पाते। यहां पढ़ें कुछ ऐसी ही पेरेंटिंगं मिस्टेक्स के बारे में।

बच्चे की हर मांग पूरी कर देना

खिलौने-कपड़े, घड़ी और साइकिल जैसी चीजों के लिए बच्चे अक्सर जिद करते हैं और मां-बाप खुशी-खुशी ये चीजें बच्चों को दिला भी देते हैं। लेकिन, एक्सपर्ट्स के अनुसार, इस तरह बचपन में बच्चे की हर मांग पूरी कर देने से बच्चों का व्यवहारिक विकास ठीक तरीके से नहीं हो पाता और बच्चे एडजस्ट भी नहीं कर पाते। इसीलिए, बच्चे की हर मांग आंख मूंदकर पूरी करने से पहले यह विचार जरूर करें कि ऐसा करना कितना जरूरी है।

बच्चों के साथ समय ना बिताना

वर्किंग पेरेंट्स के साथ खासकर ऐसा होता है कि वे अपनी भागदौड़ और जिंदगी में बिजी रहते हैं और उन्हें अपने बच्चों के साथ समय बिताने का मौका नहीं मिल पाता लेकिन, क्या आप जानते हैं ऐसे करने से बच्चे के इमोशनल विकास और सामाजिक विकास पर प्रभाव पड़ सकता है। बच्चे जब पूरी तरह से मां-बाप की नजर से दूर रहें या मां-बाप उनकी तरफ ध्यान ना दे पाएं तो इससे बच्चे मनमानी करने लगते हैं और झूठ बोलने जैसी आदतें सीख लेते हैं जिससे उन्हें आगे चलकर कई तरह की तकलीफों का सामना करना पड़ सकता है।

बहुत अधिक पाबंदियां लगाना

जहां समय ना देने से बच्चों का व्यवहार बिगड़ सकता है वहीं कुछ मां-बाप अपने बच्चे को अच्छा व्यवहार सिखाने के लिए उनपर कई तरह की पाबंदियां भी लगाते हैं जो कि ठीक नहीं। थोड़े-बहुत नियम और सख्ती बच्चों के साथ बिल्कुल सही है। लेकिन, जब बच्चों पर बहुत अधिक पाबंदियां लगायी जाती हैं तो वे बिगड़ जाते हैं और वे मानसिक स्तर पर मजबूत नहीं बन पाते  !!

बच्चों को हमेशा प्रोटेक्ट करना

मां-बाप बच्चों को अच्छी परवरिश देने की कोशिश में उन्हें हर मुश्किल स्थिति से बचाने की कोशिश करते हैं जिससे बच्चे जीवन की कठिनाइयों का सामना करना नहीं सीख पाते और कमजोर,डरपोक और दब्बू बन जाते हैं। 

बच्चों से ज्यादा उम्मीदें लगाना

परिवार के लोगों को एक-दूसरे से कुछ उम्मीदें होती हैं और मां-बाप भी चाहते हैं कि उनका बच्चा जीवन में कुछ बड़ा और बेहतर काम करे। इसीलिए बचपन से ही बच्चों पर कई तरह से दबाव बनाया जाता है और उन्हें बार-बार याद दिलाया जाता है कि उनके माता-पिता ने उनके भविष्य और करियर के बारे में क्या-क्या सोच रखा है। लेकिन ऐसा करने से बच्चे चिड़चिड़ापन महसूस करते हैं और इसे मेंटल टॉर्चर की तरह लेते हैं जिससे बच्चे सीखने और पढ़ने-लिखने से भी कतराते हैं।

हर बात में अपनी सलाह देते रहना

कई मां-बाप बच्चों को केवल वही काम करने के लिए प्रेशराइज्ड करते हैं जो उन्हें ठीक लगता है। लेकिन, बच्चे अपने आसपास के माहौल में दूसरे बच्चों को देखकर कई बार कुछ फैसले खुद लेना चाहते हैं और खुद के मन से कुछ काम करना चाहते हैं। लेकिन, बार-बार माता-पिता और बड़ों द्वारा उनकी बात को काटना या उन्हें रोकना-टोकना उनके मानसिक विकास में स्लो कर सकता है और बच्चे मेंटली स्ट्रॉन्ग नहीं बन पाते और कोई बड़ा निर्णय लेने से घबराते हैं।

केवल पढ़ाई को ही महत्व देना

कुछ माता-पिता के लिए अच्छा बच्चा होना या जीवन में आगे रहने का अर्थ यही है कि बच्चे एकेडमिक्स में अच्छा प्रदर्शन करें और अच्छे मार्क्स लाएं। लेकिन, हर बच्चा अलग होता है और इसीलिए, जरूरी नहीं कि हर बच्चा पढ़ाई में अव्वल रहे। हो सकता है कि आपके बच्चे की रूचि किसी और क्षेत्र में हो इसीलिए, उसे केवल पढ़ाई के लिए दबाव बनाना या कम मार्क्स आने पर डांटना-फटकारना नहीं चाहिए। इससे बच्चा खुद को कम समझता है और जीवन में खुद को दूसरों से पीछे मान लेता है।

बच्चों पर हाथ उठाना

आपने भी अक्सर लोगों को कहते सुना ही होगा कि कभी-कभार बच्चों को एक-दो थप्पड़ मार देने चाहिए। लेकिन, यह तरीका बिल्कुल ठीक नहीं है। बच्चों को मारने और उन पर हाथ उठाने से बच्चे अपने मां-बाप के बारे में गलत सोच बनाने लगते हैं। इससे उन्हें मां-बाप से नफरत होने लगती है और वे ढीठ भी बन जाते हैं। इससे बच्चे ना केवल बगावत पर उतर आते हैं बल्कि पढ़ाई-लिखाई या वह काम जो आप उनसे करवाना चाहते हैं वह बिल्कुल भी नहीं करते।