इस उम्र में पैरेंट्स को बच्चों के साथ सोना बंद कर देना चाहिए ; जानिए वजह

1037

हर माता-पिता अपने बच्चे का हर तरह से ख्याल रखते हैं. कई पैरेंट्स अपने बच्चों को सुरक्षित महसूस कराने और उनकी देख-रेख के लिए उनके साथ ही सोते हैं लेकिन कई बार यह पेरेंट्स और बच्चे दोनों के लिए काफी नुकसानदायक साबित हो सकता है. एक स्टेज के बाद जरूरी है कि माता-पिता बच्चों के साथ बेड शेयर ना करें. आइए जानते हैं किसी स्टेज पर माता-पिता को अपने बच्चों के साथ बेड शेयर नहीं करना चाहिए और अगर आप ऐसा करते हैं तो इससे क्या नुकसान हो सकते हैं.

अमेरिकी एक्ट्रेस एलिसिया सिल्वरस्टोन अक्सर अपनी पैरेंटिंग स्टाइल के चलते चर्चाओं में रहती हैं. हाल ही में एलिसिया ने इस बात का खुलासा किया है कि वह अपने 11 साल के बेटे बीयर के साथ ही सोती हैं. एलिसिया ने बताया, ‘बीयर और मैं अभी भी साथ ही सोते हैं.’ एलिसिया के मुताबिक, वह सिर्फ नेचर को फॉलो कर रही हैं. एलिसिया के इस बयान पर सोशल मीडिया पर उन्हें काफी ट्रोल किया जा रहा है. एलिसिया के बयान पर कमेंट करते हुए एक यूजर ने लिखा, ‘वह स्वतंत्र होकर कैसे रहना सीख पाएगा? आप उसकी मदद नहीं कर रही हैं बल्कि उसका नुकसान कर रही हैं.’

सोशल मीडिया पर जहां एक तरफ लोग एलिसिया के को-स्लीपिंग कॉन्सेप्ट की निंदा कर रहे हैं. वहीं, कुछ लोग ऐसे भी हैं जिनकी नजर में यह बुरा नहीं है. एलिसिया की इस च्वॉइस पर एक यूजर ने ट्वीट किया है, ‘अभी समाज में बहुत सारे आवारा घूम रहे हैं … शायद माता-पिता से थोड़ा और प्यार इसका जवाब हो सकता है.”

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या बच्चों के साथ एक ही बेड पर सोना सही होता है? या किस उम्र तक माता-पिता को अपने बच्चों के साथ सोना चाहिए? ऐसे में आइए जानते हैं क्या कहना है बाल चिकित्सक और साइकोलॉजिस्ट्स का. 

न्यूयॉर्क स्थित बाल चिकित्सक डॉ. रेबेका फिस्क ने कहा, ‘मैं माता-पिता को हमेशा कहती हूं कि बच्चों के साथ एक ही बेड पर सोना उनका अपना निजी फैसला है. यह कोई मेडिकल निर्णय नहीं है.’ एक वेबसाइट से बात करते हुए फिस्क ने कहा कि माता-पिता को कभी भी 12 महीने से कम उम्र के बच्चों के साथ बेड शेयर नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे SIDS (सडन इन्फेंट डेथ सिंड्रोम) और दम घुटने से मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है.

वहीं, फिस्क का कहना है कि हर किसी की नींद से संबंधित अलग-अलग जरूरतों के कारण साथ में सोने से कई बार आपको और बच्चे को सही से नींद आने में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है. अगर आप अपने बच्चे के साथ सो रहे हैं तो इस बात का ख्याल रखें कि उसे दिन भर में अच्छी तरह से आराम मिला हो. अगर ऐसा नहीं हो पा रहा है तो साथ सोने के अलावा आपके पास और भी कई विकल्प हैं. जैसे आप कमरे में एक एक्स्ट्रा बिस्तर रख सकते हैं. बच्चे के सोने के बाद आप उसमें सो सकते हैं ताकि आपका बच्चा बेड पर खुलकर सो सके और उसे नींद के दौरान किसी दिक्कत का सामना ना करना पड़े. आप चाहे तो बच्चे को सुलाने के बाद दूसरे कमरे में भी सो सकते हैं. 

वहीं, चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट एलिजाबेथ मैथिस ने कहा कि बच्चों के साथ बेड शेयर करना कई बार काफी अच्छा भी साबित होता है खासकर उस समय जब माता-पिता दोनों अलग-अलग रहते हैं. मैथिस का कहना है कि जिन लोगों के साथ आप सेफ फील करते हैं, उनके आसपास रहने से आपको काफी अच्छा महसूस होता है.

इस स्टेज पर बच्चों के साथ सोना कर देना चाहिए बंद

यह जानना काफी जरूरी है कि किस स्टेज पर आपको अपने बच्चे के साथ सोना बंद कर देना चाहिए. जब आपको अपने बच्चे में शारीरिक बदलाव नजर आने लगें तो आपको उनके साथ सोना बंद कर देना चाहिए. इसे प्री-प्यूबर्टी (यौवनारम्भ) कहा जाता है. प्यूबर्टी या प्री-प्यूबर्टी  उस समय को कहा जाता है जब आपके बच्चे का शरीर यौन रूप से परिपक्व होने लगता है. इस दौरान लड़कियों में ब्रेस्ट का विकास और पुरुषों में दाढ़ी-मूंछ बढ़ना, प्राइवेट पार्ट के आकार में वृद्धि जैसे शारीरिक परिवर्तन होते हैं. फिस्क ने कहा, ‘प्री-प्यूबर्टी वह समय होता है जब आपको अपने बच्चों के साथ सोना बंद कर देना चाहिए.’ 

मैथिस ने भी फिस्क की बात का सपोर्ट करते हुए कहा कि प्यूबर्टी ही वह समय होता है जब आपको अलग-अलग बेड पर सोना शुरू कर देना चाहिए. प्यूबर्टी फेज शुरू होने की औसत उम्र लड़कियों में 11 साल और लड़कों में 12 साल होती है. हालांकि, लड़कियों में 8 साल से 13 साल के बीच प्यूबर्टी का शुरू होना भी सामान्य है. वहीं, लड़कों में प्यूबर्टी 9 साल की उम्र से लेकर 14 साल की उम्र के बीच शुरू हो सकती है.

मैथिस ने कहा, प्यूबर्टी के दौरान बच्चों के शरीर में कई तरह के बदलाव हो रहे होते हैं, ऐसे में जरूरी है कि आप बच्चों को स्पेस दें. इससे वह सहज रहेंगे. अगर आप बच्चों को एक ही बेड पर सुलाते हैं तो इससे आपकी प्राइवेसी भी प्रभावित होती है.

हालांकि, आप ये जरूर सुनिश्चित करें कि आपका बच्चा अगर दूसरे कमरे में या अलग बिस्तर पर सोए तो उसे सुरक्षित और सहज महसूस हो. जब आपका टीनेजर बच्चा किसी बात को लेकर परेशान हो तो भी उसे अपने पास सोने के लिए कह सकते हैं.