स्कूल वैन-आटो में ठूंसकर ले जाने वाले चालक मानते नहीं और जिम्मेदारों को दिखता नहीं, दिशा-निर्देशों की भी अनसुनी

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रायपुर, राजधानी में अराजक यातायात लंबे समय से समस्या रहा है। पुलिस द्वारा इस सिलसिले में समय-समय पर विभिन्न दिशा-निर्देश जारी किए। इसके बावजूद पुराना ढर्रा बदस्तूर जारी है। आलम यह है कि इन दिनों नौनिहालों की जान खतरे में है। ऐसा इसलिए, क्योंकि स्कूल वेन में आठ की जगह पर 12 से ज्यादा बच्चों को सवार कर लिया जाता है। इससे दुर्घटना का खतरा बना रहता है। साथ ही कोविड महामारी का संकट फिलहाल बरकरार रखने से संक्रमण से भी इन्कार नहीं किया जा सकता।

मुख्य मार्ग से लेकर उप नगरीय क्षेत्रों की सड़कों तक सुबह से शाम तक ऐसी कई स्कूल वेन देखी जा रही हैं, जिनमें स्कूली बच्चों को मवेशियों की मानिंद ठूंसकर भर लिया जाता है। इस वजह से बच्चों को कई बार सांस लेने तक में परेशानी होने लगती है। वे आपस में लड़ने भी लगते हैं। भारी बस्तों का बोझ अलग स्कूल वेन का भार बढ़ा देता है। ऐसे में संतुलन बिगड़ने से दुर्घटना का खतरा हर दिन बना रहता है। इसके बावजूद स्कूल प्रबंधन व वाहन मालिक व चालक इस समस्या की ओर गंभीरता से ध्यान नहीं दे रहे हैं। ऐसे में अभिभावक बच्चों के स्कूल जाते व घर आते समय घबराए रहते हैं। वे मजबूरी में वेन से आना-जाना भी बंद नहीं कर पा रहे, लेकिन कम से कम उनकी चिंता दूर करने की दिशा में तो विशेष कदम वक्त का तकाजा है।

नियम-कायदे महज कागजों में कैद

विभिन्न नियम-कायदे महज कागजों में कैद होकर रह गए हैं। उनका पालन करवाने व करने वालों को कोई परवाह नहीं है। यदि यही हाल रहा तो हालत नुकसानदायक हो सकती है। सामाजिक संगठनों को विरोध करने आगे आना होगा। अभिभावकों के संगठन भी अपनी जिम्मेदारी निभा सकते हैं। इससे दबाव बनेगा। हाई कोर्ट के अधिवक्ताओं से इस सिलसिले में रायशुमारी के बाद जनहित याचिका भी दायर की जा सकती है। इस सिलसिले में पूर्व न्यायदृष्टांत भी मार्गदर्शी हो सकते हैं।