राजधानी रायपुर में 14 कोबरा का किया गया रेस्क्यू, सपेरों की रेस्क्यू टीम के साथ झड़प…

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रायपुर, राजधानी रायपुर के कई गली मोहल्लों में सांप की नुमाइश कर पैसे कमाते कुछ लोग दिख जाते हैं। दरअसल वन अधिनियम के तहत ऐसा किया जाना गैरकानूनी है। अब ऐसे लोगों के खिलाफ ही वन विभाग ने कार्रवाई की मुहिम शुरू की है। रायपुर के महादेव घाट इलाके से एक दो नहीं ,बल्कि 14 कोबरा रेस्क्यू किए गए। यह सभी संरक्षित प्रजाति के कोबरा हैं। रायपुर शहर की एनिमल रेस्क्यू संस्था लकी टेल्स और नोवा नेचर के सदस्यों ने इन सांपों को बरामद किया है।

संस्था की वंचना लाबान ने बताया कि खुद को सपेरे बताने वाले लोग सांपों के दांत को तोड़ देते हैं। उनका जहर निकाल दिया जाता है। उसके बाद उनकी नुमाइश कर पैसे कमाने का काम होता है। ऐसे में सांप की सेहत पर बुरा असर पड़ता है और चंद दिनों में उसकी मौत हो जाती है। इस तरह देशभर में कई कोबरा मार दिए जाते हैं। वन अधिनियम के तहत सांप जंगली जानवर के रूप में संरक्षित हैं, वंचना ने बताया कि इसके लिए बकायदा अधिनियम 1972 की अनुसूची जारी की गई है। जिसमें सांप के शरीर अंग या शहर का शिकार करना या उसे अपने पास रखना दंडनीय अपराध है।

सामाजिक संस्था के प्रतिनिधि जब महादेवघाट इलाके में पहुंचे तो एक दो नहीं बल्कि 14 ऐसे लोग मिले जिनकी पिटारियों में कोबरा बंद था। कुछ बेहद विशेष प्रजाति के ब्लैक कोबरा सांप भी थे , जो अमूमन कम ही दिखाई देते हैं। जब संस्था के सदस्यों ने सांपों को रेस्क्यू करना चाहा तो सपेरे इनसे भिड़ गए, बहसबाजी हुई । काफी देर तक हाईवोल्टेज ड्रामे के बाद संस्था के लोग सांपों का रेस्क्यू करने में कामयाब रहे। इन सभी सांपों को कार में रखकर टीम बारनवापारा के जंगल ले गई और वहां इन सभी सांपों को प्रकृति के बीच जंगल में छोड़ दिया गया।