फर्जी प्रमाण पत्रों के सहारे बनाये गए गुरूजी, FIR के 11 साल बाद जनपद CEO को किया गया गिरफ्तार, अब तक इतने हो चुके हैं बर्खास्त…

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सिटी न्यूज रायपुर :  डेढ़ दशक पहले मगरलोड जनपद पंचायत में शिक्षाकर्मियों की भर्ती में जमकर फर्जीवाड़ा किया गया। इस ममले में तत्कालीन CEO और भर्ती समिति द्वारा बचाव के तमाम प्रयास किये गए मगर RTI से निकाले गए गए दस्तावेजों की छानबीन से मामला खुला और CID जांच के बाद अब जाकर अधिकारी की गिरफ़्तारी हुई है।

स्वीकृत पदों से ज्यादा की कर दी भर्ती..!

धमतरी जिले के जनपद पंचायत मगरलोड में वर्ष 2007 में शिक्षाकर्मी वर्ग 3 की भर्ती के लिए 150 शिक्षाकर्मियों की भर्ती की अनुमति विभाग ने दी थी, मगर जनपद द्वारा कुल 172 पदों पर भर्ती कर दी गई। तब आरोप लगे कि फर्जी दस्तावेजों के सहारे सैकड़ों शिक्षा कर्मियों की भर्ती चयन समिति एवं छानबीन समिति द्वारा कर दी गई है।

RTI से दस्तावेज मांगे तो CEO पहुंची हाईकोर्ट

सूचना के अधिकार के तहत इस शिक्षाकर्मी भर्ती से संबंधित दस्तावेज की मांग 2008 से लगातार की गई, लेकिन विभाग जानकारी देने से बचता रहा। जनपद पंचायत मगरलोड की मुख्य कार्यपालन अधिकारी कमला कांत तिवारी ने शिक्षाकर्मी वर्ग 3 भर्ती वर्ष 2007 से संबंधित दस्तावेज को देने से बचने के लिए उच्च न्यायालय बिलासपुर से स्थगन आदेश प्राप्त कर लिया था। सूचना के अधिकार के तहत दस्तावेज प्रदान नहीं करने के कारण आवेदक को परेशान करने, पारदर्शिता पूर्ण नहीं करने, सूचना को छिपाना व कानून को विफल करना स्वप्रमाणित पाया गया।

राज्य सूचना आयोग ने लगाया जुर्माना

इस मामले में मुख्य सूचना आयुक्त, राज्य सूचना आयोग ने पृथक-पृथक आदेश जन सूचना अधिकारी जनपद पंचायत मगरलोड को क्रमशः आर्थिक दंड 10,000 ,15,000, 5000, 5000,10000 शासित अधि रोपित कर जन सूचना अधिकारी के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही करने, आवेदक को निशुल्क जानकारी उपलब्ध कराने के साथ ही प्रकरण को गंभीरता से देखते हुए पारित आदेश की प्रति से मुख्य सचिव को अवगत कराने का आदेश पारित किया।

4 साल बाद मिली जानकारी, CID ने की जांच

शिक्षाकर्मी भर्ती वर्ष 2007 में हुई शिक्षाकर्मियों की भर्ती के दस्तावेज सूचना के अधिकार के तहत जुलाई 2011 में देने के बाद भर्ती में गड़बड़ी की शिकायत पुलिस से की गई। मामला परवान चढ़ा तब सीआईडी पुलिस रायपुर ने इसकी जांच की। जिसके बाद FIR दर्ज हुई और अब इसके 10 वर्ष 9 माह बाद की विवेचना के बाद जिला पुलिस ने भर्ती समिति से जुड़े अधिकारी की गिरफ़्तारी की है।

राज्यपाल के भी फर्जी हस्ताक्षर किये

सन 2007 में शिक्षाकर्मियों की भर्ती की प्रक्रिया में प्रमाणपत्रों का बोनस अंक देने के अलावा चयन समिति द्वारा उम्मीदवारों का साक्षात्कार लेकर नंबर दिए जाते थे। उस दौर में पूरे प्रदेश में इस भर्ती में जमकर धांधली की गई थी। धमतरी के मगरलोड जनपद में तो फर्जीवाड़े की हद हो गई थी। वहां आवेदकों के फर्जी प्रमाण पत्र तैयार किये गए। इनमे स्काउट गाइड के प्रमाण पात्र में तत्कालीन राज्यपाल का भी फर्जी हस्ताक्षर कर दिया गया। इसी तरह फर्जी खेल प्रमाण पत्र, अनुभव प्रमाण पत्र, एनसीसी प्रमाण पत्र भी जमा किये गए।

बिना पास हुए फर्स्ट डिवीजन का मार्कशीट

इस फर्जीवाड़े में बिना हायर सेकेंडरी पास किए 3 अभ्यर्थियों को फर्जी अंकसूची बनाकर प्रथम श्रेणी का अंक देकर भर्ती कर दिया गया। वहीं
फर्जी डीएड प्रमाण पत्र भी जमा किया गया। कई अभ्यर्थियों को राज्यपाल के फर्जी हस्ताक्षर से बने स्काउट गाइड प्रमाण पत्र में अंक देकर भर्ती किया गया।
16 अभ्यर्थियों को उनके हायर सेकेंडरी की अंकसूची में तृतीय श्रेणी प्राप्तांक को प्रथम श्रेणी का अंक देकर फर्जी तरीके से अंक तालिका तैयार कर भर्ती की गई।

पात्र उम्मीदवारों को इस तरह किया अपात्र

मगरलोड में हुई इस भर्ती प्रक्रिया में मेरिट लिस्ट में टॉप आने वाले उम्मीदवारों को भी अपात्र ठहरा दिया गया। जैसे कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के 10 अभ्यर्थियों, जिनका हायर सेकेंडरी प्राप्तांक 72% से 80% होना जानते हुए भी अंक तालिका में कम अंक दर्शा कर उन्हें भर्ती से वंचित किया गया।अनुसूचित जनजाति के प्रथम श्रेणी उत्तीर्ण चार अभ्यर्थी के प्राप्तांक प्रतिशत को भर्ती अंक तालिका में जानबूझकर तृतीय श्रेणी दर्शा कर उनकी भर्ती नहीं की गई। 10 अभ्यर्थियों के न्यूनतम प्राप्तांक को भर्ती अंक तालिका में अधिकतम प्राप्तांक दर्शा कर उन्हें भर्ती किया गया।

भर्ती के लिए उम्मीदवारों को बना दिया दिव्यांग

सामान्य श्रेणी के 6 शिक्षाकर्मियों को दिव्यांग ना होना जानते हुए भी उन्हें दिव्यांग वर्ग से नियुक्ति दे दी गई। 9 अभ्यर्थियों को कूट रचित डीएड प्रमाण पत्र का 11 अंक देकर उन्हें नियुक्ति का लाभ दिया गया, 14 अभ्यर्थियों को उनके द्वारा खेल प्रमाण पत्र संलग्न नहीं किए जाने के बावजूद उन्हें खेल का 4.5 अंक प्रदान कर भर्ती की गई। 9 अभ्यर्थियों को आवेदन पत्र में एनसीसी प्रमाण पत्र संलग्न नहीं किए जाने के बाद भी एनसीसी का 2.5 अंक का लाभ देकर नियुक्ति की गई। इस तरह यहां पूरा का पूरा फर्जीवाड़ा किया गया।

पूरी चयन समिति और 94 शिक्षाकर्मियों पर FIR

मगरलोड फर्जी शिक्षाकर्मी भर्ती घोटाला के FIR में चयन समिति छानबीन समिति सहित 94 शिक्षाकर्मियों का नाम दर्ज हैं। RTI कार्यकर्त्ता कृष्ण कुमार साहू, ग्राम चंदना की शिकायत पर शिक्षा कर्मी वर्ग 3 की भर्ती हेतु तत्कालीन छानबीन एवं चयन समिति में कमलाकांत तिवारी, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत मगरलोड, विकास खंड शिक्षा अधिकारी एन आर साहू, बुधराम निषाद पंचायत एवं समाज शिक्षा संगठक, एसके सोनी, परियोजना अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग, श्याम साहू जनपद अध्यक्ष, कोमल यदु जनपद उपाध्यक्ष, नीलकंठ सिन्हा, शत्रुघ्न साहू ,नारायण ध्रुव, भरत लाल साहू एवं संतोषी साहू के खिलाफ FIR दर्ज किया गया।

बता दें कि मामले के मुख्य आरोपी कमलाकांत तिवारी वर्तमान में जिला पंचायत दुर्ग में बतौर परियोजना अधिकारी पदस्थ हैं, जिन्हें पुलिस ने भिलाई स्थित उनके निवास से गिरफ्तार किया।

19 की सेवाएं समाप्त, दर्जनों का इस्तीफा

इस मामले में ठगी की धाराओं के साथ ही एसटी-एससी एक्ट अंतर्गत उपबंधित धाराए जोड़ी गई। शिक्षा कर्मी वर्ग 3 के लिए स्वीकृत पद 150 के विरुद्ध कुल 172 पदों पर भर्ती की गई। इनका आदेश पृथक-पृथक अनेकों बार जारी किया गया, जिसमें अभ्यर्थी के निवास के पते को छुपाया गया। चयन समिति के सदस्यों द्वारा अपने परिवार के अनेकों सदस्यों की शिक्षा कर्मी वर्ग 3 के पद पर नियुक्त की गई। इस मामले में अभी तक 19 शिक्षा कर्मियों की सेवाएं समाप्त की जा चुकी हैं और दर्जनों शिक्षाकर्मी इस्तीफा दे चुके हैं। वहीं मगरलोड पुलिस ने 17 शिक्षाकर्मियों की गिरफ्तारी कर अभियोग पत्र प्रस्तुत किया जिस पर न्यायालय ने उन्हें कठोर दंड से दंडित किया है।

धमतरी जनपद में भी हुआ था फर्जीवाड़ा

मगरलोड की तरह ही उस दौरान धमतरी में भी शिक्षाकर्मी भर्ती में फर्जीवाड़ा हुआ था। तब RTI कार्यकर्त्ता कृष्ण कुमार साहू की ही शिकायत पर जांच हुई और तत्कालीन जनपद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष सहित चयन समिति से जुड़े अनेक लोगों को जेल की हवा खानी पड़ी थी।