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सिटी न्यूज रायपुर –

रायपुर-  कोरोना आपदा में लापरवाही के कारण बिलासपुर मेडिकल काॅलेज यानी सिम्स के डीन और जिला अस्पताल के सिविल सर्जन को भारी पड़ गई. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सख्त फैसला लेते हुए तत्काल प्रभाव से हटाने का आदेश जारी किया है. मुख्यमंत्री ने चीफ सेक्रेटरी को दिए निर्देश में कहा है कि राज्य के सभी मेडिकल काॅलेजों का भी तत्काल निरीक्षण कराया जाए, साथ ही इस कार्य़वाही की भी जानकारी दी जाए.

गौरतलब है कि कोरोना जैसी महामारी के बावजूद लापरवाही की गंभीर शिकायतें सामने आई थी, जिसके बाद मुख्यमंत्री ने सख्ती बरती है. मुख्यमंत्री ने अपनी नोटशीट में लिखा है कि राज्य के दूसरे सबसे बड़े शहर के मेडिकल काॅलेज में आपदा के समय इतनी अव्यवस्थायें होना दुर्भाग्यजनक और पीड़ादायक है.

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की यह सख्ती सिम्स सिम्स पर पांच सदस्यीय जांच कमेटी की रिपोर्ट के बाद सामने आई है. बता दें कि कोरोना संकट में भी लगातार लापरवाही की शिकायतों के बाद स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त सचिव डाॅ.प्रियंका शुक्ला के नेतृत्व में गठित पांच सदस्यीय जांच कमेटी ने बिलासपुर जाकर जांच की थी.

रायपुर के युवानेता बेदराम साहू ने आक्रोश भरे शब्दों में कहा कि राजधानी रायपुर के कलेक्टर और सी एम एच ओ मीरा बघेल की लापरवाही मुख्यमंत्री को नजर नही आ रहा है , एक तरफ राज्य के कददावर मंत्री एक दिन पहले कहते है कि राजधानी रायपुर में लॉकडाउन लगाने का कोई प्रस्ताव या आवशयकता नही है , और अगले दिन 7 दिन का संपूर्ण लॉकडाउन की  कलेक्टर घोषणा कर देते हैं , इससे यह साबित होता है कि सरकार और प्रशासन में सामंजस्य नही है, यही कारण है कि आधा अधुरा प्लान के साथ लॉकडाउन घोषित किया गया अब संशोधन आदेश जारी कर रहे है फिर भी फैक्टरियों को पूर्णतः बंद करने का आदेश नही दिया गया है जिससे इस लॉकडाउन को सफल बनाने में संदेह है , राजधानी रायपुर के साथ साथ पुरे प्रदेश में सख्त लॉकडाउन लागू किया जाना था, लेकिन इस राज्य में कलेक्टर बडा है या मंत्री यह समझ में नही आ रहा, वहीं रायपुर को कोरोना का गढ बनाने में सबसे अहम भूमिका निभाने वाली मुख्य स्वास्थ्य चिकित्सा अधिकारी मीरा बघेल पर कार्यवाही नही किया जाना रायपुरियंस के लिये बडा ही दूर्भाग्य जनक है !!

बिलासपुर के कार्यवाही के बाद जनता कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष श्री अमित जोगी ने ट्वीट कर कहा कि –

@ChhattisgarhCMO CIMS के डीन और कुछ अन्य स्वास्थ्य अधिकारियों के ख़िलाफ़ कार्यवाही करके अपनी ज़िम्मेदारी से बच नहीं सकते।छत्तीसगढ़ की जनता पूछ रही है कि आख़िर आपने कोरोना को रोकने के लिए 4 महीने तक क्या किया?अब जब घर में आग लग गयी है तो @bhupeshbaghel जी कुआँ खोद रहे हैं!

 

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    इस कमेटी में उनके अलावा डाॅ. निर्मल वर्मा, डाॅ.सुरेंद्र पामभोई, डाॅ.रविंद्र पांडा और डाॅ. ओ पी सुंदरानी शामिल थे. कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में सिम्स के प्रबंधन के लिए एक सक्षम अधिकारी के नेतृत्व में नियंत्रण दल गठित किए जाने का सुझाव दिया था. कमेटी ने अपनी जांच रिपोर्ट में यह कहा था कि सिम्स, कोविड हाॅस्पिटल और जिला अस्पताल के बीच संवाद की भारी कमी है. इन सबके बीच समन्वय स्थापित करने और टेस्टिंग और कर्मचारियों की शिफ्टिंग तथा एलोकेशन के लिए किसी सीनियर अधिकारी को प्रभारी बनाया जाना उचित होगा. कमेटी ने कहा था कि ओबीडी में भारी अव्यवस्था है, जिसकी वजह से मरीजों की बेतरतीब भीड़ हो रही है. कमेटी ने सिम्स में स्टाॅफ की कमी का भी जिक्र किया है

     

कमेटी ने सरकार को सौंपी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि लैब में इस समय 32 लैब टेक्नीशियन हैं, पांच और ज्वाइन करने वाले हैं, उसके बाद भी केवल एक ही शिफ्ट चलाई जा रही है. तीन डाटा एंट्री ऑपरेटर जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा CIMS को दिए गए थे लेकिन उनमें से केवल एक ही लैब में रिपोर्ट कर रहे है, जिसकी जानकारी सिम्स द्वारा विभाग को नहीं दी गयी थी. विभाग को चार डाटा एंट्री ऑपरेटर इस हेतु सिम्स को उपलब्ध कराये जाने हेतु निर्देशित किया गया था. लैब तक सैम्पल पहुंचाने में भी देरी देखी गई है.

सिटी न्यूज रायपुर….

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