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रायपुर। जिस प्रकार से जिले का सबसे बड़ा अधिकारी कलेक्टर होता है उसी प्रकार स्वास्थ्य विभाग का सबसे बड़ा अधिकारी  CMHO  होता है यदि निजी या सरकारी अस्पतालों कोई भी गडबडी , अव्यवस्था हो रही हो तो CMHO  की जवाबदेही बनती है –  गौरतलब है कि राजधानी रायपुर में पिछले कई महीनों से स्वास्थ्य विभाग की गंभीर शिकायतें लगातार मिल रही है फिर भी कोई सुधार तो नहीं बल्कि दिनोदिन हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। कोरोना का इलाज तो नही है लेकिन कोरोना के रोकथाम और उनके फैलाव को रोकने कोई भी विशेष प्रयास नहीं किया जा रहा है,  कोरोना के चक्कर में शुगर,  बीपी वाले मरीज एक बार हास्पिटल में भर्ती हुवे तो वापस सकुशल घर जाने वाले बडे सौभाग्यशाली होते हैं, सरकारी अस्पतालों में तो डाक्टर झांकने तक नहीं जाते, वार्डबॉय ही इलाज करते हैं और उतना ही दवा देते हैं , सुबह शाम दो – दो गोली जो उन्हें देने कहा गया है बस। इसके अलावा यदि और कोई तकलीफ है तो डाक्टर को बुलाते रहो, खुद बोलो – खुद सुनो… हम डरा नही रहे हैं यह स्थिति पैदा किया है यहां के डाक्टरों ने , जन जन के जुबान पर यही बात है,  एक तरफ हम कहते हैं कोरोना से डरे नही…लेकिन खुद स्वास्थ्य विभाग के व्यवहार और कुव़्यव्स्था ने लोगों को डरा दिया है,  और  जिम्मेदार अधिकारी और डाक्टर कोरोना के डर से  ए. सी. कमरे में आराम फरमा रहे हैं , जो डाक्टर नौकरी नही कर सकते उन्हें नौकरी छोड़ देना चाहिए और यदि नौकरी कर रहे हैं तो कोई भी बीमारी से कराहता मरीज आये उनका बेहतर से बेहतर इलाज करो…और जो डाक्टर इलाज किये बगैर मरीज को भगा देते हैं उनके विरूद्ध और विभाग के मुखिया  CMHO  के खिलाफ अपराध दर्ज किया जाए !!

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  • मरीज पलारी तहसील में चपरासी है, 1 लाख 15 हजार दे चुके थे परिजन, ,  1 लाख 75 हजार की और हो रही थी मांग, 

रायपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती पलारी का कोरोना मरीज लगभग लूट का शिकार हो चुका था और आगे भी उससे अस्पताल प्रबंधन बड़ी राशि ऐंठने की तैयारी में था पर सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होते ही विधायक शकुंतला साहू ने उसके मुफ्त इलाज की व्यवस्था करवाई।

विधायक ने निजी अस्पतालों

को चेतावनी भी दी है कि कोरोना के इलाज के नाम पर वे लूट का अड्डा न बनें। तहसील में पदस्थ कर्मचारी है। इस आदिवासी युवक को 25 अगस्त को सांस लेने में तकलीफ हुई। उसे बीपी और बीपी शुगर पहले से था। परिवार वालों ने रायपुर के निजी अस्पताल में उसे भर्ती कराया जिसका तीन दिन में अस्पताल प्रबंधन ने उसे 1 लाख 15 हजार का बिल थमाकर राशि वसूल भी कर ली।

परिवार के पास उपचार के लिए और पैसे नहीं थे पर डॉक्टरों ने उसे आईसीयू में भर्ती कर उसका कोविड टेस्ट कराया जो तीसरे दिन पॉजिटिव आया। कोरोना पॉजिटिव आने पर मरीज के परिजनों ने डॉक्टर से निजी अस्पताल में उपचार कराने में असमर्थता जाहिर कर उसे सरकारी अस्पताल में रेफर करने का निवेदन किया। इस पर डॉक्टर ने मरीज की पत्नी लक्ष्मी कंवर से सरकारी अस्पताल से कोरोना मरीज को भर्ती करने का पत्र लिखवाकर लाने को कहा तथा ऐसा करने पर ही उसे रेफर करने की बात कही।

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इस तरह 6 दिन बाद मरीज के परिजन को 1 लाख 75 हजार और अस्पताल में जमा करने को कहा जिससे परिवार सकते में आ गया। तब कसडोल विधायक एवं संसदीय सचिव शकुंतला साहू से आदिवासी समाज के लोगो व क्रांति सेना के सदस्यों ने अस्पताल प्रबंधन द्वारा उपचार के नाम पर वसूली जा रही मोटी रकम का विरोध करते हुए मरीज को शासकीय अस्पताल में भेजने की मांग की।

सीएमएचओ डॉ. मीरा बघेल से बात कर व्यवस्था कराई : इस पर रायपुर की मुख्य जिला चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर मीरा बघेल से शकुंतला साहू ने फोन पर बात कर मरीज का निशुल्क उपचार कराने और बेहतर सुविधा देने के निर्देश दिए।

विधायक के निर्देश पर डॉक्टर मीरा बघेल ने अस्पताल में भर्ती मरीज की जानकारी लेकर उसका बेहतर और निशुल्क उपचार करने को कहा. तब जाकर अस्पताल प्रबंधन ने मरीज की पत्नी व परिवार की वीडियो कॉलिंग से मरीज से बात कराकर उसका निशुल्क उपचार का आश्वासन दिया।

विधायक की पहल पर गरीब आदिवासी युवक का इलाज तो हो जाएगा, लेकिन कई गरीब मरीज एैसे है जिनका विधायक या कोई ऩेता साथ नही दे रहा उनका तो भगवान ही मालिक हैं,  राजधानी रायपुर में बडे बडे नेता और अधिकारी बैठे हैं , सब कुछ देख भी रहे हैं फिर भी चुप बैठेे हैं, सी एम एच ओ के राजनीतिक पहुँच के कारण किसी की हिम्मत नही कि इस अन्यााय को रोक सकेे , व्यवस्था को दुरूस्त कर सके,  अमीर और गरीब मेें फर्क, इलाज में भेदभाव , एप्रोच सिस्टम बंद करना ही होगा ,  येे VIP  कल्चर बंद करना ही होगा, CMHO मीरा बघेल की जिम्मेदारी है कि ये व्यवस्था बनाये कि बिना किसी एप्रोच के गरीबों का बेहतर इलाज हो, परन्तु यहां राजधानी रायपुर में तो उन्हीं का बेहतर इलाज होता है।

जो किसी विधायक या मंत्री से फोन करवाये,  लिखवाकर लाये एैसी परम्परा चल रहा है, जिसके जिम्मेदार  मुख्य जिला चिकित्सा एवम् स्वास्थ्य अधिकारी मीरा बघेल को बर्खास्त करने की मांग की जा रही है ताकि स्वास्थ्य सुविधा मे सुधार हो सके अन्यथा ये CMHO के रहते निश्चित रूप से राजधानी रायपुर में कोरोना के कहर को रोकने में नाकाम साबित होंगी, जिसका खामियाजा राजधानी रायपुर के जनता को भुगतना होगा  !!

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कर्मचारियों ने दिए 50 हजार: वही तहसील आफिस के इस कोरोना पॉजिटिव मरीज के इलाज के लिए पलारी तहसील के अधिकारियों-कर्मचारियो नें 50 हजार की आर्थिक मदद भी की है। इस रकम को मिलाकर ही उसके परिवार के लोगों ने 1 लाख 15 हजार अस्पताल में जमा किए थे।

महामारी का कोई गलत लाभ न उठाए : शकुंतला
इस संबंध में विधायक शकुंतला साहू ने कहा कि आज पूरा देश कोरोना महामारी की चपेट में है और हमारे प्रदेश में स्थिति गंभीर है। सरकार उन संक्रमित मरीजों का नि:शुल्क उपचार कर रही है, ऐसे में कोई निजी अस्पताल उपचार के नाम पर मजबूर गरीबों से अनाप शनाप पैसे ऐंठे तो ये उचित नहीं है।

राजधानी रायपुर में विधायक शकुंतला साहू के कार्यशैली की तारीफ हो रही है वहीं हाथ पर हाथ धरे बैठे राजधानी के सभी विधायकों और कलेक्टर पर सवाल उठाए जा रहे हैं  !!

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