रायपुर. शहर में ड्रग्स बेचने वाले प्लानिंग के साथ धंधा करते थे। होटल-रेस्टोरेंट में छोटी-छोटी पार्टियां आयोजित करते थे। फिर पहले दिन युवक-युवतियों को मुफ्त में कोकिन का ट्रायल करवाते थे। फिर अगली बार में 2 हजार रुपए लेते थे। इसके बाद 8 से 10 हजार रुपए में एक-एक डोज बेचते थे। श्रेयांश झाबक, विकास बंछोर, आशीष जोशी और निकिता पंचाल रायपुर और भिलाई-दुर्ग में इसी तरह अपना नेटवर्क फैलाते थे। इसके बाद वाट्सएप गु्रप बनाकर वीकेंड में कोकिन उपलब्ध कराते थे।

दूसरी ओर सूत्रों के मुताबिक श्रेयांश और विकास के ऊपर भी बड़ा नेटवर्क रायपुर में सक्रिय हैं, जो इस तरह के मादक पदार्थों की तस्करी में लिप्त है। और बड़े पैमाने पर युवाओं को हर तरह का नशा उपलब्ध करा रही है। इस नेटवर्क तक पुलिस पहुंच नहीं पाई है। हालांकि पुलिस की टेक्नीकल टीम ने आरोपियों के मोबाइल से कई अहम जानकारियां हासिल की है। इसके आधार पर कुछ और लोग पुलिस के निशाने पर हैं।

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लॉकडाउन में भी पहुंच गया मॉल
ड्रग्स माफिया का नेटवर्क इतना तगड़ा था कि लॉकडाउन के दौरान भी आरोपियों के पास कोकिन की कमी नहीं थी। और अपने गु्रप से जुड़े लोगों को कोकिन उपलब्ध कराते थे। यहां तक की कुछ नेताओं के बिगड़ैल नवाबों की विशेष मांग पर कुछ चुने हुए होटल और रेस्टोरेंट में भी चोरीछिपे कोकिन सप्लाई की गई।

कई साल से कर रहे नशा
पुलिस सूत्रों के मुताबिक पकड़े आरोपी संभव पारख और हर्षदीप सिंह जुनेजा पिछले कई सालों से कोकिन का नशा कर रहे हैं। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि रायपुर में ड्रग्स नेटवर्क चलाने वाले श्रेयांश झाबक और विकास बंछोर के ऊपर भी कई ड्रग्स पैडलर हैं, जो कोकिन के अलावा ब्राउन शुगर और अन्य मादक पदार्थों की तस्करी कर रहे हैं।

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संदिग्ध नंबर हुए बंद
संभव पारख और हर्षदीप के अलावा निकिता, हर्षदीप व अन्य के मोबाइल में मिले कॉन्टेक्ट नंबरों की पुलिस की टेक्नीकल टीम जांच कर रही है। सभी के मोबाइल में एक हजार से ज्यादा संदिग्ध मोबाइल नंबर मिले हैं, जो खास नाम से सेव है। पुलिस को आशंका है कि ये सभी ड्रग्स नेटवर्क का हिस्सा है।