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छत्तीसगढ़ के किसान अब उन्नत खेती की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। लेमनग्रास की खेती किसानों को मालामाल करेगी। राज्य के विभिन्‍न जिलों में 800 एकड़ में लेमनग्रास की खेती की जा रही है।

HIGHLIGHTS

  1. छत्तीसगढ़ के 800 एकड़ से भी अधिक क्षेत्र में की जा रही लेमनग्रास की खेती
  2. विभिन्न जिलों में किसानों ने सीख ली लेमनग्रास की खेती की विधि
  3. लेमनग्रास की खेती से बनेंगे ब्यूटी प्रोडक्ट और सुगंधित तेल

छत्तीसगढ़ के किसान अब उन्नत खेती की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। लेमनग्रास की खेती किसानों को मालामाल करेगी। विभिन्न जिलों में किसानों ने लेमनग्रास की खेती की विधि सीख ली है। लेमनग्रास से ब्यूटी प्रोडक्ट के उत्पाद और सुगंधित तेल के साथ इसका उपयोग परफ्यूम और अन्य हर्बल उत्पाद बनाने में होता है।

राज्य सरकार के औषधि पादप बोर्ड द्वारा किसानों को लेमनग्रास का निश्शुल्क पौधा वितरित किया जा रहा है। वर्तमान में छत्तीसगढ़ के 800 एकड़ से भी अधिक क्षेत्र में लेमनग्रास की खेती की जा रही है।

बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मंशा के अनुरूप छत्तीसगढ़ आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड की पहल से किसान इसकी खेती के लिए प्रोत्साहित हो रहे हैं।

प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख वी.श्रीनिवास राव ने बताया कि छत्तीसगढ़ में अब किसानों द्वारा सकारात्मक रूप से लेमनग्रास को अपनाया जा रहा है। लेमनग्रास की खेती से धान की फसल की अपेक्षा अधिक लाभ संभावित है।lemon%20grass%20farming%20in%20cg October 7, 2023

66 गांवों में फसल
राज्य में लेमनग्रास उत्पादन से धान की अपेक्षा किसानों की आय में कई गुना वृद्धि की संभावना है। मुख्य कार्यपालन अधिकारी छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड जेएसीएस राव ने बताया कि राज्य के महासमुंद पेंड्रा, कोरिया कोरबा, बिलासपुर तथा बलरामपुर जिलों के 66 ग्रामों के 653 किसानों के लगभग 800 एकड़
में लेमनग्रास की खेती की जा रही है, जिससे प्रति एकड़ 80,000 से एक लाख रुपये आय की प्राप्ति किसानों को होगी। लेमनग्रास एक औषधीय एवं सुगंधित पौधा है। इसके तेल का कई प्रकार के सौंदर्य प्रसाधन सामग्री तथा अन्य उत्पाद में उपयोग में आता है। पूरे विश्व में भारत लेमनग्रास तेल का शीर्ष निर्यातक है। लेमनग्रास बहुवर्षीय फसल है।
राज्य की जलवायु उपयुक्त
बोर्ड के मुताबिक छत्तीसगढ़ की जलवायु लेमनग्रास की खेती के लिए बहुत उपयुक्त है। इसकी खेती खाली पड़त भूमि पर की जाती है। लेमनग्रास की खेती कई प्रकार की भूमि पर की जा सकती है, जिसमें सिंचाई के लिए पानी की आवश्यकता कम होती है।
इसको एक बार रोपण करने उपरांत बार-बार रोपण की आवश्यकता नही होती। चूंकि इसकी कटाई हर बाई से तीन माह में की जाती है, जिससे किसानों को आय का स्त्रोत बना रहता है।lemon%20grass%20farming%20in%20cg%20news October 7, 2023
बाजार में 950 रुपये किलो
लेमनग्रास तेल की वर्तमान बाजार कीमत 800 से 950 रुपये प्रति किग्रा तक है। इस हिसाब से किसानों को एक एकड़ से 80 हजार से भी अधिक आय प्राप्त होती है। लेमनग्रास की बुआई पूरे वर्षभर (अत्यधिक ठंड तथा गर्मी को छोड़कर) की जाती है ।
एक एकड़ में रोपण के लिए 16 से 20 हजार पौधे की आवश्यकता होती है। फसल की कटाई हर ढाई माह के अंतराल में किया जाता है। इसकी उत्पादन वर्ष में 04 से 05 बार तक की जा सकती है।
प्रसंस्करण की विधि
लेमनग्रास की पहली कटाई 6 माह उपरांत हर ढाई माह में किया जाता है। फसल कटाई कर आसवन यूनिट की सहायता से उसका तेल निकाल लिया जाता है। इसके बाद तेल बाजार में विक्रय के लिए तैयार हो जाता है। बोर्ड द्वारा मार्केटिंग के लिए भी सुविधा प्रदाय की जाती है, जिससे किसानों को 15 दिनों में ही उपज का पैसा प्राप्त हो जाता है।