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देशभर में टमाटर का भाव आसमान छू रहा है। रायपुर समेत पूरे प्रदेश में टमाटर 80 रुपए से 100 रुपए किलो बिक रहा है। अचानक टमाटर इतना महंगा क्यों, भास्कर ने रायपुर से कर्नाटक तक की मंडी में पड़ताल की तो यह बात सामने आई कि महंगे टमाटर से छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि पूरे देश को 15 दिन और राहत नहीं मिलने वाली है।

कर्नाटक, आंध्रप्रदेश के कारोबारियों के मुताबिक 15-20 जुलाई से नई फसल आना शुरू होगी, टमाटर के दाम तभी कम होना शुरू होंगे, वह भी धीरे-धीरे। उससे पहले पूरे देश में टमाटर तकरीबन इसी भाव में बिकेगा। टमाटर की खेती करनेवालों ने पिछले 3 साल में तगड़ा घाटा झेला है। कर्नाटक ही नहीं, अधिकांश उत्पादक राज्यों ने किसानों ने फसल कम लगाई। छत्तीसगढ़ में ही टमाटर की 17 हजार एकड़ की खेती 11 हजार एकड़ में सिमट गई।

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यहां टमाटर आंध्रप्रदेश और कर्नाटक से आता है। पिछले साल 300 ट्रक रोजाना की खपत थी। इस साल आवक ही कम है तो प्रदेश में बड़ी मुश्किल से 30 ट्रक आ रहे हैं। रायपुर में तो 6-7 ट्रक ही। व्यापारी कहते हैं- टमाटर इतना महंगा है कि लोगों ने खरीदना कम कर दिया। डिमांड और सप्लाई में बड़ा गैप आ गया। इसलिए दाम आसमान छूने लगे।

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मंडियों का हाल

1. टुरी हटरी बाजार: 80-100 रु किलो

सब्जी दुकान संचालक गौतम ने बुधवार-गुरुवार को थोक सब्जी मंडी शास्त्री मार्केट से 1700-1750 रु. कैरेट टमाटर खरीदा। जो भाड़ा और 2-4 रुपये मुनाफा निकालकर अभी 80 रुपये किलो में बेच रहे हैं। कई दुकानदार 100रुपए में।

2. डूमरतराई बाजार: 1800 रुपए कैरेट

डूमरतराई सब्जी मार्केट के अध्यक्ष टी. श्रीनिवासन रेड्डी का कहना है कि माल होगा तो रेट कम होगा, अभी जहां रायपुर में रोजाना 20 गाड़ी टमाटर की खपत थी, आज 6-7 गाड़ी माल ही आ रहा है। महंगाई के कारण लोग कम खरीद रहे।

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3. कोलार (कर्नाटक) : 1300-1600 रु कैरेट

एसएमए ट्रेडर्स के संचालक दादा पीर के मुताबिक पिछले 2 साल से किसानों को सही रेट नहीं मिला। चिंतामणि मंडी, आंध्रप्रदेश के सैयद बाबाजान ने बताया कि किसान और व्यापारी घाटे में हैं। इसलिए ज्यादा फसल का रिस्क नहीं लिया।

“100 ट्रक रोजाना की मांग पर 30 ट्रक ही टमाटर आ रहा है। 20 कैरेट बेचने वाला दुकानदार 2-3 कैरेट बेच पा रहा है। आने वाले समय में दाम और बढ़ेंगे।”

जालम सिंह पटेल, अध्यक्ष-छत्तीसगढ़ बीज निगम

  • देशभर में 80% टमाटर की आपूर्ति आंध्रा व कर्नाटक से
  • कोलार मंडी से 250 ट्रक टमाटर निकलते से, आज 60
  • 20 ट्रक टमाटर आता है, फिलहाल सप्लाई 6 ट्रक ही

4 कारण टमाटर की महंगाई के

  1. कर्नाटक के किसानों ने टमाटर का एरिया घटाकर एक चौथाई कर दिया। उत्पादन 1000 कैरेट होता था, अभी रोज 250-300 ही है।
  2. आंध्र में इस बार तापमान 45 डिग्री तक गया, जिसने पौधे झुलसे। इस वजह से बचे खेतों में भी उत्पादन एक चौथाई तक सिमट गया।
  3. फूलगोभी की फसल में कीड़े लगे, जिन्होंने टमाटर को भी नुकसान पहुंचाया। कर्नाटक और आंध्रप्रदेश, दोनों राज्यों में ये देखने में अाया।
  4. प्री-मानसून बारिश नहीं के बराबर हुई, इसलिए फसल को पहले कम पानी मिला। फिर मानसून आया तो ऐसा बरसा कि पौधे लेट गए।

छत्तीसगढ़ में स्टोरेज बड़ी समस्या

छत्तीसगढ़ में रोजाना 250 टन तक टमाटर निकलता है। धमधा में भी उत्पादन इतना ज्यादा है कि इतना स्टोरेज संभव नहीं है। सरकार को इस बार बीज निगम ने प्यूरी (पेस्ट) और पाउडर बनाने के लिए 100 मशीन खरीदने का प्रस्ताव भेजा है। इससे 50 किलो तक टमाटर की प्यूरी 2 घंटे में बन जाएगी। एक मशीन सवा लाख रुपए तक की है।

एक्सपर्ट व्यू – रेट अभी ज्यादा ही

“अक्टूबर से मार्च तक छत्तीसगढ़ में भरपूर टमाटर पैदा होता है। दूसरे राज्यों को जाता है। अप्रैल से अगस्त तक टमाटर के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भरता रहती है, क्योंकि यहां गर्मी में टमाटर पैदा नहीं होता। टमाटर के लिए 22 से 32 डिग्री तापमान चाहिए, जो अक्टूबर से मार्च के बीच मिलता है। धमधा में अभी टमाटर लगा रहे हैं। फसल आने में 3 महीने लगेंगे।” -प्रो. गजेंद्र चंद्राकर, कृषि वैज्ञानिक